Bricks Beads And Bones | ईंटें मनके और अस्थियाँ | Chapter 1 Class 12 History

 प्रश्न 1. पुरातत्त्वविद् हड़प्पाई समाज में सामाजिक आर्थिक भिन्नताओं का पता किस प्रकार लगाते हैं ? वे कौन-सी भिन्नताओं पर ध्यान देते हैं ?
How do archaeologists trace socio-economic differences in Harappan society ? What are the differences that they notice?

अथवा

पुरा वस्तुएँ (मानवाकृतियाँ), हड़प्पा काल की सामाजिक विभिन्नताओं के अंतर को पहचानने में किस प्रकार सहायक होती हैं ? वर्णन 

अथवा 

हड़प्पा काल की सामाजिक भिन्नताओं को पहचानने में पुरावस्तुएँ किस प्रकार सहायक होती हैं ? संक्षेप में वर्णन कीजिए।

उत्तर : पुरातत्वविद् हड़प्पाई समाज में सामाजिक-आर्थिक भिन्नताओं का पता कई प्रकार से लगाते हैं। इसके लिए वे मुख्यत: निम्नलिखित भिन्नताओं को आधार बनाते हैं
1. शवाधान : शवाधानों में मृतकों को दफनाते समय उनके साथ विभिन्न प्रकार की वस्तुएँ रखी जाती थीं। ये वस्तुएँ बहुमूल्य भी हो सकती हैं और साधारण भी। हड़प्पा स्थलों के जिन गों में शवों को दबाया गया था, वहाँ भी यह भिन्नता दिखाई देती है। बहुमूल्य वस्तुएँ मृतक की मजबूत आर्थिक स्थिति को व्यक्त करती हैं, जबकि साधारण वस्तुएँ उसकी साधारण आर्थिक स्थिति की प्रतीक हैं।
2. विलासिता की वस्तुएँ : सामाजिक भिन्नता को पहचानने की एक अन्य विधि है- पुरावस्तुओं का अध्ययन। पुरातत्वविद् इन्हें मोटे तौर पर उपयोगी तथा विलास की वस्तुओं में वर्गीकृत करते हैं। पहले वर्ग में उपयोग की वस्तुएँ शामिल हैं। इन्हें पत्थर अथवा मिट्टी आदि साधारण पदार्थों से आसानी से बनाया जा सकता है। इनमें चक्कियाँ, मृदभांड, सूइयाँ, झाँवा आदि शामिल हैं। ये वस्तुएँ प्रायः सभी बस्तियों में पाई गई हैं। पुरातत्वविद् उन वस्तुओं को कीमती मानते हैं, जो दुर्लभ हो अथवा महँगी हों या फिर स्थानीय स्तर पर न मिलने वाले पदार्थों से अथवा जटिल तकनीकों से बनी हों। इस दृष्टि में फयॉन्स के छोटे पात्र कीमती माने जाते थे क्योंकि इन्हें बनाना कठिन था। जिन बस्तियों में ऐसी कीमती वस्तुएँ मिली हैं, वहाँ के समाजों का स्तर अपेक्षाकृत ऊँचा रहा होगा।

प्रश्न 2. मोहनजोदड़ो की कुछ विशिष्टताओं का वर्णन कीजिए।

Describe some of the distinctive features of Mohenjodaro.

उत्तर : मोहनजोदड़ो की कुछ विशिष्टताएँ निम्नलिखित हैं :
(क) गलियाँ : शहर में चौड़ी और सीधी सड़कें थीं सड़कें और गलियाँ एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं। गलियां एक-दूसरे को वर्णाकार और आयताकार खण्डों में काटती थी गलियों के दोनों ओर सभी घरों के साथ-साथ नालियाँ बनी हुईं थे शहर में गलियों का जाल बिछा हुआ था।
(ख) भवन : बस्ती को दो भागों में विभाजित किया गया था। एक छोटी बस्ती थी लेकिन उसे ऊँचाई पर बनाया गया था दूसरी बस्ती कहीं अधिक बड़ी थी लेकिन उसे नीचे बनाया था। छोटी बस्ती को दुर्ग और निचले बड़ी बस्ती को निचला शहर कहा जाता था। दुर्ग की संरचनाएँ कच्ची ईंटों के चबूतरे पर बनी थी। इसलिए इसकी ऊँचाई अधिक थी। दुर्ग को निचले शहर से अलग करने के लिए उसे दीवार से घेर दिया गया था। निचले शहर को भी दीवार से घेरा गया था। इसके अतिरिक्त कई भवनों को ऊँचे चबूतरे पर बनाया गया था जो नींव का कार्य करते थे। कच्ची और पक्की ईंटें एक निश्चित अनुपात की होती थी। प्रत्येक ईंटों की लंबाई और चौड़ाई, ऊँचाई की क्रमशः चार गुनी और दोगुनी होती थी|
(ग) जल-निकास व्यवस्था : मोहनजोदड़ो की जल-निकास प्रणाली उत्तम व्यवस्था वाली थी। सड़कों और गलियों को लगभग एक ग्रिड पद्धति में बनाया गया था तथा वे एक-दूसरे को समकोण बनाते हुए काटती थीं। गलियों और सड़कों के दोनों ओर नालियाँ बनी थी जिनमें घर से गन्दा पानी बहकर आता था। नालियाँ डंकी होतो थीं।
(घ) विशाल स्नानघर : मोहनजोदड़ो का सबसे प्रमुख सार्वजनिक स्थल विशाल स्नानागार था। कपड़े बदलने के लिए कमरे बने हुए थे। सीढ़ियाँ जलाशय के नीचे सतह तक बनी हुई थीं। स्नानागार का फर्श पक्की ईंटों का बना हुआ था। पानी एक बड़े कुएँ से जलाशय में आता था। शायद इस विशाल स्नानागार का उपयोग किसी धार्मिक कार्यों में स्नान के लिए किया जाता था।

प्रश्न 3. हड़प्पा सभ्यता में शिल्प उत्पादन के लिए आवश्यक कच्चे माल की सूची बनाइए तथा चर्चा कीजिए कि ये किस प्रकार प्राप्त किए जाते होंगे ?
List the raw materials required for craft production in the Harappan civilisation and discuss how these might have been obtained.

