Assess Mahatma Gandhi’s role in the national movement in the context of the methods adopted by him. राष्ट्रीय आंदोलन में महात्मा गाँधी की भूमिका का उसके द्वारा अपनाये गये तरीकों के संदर्भ में आकलन कीजिए।

 उत्तर : भारत में जब अंग्रेजों का राज्य था और भारतीय जनता उनके द्वारा प्रत्यक्ष एवं परोक्ष रूप से सताई जा रही थी। ऐसे समय में महात्मा गाँधी ने दक्षिण अफ्रीका से भारत आकर यहाँ की जनता का बारीकी से अध्ययन किया। उन्होंने भारतीयों की दशा सुधारने हेतु अहिंसा का सहारा लिया। इसके अंतर्गत उन्होंने अपने विचारों को भारतीय जनता के समक्ष रखा तथा आंदोलनों के रूप में अंग्रेजों के सामने विरोध प्रकट किया। इन आंदोलनों में से कुछ प्रमुख आंदोलन जो गाँधी जी द्वारा प्रतिपादित थे, निम्नलिखित हैं :

(i) असहयोग आंदोलन : इस संबंध में गाँधी जी का सुझाव था कि खिलाफत आंदोलन तथा असहयोग आंदोलन एक साथ चलाये जाये। इन्हें क्रमिक चरणों में चलाया जाये तथा उनके द्वारा भारतीयों को प्रदान की गयी उपाधियों का बहिष्कार करें
(ii) चंपारण सत्याग्रह : सन् 1917 में गाँधी जी ने बिहार के चंपारण नामक स्थान पर पहला सत्याग्रह प्रारंभ किया जो किसानों की दुर्दशा को सुधारने संबंधी था। इसे वहाँ के अंग्रेज बागान मालिकों तथा प्रशासन को मानना पड़ा।
गाँधी जी ने किसानों के भूराजस्व कर की वसूली के विरोध में 1918 में खेड़ा सत्याग्रह किया। गाँधी जी ने मुसलमानों तथा हिंदुओं को अधिक निकट लाकर उनमें पारस्परिक सद्भावना उत्पन्न की। उन्होंने रॉलट एक्ट के विरोध में असहयोग आंदोलन शुरू किया।
9 अप्रैल 1930 को गाँधी जी ने सविनय अवज्ञा आंदोलन प्रारंभ किया जिसका उद्देश्य विदेशी नमक का बहिष्कार करना था। सत्याग्रहियों ने विदेशी कपड़ों का भी बहिष्कार किया। अंग्रेजों ने सभी आंदोलनों को रोकने के लिए गाँधी इरविन समझौता करने का निर्णय लिया।

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