Chapter 6 History Class 11 तीन वर्ग

लघु उत्तरात्मक प्रश्न

प्रश्न 1. यूरोपीय समाज किन-किन सामाजिक वर्गों में बँटा हुआ था? मध्य काल के अंत में कौन-सा नया वर्ग इन समाजों में उदय हुआ ?
उत्तर : (i) सामन्तवादी वर्ग (Feudal Classes) : यूरोप में सामन्तवादी व्यवस्था मध्यकाल में आरम्भ हुई। इस व्यवस्था में राजा सबसे ऊपर होता था। वह लार्डस लोगों में भूमि बाँट देता था। लार्डस लोगों आगे अपने से निचले स्तर के अधिकारियों को जिन्हें बैरन कहा जाता था. भूमि दे देते थे एक और अर्ल भी राजा के अधिकारी होते थे युद्ध के समय इन लोगों से सनिक सहायता मांग सकता था। सामन्त लोगों सैनिक रखते थे। वे कर लगाते थे। शीघ्र ही सामन्तवादी व्यवस्था वशानुगत बन गई। सामन्त का सबसे बड़ा पुत्र, उसकी मृत्यु के बाद, उसका उत्तराधिकारी होता था।
(ii) किसान (The Peasants): किसान सबसे निचले वर्ग के लोग होते थे। समाज में उनकी संख्या सबसे अधिक थो। किसान भी कई वर्गों में बँटे हुए थे-स्वतन्त्र किसान, कृषि दास और सर्फ।
(iii) नया वर्ग (Ne Class) : मध्यकाल के अंत में एक नए वर्ग का उदय हुआ। इसे मध्यम वर्ग (Middle Class) कहा गया।
(iv) मध्यम वर्ग के उदय के कारण (Reasons for Development of Middle Class) : नए आविष्कारों के कारण उद्योगों और व्यापार में वृद्धि हुई। इस तरह से नगरों में मध्यम वर्ग का जन्म हुआ। ये लोग शांति चाहते थे जिससे कि व्यापार और उद्योगों में उन्नति हो सके।

प्रश्न 2. सामंतवाद क्या था? इसकी आर्थिक विशेषताएँ बताओ।
उत्तर : ‘सामंतवाद’ शब्द जर्मन शब्द ‘फ्यूड’ से बना है जिसका अर्थ भूमि का एक टुकड़ा है। इस प्रकार सामंतवाट भूमि से जुड़ी एक प्रणाली थी। यह एक ऐसे समाज की ओर संकेत करता है जो मध्य फ्रांस और बाद में इंग्लैंड तथा दक्षिण इटली में विकसित हुआ।
आर्थिक दृष्टि से सामंतवाद एक प्रकार के कृषि उत्पादन को व्यक्त करता है जो सामंत (लार्ड) और कृषकों के संबंधों पर आधारित था। कृषक अपने खेतों के साथ-साथ लार्ड के खेतों पर काम करते थे। लार्ड कृषकों को उनकी श्रम-सेवा के बदले में सैनिक सुरक्षा देते थे। लार्ड के कृषकों पर व्यापक न्यायिक अधिकार भी थे। इसलिए सामंतवाद ने जीवन के न केवल आर्थिक बल्कि सामाजिक और राजनीतिक पहलुओं पर भी प्रभाव डाला।

प्रश्न 3. मठों में भिक्षुओं का किन मुख्य नियमों का पालन करना पड़ता था?
उत्तर : मठों में भिक्षुओं द्वारा पालन किये जाने वाले मुख्य नियम :
(i) बेनिडेक्टाइन मठों के अनुसार भिक्षुओं को बोलने की सामाजि आज्ञा कभी-कभी ही दी जानी चाहिए।
(ii) उन्हें विनम्रता अपनानी चाहिए अर्थात् आज्ञा का पालन करना चाहिए।
(iii) किसी भी भिक्षु को निजी संपत्ति नहीं रखनी चाहिए। (iv) आलस्य आत्मा का शत्रु है। इसलिए भिक्षु और भिलुणियों को निश्चित समय में शारीरिक श्रम और निश्चित अवधि में पवित्र पाठ करना चाहिए।
(iv) मठ इस प्रकार बनाना चाहिए कि आवश्यकता की समस्त वस्तुएँ-जल, चक्की, उद्यान, कार्यशाला सभी उसकी सीमा के अन्दर हो।

