विचारक, विश्वास और इमारते (सांस्कृतिक विकास ) Thinkers, Beliefs and Buildings Cultural Developments Class 12 History Chapter 4

विचारक, विश्वास और इमारतें

Class 12 | Chapter 4

हिंदी नोट्स

 याद रखने योग्य 

  1. गाँधी बौद्ध धर्म का एक महत्वपूर्ण केंद्र है इसकी खोज से आरंभिक बौद्ध धर्म के बारे में हमारी जानकारी में महत्वपूर्ण बदलाव आए । 
  2. अग्वेद, अग्नि, इंद, सोम आदि कई देवताओं के स्तुति-सूक्तों का संग्रह है। यज्ञों के समय इन सूक्तों का उच्चारण किया जाता था और लोग मधेशी, पुत्र, स्वास्थ्य, लबी आयु आदि के लिए प्रार्थना करते थे। 
  3.  उपनिषदों में दी गई विचारधाराओं से पता चलता है कि लोग जीवन का अर्थ, मृत्यु के बाद जीवन की संभावना और पुनर्जन्म के बारे में जानने के लिए उत्सुक रहते थे।
  4. काई विचारकों में, जिनमें महावीर और बुद्ध शामिल हैं, वेदों के प्रभुत्व पर प्रश्न उठाया। उन्होंने यह माना कि जीवन के दु:खों से मुक्ति का प्रयास हर व्यक्ति स्वयं कर सकता है।
  5.  जैन धर्म के मूल सिद्धांत छती शताब्दी ईसा पूर्व में वर्धमान महावीर के जन्म से पहले ही उत्तर भारत में प्रचलित थे। जैन परंपरा के अनुसार महावीर से पहले 23 शिक्षक हो चुके थे, जिन्हें तीर्थंकर कहा जाता है। 
  6.  जैन दर्शन की सबसे महत्वपूर्ण अवधारणा है कि सारा संसार सजीव है। यह माना जाता है कि पत्थर, चट्टान और जल में भी जीवन होता है। 
  7.  पुर अपने युग के सबसे प्रभावशाली शिक्षकों में से एक थे। सैकड़ों वर्षों के दौरान उनके संदेश पूरे उपमहाद्वीप में और उसके बाद मध्य एशिया होते हुए चीन, कोरिया और जापान तथा श्रीलंका से समुद्र पार कर म्यांमार, थाइलैंट और इंडोनेशिसया तक फैल गए।
  8.  बुद्ध के बचपन का नाम सिद्धार्थ था। वह शाक्य कबीले के सदस्य के पुत्र थे।
  9.  बुद्ध का मानना है कि समाज का निर्माण मनुष्यों ने किया था न कि ईश्वर ने। इसीलिए उन्होंने राजाओं और गृहपतियों दयावान और आचारवान होने की सलाह दी। बुद्ध के अनुसार व्यक्ति प्रयास से सामाजिक परिवेश को बदला जा सकता है। 
  10.  आरंभ में केवल पुरुष ही संघ में सम्मिलित हो सकते थे। बाद में महिलाओं को भी अनुमति दे दी गई। बौद्ध ग्रंथों के अनुसार बुद्ध के प्रिय शिष्य आनंद ने बुद्ध को समझाकर महिलाओं के संघ में प्रवेश की अनुमति प्राप्त की थी। 
  11.  स्तूप बनाने की परंपरा संभवत: बुद्ध के पहले से ही प्रचलित थी, परंतु यह बुद्ध धर्म से जुड़ गई। क्योंकि ऐसे स्थलों में अवशेष होते थे जिन्हें पवित्र समझा जाता था।
     
  12. साँची और भरहुत के प्रारंभिक स्तूप बिना अलंकरण के हैं। इनमें केवल पत्थर की वेदिकाएँ और तोरणद्वार ही बने हैं।
  13. अमरावती के स्तूप की खोज अचानक हुई: 17% में क न्यानीय साज नदिर कनाना वाहात ये कराचाराय आमा स्तूप के अवशेष मिल गए। 
  14. 1818 में साँची की खोज हुई उस समय तक भी इसके सीन तरणदार ख् थो चीचा इर ह हुआमा देल भी अच्छी दशा में था। 
  15.  कला इतिहासकरों को बौड मूर्तिकला को समझने के लिए कुछ के करिक-िखन का सहार लना पढ विकरत हए प्राप्ति हुई।
  16.  लोक परंपरा में यह माना जाता या कि शालभाषिका द्वारा एए बाने स मुल िल थ आरे आने थे। 
  17.  सांची में जानवरों के कुछ बहुत ही सुंदर उत्कीर्णन पाए गए है। इस वानकरी में हाथी योे क ऐसा लगता है कि इन जानवरतें का उत्कोणन लोगों को आकर्ित करने के लिए किया गया था।
  18.  कनिष्ठ के समय में बौद्ध धर्म में महावीर पेपर का दय हआा। महा्यान क वूर्म ब साो के को हीनयान के अनुयायी करते थे। 
  19.  आरंभिक मंदिर एक चौकोर करने के रूप में होते थे लिसे गामीपरा का वाता था। इसमे एक पायाना डाला पति होकर उपासक मूर्ति की पूजा करने के लिए अपर वाकतथा। और-धोर यामी के एक ह चा क्लाय सपा जिसे शिखर कहा जाता था।
  20.  इसका सबसे विकसित रूप हमें आखो के कैलाशनाथ के मि में दियाईहै कियसे पही ककर को उसे मंदिर का रूप दे दिया गया था।

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