Notes Part 1 – ईंट मनके और अस्थियाँ – Class 12th History Chapter 1

Index

1. ईंट मनके और अस्थियाँ

1. आरंभ 2. निर्वाह के तरीके 3. मोहनजोदड़ो 4. सामाजिक विभिन्नताओं का अवलोकन 5. शिल्प उत्पादन के विषय में जानकारी 6. माल प्राप्त करने सम्बन्धी नीतियाँ 7. मुहरें लिपि तथा बाट 8. प्राचीन सभ्यता 9. सभ्यता का अंत 10. हड़प्पा सभ्यता की खोज 11. अतीत को जोड़कर पूरा करने की समस्याएं मानचित्र बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर 1 अंकीय प्रश्न उत्तर 2 अंकीय प्रश्न उत्तर

2. राजा किसान और नगर

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

3. बंधुत्व जाति और वर्ग

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

4. विचारक विश्वास और इमारतें

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर 1 बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर 2

6. भक्ति सूफी और परम्पराएँ

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

7. एक साम्राज्य की राजधानी विजयनगर

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

8. उपनिवेशवाद और देहात

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

10. उपनिवेशवाद और देहात

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

11. विद्रोह और राज

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

13. महात्मा गाँधी और आन्दोलन

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

15. संविधान का निर्माण

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

आरंभिक हडप्पा सभ्यता और विकसित हड़प्पा सभ्यता में अंतर

आरंभिक हड़प्पा सभ्यता विकसित हड़प्पा सभ्यता
पुरानी सभ्यता
छोटी संरचना
छोटी बस्तियां
निर्वाह के तौर तरीके दोनों के सामान
नई सभ्यता
बड़ी संरचना
बड़ी बस्तियां
निर्वाह के तौर तरीके दोनों के सामान

निर्वाह के तरीके

  • पेड़ – पोधो से प्राप्त उत्पाद
    • गेंहूँ
    • जौ
    • राई
    • मटर
    • दाल
    • सफ़ेद चना
    • तिल सरसों
  • जानवर
    • भेड
    • बकरी
    • भैंस
    • सूअर
    • बैल
    • गाय

कृषि प्रोद्योगिकी

  • मुहरो पर पाए गए रेखांकित और मृण्मूर्ति यह संकेत देती है की की उन्हें वृषभ के विषय मै जानकारी थी !
  • खेत जोतने के लिए बैलों का प्रयोग होता है !
  • चोलिस्तान के कई स्थलों और बनवाली (हरियाणा ) से मिट्टी से बने हल के प्रतिरूप मिले है !
  • कालीबंगन (राजस्थान ) नामक स्थान कूड़े पर ( हलरेखा ) का साक्ष्य मिला है !
  • कालीबंगन खेत में हल रेखाओं के दो समुह एक दुसरे को समकोण पर कटते हुए पाए गए है जो दर्शाते है की एक साथ दो अलग -अलग फ़सले उगाई जाती थी !
  • फसल काटने के लिए शायद पत्थर के हंसियो का प्रयोग होता था !
  • अफगानिस्थान मै शोर्तुघई नामक हड़प्पा स्थल में नहरों के कुछ अवशेष पाए गए है !
  • परंतु ये अवशेष पंजाब और सिन्धु में नहीं पाए गए है !
  • ऐसा संभव है की प्राचीन नहरे बहुत पहले ही गाद से भर गयी थी !
  • धोलावीरा (गुजरात ) में मिले जलाशयों का प्रयोग संभवत : कृषि के लिए वर्षा के जल के संचयन हेतु किया जाता होगा !

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