अथवा

“हड़प्पावासी शिल्प उत्पादन हेतु माल प्राप्त करने के F लिए विभिन्न तरीके अपनाते थे।” इस कथन के संदर्भ में शिल्प उत्पादन के लिए कच्चा माल प्राप्त करने के तरीकों को स्पष्ट कीजिए। 


 उत्तर : हड़प्पा सभ्यता में शिल्प उत्पादन के लिए आवश्यक कच्चे माल की सूची :
1. चिकनी मिट्टी, 2. पक्की मिट्टी, 3. कार्निलियन या लाल रंग का सुन्दर पत्थर, 4. लाजवर्द मणि या नीले रंग का कीमती पत्थर, 5. सेलखड़ी, 6. जैस्पर, 7. स्फटिक, 8. क्वार्ट्ज, 9. तांबा, 10. कांसा, 11. सोना, 12. शंख, 13. लेप की सामग्री, 14. घिसाई. यालिश और छेद करने के औजार, 15. कुम्हार का चक्का, 16. तकलियाँ, 17. सूइयाँ, 18. झावा, 19. फयॉन्स, 20. मिट्टी के बर्तन, 21. मनके, 22. पीले रंग के कच्चे माल, 23. अस्थियाँ, 24. कपास या सूत, ऊन आदि, 25. टिन।

उपरोक्त मालों को प्राप्त करना 
(क) मुलायम और पक्की मिट्टियाँ स्थानीय स्रोतों से प्राप्त की जाती थीं।
(ख) विभिन्न प्रकार के पत्थरों को आस-पास के राज्यों से प्राप्त किया जाता था कार्निलियन को गुजरात के भड़ौच से प्राप्त किया जाता था। कुछ विशिष्ट पत्थर जैसे लाजवर्द मणि को अफगानिस्तान से मंगाया जाता था दक्षिणी राजस्थान तथा उत्तरी गुजरात से सेलखड़ी लायी जाती थी।
(ग) राजस्थान के खेतड़ी से ताँबा तथा दक्षिण भारत से सोना मंगाया जाता था। तांबा संभवत: ओमान से भी प्राप्त किया जाता था।
(घ) लकड़ी आस-पास के जंगलों से प्राप्त की जाती थी। कुछ अच्छे प्रकार की लकड़ी का आयात मैसोपोटामिया से भी किया जाता था।
(ङ) कताई के लिए कपास तथा ऊन क्रमश: खेतों तथा भेड़ों से प्राप्त की जाती थी।
(च) फयान्स मोहनजोदड़ो और हड़प्पा से प्राप्त किए जाते थे।
(छ) खिलौने बनाने तथा मनके बनाने में सेलखड़ी चूर्ण के लेप का प्रयोग किया जाता था जिसे सांचे में ढालकर विभिन्न प्रकार की आकृतियाँ तैयार की जाती थीं लेप स्थानीय वस्तुओं से तैयार कर लिया जाता था।
(ज) लोथल और धौलावीरा में घिसाई, पालिश और छेद करने के उपकरणों को बनाया जाता था।

प्रश्न 4. हड़प्पाई समाज में शासकों द्वारा किये जाने वाले संभावित कार्यों की चर्चा कीजिए ।
Discuss the functions that may have been performed by rulers in Harappan society. 

उत्तर : हड़प्पाई समाज में सत्ता के केंद्र किस प्रकार के थे या सत्ताधारी लोग कौन थे, इस संबंध में पुरातात्विक साक्ष्यों से पूर्ण जानकारी नहीं मिलती है। कुछ पुरातत्वविदों का मानना है कि हड़प्पाई समाज में शासक नहीं होते थे। सभी लोगों की सामाजिक स्थिति एक समान थी। दूसरे पुरातत्वविदों का मानना है कि यहाँ कई शासक थे, जैसे-मोहनजोदड़ो, हड़प्पा आदि के अपने अलग-अलग राजा होते थे। कुछ विद्वानों का मत है कि हड़प्पाई समाज एक ही राज्य था। सबसे अंतिम परिकल्पना सबसे युक्तिसंगत प्रतीत होती है क्योंकि ऐसा संभव नहीं है कि समुदाय इकट्टे मिलकर विभिन्न कार्यों का निर्णय लेते होंगे और उसे कार्यान्वित करते होंगे। हड़प्पा के शासक के द्वारा किए जाने वाले कार्यों में शामिल था-नियोजित नगर बनाना, विभिन्न प्रकार के शिल्पों का व्यवस्थीकरण, कच्चे माल के समीप बस्तियाँ बसाना, देश के विभिन्न भागों में अभियान योजना, दूर-दराज के देशों के साथ संपर्क बनाना, विभिन्न वस्तुओं का आयात करना आदि।

प्रश्न 5. चर्चा कीजिए कि पुरातत्त्वविद् किस प्रकार अतीत का पुनर्निर्माण करते हैं ?
Discuss how archaeologists reconstruct the past.

अथवा

“किसी पुरावस्तु की उपयोगिता की समझ प्रायः आधुनिक समय में प्रयुक्त वस्तुओं से उनकी समानता पर आधारित होती है।” उचित साक्ष्यों की सहायता से इस कथन का औचित्य निर्धारित कीजिए। 

उत्तर : पुरातत्वविदों द्वारा अतीत का पुनर्निर्माण निम्नलिखित तथ्यों के आधार पर किया जाता है
(क) हड़प्पा सभ्यता की लिपि को अभी तक नहीं पढ़ा जा सका है। इसलिए इन सभ्यता स्थलों से प्राप्त साक्ष्यों, जैसे-मृदभांड, औजार, आभूषण और अन्य वस्तुओं के आधार पर अतीत का पुनर्निर्माण करते हैं।
(ख) खुदाई द्वारा हड़प्पा सभ्यता के काल का ज्ञान।
(ग) पक्की मिट्टी की मूर्तिकाएँ और मोहरें हड़प्पाई लोगों की धार्मिक प्रथाओं पर काफी प्रकाश डालते हैं।
(घ) खुदाई में मिले मिट्टी के बर्तनों का अतीत जानने में महत्त्वपूर्ण स्थान है।
(ङ) चाक पर बने हुए मिट्टी के बर्तन इस बात की ओर इंगित करते हैं कि यह संस्कृति पूर्णतया विकसित थी।
(च) प्राप्त मूर्तियों जैसी आकृतियों से अतीत के सामाजिक जीवन को समझने में सहायता मिलती है।
(छ) कीमती आभूषणों से आर्थिक दशा की जानकारी मिलती है।
(ज) शवाधानों से प्राप्त विभिन्न सामग्रियों से सामाजिक भिन्नता की जानकारी मिलती है।
(झ) बैलगाड़ीनुमा खिलौनों से यह ज्ञात होता है कि हड़प्पाई लोग आने-जाने या सामान ढोने के लिए किस प्रकार के यातायात साधनों का प्रयोग करते थे।
(ब) अस्थिपिंजरों से हड़प्पाई लोगों के शव-विसर्जन और धार्मिक विश्वासों की जानकारी मिलती है।

प्रश्न 1. सिन्धु घाटी सभ्यता को हड़प्पा संस्कृति क्यों कहते हैं? 

