ईंट मनके तथा अस्थियाँ (हड्डपा सभ्यता) याद रखने योग्य बातें | Bricks Beads and Bones

याद रखने योग्य बातें

  1. हड़प्पा सभ्यता को सिंधु घाटी की सभ्यता भी कहा जाता है। इसका काल 2600 ई. पू० से 1900 ई० पू० के बीच निर्धारित किया गया है।
  2. अफगानिस्तान के शोपई नामक पुरास्थल से हड़प्पा सभ्यता में नहरी सिंचाई के अवशेष मिले हैं।
  3. हड़प्पा के पुरास्थलों से मिले अनाज के दानों तथा पश-पक्षियों की हतियों से हड़प्पाई लोगों के भोजन की जानकारी मिलती है। हड़प्पा काल में बर्तन, पत्थर, धातु तथा मिट्टी से बनाए जाते थे। बलुआ पत्थर से बनी चक्कियों भी मिली हैं।
  4. हड़प्पा सभ्यता से पूर्व की बस्तियाँ प्राय: छोटी होती थी। इनमें कृषि तथा पशुपालन प्रचलित था।
  5. हड़प्पा सभ्यता का सबसे पुराना खोजा गया शहर हड़प्पा था परंतु सबसे महत्त्वपूर्ण शहर मोहनजोदड़ों था। मोहनजोदड़ों एक नियोजित शहर था। यहाँ को गलियाँ तथा सड़कें एक-दूसरे को समकोण पर काटती थी। मकान पक्की ईंटो के बने हुए थे। गंदे पानी की निकासी के लिए नालियाँ बनी हुई थीं।
  6. हड़प्पा सभ्यता के शिल्पों में मनके बनाना शंख की कटाई धातु कर्म, मोहरें तथा बाट बनाना आदि शामिल थे। शंख से चूड़ियाँ, करछियाँ तथा पच्चीकारी की वस्तुएँ बनाई जाती थीं। 
  7. मोहनजोदड़ो के दुर्ग पर एक विशाल जलाशय, एक मालगोदाम तथा कुछ अन्य महत्त्वपूर्ण संरचनाएँ मिली है जिनका प्रयोग सार्वजनिक रूप से किया जाता था। 
  8. हड़प्पा में कुछ शवाधान मिले हैं जिनमें मृतकों को दफनाया गया है। ये एक प्रकार के गर्त हैं जहाँ शवों के साथ दैनिक प्रयोग की कुछ अन्य वस्तुएँ भी रखी गई हैं।
  9. मेसोपोटामिया के लेखों में वर्णित मेलुटा संभवतः हड़प्पाई क्षेत्र था। यहाँ से मेसोपोटामिया में कार्निलियन, लाजवर्द मणि, ताँबा, सोना आदि पदार्थ भेजे जाते थे।
  10. हड़प्पा लिपि वर्णमालीय न होकर चित्रमय थी। यह संभवत: दाई ओर से बाईं ओर लिखी जाती थी।
  11. शिल्प-उत्पादन के लिए केवल स्थानीय माल का ही प्रयोग नहीं होता था। इसके लिए पत्थर, अच्छी लकड़ी तथा धातु आदि कच्चे माल बाहर से मँगवाने पड़ते थे।
  12. हड़प्पा सभ्यता में शासक (राजा) की महत्त्पूर्ण भुमिका थी। सभी जटिल निर्णय उसी के द्वारा लिए जाते थे
  13. सिंधु घाटी की सभ्यता की खोज में दो पुरातत्त्वविदों दयाराम साहनी तथा राखालदास बनर्जी का प्रमुख योगदान रहा।

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