यायावार साम्राज्य Chapter 5 Class 11 History

लघु उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. हरकारा पद्धति क्या थी?

उत्तर : (i) चंगेज खान ने तीव्र गति से चलने वाली हरकारा पद्धति अपना रखी थी जिसकी सहायता से उसने अपने राज्य के दूरस्थ क्षेत्रों से संपर्क बनाए रखा।
(ii) अपेक्षित दूरी पर बनी हुई सैनिक चौकियों में स्वस्थ एवं बलवान घोड़े तथा घुड़सवार संदेशवाहक तैनात रहते थे। इस संचार प्रविधि की व्यवस्था करने के लिए मंगोल यायावर अपने पशु-समूहों से अपने घोड़े और अन्य पशुओं का दसवाँ हिस्सा प्रदान करते थे। इस कुबकुर कर कहते थे।
(iii) इस हरकारी-पद्धति (याम) में चंगेज खान की मृत्यु के बाद संशोधन किया गया और इसकी गति तथा विश्वसनीयता ने यात्रियों को आश्चर्य में डाल दिया। इससे आगे आने वाले महान खानों को अपने विस्तृत महाद्वीपीय साम्राज्य के भूभागों में होने वाली घटनाओं की निगरानी करने में सहायता मिलती थी।

प्रश्न 2. चंगेज खान की विधि संहिता क्या थी?
अथवा
यास (Yasa) के विषय से आप क्या जानते हैं?
उत्तर : (i) इतिहासकार डेविड आयलॉन के अनुसंधान के फलस्वरूप यास (vasa) पर प्रकाश पड़ा है। वह नियम संहिता, जिसके बारे में कहा जाता है कि चंगेज खान ने 1206 ई. के ‘कुरिलताई’ में घोषणा की थी, उसमें उन जटिल विधियों का विस्तृत वर्णन किया गया है जो महान ख़ान की स्मृति को बनाए रखने के लिए उसके उत्तराधिकारियों ने प्रयुक्त की थी।
(ii) अपने प्रारंभिक स्वरूप में यह शब्द ‘यसाक’ (yasag) लिखा जाता था जिसका अर्थ था ‘नियम’, ‘आदेश’ अथवा ‘आज्ञा’।
(iii) वास्तव में जो थोड़ा बहुत विवरण ‘यसाक’ के बारे में हमें प्राप्त होता है उसका संबंध प्रशासनिक विनियमों से है जैसे-आखेट का व्यवस्थापन, सेना संगठन तथा डाक-तंत्र।
(iv) तेरहवीं शताब्दी के मध्य तक, किसी तरह से मंगोलों ने इससे संबद्ध शब्द ‘यास’ का प्रयोग और अधिक सामान्य अर्थ में करना प्रारंभ कर दिया। इसे चंगेज़ ख़ान की विधि संहिता कहा जा सकता है।

प्रश्न 3. चंगेज खान के सैनिक सफलताओं के कारण बताइए।
उत्तर : चंगेज खां की सैनिक सफलताओं के कारण: इसके प्रमुख कारण निम्नलिखित थे-
(i) उसकी सफलता के पीछे उसकी असाधारण कुशलता थी जिसमें उसने अत्यन्त युद्ध कुशल स्टेपी युद्ध व्यवस्था को अपनी सैनिक युद्धनीति में प्रयोग किया।
(ii) मंगोलों और तुर्कों की घुड़सवारी कौशल ने उसकी सेना को गति प्रदान की थी। वह अद्भुत तीरंदाज था। इससे उसके सैनिक गति की तीव्रता को बढ़ावा मिला।
(iii) स्टेपी प्रदेश के घुड़सवार सदैव फुर्तीले और बड़ी तेज गति से यात्रा करते थे।
(iv) उसे मौसमों के बारे में अद्भुत जानकारी थी। उसने घोर शीत ऋतु में युद्ध प्रारम्भ किये।
(v) चंगेज खां ने घेराबन्दी उत्सेध यंत्र और सेप्था बमबारी के महत्त्व को समझा। (vi) उसके इंजीनियरों ने उसके शत्रुओं के विरुद्ध अभियानों में हल्के चल-उपस्करों का निर्माण किया।