उत्तर: (i) सिन्धु घाटी सभ्यता की सर्वप्रथम खोज हड़प्पा नामक स्थान पर हुई। इसलिए इसे हड़प्पा संस्कृति कहते हैं।
(ii) इसकी सर्वप्रथम खोज 1921 ई० में दयाराम साहनी ने की। 

प्रश्न 2. हड़प्पा सभ्यता में सिंचाई के लिए नहरों के अवशेष कहाँ से मिले हैं? सिंचाई के अन्य साधन कौन-कौन से थे?

उत्तर : हड़प्पा सभ्यता में सिंचाई के लिए नहरों के अवशेष अफगानिस्तान में शोर्तुघई नामक पुरास्थल से मिले हैं। सिंचाई के अन्य साधन थे
1. कुओं से प्राप्त जल।
2. जलाशयों में एकत्रित जल।

प्रश्न 3. हड़प्पा संस्कृति का ज्ञान हमें किन स्रोतों से होता है?

उत्तर : हड़प्पा संस्कृति की जानकारी के अनेक स्रोत है-
 (i) विभिन्न स्थलों की खुदाई से प्राप्त सड़कों, गलियों, भवनों, स्नानागारों आदि के द्वारा नगर योजना, वास्तुकला और लोगों के रहन-सहन के विषय में जानकारी मिलती है।
 (ii) कला शिल्प की वस्तुएँ जैसे-तकलियाँ, मिट्टी के खिलौने, धातु की मूर्तियाँ, आभूषण, मृद्भाण्ड आदि से विभिन्न व्यवसायों एवं सामाजिक दशा के विषय में जानकारी प्राप्त होती है।
(iii) मिट्टी की मुहरों से धर्म, लिपि आदि का ज्ञान होता है। 

प्रश्न 4. हड़प्पा काल में बर्तन तथा चक्कियाँ क्रमशः किस-किस चीज़ से बनाई जाती थीं?

उत्तर : हड़प्पा काल में बर्तन पत्थर, धातु तथा मिट्टी से बनाये जाते थे।

प्रश्न 5. हड़प्पावासियों द्वारा सिंचाई के लिए प्रयोग में लाये जाने वाले साधनों के नामों का उल्लेख कीजिए।उदाहरण भी दीजिए। 

उत्तर : हड़प्पावासियों द्वारा मुख्यतः नहरें, कुएँ और जल संग्रह करने वाले स्थानों को सिंचाई के रूप में प्रयोग में लाया जाता था।
उदाहरणार्थ : 
(i) अफगानिस्तान में शौर्तुपई नामक स्थल से हड़प्पाई नहरों के चिह्न प्राप्त हुए हैं।
(ii) हड़प्पा के लोगों द्वारा सिंचाई के लिए कुओं का भी इस्तेमाल किया जाता था।
(iii) गुजरात के धोलावीरा नामक स्थान से पानी की बावली (तालाब) मिला है। इसे कृषि की सिंचाई के लिए पानी देने के लिए जल संग्रह के लिए प्रयोग किया जाता था।

प्रश्न 6. हड़प्यावासियों की सामाजिक विभिन्नताओं को पहचानने की दो विधियों का उल्लेख कीजिए।

 उत्तर : (i) शवाधानों गर्ता की बनावट तथा उनमें मिली वस्तुओं का अध्ययन।
(ii) पुरावस्तुओं को मोटे तौर पर उपयोगी तथा विलास की वस्तुओं में वर्गीकृत किया जाता है।

प्रश्न 7. हड़प्पा निवासियों के कब्रों में मिली किन्हीं पाँच वस्तुओं का उल्लेख कीजिए। 

उत्तरः (i) मृदभांड, (ii) खोपड़ियाँ तथा अस्थियाँ, (iii) शंखों के छल्ले, (iv) जैस्पर के मनके. (v) आभूषण आदि।

प्रश्न 8. हड़प्पाइयों द्वारा बर्तनों के विभिन्न प्रयोगों का उल्लेख कीजिए। सिन्धु घाटी में ये बर्तन किन-किन चीजों से बनाए जाते थे ?

उत्तर : कुछ बर्तन (जैसे चक्की, अनाज या खाद्य पदार्थ) पीसने के लिए प्रयोग किये जाते थे। इन बर्तनों को चीजों को मिलाने के लिए अलग रखने के लिए और खाना पकाने के लिए भी इस्तेमाल किया जाता था ये यहाँ पात्र पत्थरों, धातुओं और चिकनी मिट्टी के बनाये जाते थे।

प्रश्न 9. हड़प्पा के लोगों द्वारा किस प्रकार के विभिन्न  बाटों का प्रयोग होता था?

उत्तर : हड़प्पाई लोगों के बाट :
(i) ये बाट सामान्यतः चर्ट नामक पत्थर से बनाये जाते थे और आमतौर पर ये किसी भी तरह के निशान से रहित घनाकार होते थे।
(ii) इन बाटो के निचले मानदंड द्विआधारी (1.2.4.8, 16, 32 इत्यादि 12.800 तक) थे जबकि ऊपरी मानदंड दशमलव प्रणाली का अनुसरण करते थे। साथ-ही-साथ छोटे बाटों का प्रयोग संभवतः आभूषणों और मनकों को तौलने के लिए किया जाता था। 

प्रश्न 10, अवतल चक्कियों का क्या उपयोग था ? 