प्रश्न 4. नौवीं और सोलहवीं सदी के मध्य को यूरोप में अंधकार युग क्यों कहा जाता है ?
उत्तर : अंधकार युग के समझे जाने के निम्नलिखित कारण थे :
(i) अज्ञानता (Ignorance) : उस काल में बहुत कम लोग शिक्षित थे। केवल धार्मिक शिक्षा ही दी जाती थी। इस तरह की शिक्षा से तो केवल पुरोहित हो बनाए जा सकते थे। (ii) तर्क की कमी (Lack of Reason) : लोगों में तर्क करने की अनुमति नहीं थी। तर्क करना एक अपराध माना जाता था और इसके लिए सजा दी जाती थी।
(iii) निरंकुश शासक (Autocratic Rulers) : शासक लोग निरंकुश थे। राजा और उसके सरदार अपने स्वार्थ की पूर्ति मात्र करना जानते थे। उन्हें जनता के हितों की ओर तनिक भी ध्यान न था। उनके अधिकारों की सीमा न थी।
(iv) राष्ट्रीयता का अभाव (Lack of Nationality) : राष्ट्रीयता का पूर्णत: अभाव था। लोग सदैव आपस में कटने-मारने को तैयार रहते थे। साँझ हितों की ओर किसी का ध्यान न था।
(v) वैज्ञानिक भावना की कमी (Lack of Scientific Spirit) : लोगों में वैज्ञानिक उत्साह न था। इसीलिए उनके मन में जिज्ञासा न थी। वे किसी भी प्रश्न का उत्तर जानने के लिए आतुर नहीं होते थे।
(vi) अंधविश्वास (Superstitions) : लोग अंधविश्वासी थे। उन्हें जादू-टोने द्वारा इलाज में विश्वास था। उपरोक्त तथ्यों से स्पष्ट होता है कि यूरोप उस काल में अंधकार युग में था।

प्रश्न 5. यूरोप में अभिजात वर्ग की स्थिति का मूल्यांकन कीजिए।
उत्तर : यूरोप में अभिजात वर्ग की स्थिति : |
(i) यूरोप में अभिजात वर्ग राजा के अधीन होता था जिसका सामाजिक प्रक्रिया में महत्त्वपूर्ण स्थान होता था। वस्तुत: भूमि पर उनका अधिकार होता था।
(ii) अभिजात वर्ग जागीरदार होता था और दास की रक्षा करता था और बदले में वह उसके प्रति निष्ठावान रहता था।
(iii) अभिजात वर्ग की एक विशेष हैसियत होती थी। उसके पास सम्पूर्ण वैधानिक अधिकार होते थे।
(iv) वह अपनी सैन्य क्षमता बढ़ा सकता था और युद्ध में उनका नेतृत्व कर सकते थे।
(v) उसका स्वयं का न्यायालय होता था और अपनी मुद्रा भी प्रचलित कर सकते थे।

प्रश्न 6. मध्यकालीन यूरोप में सामंतवाद के विभिन्न वर्गों में जो संबंध था, उसका वर्णन कीजिए।
उत्तर : सामंतवाद में विभिन्न वर्ग थे ड्यूक अथवा अल, बैरन तथा नाइट। इन सामंतों के अतिरिक्त किसानों की श्रेणी भी थी। किसानों के दो वर्ग थे-पहले वर्ग में स्वतंत्र किसान आते थे और दूसरे वर्ग में कृषक दासों की गणना होती थी। प्रत्येक सामंत अपने से उच्च सामंत को अपना अधिपति मानता था और वह अपने अधीन सामंतों का अधिपति समझा जाता था कोई भी सामंत भूमि का स्वामी नहीं था वह अपने अधिपति को ओर से उस भूमि का प्रबंध करता था। युद्ध के समय में राजा ड्यूकों तथा अर्ल से, अर्ल बैरनों से और बैरन नाइटों से सैनिक सहायता लेते थे। राजा भी सीधा बैरन या नाइट से संपर्क स्थापित नहीं कर सकता था। स्वतंत्र किसान केवल कर देते थे, परन्तु दास किसानों से बेगार ली जाती थी।

