शासक और इतिविरेतक {मुग़ल दरबार}

शासक और इतिविरेतक {मुग़ल दरबार}

Class 12 | Chapter 9

हिंदी नोट्स

 याद रखने योग्य बातें 

  1. जलालुद्दीन अकबर (1556-1605) को सबसे महान मुगल शासक আता है। उसने ने केवल साम्रान्य का विस्तार किया बल्कि उसे भाव और समृद्ध भी बनाया।
  2. सती पत्तों के लेखक दरबारी थे। उन्होंने जो इतिहास लिखे वे मुख्य में इन बातों पर केंद्रित थे-0 शासक पर केंद्रित पटनाएँ, (i) का परिवार, (if) दरबार तथा अभिजात. (v) युद्ध और प्रशासनिक व्यवस्थाएँ।
  3. अकबर ने फारस के राज दरबार की मुख्य भाषा बनाया था। इसके लिए अकबर को संभवतः ईरान के साथ सांस्कृतिक और बौद्धिक कोन, मुगल दरबार में पद पाने के इच्छुक ईरानी तथा मध्य एशियाई प्रवासियों ने प्रेरित किया होगा।
  4. পন काल के दो महत्त्वपूर्ण चित्रित इतिहास थे। अबुल फजल का कारनामा तथा अब्दुल हमीद लाहौरी का बादशाहनामा।
  5. मुला-ए-कुल का आदर्श मुगल साम्राज्य के सभी वर्गों तथा नृजातीय धार्मिक समुदायों के बीच शांति, सद्भावना और एकीकरण से प्रेरित पाः सुलह-ए-कुल में सभी धर्मों और मतों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता थी, परंतु उनसे यह आशा की जाती थी कि वे राज्य मला को क्षति नहीं पहुँचाएँगे अथवा आपस में नहीं लड़ेंगे
  6. जहाँआरा मुगल बादशाह शाहजहाँ की पुत्री थी। उसने शाहजहाँ की नई राजधानी शाहजहाँनाबाद (दिल्ली) की कई बास्तुकलात्मक परियोजनाओं में भाग लिया। इनमें एक दो मंजिली भव्य कारवाँसराय शामिल थी जिसमें एक आँगन और एक बाग था।
  7. तैनात-ए-रकाब मुगल दरबार में नियुक्त अभिजातों का एक ऐसा सुरक्षित बल था जिसे किसी भी प्रांत या सैन्य अभियान में भेजा जा सकता था। उन्हें प्रतिदिन दो बार सुबह और शाम सार्वजनिक सभा-भवन में बादशाह के प्रति आत्मनिवेदन करने के लिए पेश होना पड़ता था।
  8. मुगल पांडुलिपियों की रचना में चित्रकारों की महत्त्वपूर्ण भूमिका थी। किसी बादशाह के शासन की घटनाओं का विवरण देने वाले इतिहासों में लिखित पाठ के साथ उन घटनाओं को चित्रों के माध्यम से भी दर्शाया जाता था। 
  9. अकबरनामा की तरह बादशाहनामा भी सरकारी इतिहास है जिसकी तीन जिल्दें (दपतर) हैं। प्रत्येक जिल्द दस चंद्र वर्षों का योरा देती है। लाहौरी ने शाहजहाँ के शासन के पहले दो दशकों पर पहला तथा दूसरा दफ्तर लिखा। बाद में शाहजहाँ के वजीर सादुल्लाह खाँ ने इन जिल्दों में सुधार किया।
  10. प्रशासन की सुविधा के लिए मुगल साम्राज्य को प्रांतों (सूबों) में बाँटा गया था। प्रातीय शासन का मुखिया गवर्नर होता था जो अपनी रिपोर्ट सीधे बादशाह को भेजता था।
  11.  मुगल प्रशासन के प्रत्येक विभाग के पास लिपिकों, लेखाकारों, लेखा-परीक्षकों, संदेशवाहकों तथा अन्य कर्मचारियों बड़ा सहायक समूह होता था। ये मानकीकृत नियमों और प्रक्रियाओं के अनुसार कार्य करते थे तथा बड़ी संख्या में आदेश तथा वृत्तांत तैयार करते थे। 
  12.  मुगल इतिवृत्त मुगल साम्रान्य को हिंदुओं, जैनियों, पारसियों, मुसलमानों आदि अनेक नृजातीय एवं धार्मिक समुदायों के रूप में प्रस्तुत करते हैं। बादशाह शांति और स्थायित्व के स्रोत रूप में इन सभी समूहों से ऊपर होता था।
  13.  गुलबदन बेगम बाबर की पुत्री तथा हुमायूँ की बहन थी। उसके द्वारा रचित “हुमायूँनामा” एक झलक मिलती है। वह तुर्की तथा फारसी में धाराप्रवह लिख सकती थी। 
  14. मुगलों के दरबारी इतिहास फारसी भाषा में लिखे गए थे। दिल्ली के सुलतानों के काल में उत्तर भारतीय भाषाओं के साथ फारसी भाषा दरबार तथा साहित्यिक रचनाओं की भाषा के रूप में खूब विकसित हुई थी। हमें मुगलों की घरेलू दुनिया
  15.  मुमल काल में ईरानी कलाकार भारत में भी आए। कुछ को मुगल दरबार में लाया गया। उदाहरण के लिए मीटर सैय्यद । और अब्दुल समद बादशाह हुमायूँ के साथ दिल्ली आए।
  16. अकबरनामा को तीन जिल्दों में बाँटा गया है जिसमें से प्रथम दो जिल्दें इतिहास हैं। तीसरी जिल्द ‘आइन-ए-अकबरी हे।

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