उत्तर : (i) हड़प्पा स्थलों विशेष रूप से मोहनजोदड़ो में अनेक अवतल चक्कियाँ मिली है। विद्वानों का अनुमान है कि इनकी सहायता से अनाज पीसा जाता था।
(ii) ये चक्कियों मुख्यतः कठोर, अग्निज अथवा बलुआ पत्थर से निर्मित थीं। दो मुख्य प्रकार की चक्कियां मिली हैं। एक वे हैं जिन पर छोटा पत्थर आगे-पीछे चलाया जाता था जिससे निचला पत्थर खोखला हो गया था तथा दूसरी वे हैं जिनका प्रयोग संभवतः केवल सालन या तरी बनाने के लिए जड़ी-बूटियों तथा मसालों को कूटने के लिए किया जाता था।

प्रश्न 11. फयॉन्स क्या होता है? इससे बने छोटे पात्रों को कीमती क्यों माना जाता था?

उत्तर : फयॉन्स बालू (घिसी हुई रेत) तथा रंग और किसी चिपचिपे पदार्थ के मिश्रण को पकाकर बनाया गया पदार्थ होता है। इससे बने छोटे पात्रों को इसलिए कीमती माना जाता था, क्योंकि इन्हें बनाना कठिन था।

प्रश्न 12, सिन्धु घाटी के लोगों द्वारा पाले जाने और उन्हें ज्ञात जंगली पशुओं के नाम लिखिए। 

उत्तर : 1. हड़प्पाई लोगों के द्वारा पालतू मवेशियों प्रमुख थे-भेड़, बकरी, भैंस, सांड तथा सूअर।
2. हड़प्पाई लोगों को वराह (सूअर) हिरण तथा घड़ियाल जैसे जंगली जानवरों की जानकारी थी।

प्रश्न 13. पुरातत्त्वविदों द्वारा ज्ञात की गई पहले स्थल का नाम लिखिए जिन्होंने बुरी तरह से स्थान को बर्बाद कर दिया है।

उत्तर : (i) हड़प्पा पुरातत्त्वविदों द्वारा खोजा गया प्रथम स्थल था।
(ii) हड़प्पा की ईंटे जो चोरो ने बुरी तरह से बरबाद कर दी थी।

प्रश्न 14. नागेश्वर तथा बालाकोट कहां स्थित थे? ये किस शिल्प के लिए विख्यात थे और क्यों?

उत्तर : नागेश्वर तथा बालाकोट समुद्र तट के समीप स्थित थे। ये शंख से वस्तुएँ बनाने के लिए विशिष्ट केंद्र थे। इसका कारण यह था कि समुद्र तट के निकट स्थित होने के कारण यहाँ शंख बहुतायत में उपलब्ध थे।

प्रश्न 15.कनिंघम कौन था? हड़प्पा सभ्यता की आरधिक बस्तियों की पहचान के लिए उसने किन वृत्तांतों का प्रयोग किया? किसी एक का उल्लेख कीजिए।

उत्तर : (i) कनिंघम भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण के पहले डायरेक्टर जनरल थे। उन्होंने उन्नीसवीं शताब्दी के मध्य में पुरातात्विक उत्खनन आरंभ किए।
(ii) हड़प्पा सभ्यता की आरंभिक बस्तियों की पहचान के लिए उन्होंने चौथी से सातवीं शताब्दी ईसवी के बीच उपमहाद्वीप में आए चीनी बौद्ध तीर्थयात्रियों द्वारा छोड़े गए वृत्तांतों का प्रयोग किया।

प्रश्न 16. हड़प्पा मुहरों और मुद्रांकनों का प्रयोग लंबी दूरी के संपर्कों को सुविधाजनक बनाने के लिए किस प्रकार होता था? मुद्रांकन से क्या पता चलता था ? 

उत्तर : (i) सामान से भरा थैला एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजते समय इसका मुख रस्सी से बाँध दिया जाता था। इसकी गाँठ पर थोड़ी गीली मिट्टी जमा कर एक या अधिक मुहरों से दबा दिया जाता था। इससे मिट्टी पर मुहरों की छाप पड़ जाती थी। यदि इस थैले के अपने गंतव्य स्थान पर पहुँचने तक मुद्रांकन अक्षुण्ण रहा तो इसका अर्थ था कि थैले के साथ किसी प्रकार की छेड़-छाड़ नहीं की गई थी। (ii) मुद्रांकन से प्रेषक की पहचान का भी पता चलता था।

प्रश्न 17. उन तीन केन्द्रों के नाम लिखिए जहाँ विशिष्ट ड्रिल से जुड़े हुए मनकों को बनाने के लिए इस्तेमाल किये अवशेष प्राप्त हुए हैं ?

उत्तर :  (i)चान्हुदड़ों, (ii) लोथल, (iii) धोलावीरा।

प्रश्न 18. आप कैस कह सकते हैं कि हड़प्पा सभ्यता के लोग सफाई पसंद करते थे ? 

उत्तर: निम्नलिखित बातों से पता चलता है कि हड़प्पा सभ्यता के लोग सफाई पसंद करते थे
(i) लगभग प्रत्येक घर में एक स्नानगृह होता था।
(ii) गर्दै पानी की निकासी की उचित व्यवस्था थी।
(iii) गलियों की नालियाँ ढकी हुई थीं और उनकी नियमित रूप से सफाई होती थी।
(iv) मोहनजोदड़ो के दुर्ग पर मिले विशाल स्नानागार विशेष अवसरों पर सामूहिक स्नान करते थे।

 प्रश्न 19. कार्निलियन का लाल रंग हड़प्पावासियों ने में लोग कैसे प्राप्त किया ? 

उत्तर : हड़प्पावासी कार्निलियन का लाल रंग प्राप्त करने के लिए पीले रंग के कच्चे माल तथा मनकों को उत्पादन के विभिन्न चरणों में आग में पकाते थे।

प्रश्न 20. हड़प्पा सभ्यता के लोगों द्वारा वस्तुओं को तैयार करने के लिए जिन तीन कच्चे मालों को स्थानीय स्रोतों और तीन बाह्य प्राप्त कच्चे मालों के नाम लिखिए। 

उत्तर : (i) चिकनी मिट्टी.(ii) पत्थर.(iii)घटिया लकड़ी। विभिन्न धातुएँ जैसे ताँबा, रांगा और सोना तथा कासा बाहर से मंगाया जाता था। बहुत बढ़िया किस्म की लकड़ी भी मेसोपोटामिया से मँगाई जाती थी।

प्रश्न 21. हड़प्पा के लोगों द्वारा अपनी लिपि में जितने चिह्न प्रयोग में लाए जाते थे उनकी लगभग संख्या लिखिए। 

उत्तर : हड़प्पाई लोगों की लिपि में लगभग 315 और 400 के बीच चिह्नों का प्रयोग किया जाता था ।

प्रश्न 22, जॉन मार्शल कौन था ? भारतीय पुरातत्त्व में उसने व्यापक परिवर्तन किस प्रकार किया ?