प्रश्न 7. बहुधा कहा जाता है कि मध्यकालीन यूरोप में चर्च ने ज्ञानदीप को प्रज्ज्वलित रखा और कभी-कभी यह भी कहा जाता है कि चर्च ने विद्या की उन्नति में रोड़े अटकाए। दोनों कथनों की पुष्टि के लिए प्रमाण दें।
उत्तर : (i) शिक्षा के प्रति चर्च का योगदान (Church’s contribution to learning) : मध्यकाल में चर्च में शिक्षा को जीवन दान दिया। चर्च लोगों को शिक्षा देता था। चाहे चर्चा में जो भी शिक्षा लोगों को दी, वह समुद्र में एक बूंद मात्र ही थी।
(ii) शिक्षा के मार्ग में रोड़े अटकाना (Preventive attvances in learning) : चर्च जो शिक्षा देता था, वह बहुत संकुचित विचारों से जुड़ी हुई थी। जो विषय चर्च पढ़ाता था. वे थे-व्याकरण, तर्क शास्त्र. गणित और धर्म शास्त्र। ऐसी शिक्षा उनके लिए उपयुक्त थी, जो पादरी बनना चाहते थे पढ़ाई गई भाषा का आधार लैटिन था जो कि साधारण व्यक्ति नहीं पढ़ सकता था। हर वस्तु पर धार्मिक आवरण चढ़ा हुआ था। जो व्यक्ति बहस करने की चेष्टा करता था, उसे दण्डित किया जाता था। लोग अंधविश्वासी थे।

प्रश्न 8. सामंतवाद के राजनीतिक और आर्थिक महत्त्व का वर्णन कीजिए।
उत्तर : मध्यकालीन यूरोप में सामंतवाद के कारण समाज में राजनीतिक और आर्थिक स्तर पर बहुत परिवर्तन हुए। राजनीतिक रूप में सामंतवाद के कारण एक नवीन शासन पद्धति का विकास हुआ। केन्द्रीय सत्ता का अभाव हो गया और वास्तविक शक्ति का प्रयोग सामती लार्ड करने लगे। इस व्यवस्था में कानून तथा न्याय का कोई आदर नहीं था। आर्थिक रूप से लोगों का जीवन बड़ा पिछड़ गया। इस युग में दास कृषकों का शोषण किया जाता था नगरों के अभाव के कारण इस युग में व्यापार ठप्प हो गया। वास्तव में सामंती ढाँचे में आर्थिक जीवन मुख्यत: ग्रामीण था। काम किसान करते थे और उनके उत्पादन का एक बहुत बड़ा भाग सामंतों के हाथों में चला जाता था।

प्रश्न 9. 11वीं शताब्दी में सामन्तवाद के आधारों के कमजोर पड़ने के क्या कारण थे?
उत्तर : 11वीं शताब्दी में सामन्तवाद के आधारों के कमजोर पड़ने के कारण :
(i) 11वीं शताब्दी में सामन्तवाद का मुख्य आधार व्यक्तिगत सम्बन्ध कमजोर पड़ने में था क्योंकि आर्थिक लेन-देन अधिक से अधिक मुद्रा पर आधारित होने लगा।
(ii) लार्डों का लगान, उनकी सेवाओं के बजाय नकदी में लेना अधिक सुविधाजनक लगने लगा।
(iii) कृषकों ने अपनी फसल व्यापारियों को मुद्रा में बेचना शुरू कर दिया जो पुनः वस्तुओं को शहर में बेच देते थे।
(iv) धन का बढ़ता हुआ उपयोग कीमतों को प्रभावित करने लगा जो खराब फसल के समय बहुत अधिक हो जाती थी।

प्रश्न 10. आजकल किसी भी देश के समाज के जीवन क्रम को सामन्तवादी कहना क्यों बुरा समझा जाता है?
उत्तर : मानव जाति के नाम पर सामन्तवाद एक धब्बा है। उन दिनों में सभी को बराबर अधिकार समाज में नहीं दिए जाते थे। किसानों की दशा बहुत बुरी थी। किसानों को ही तीन वर्गों में बाँटा जाता था। जैसे स्वतन्त्र व्यक्ति, दास और कृषि दास। आज का युग प्रगतिशील है। मालिक और मजदूर के सम्बन्ध समान स्तर पर आधारित हैं। ऐसी दशा में किसी भी समाज को सामन्तवादी कहना, उसे लांछित करना है। कानूनी तौर पर सामन्तवाद आजकल उपयुक्त नहीं है। किसी को उसकी सम्पत्ति से वेदखल करना आज अपराध माना जाता है। इसीलिए किसी भी समाज या लोगों को सामन्तवादी कहना उचित नहीं है।