प्रश्न 3. चंगेज खान द्वारा अपनाई गई संचार प्रणाली की मुख्य विशेषताएँ बताइए।
उत्तर : चंगेज खान ने एक फुर्तीली संचार (हरकारा) पद्धति अपना रखी थी जिससे राज्य के दूर स्थित स्थानों में आपसी संपर्क बना रहता था। अपेक्षित दूरी पर सैनिक चौकियाँ बनाई गई थीं। इन चौकियों में स्वस्थ एवं शक्तिशाली घोड़े तथा घुड़सवार तैनात रहते थे। ये घुड़सवार संदेशवाहक का काम करते थे। इस संचार पद्धति के संचालन के लिए मंगोल यायावर अपने- अपने घोड़ों अथवा अन्य पशुओं का दसवाँ भाग प्रदान करते थे। इसे ‘कुबकुर’ कर कहते थे। यायावर लोग यह कर अपनी इच्छा से प्रदान करते थे। इससे उन्हें अनेक लाभ प्राप्त होते थे। चंगेज खान की मृत्यु के पश्चात् इस हरकारा पद्धति (याम) में और भी सुधार लाये गये। इस पद्धति से महान् खानों को अपने विस्तृत साम्राज्य के सुदूर स्थानों में होने वाली घटनाओं पर निगरानी रखने में सहायता मिलती थी।

प्रश्न 4. मंगोल साम्राज्य के विस्तार पर संक्षेप में प्रकाश डालिए।
उत्तर : (i) सिक्कों के पतन के समय मध्य एशिया में मंगोलों की शक्ति उत्पन्न हुई। इसका प्रवर्तक चंगेज खान (1206-1227) था। उसने असभ्य कबीलों की सेना एकत्र करके समस्त एशिया को लूटा, चीन की दीवार को तोड़कर उत्तरी चीन पर अधिकार कर लिया और तुर्किस्तान तथा ईरान पर भी चढ़ाइयाँ करके लूट-मार की।
(ii) चंगेज खान के बेटे चगताई ने एशिया में उसके राज्य को बढ़ाया, यूरोप पर आक्रमण करके रूस, पोलैंड तथा हंगरी को उजाड़ दिया तथा मास्को, कीव तथा पेस्थ नगरों को जला दिया किन्तु सन् 1241 में उसकी मृत्यु हो जाने से शेष यूरोप उसकी मार-काट से बच गया।
(iii) उसके उत्तराधिकारी फिबलेखान (1249 से 1294) ने अपने राज्य को और भी बढ़ाया; एशिया तथा रूस पर भी उसने स्थायित्व प्राप्त कर लिया। उसकी राजधानी पीकिंग थी। उसके एक सेनानायक ने बगदाद को विजित किया था।
(iv) फिबेलखान की मृत्यु पर उसका राज्य छिन्न-भिन्न हो गया, यद्यपि बाद में तैमूर ने राज्य का पुनर्स्थापन किया। रूस में मंगोलों का राज्य तीन सौ वर्षों तक स्थापित रहा। उसने रूस के इतिहास पर अपना स्थायी प्रभाव डाला।
(v) मंगोलों के प्रादुर्भाव के अनेक अच्छे परिणाम हुए। इनके मार्ग से यूरोप के मान्कों, व्यापारियों तथा यात्रियों का आना जाना जारी रहा, जैसे धर्म युद्धों के समय में हुआ था। इस मार्ग के द्वारा एशिया के कई आविष्कार तथा विचार यूरोप में पहुँच गए, जिनसे पश्चिमी यूरोप को बड़ी सहायता मिली। इनके बिना यूरोप की सभ्यता कई शताब्दियाँ पीछे रह जाती।