उत्तर : जॉन मार्शल भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण के डायरेक्टर जनरल थे। उनमें आकर्षक खोजों में दिलचस्पी और दैनिक जीवन की पद्धतियों को जानने की भी उत्सुकता थी। 1924 में उन्होंने पूरे विश्व के समक्ष सिंधु घाटी में एक नवीन सभ्यता की खोज की घोषणा की। वस्तुतः उन्होंने भारत को जहाँ पाया था, उसे उससे तीन हजार वर्ष पीछे छोड़ दिया।

प्रश्न 23. हड़प्पा सभ्यता की जानकारी में हमें किन-किन साक्ष्यों से सहायता मिलती है ? 

उत्तर : हड़प्पा सभ्यता की जानकारी में हमें केवल भौतिक साक्ष्यों से ही सहायता मिलती है। इनमें निम्नलिखित साक्ष्य शामिल हैं-
(i) नगरों तथा भवनों के अवशेष।
(ii) मृदभांड, औजार, आभूषण तथा घरेलू सामान।
(iii) शवाधान तथा जानवरों की हड्डियाँ।
(iv) मोहरें तथा बाट।

प्रश्न 24. जीव-पुरातत्वविदों द्वारा किए गए अध्ययन हड़प्पा संस्कृति के बारे में क्या उजागर करते हैं?

उत्तर : 1. हड़प्पा स्थलों से प्राप्त जानवरों की हड्डियों में मवेशियों, भेड़, बकरी, भैंस तथा सूअर की हड्डियाँ शामिल हैं। जीव-पुरातत्वविदों द्वारा किए गए अध्ययनों से संकेत मिलता है कि ये सभी जानवर पालतू थे।
2. इसके अलावा, हड़प्पा स्थलों से जंगली प्रजातियों जैसे वराह, हिरण तथा घड़ियाल की हड्डियाँ भी मिली हैं। लेकिन इस बात के निश्चित संकेत नहीं मिलते हैं कि हड़प्पा निवासी खुद इन जानवरों का शिकार करते थे या शिकारी समुदायों से इनका माँस प्राप्त करते थे।

प्रश्न 25. हड़प्पा क्षेत्र से ओमान, दिलमुल तथा मैसोपोटामिया तक किन मार्गों से जाया जाता था? इस संबंध में क्या साक्ष्य हैं?

उत्तरः हड़प्पा क्षेत्र से ओमान, दिलमुन तथा मैसोपोटामिया तक संभवत: जलमार्गों द्वारा जाया जाता था। इस बात का संकेत हड़प्पा मुहरों पर बने जहाजों तथा नावों के चित्रों से मिलता है।

प्रश्न 26. भारतीय पुरातत्त्व विज्ञान के जनक सामान्यतया किसे कहा जाता है ?

उत्तर : अलेक्जेंडर कनिंघम को सामान्यतः भारतीय पुरातत्व विज्ञान का जनक कहा जाता है। 

प्रश्न 27.आरंभिक तथा विकसित हड़प्पा संस्कृतियों में कृषि के कई तत्त्व समान थे।” सोदाहरण व्याख्या कीजिए।

उत्तर : “आरंभिक तथा विकसित हड़प्पा संस्कृतियों में कई तत्त्व समान थे।” इस कथन की व्याख्या निम्नलिखित बिंदुओं के आधार पर की जा सकती है :

(i)विकसित हड़प्पा से पहले भी इस क्षेत्र में अनेक संस्कृतियाँ अस्तित्व में थीं। ये संस्कृतियाँ अपनी विशिष्ट मृद भाण्ड शैली से संबंधित थीं तथा इनके संदर्भ में हमें कृषि पशुपालन तथा कुछ शिल्पकारी के साक्ष्य भी प्राप्त होते हैं। बस्तियाँ आमतौर पर छोटी थीं तथा इनमें बड़े आकार की संरचनाएँ लगभग न के बराबर थीं।
(ii) विकसित हड़प्पा संस्कृति कुछ ऐसे स्थानों पर पनपी जहाँ पहले आरंभिक हड़प्पा संस्कृतियाँ थीं। इन संस्कृतियों में अनेक तत्व जिनमें निर्वाह करने के तरीके सम्मिलित हैं, समान थे। हड़प्पा सभ्यता के निवासी अनेक प्रकार के पेड़-पौधों से प्राप्त उत्पाद और जानवरों जिनमें मछली भी शामिल हैं. से प्राप्त भोजन करते थे। – विकसित हड़प्पा सभ्यता में प्रतिदिन के उपयोग की वस्तुएँ शामिल हैं जिन्हें पत्थर या मिट्टी जैसे सामान्य पदार्थों से आसानी से बनाया जा सकता था। इनमें मृदभाण्ड, चक्कियाँ, सुइयाँ झाँवा आदि शामिल हैं।

प्रश्न 28. हड़प्पन स्थलों की जल-निकास प्रणाली की विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।

उत्तर : (i) हड़प्पा-शहरों की सबसे अनूठी विशिष्टताओं में से एक ध्यानपूर्वक नियोजित जल निकास प्रणाली थी। सड़कों तथा गलियों को लगभग एक ‘ग्रिड’ पद्धति में बनाया गया था और ये एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं।
(ii) ऐसा प्रतीत होता है कि पहले नालियों के साथ गलियों को बनाया गया था और फिर उनके अगल-बगल आवासों का निर्माण किया था।

प्रश्न 29. विशाल स्नानागार, जो हड़प्पा के नगरों के दुर्ग में पाया गया है, उसकी दो विशेषताएँ बताइए।

उत्तर : (i) यह दुर्ग के आंगन में बना हुआ एक आयताकार जलाशय है और चारों तरफ से गलियारे से घिरा हुआ है।
(ii) जलाशय (स्नानगृह) तक पहुंचने के लिए इसके ऊपरी तथा दक्षिणी भाग में दो सीढ़ियाँ बनी हुई थीं।
(iii) विद्वानों का मत है कि इस स्नानघर से यह संकेत मिलता है कि इसका प्रयोग किसी विशेष अनुष्ठान जाता था। के लिए किया