प्रश्न 11. यूरोप में मध्यकाल के अन्तिम वर्षों में किस नए सामाजिक वर्ग का विकास हुआ और क्यों?
उत्तर : मध्यकाल के अन्तिम वर्षों में व्यापार ने बहुत उन्नति की। इसका एक महत्त्वपूर्ण परिणाम यह निकला कि इस युग में नए वर्ग का जन्म हुआ जिसे व्यापारी वर्ग के नाम से जाना जाता है। इस नए वर्ग के विकास के निम्नलिखित कारण थे (i) धर्म-युद्धों के कारण यूरोप में भोग-विलास की वस्तुओं की मांग बढ़ गई। इसके कारण बहुत-से लोग इन वस्तुओं का व्यापार करने लगे। इस प्रकार व्यापारी वर्ग का काफी विकास हुआ।
(i) कृषि के विकास के कारण किसान कृषिगत वस्तुओं का गैर-कृषिगत वस्तुओं के साथ विनिमय करने लगे। इससे भी व्यापारी वर्ग के विकास को काफी प्रोत्साहन मिला।

प्रश्न 12. लगभग किस समय मध्यकाल की समाप्ति पश्चिम और पूर्व में हुई? मानव की प्रगति में परिवर्तन के विषय में तुम्हारा जो ज्ञान है, उसे ध्यान में रखकर बतलाओ कि यह कहना क्यों कठिन है कि इतिहास का कोई एक काल ठीक समय समाप्त हुआ और दूसरा कोई काल कब आरम्भ हुआ ?
उत्तर : (i) पश्चिम में मध्यकाल का अंत (End of the Medieval Period in the West) : जब नई शिक्षा ने अंधविश्वासों तथा अज्ञान पर मध्य युग में विजय पाई जो पश्चिम में मध्य काल का अंत हो गया।
(ii) पूर्व में मध्यकाल का अंत (End of the Medieval Period in the East) : पूर्व में मध्यकाल का अंत अठारहवीं शताब्दी में हुआ।
(iii) काल विभाजन (Division of Periods) : यह पूरी तरह से कहना कठिन है कि इतिहास में कब एक काल का अंत होता है और दूसरे काल का प्रारम्भ ? विश्व के सभी देशों में मध्यकाल एक साथ आरम्भ नहीं हुआ था। यूरोप और पश्चिमी देशों में मध्यकाल का प्रारम्भ 500 से 1500 ई. तक माना जाता है परन्तु यह तथ्य विश्व के अन्य देशों पर लागू नहीं होता है। पूर्व में मध्यकाल एक लम्बे काल तक चला क्योंकि किसी एक देश में होने वाला विकास अन्य देशों में भी उसी काल में नहीं लागू होता है। एक देश का विकास जल्दी हो गया, जबकि दूसरे देश का विकास देर से हुआ। इस तरह से इतिहास में काल विभाजन सरल नहीं है।

प्रश्न 13. यूरोप में समाज का चौथा वर्ग किस प्रकार अस्तित्व में आया?
उत्तर : ‘नगर की हवा स्वतंत्र बनाती है’ एक लोकप्रिय कहावत थी। अतः स्वतंत्र होने की इच्छा रखने वाले कृषि दास भाग कर नगरों में छिप जाते थे। यदि कोई कृषि दास अपने लॉर्ड की नज़रों से एक वर्ष तथा एक दिन तक छिपे रहने में सफल रहता था तो वह एक स्वतंत्र नागरिक बन जाता था। नगरों में रहने वाले अधिकतर व्यक्ति या तो स्वतंत्र कृषक थे या भगौड़े कृषक। कार्य की दृष्टि से वे अकुशल श्रमिक होते थे। नगरों में अनेक दुकानदार और व्यापारी भी रहते थे। आगे चलकर विशिष्ट कौशल वाले व्यक्तियों जैसे साहूकार तथा वकील आदि की आवश्यकता अनुभव हुई। बड़े नगरों की जनसंख्या लगभग तीस हजार होती थी। नगरों में रहने वाले इन्हीं लोगों ने समाज का चौथा वर्ग बनाया।