प्रश्न 5. मंगोलों के इतिहास को जानने वाले साधन कौन-कौन से हैं?
उत्तर : (i) स्टेपी प्रदेश के निवासियों ने अपना कोई साहित्य नहीं रचाया था, इसीलिए हमारे इन यायावरी समाजों का ज्ञान मुख्यतः इतिवृत्तों, यात्रा-वृत्तांतों और नगरी साहित्यकारों के दस्तावेजों से प्राप्त होता है। इन लेखकों ने यायावरों के जीवन से जुड़ी सूचनाएँ बहुत अधिक दोषपूर्ण, गलत और पक्षतापूर्ण रूप से प्रस्तुत की हैं।
(ii) मंगोलों की साम्राज्यिक सफलताओं ने अनेक साहित्यकारों को अपनी ओर आकर्षित किया। उनमें से कुछ ने अपने अनुभवों के यात्रावृत्तांत लिखे और अनेक साहित्यकार मंगोल अधिपतियों के राज्याश्रय में रहे। इन व्यक्तियों की पृष्ठभूमि अलग-अलग प्रकार की थी। वे बौद्ध, कन्फ्यूशियनधर्मी, ईसाई, तुर्क और मुसलमान थे।
(iii) यद्यपि इन लोगों को मंगोल परंपराओं का ज्ञान नहीं था। इनमें कुछ ने उनके विषय में सहानुभूतिपरक विवरण और यहाँ तक कि उनकी प्रशस्तियाँ भी लिखीं तथा इसके विपरीत उनके विरोधियों ने स्टेपी लुटेरों के विषय में कटु वचन कहे हैं।
(iv) इस प्रकार हमें मंगोलों के विषय में अनेक मनोरंजक विवरण मिलते हैं। इन सबसे हमें यह ज्ञात होता है कि अपने ही क्षेत्र विशेष में रहने वाले ये यायावर विशेष आदिम बर्बर लोगों की तरह थे।

प्रश्न 6. चंगेज खान की अलोकप्रियता के तीन कारण बताइए।
उत्तर : चंगेज खान की अलोकप्रियता के निम्नलिखित कारण थे
(1) चंगेज खान एक लुटेरा था। उसने सैकड़ों नगरों को ध्वस्त किया।
(2) चंगेज खान एक लुटेरे के साथ-साथ हत्यारा भी था। उसने हजारों लोगों के साथ स्त्रियों तथा बच्चों को भी मौत के घाट उतार दिया। यहाँ तक कि निशापुर के घेरे के समय उसने कुत्ते और बिल्लियों को भी मारने का आदेश दे दिया।
(3) उसने अपने कबीले पर तलवार के बल पर शासन किया।

प्रश्न 7. चंगेज खान के सैनिक संगठन का वर्णन कीजिए।
उत्तर : चंगेज खान का सैनिक संगठन :
(i) प्रारंभ में उसकी सेना स्टेपी मैदानों की पुरानी दशमलव पद्धति के अनुसार संगठित की गई जो 10,100,1000.10000 सैनिकों में विभाजित थी।
(ii) चंगेज खान ने इस प्रथा को समाप्त कर दिया। जनजातीय समूहों को विभाजित कर उनके सदस्यों को नवीन सैनिक इकाइयों में विभक्त कर दिया।
(iii) उसकी सेना अनुशासित थी। आज्ञा का उल्लंघन करने पर दण्ड दिया जाता था।
(iv) नवीन सैनिक टुकड़ियों को चंगेज के चारों पुत्र के अधीन कर दिया जो विशेष रूप से चुने हुए कप्तानों के अधीन कार्य करते थे जिन्हें नोयान कहा जाता था।
(v) यह अपने सैनिकों से प्रेम करता था।

प्रश्न 8. चंगेज खान की उपलब्धियों पर प्रकाश डालिए।
उत्तर : (i) चंगेज खान की उपलब्धियाँ आश्चर्य में डालने वाली थी। इसके पीछे उसकी असाधारण कार्यकुशलता थी जिसमें उसने अत्यंत युद्ध-कुशल स्टेपी-युद्ध व्यवस्था को अपनी सैनिक-युद्धनीति में प्रयोग किया।
(ii) मंगोलों और तुर्को की घुड़सवारी कौशल ने उसकी सेना को गतिशीलता दी। उनके घोड़े पर सवार होकर तीरंदाजी का कौशल शानदार था जिसे उन्होंने अपने दैनिक-जीवन में जंगलों में पशुओं का आखेट करते समय प्राप्त किया था ।
(iii) उनके इस घुड़सवारी तीरंदाजी के अनुभव ने उनकी सैनिक-गति को बहुत तेज कर दिया। स्टेपी प्रदेश के घुड़सवार सदैव फुर्तीले और बड़ी तेज गति से यात्रा करते थे। अब उन्हें अपने आस-पास के भूभागों और मौसम की जानकारी हो गई जिसने उन्हें अकल्पनीय कार्य करने की क्षमता प्रदान की।

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