प्रश्न 30, मोहनजोदड़ो के वास्तुकला संबंधी लक्षण किस प्रकार नियोजन की ओर संकेत करते हैं? उपयुक्त उदाहरणों द्वारा पुष्टि कीजिए। 

उत्तर : (i) मेके के अनुसार “निश्चित रूप से यह (जल निकास प्रणाली) अब तक की खोजी गई सर्वथा प्राचीन प्रणाली है।” इसके अंतर्गत हर एक आवास को नालियों से जोड़ा गया था। मुख्य नाले गारे में जमाई गई ईंटों से बने थे और इन्हें ऐसी ईंटों से ईका गया था जिन्हें सफाई के लिए हटाया जा सकता था।
(ii) बहुत लंबे नालों में कुछ अंतरालों के पश्चात् सफाई के लिए हौदियों बनाई गई थीं। इस निकास प्रणाली की तुलना हम आज की जल निकास प्रणाली से कर सकते हैं। यह उत्तम निकास प्रणाली एक नगर योजना का प्रमाण है।
(iii) उल्लेखनीय बात यह है कि यह निकास प्रणाली छोटी बस्तियों जैसे लोथल में प्राप्त हुई है जहाँ पर आवासों के निर्माण के लिए तो कच्ची ईंटों का प्रयोग हुआ था परंतु नालियों का निर्माण पकी ईंटों द्वारा किया गया था।

प्रश्न 31. हड़प्पा के लोगों के बाटों का परिचय दीजिए। 

उत्तर : (i) उनके बाट घनाकार तथा अंडाकार थे।
(ii) ये सामान्यतः चर्ट नामक पत्थर से बनाए जाते थे।
(iii) इन वाटों के निचले मानदंड द्विआधारी (1, 2, 4, 8, 16, 32 इत्यादि 12,800 तक) थे, जबकि ऊपरी मानदंड दशमलव प्रणाली के अनुसार थे।
(iv) छोटे बाटों का प्रयोग संभवतः आभूषणों तथा मनकों को तोलने के लिए किया जाता था।

प्रश्न 32. हड़प्पाई लोगों के बाट का संक्षेप में परिचय दीजिए।

उत्तर : हड़प्पाई लोगों के बाट : विनिमय बाटों की एक सूक्ष्म या परिशुद्ध प्रणाली द्वारा नियंत्रित थे। ये बाट सामान्यत: चर्ट नामक पत्थर से बनाये जाते थे और आम तौर पर ये किसी भी तरह के निशान से रहित घनाकार होते थे। इन बाटों के निचले मानदंड द्विआधारी (1, 2, 4, 8, 16, 32 इत्यादि 12,800 तक) थे जबकि ऊपरी मानदंड दशमलव प्रणाली का अनुसरण करते थे। छोटे बाटों का प्रयोग संभवतः आभूषणों और मनकों को तौलने के लिए किया जाता था। धातु से बने तराजू के पलड़े भी मिले हैं।

प्रश्न 33. हड़प्पा संस्कृति को कांस्य युग सभ्यता क्यों कहते हैं ?

उत्तर : (i) हड़प्पा के लोगों को ताँबे में टिन मिलाकर काँसा बनाने की विधि आती थी। (ii) काँसे की सहायता से ही हडप्पा के लोग उन्नति के शिखर पर पहुँच सके। उन्होंने एक नगरीय सभ्यता का विकास किया। अतः हड़प्पा संस्कृति को कांस्य युग सभ्यता कहते हैं।

प्रश्न 34. हड़प्पा की लिपि की कोई दो विशेषताएँ लिखिए।

 उत्तर :(i) हड़प्पा लिपि वर्णमालीय नहीं थी, बल्कि चित्रमय थी।
(ii) यह संभवत: दाईं ओर से बाईं ओर लिखी जाती थी, क्योंकि कुछ मोहरों पर दाईं ओर चौड़ा अंतराल है, जबकि बाईं ओर यह संकुचित है, जैसे लिखते-लिखते स्थान कम पड़ गया हो।

प्रश्न 35. हड़प्पा सभ्यता में 1900 ई.पू. के बाद आए किन्हीं दो बदलावों का उल्लेख कीजिए। ये परिवर्तन कैसे आ सके ? स्पष्ट कीजिए। 

उत्तर : हड़प्पा सभ्यता में 1900 ई०पू० के बाद आए बदलाव :
 (i) हड़प्पा स्थलों की भौतिक संस्कृति में बदलाव आया था। उदाहरण के लिए, सभ्यता की विशिष्ट पुरावस्तुओं-बाटों, मुहरों तथा विशिष्ट मनकों का समाप्त हो जाना। लेखन, लंबी दूरी का व्यापार तथा शिल्प विशेषज्ञता भी समाप्त हो गई।
(ii) सामान्यतः थोड़ी वस्तुओं के निर्माण के लिए थोड़ा ही माल प्रयोग में लाया जाता था। आवास निर्माण की तकनीकों का ह्रास हुआ और बड़ी सार्वजनिक संरचनाओं का निर्माण अब बंद हो गया। ये पुरावस्तुएँ एवं बस्तियाँ एक ग्रामीण जीवन शैली की ओर संकेत करती हैं और इन संस्कृतियों को “उत्तर हड़प्पा” या “अनुवर्ती” संस्कृतियाँ कहा गया है।

परिवर्तन के कारण : इसके कई कारण हैं। इनमें जलवायु परिवर्तनों, वनों की कटाई, अत्यधिक बाढ़ नदियों का सूख जाना या मार्ग परिवर्तन एवं भूमि का अत्यधिक उपयोग भी सम्मिलित है, लेकिन ये कारण समस्त सभ्यता के पतन की व्याख्या के लिए उपयुक्त नहीं हो सकते हैं।

अथवा

हड़प्पा बस्तियों में प्रयोग में लाई गई ईंटों की कोई दो विशेषताएँ बताओ।

उत्तर : (i) हड़प्पा बस्तियों में प्रयोग में लाई गई में अथवा धूप में सुखाकर पकाई गई थीं। भट्टी
(ii) इन ईंटों की लंबाई इनकी ऊँचाई की चार गुनी तथा चौड़ाई, ऊँचाई की दोगुनी होती थी।