प्रश्न 14. मध्य युग में अनेक समाजों ने शेष दुनिया से अपने को अलग क्यों रखा? इसका तुम्हारे मत से उन समाजों श पर क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर : मध्यकाल के लोगों ने निरंकुश शासकों के अधीन रहकर कष्ट उठाए क्योंकि चारों ओर अज्ञानता, तर्क न करने की शक्ति राष्ट्रीयता और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का अभाव था। इससे लोग अपने आपको असुरक्षित अनुभव करने लगे थे। वे केवल अपने स्वार्थ से बँधकर रह गए। उन्हें दूसरे के हितों का जरा भी ध्यान न था, लेकिन ऐसी प्रवृत्ति अधिक दिनों तक न रह सकी शीघ्र ही लोगों को आर्थिक और सामाजिक संकट अनुभव हो लगा। अतः बड़े-बड़े शहरों में विभिन्न आर्थिक गतिविधियों आरम्भ हो गई जिनमें सुनार, लुहार, नाई, मोची तथा बढ़ई का काम होने लगा। उन्होंने अपने छोटे-छोटे समूह बनाए, जो उनके हितों की रक्षा करते थे। व्यापारी संघ और ‘हस्तकला संघ’ ने अपने सदस्यों के आर्थिक, सामाजिक तथा अन्य हितों की रक्षा के लिए कदम उठाए।
जिसके परिणामस्वरूप यातायात और संचार के साधनों की वृद्धि के साथ ही इस तरह के समाज की भूमिका सराहनीय होने लगी, विशेषकर आर्थिक वर्ग में।

प्रश्न 15. यूरोप में मध्ययुगीन मठों के दो-दो गुण तथा दोषों की सूची बनाओ।
उत्तर : मध्ययुगीन मठ प्रणाली यूरोप के लिए वरदान भी थी और अभिशाप भी। इसके दो गुणों और दो दोषों का वर्णन इस प्रकार है

गुण : (i) इन मठों ने शिक्षा केंद्रों के रूप में कार्य किया. इस प्रकार यूरोप में ज्ञान का प्रसार हुआ।
(ii) मध्यकालीन चर्च के प्रतिनिधि के रूप में कार्य करते हुए प्रशिक्षित भिक्षुओं ने संन्यासी जीवन की पवित्रता, नैतिकता, तप त्याग, अनुशासन के आदेशों को प्रोत्साहन दिया।
दोष : (i) इन मठों ने विस्तृत भूमि और अत्यधिक धन अपने पास एकत्रित कर लिया।
(ii) भिक्षु एवं भिक्षुणियों के साथ-साथ रहने के कारण भ्रष्टाचार फैल गया। वे तप और त्याग के जीवन को छोड़ कर भ्रष्ट एवं विलासितापूर्ण जीवन व्यतीत करने लगे।

प्रश्न 16. रोमन कैथोलिक चर्च पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर : मध्यकाल में रोमन कैथोलिक चर्च पश्चिमी देशों में उतना ही शक्तिशाली था, जितना कि सामन्तवाद, चर्च में सबसे ऊँचा स्थान पोप का था, उसे पृथ्वी पर ईसा मसीह का प्रतिनिधि माना जाता था। बाद में सम्राट ने ईसाई धर्म स्वीकार कर लिया। कई बर्बर सामन्तों ने भी इस धर्म को ग्रहण कर लिया। तब पोप पश्चिमी यूरोप की जनता का धार्मिक नेता बन गया। ईसा की छठी शताब्दी में पोप उसी प्रकार चर्च का अध्यक्ष माना जाने लगा जैसे कि राजा अपने-अपने क्षेत्र में माने जाते थे। राजाओं की अपेक्षा पोप अधिक शक्तिशाली होते थे। वे राजाओं को अपने आदेश मानने के लिए बाध्य कर देते थे।

