महात्मा गाँधी और राष्ट्रीय आंदोलन {सविनय अवज्ञा और उससे आगे}

महात्मा गाँधी और राष्ट्रीय आंदोलन  {सविनय अवज्ञा और उससे आगे}

Class 12 | Chapter 13

हिंदी नोट्स

याद रखने योग्य बातें

  1. गांधीजी स्वतंत्रता संघर्ष में भाग लेने वाले सभी नेताओं में सबसे प्रभावशाली और सम्मानित थे। इसलिए उन्हें राष्ट्रपिता कहना गलत नहीं है।
  2.  इतिहासकार चंद्रन देवनेसन के अनुसार, दक्षिण अफ्रीका ने ही गांधीजी को ‘महात्मा’ बनाया। दक्षिण अफ्रीका में ही गांधीजी ने पहली बार अहिंसात्मक विरोध के अपने विशेष तरीके का प्रयोग किया। इसे ‘सत्याग्रह’ का नाम दिया जाता है। 
  3. स्वदेशी आंदोलन ने कुछ प्रमुख नेताओं को जन्म दिया। इनमें महाराष्ट्र के बाल गंगाधर तिलक, बंगाल के विपिन चंद्र पाल और पंजाब के लाला लाजपत राय प्रमुख थे। ये तीनों नेता लाल, बाल और पाल के नाम से जाने जाते थे। 
  4. लाल, बाल, पाल ने जहाँ औपनिवेशिक शासन के प्रति लड़ाकू विरोध का समर्थन किया वहीं ‘उदारवादियों’ का समूह क्रमिक एवं लगातार प्रयास करते रहने का समर्थक था।
  5. एक दृष्टि से फरवरी, 1916 में बनारस में गाँधीजी का भाषण वास्तविक तव्य को हो उजागर करता था। इसका कारण यह था कि भारतीय राष्ट्रवाद वकीलों, डॉक्टरों और जमींदारों जैसे विशिष्ट वर्गों का ही प्रतिनिधित्व करता था। 
  6. चंपारण, अहमदाबाद और खेड़ा के अभियानों ने गांधीजी को एक ऐसे राष्ट्रवादी की छवि प्रदान की जिनमें गरीबों के लिए गहरी सहानुभूति थी।
  7. रॉलेट सत्याग्रह से ही गाँधीजी एक सच्चे राष्ट्रीय नेता बन गए। इसकी सफलता से उत्साहित होकर गाँधीजी ने अंग्रेजी शासन के विरुद्ध ‘असहयोग’ आंदोलन आरंभ कर दिया। लोगों ने अपने संघर्ष का विस्तार करते हुए खिलाफत आंदोलन को असहयोग आंदोलन का अंग बना लिया। 
  8. विद्यार्थियों ने सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में जाना छोड़ दिया। वकीलों ने अदालतों में जाने से इन्कार कर दिया। कई कस्बों और नगरों में श्रमिक-वर्ग हड़ताल पर चला गया। 
  9. 1922 तक गाँधीजी ने भारतीय राष्ट्रवाद को पूरी तरह परिवर्तित कर दिया। अब राष्ट्रीय आंदोलन केवल व्यवसायियों तथा बुद्धिजीवियों का हो आंदोलन नहीं रह गया था। अब इसमें हजारों की संख्या में किसानों, श्रमाकों और कारीगरों ने भी भागलेना शुरू कर दिया। 
  10.  गाँधीजी जहाँ भी जाते थे वहीं उनकी चमत्कारिक शक्तियों की अफवाहें फैल जाती थीं। कुछ स्थानों पर यह कहा गया कि उन्हें राजा द्वारा किसानों के कष्टों को दूर करने के लिए भेजा गया है और उनके पास सभी स्थानीय अधिकारियों के निर्देशों को अस्वीकृत कर देने की शक्ति है। 
  11.  गांधीजी ने राष्ट्रवादी संदेश का प्रसार अंग्रेजी भाषा की बजाय मातृभाषा में करने को प्रोत्साहन दिया। इस प्रकार कांग्रेस की प्रांतीय समितियाँ ब्रिटिश भारत की कृत्रिम सीमाओं की बजाय भाषाई क्षेत्रों पर आधारित थीं। इन अलग-अलग तरीकों से राष्ट्रवाद देश के कोने-कोने में फैल गया।
  12.  महात्मा गाँधी को 1922 में राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया था। फरवरी, 1924 में वे जेल से रिहा हो गए। म उन्होंने अपना ध्यान घर में बुने कपड़े (खादी) को बढ़ावा देने तथा हुआछूत को समाप्त करने पर लगाया।