प्रश्न 36. हड़प्पावासियों के रिहाइशी भवनों के लिए गृह-स्थापत्य की दो विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।

उत्तर : (i) हड़प्पावासी ईंट से बने रिहाइशी भवनों में रहते थे।
(ii) ये भवन एक निश्चित योजना को ध्यान में रखकर बनाए जाते थे।
(iii) हर घर में एक स्नानघर होता था। इसका फर्श ईंटों से
(iv) कई मकानों, भवनों में कुएँ भी होते थे। (कोई दो) बना होता था।

प्रश्न 37. हड़प्पा सभ्यता के निर्वाह के तरीकों का वर्णन कीजिए।

उत्तर- हड़प्पा सभ्यता के लोगों के निर्वाह के मुख्य तरीके निम्नलिखित थे-

(i) लोग कई प्रकार के पेड़-पौधों तथा जानवरों से भोजन प्राप्त करते थे। मछली उनका मुख्य आहार था।
(ii) उनके अनाजों में गेहूँ, जौ, दाल, सफेद चना तथा तिल शामिल थे। इन अनाजों के दाने कई हड़प्पा स्थलों से मिले हैं ।
(iii) लोग बाजरा तथा चावल भी खाते थे। बाजरे के दाने गुजरात के स्थानों से मिले हैं। चावल का प्रयोग संभवत: कम किया जाता था क्योंकि चावल के दाने अपेक्षाकृत कम मिले हैं।
(iv) जले अनाज के दानों तथा बीजों की खोज से पुरातत्वविदों द्वारा आहार संबंधी आदतों के बारे में जानकारी हासिल की गई है। 

प्रश्न 38. अन्य सभ्यताओं की अपेक्षा सिन्धु घाटी की सभ्यता के विषय में हमारी जानकारी कम क्यों है ?

उत्तर : (i) उस काल की लिपि आज तक पढ़ी नहीं जा सकी है।
(ii) केवल पुरातात्त्विक अवशेषों का अध्ययन करते हुए अनुमान के आधार पर ही सिन्धु घाटी सभ्यता के विषय में (सभ्यता का समय व विकास आदि का) ज्ञान प्राप्त कर पाए हैं जबकि अन्य सभ्यताओं के संबंध में जानकारी का मुख्य आधार उनकी लिपि का पढ़ा जाना है।

प्रश्न 39. “शवाधान हड़प्पा सभ्यता में व्याप्त सामाजिक विषमताओं को समझने का एक बेहतर स्रोत है ।” व्याख्या करें।

उत्तर : (i) शवाधान का अध्ययन सामाजिक विषमताओं को परखने की एक विधि है। मिस्र के पिरामिडों का अध्ययन जिस प्रकार उस सभ्यता के सामाजिक जीवन पर प्रकाश डालता है उसी प्रकार हड़प्पा सभ्यता में भी शवाधान एक विशेष महत्त्व रखते हैं।
(ii) हड़प्पा स्थलों से मिले शवाधानों में आमतौर पर मृतकों को गों में दफनाया जाता था। इन गर्तों की बनावट एक दूसरे से भिन्न होती थी। कुछ गीतों की सतह पर ईंटों की चिनाई के अवशेष भी मिले हैं।
(iii) कुछ कब्रों में कंकाल के पास मृदभांड तथा आभूषण मिले हैं जो इस ओर संकेत करते हैं कि इन वस्तुओं का प्रयोग मृत्युपरांत किया जा सकता है। पुरुष एवं स्त्री दोनों के शवाधानों से आभूषण मिले हैं। हाल के उत्खनन में एक शवाधान से पुरुष खोपड़ी के साथ शंख के तीन छल्ले, मनके, जैस्पर के मनके इत्यादि प्राप्त हुए हैं। कुछ शवों को ताँबे के दर्पण के साथ दफनाया गया है।
निष्कर्षत: यह कहा जा सकता है कि शवों के साथ बहुमूल्य वस्तुओं को दफनाने का प्रचलन नहीं था। मृतक के सामाजिक स्तर पर पता शवाधानों की बनावट एवं पाए गए अवशेषों से लग जाता है।

प्रश्न 40. हड़प्पा सभ्यता में मनकों के निर्माण में प्रयुक्त पदार्थों या सामग्रियों के नाम लिखिए|

उत्तर : मनके बनाने में प्रयुक्त पदार्थ निम्नलिखित थे-
(i) कानीलियन, (ii) जैस्पर, (iii) स्फटिक, (iv) कपाट्रेप, (v) सेनखड़ी जैसे पत्थर, (vi) ताँबा, (vii) काँसा, (viii) सोना, (ix) शंख, (x) पक्की मिट्टी। 

प्रश्न 41. हड़प्यावासियों द्वारा कृषि की उपज बढ़ाने के लिए अपनाए गए किन्हीं दो तरीकों का उल्लेख कीजिए।

 उत्तर : (i) दो फसलें उगाना : कालीबंगन में खेत में हल की रेखाएँ समकोण पर एक-दूसरे को काटती हैं। इससे यह अनुमान लगाया जाता है कि एक साथ दो अलग फसलें उगाई जाती थी।
(ii) सिंचाई : अफगानिस्तान के शुगर में नहरों के अवशेष प्राप्त हुए हैं परंतु पंजाब और सिंध में कोई प्रमाण प्राप्त नहीं हुआ गुजरात (धौलावीरा) में जलाशय होने से अनुमान है कि इनका प्रयोग सिंचाई के लिए किया जाता होगा अतः यह अनुमान लगाया जाता है कि अर्ध शुष्क क्षेत्रों के कारण सिंचाई नहरों, कुओं और जलाशयों से की जाती होगी।

प्रश्न 42, हड़प्पा-पूर्व की बस्तियों की क्या विशेषताएँ थीं ?