प्रश्न 17. मध्यकालीन यूरोप की प्रमुख विशेषताएँ क्या थीं? ये किस अंश तक सभ्यता की उन्नति में बाधक हुई ?
अथवा
मध्य युग में यूरोप की राजनैतिक दशा का विवेचन कीजिए।
उत्तर : मध्य युग में यूरोप की राजनैतिक दशा अच्छी न थी। इस युग में वहाँ पर कई बड़े-बड़े साम्राज्यों का पतन हुआ था जिसके फलस्वरूप छोटे-छोटे राज्य पनपने लगे। सामन्तवाद की जड़ें मजबूत हो गई थीं। प्रतिदिन युद्ध होते रहते थे। युद्ध कभी एक सामन्त के दूसरे सामन्त से, कभी सामन्तों के राजाओं से तो कभी एक राजा का दूसरे राजा से होते रहते थे। चारों ओर अशांति और अव्यवस्था फैली हुई थी। अत: मध्ययुग में यूरोप की राजनैतिक अवस्था बड़ी खराब थी। मध्यकालीन यूरोप में सारा समाज दो वर्गों में बंटा हुआ था: (i) सामन्त वर्ग, (ii) किसान वर्ग। किसानों की दशा अच्छी नहीं थी। मध्यकाल में यूरोप के देशों में धार्मिक सहनशीलता नहीं थी। ईसाइयों का बोलबाला था। गैर ईसाइयों विशेषकर यहूदियों व मुसलमानों को बहुत तरह के कष्ट भोगने पड़ते थे।मध्यकालीन यूरोप की ऊपर लिखित विशेषताएँ, वहाँ की सभ्यता की उन्नति में बाधक सिद्ध हुईं, क्योंकि अशांति और अव्यवस्था के काल में कोई भी सभ्यता उन्नति नहीं कर सकती।

प्रश्न 18. राष्ट्र-राज्यों के विकास में किन तत्वों ने सहायता पहुँचाई? इन राज्यों में विकसित राजनीतिक व्यवस्था का वर्णन करो।

उत्तर : राष्ट्र-राज्यों के विकास में निम्नलिखित तथ्यों ने सहायता पहुँचाई :
(i) सामंतवाद का पतन : सामंतवाद के पतन के कारण सामंतों की शक्ति कमजोर हो गई। इसके कारण शक्तिशाली शासकों ने पूर्ण सत्ता अपने हाथ में ले ली।
(ii) मध्यम वर्ग का शक्तिशाली होना : वाणिज्य और व्यापार की उन्नति के कारण मध्यम वर्ग की शक्ति बढ़ गई। मध्यम वर्ग ने राष्ट्र-राज्यों के उदय तथा विकास में महत्त्वपूर्ण भाग लिया।
(iii) राष्ट्रीय भाषाएं और साहित्य : राष्ट्रीय भाषाओं और उनमें लिखे गए साहित्य ने भी राष्ट्र राज्यों के विकास में बहुत सहायता की।नए राष्ट्र राज्यों का शासन शक्तिशाली निरंकुश राजाओं के हाथ में था। इन शासकों ने अपीलों के लिए न्यायालय स्थापित किए। देश में ऐसी राजनीतिक व्यवस्था की जिससे अराजकता का अंत हो गया। इसके अतिरिक्त कृषि दासता की प्रथा को सदा के लिए समाप्त कर दिया गया।

प्रश्न 19, सामन्तवाद क्या है? इसके राजनैतिक और आर्थिक महत्त्व का वर्णन कीजिए।
उत्तर : (i) सामन्तवाद का अर्थ (Meaning of Feudalism); सामन्त प्रणाली के अनुसार देश की भूमि और प्रशासन सीधे राजा के हाथों में न होकर बड़े-बड़े जागीरदारों के हाथों में होता था, जिन्हें सामन्त कहा जाता था। भूमि पर खेती तो किसान करते थे, लेकिन उन्हें उत्पादन का एक निश्चित भाग कर के रूप में सामन्तों को देना पड़ता था। सामन्तों की कई श्रेणियाँ थीं-जैसे ड्यूक या अर्ल (Duke or Earl), बैरन और नाइट्स (Baron and Knights)
(ii) राजनीतिक महत्त्व (Political Importance) : सामन्त लोग अपने-अपने क्षेत्र में शांति स्थापित रखते थे तथा लोगों की बाहरी आक्रमणों से रक्षा करते थे। इसके अतिरिक्त वे राजा को युद्ध के समय सैनिकों और हथियारों आदि से सहायता करते थे। सामन्तवादी व्यवस्था द्वारा मध्यकालीन युग में शांति और स्थापित हो सकी। सुव्यवस्था
(iii) आर्थिक प्रभाव (Economic Effect ) : सामन्ती जीवन कृषि पर आधारित था। गाँव की कृषि योग्य भूमि मेनर कहलाती थी मेनर प्रणाली के द्वारा ही आर्थिक व्यवस्था स्थापित की गई है। इस प्रणाली में मेनर में काम करने वाले व्यक्तियों का निर्वाह अच्छी प्रकार से होता था।