  13.  दिसम्बर, 1920 में कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन लाहौर में हुआ। यह अधिवेशन दो दृष्टियों से महत्त्वपूर्ण था : (.) जवाहरला नेहरू का अध्यक्ष के रूप में चुनाव जो युवा पीढ़ी के नेतृत्व का प्रतीक था। (ii) ‘पूर्ण स्वराज’ अथवा पूर्ण स्वतंत्रता की उद्घोषण। 
  14. 26 फरवरी, 1930 को देश में पहली बार विभिन्न स्थानों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराकर और देशभक्ति के गीत गाकर ‘स्वतंत्रता दिवस’ मनाया गया। 
  15. नमक कानून एक घृणित कानून था। इसे भंग करने के लिए 12 मार्च, 1930 को गाँधीजी ने अपने साबरमती आश्रम से समुद्र की ओर चलना आरंभ किया। तीन सप्ताह बाद वे दाँडी पहुँचे। वहाँ उन्होंने मुट्ठी भर नमक बनाकर नमक कानून को तोड़ा। पह सविनय अवज्ञा आंदोलन की शुरूआत थी।
  16. गाँधीजी ने अपनी दाँडी-यात्रा के दौरान स्थानीय अधिकारियों से आह्वान किया था कि वे सरकारी नौकरियाँ छोड़कर स्वतंत्रता संघर्ष में शामिल हो जाएं। वसना नामक गाँव में गांधीजी ने अपने भाषण में सभी को संगठित होने के लिए कहा था। उन्होंने कहा कि, स्वराज प्राप्ति के लिए हिंदू, मुसलमान, पारसी और सिख सभी को एकजुट होना पड़ेगा। 
  17. 1935 में गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट पारित हुआ। इसमें सौमित प्रतिनिधिक शासन-व्यवस्था का आश्वासन दिया गया। 1937 में सीमित मताधिकार के आधार पर चुनाव हुए। उनमें कांग्रेस को जबरदस्त सफलता मिली। 11 में से 8 प्रांतों में कांग्रेस के प्रधानमंत्री’ सत्ता में आए. जो ब्रिटिश गवर्नर की देखरेख में काम करते थे।
  18.  मार्च, 1940 में मुस्लिम लोग ने ‘पाकिस्तान’ के नाम से एक पृथक राष्ट्र की स्थापना का प्रस्ताव पारित किया और उसे अपना लक्ष्य घोषित कर दिया। इससे राजनीतिक स्थिति काफी जटिल हो गई। 
  19.  क्रिप्स मिशन की विफलता के बाद महात्मा गाँधी ने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध अपना तीसरा बड़ा आंदोलन छेड़ने का निर्णय लिया। यह आंदोलन अगस्त, 1942 में शुरू हुआ जिसे ‘अंग्रेजो भारत छोड़ो’ का नाम दिया गया। 
  20.  जून, 1944 में गाँधीजी ने कांग्रेस तथा मुस्लिम लीग के बीच की दूरी को पाटने के लिए जिन्ना के साथ कई बार बात की 1945 में ब्रिटेन में लेबर पार्टी की सरकार बनी। यह सरकार भारत की स्वतंत्रता के पक्ष में थी। अत: वायसराय लॉर्ड वावेस ने कांग्रेस और मुस्लिम लीग के प्रतिनिधियों के बीच कई बैठकों का आयोजन किया
  21. फरवरी, 1947 में वावेल की जगह लॉर्ड माउंटबेटन को वायसराय नियुक्त किया गया। उन्होंने घोषणा की कि भारत को स्वतंत्रत दे दी जाएगी लेकिन उसका, विभाजन भी होगा।
  22. अनेक विद्वानों ने स्वतंत्रता बाद के महीनों को गाँधीजी के जीवन का ‘श्रेष्ठतम क्षण’ माना है। बंगाल में शांति स्थापना के अभियान के बाद गाँधीजी दिल्ली आ गए। 
  23. गांधीजी ने जीवन भर स्वतंत्र और अखंड भारत के लिए युद्ध लड़ा। फिर भी, जब देश विभाजित हो गया तो को उनका यह आचरण पसंद नहीं था। अत: 30 जनवरी को शाम को गाँधीजी की दैनिक प्रार्थना सभा में एक युवक ने उन्हें कुछ भारतीयों गोली मारकर मौत की नींद सुला दिया।

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