 उत्तर : (i) हड़प्पा-पूर्व की बस्तियाँ प्राय: छोटी होती थी और इनमें बड़ी संरचनाएँ नाममात्र ही थीं ।
(ii) इनकी अपनी विशिष्ट मृदभांड शैली थी।
(iii) इनमें कृषि तथा पशुपालन भी प्रचलित था। लोग शिल्पकारी भी करते थे।

प्रश्न 43. हड़प्पाई संस्कृति के पाँच विकसित क्षेत्रों के नाम लिखिए। 

उत्तर : 1, हड़प्पा, 2, मोहनजोदड़ो, 3. लोथल, 4.कालीबंगा, 5. चन्हूदड़ो, 6. बनवाली, 7. रोपड़। प्रश्न 44, हड़प्पा बस्तियों के विभाजित दो भागों के नाम व उनकी एक-एक मुख्य विशेषता का उल्लेख कीजिए।

प्रश्न 44. हड़प्पा बस्तियों के विभाजित दो भागों के नाम व उनकी एक-एक मुख्य विशेषता का उल्लेख कीजिए।

उत्तर : 1. हड़प्पा बस्तियों के नाम : हड़प्पा बस्तियों के दो भाग थे : एक छोटा लेकिन ऊँचा बनाया गया तथा दूसरा अधिक बड़ा लेकिन नीचा बनाया गया। पुरातत्वविदों ने उन्हें क्रमश: दुर्ग और निचला शहर का नाम दिया है।
II. मुख्य विशेषताएं:
(i) छोटी लेकिन ऊँचाई पर बनी बस्ती या दुर्ग की ऊँचाई का कारण यह था कि यहाँ की संरचनाएँ कच्ची ईंटों के चबूतरे पर बनी हुई थीं। इस बस्ती को दीवार से घेरा गया था ताकि निचले शहर से इसे अलग किया जा सके।
(ii) निचला शहर या दूसरी बस्ती को भी दीवार से घेरा गया था। इनके अलावा अनेक भवनों को ऊँचे चबूतरे पर बनाया गया था जो नींव का कार्य करते थे।

प्रश्न 45. हड़प्पा के नगरों की दो विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।

उत्तर :(i) हड़प्पा संस्कृति के नगर एक विशेष योजना के अनुसार बनाए गए थे। जल निकासी की व्यवस्था बहुत शानदार थी। नालियाँ भी सरलता से साफ हो सकती थीं।
(ii) किसी भी भवन को अपनी सीमा से आगे कभी नहीं बढ़ने दिया जाता था और न ही बर्तन पकाने वाली किसी भी भक को नगर के अंदर बनाने दिया जाता था अर्थात् अनधिकृत निर्माण नहीं किया जाता था।

प्रश्न 46. मोहनजोदड़ो के आवासीय भवनों की विशिष्ट विशेषताओं को स्पष्ट कीजिए। 

 उत्तर : (i) मोहनजोदड़ो की बस्तियाँ दो भागों में विभाजित थीं। एक भाग छोटा लेकिन ऊँचाई पर बनाया गया था। दूसरा कहीं अधिक बड़ा लेकिन नीचे बनाया गया था। पुरातत्वविदों ने इन बस्तियों को क्रमश: दुर्ग और निचला शहर का नाम दिया है।
(ii) मोहनजोदड़ो का निचला शहर आवासीय भवनों के उदाहरण प्रस्तुत करता है। इनमें से कई एक आँगन पर केंद्रित थे जिसके चारों ओर कमरे बने थे। संभवत: आँगन खाना पकाने और कताई करने जैसी गतिविधियों का केंद्र था, खास तौर से गर्म और शुष्क मौसम में।

प्रश्न 47. हड़प्पा निवासियों की कब्रों में मिली किन्हीं चार वस्तुओं का उल्लेख कीजिए।

 उत्तर : पुरुषों और महिलाओं, दोनों के आभूषण, मृदभांड, शंख के तीन छल्ले, जैस्पर (एक प्रकार का उपरत्न) के मनके तथा सैकड़ों की संख्या में सूक्ष्म मनकों से बना एक आभूषण । 

प्रश्न 48. कार्नीलियन का लाल रंग हड़प्पावासियों ने कैसे प्राप्त किया ? 

उत्तर : पुरातत्वविदों द्वारा किए गए प्रयोगों ने दर्शाया है कि | कानीलियन का लाल रंग, पीले रंग के कच्चे माल तथा उत्पादन के विभिन्न चरणों में मनकों को आग में पका कर प्राप्त किया जाता था। पत्थर के पिंडों को पहले अपरिष्कृत आकारों में तोदा जाता था और फिर बारीकी से शल्क निकालकर इन्हें अंतिम रूप । दिया जाता था। घिसाई, पॉलिश और इनमें छेद करने के साथ ही यह प्रक्रिया पूरी होती थी। 

प्रश्न 49. आर.ई.एम. व्हीलर कौन था ? भारतीय पुरातत्त्व में उसके किसी एक योगदान का उल्लेख कीजिए। 

उत्तर : आर. ई. एम. व्हीलर एक पुरातत्वविद थे। 1944 ई० में इन्हें भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण के डायेरक्टर जनरल बनाया गया था। इनका मानना था कि एक समान क्षैतिज इकाइयों के आधार पर खुदाई की बजाय टीले के स्तर विन्यास का अनुसरण करना अधिक आवश्यक था।

प्रश्न 50. हड़प्पावासियों ने किस सीमा तक उपमहाद्वीप तथा उसके आगे व्यापारिक संबंध स्थापित किए थे ? स्पष्ट कीजिए। 

उत्तर :(i) पुरातात्विक खोजों से पता चलता है कि ताँबा संभवत: अरब प्रायद्वीप के दक्षिण-पश्चिम किनारे पर स्थित ओमान से लाया जाता था। ओमानी ताँबे और हड़प्पाई पुरावस्तुओं दोनों में निकल के अंश मिले हैं।
(ii) इसके अतिरिक्त एक बड़ा हडप्पाई मर्तबान, जिसके ऊपर काली मिट्टी की एक परत चढ़ाई गई थी, ओमानी स्थलों से मिला है। यह अनुमान है कि हड्प्पा सभ्यता के लोग इनमें रखे सामान का ओमानी ताँबे से विनिमय करते थे।
(iii) यह अनुमान है कि ओमान, बहरीन या मेसोपोटामिया से संपर्क सामुद्रिक मार्ग से रहा होगा क्योंकि मेसोपोटामिया के लेख मेलुहा (हड़प्पाई क्षेत्र) को नाविकों का देश कहते हैं। इनमें मेलुहा से प्राप्त उत्पादों-कार्नीलियन, लाजवर्द मणि, ताँबा, सोना तथा विविध प्रकार की लकड़ियों का उल्लेख है। इसके अलावा मुहरों पर जहाजों तथा नावों के चित्र प्राप्त हुए हैं।


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