प्रश्न 20. यूरोप में सामन्ती समाज में किसान किन वर्गों में विभाजित थे ? उन वर्गों के सामन्तों के साथ सम्बन्धों का वर्णन कीजिए।
उत्तर : मध्यकाल में सामन्तवाद के अन्तर्गत किसानों के तीन वर्ग थे :
(i) स्वतंत्र किसान (Free holders) : इस वर्ग के किसान सामन्त से भूमि प्राप्त करते थे और बदले में उसे कर देते थे।
(ii) कृषि दास (Villeins) : इस वर्ग के किसानों को अपनी उपज का एक निश्चित भाग लॉडों को देना पड़ता थान कुछ निश्चित दिनों तक सामन्त के खेतों पर मुफ्त काम भी करना पड़ता था।
(iii) दास कृषक (Serfs) : यह किसानों का सबसे निम्न वर्ग था और सबसे अधिक संख्या इन्हीं लोगों की थी। इन्हें अपने स्वामी सामन्त को अपनी उपज का एक भाग देना पड़ता था। उसके खेतों पर मुफ्त काम करना पड़ता था तथा बिना मजदूरी लिए उसका मकान बनाना, लकड़ी चीरना, पानी भरना आदि घरेलू काम भी करने पड़ते थे। यदि वे स्वतन्त्र होने का प्रयास करते, तो उन्हें पकड़ कर कठोर दण्ड दिया जाता था।

प्रश्न 21. राष्ट्र-राज्यों की तीन उपलब्धियाँ बताओ।
उत्तर : राष्ट्र-राज्यों की तीन उपलब्धियाँ निम्नलिखित थीं (i) समाज में सर्फ वर्ग की समाप्ति कर दी गई। इसके अतिरिक्त सामंतवाद का अंत करके कृषि, उद्योग तथा व्यापार की उन्नति से लोगों के जीवन स्तर को ऊँचा उठाया गया।
(ii) सीमा विवादों को समाप्त करके राज्यों को सुरक्षित सीमाएँ प्रदान की गई।
(iii) राष्ट्र-राज्यों ने एक ही भाषा बोलने वाले और समान संस्कृति से संबंधित लोगों में एकता स्थापित की।

प्रश्न 22. इंग्लैंड में सामंतवाद के विकास पर लघु उत्तर : सामंतवाद का विकास इंग्लैण्ड में ग्यारहवीं सदी से टिप्पणी लिखिए।

उत्तर : सामंतवाद का विकास इंग्लैण्ड में ग्यारहवीं सदी से हुआ।
(i) छठी सदी में मध्य यूरोप से एजिल ( Angles) और सैक्सन (Sarons) इंग्लैण्ड में आकर बस गए। इंग्लैण्ड देश का नाम ‘एजिल लैण्ड’ का रूपांतरण है।
(ii) ग्यारहवीं सदी में नारमैण्डी (Normandy) के विलियम ने एक सेना के साथ इंग्लिश चैनल (English chan. nel) को पार कर इंग्लैण्ड के सैक्सन राजा को पराजित कर दिया। इस समय, फ्रांस और इंग्लैण्ड में क्षेत्रीय सीमाओं और व्यापार से उत्पन्न होने वाले विवादों के कारण हमेशा युद्ध होते रहते थे।
(ii) विलियम प्रथम ने भूमि नपवाई, उसके नक्शे तैया । करवाए और उसे अपने साथ आए 180 नॉरमन ज़ागीरदारों में बार दिए। यही लार्ड, राजा के प्रमुख काश्तकार बन गए थे जिनसे वह सैन्य-सहायता की आशा करता था। व राजा को कुछ नाइट देने के लिए बाध्य थे।
(iv) शीघ्र ही वे नाइटों को कुछ भूमि उपहार में देने लगे। ऊ उनकी उसी प्रकार सेवा की आशा रखते थे जैसे वे राजा की कर थे किंतु वे नाइटों का अपने निजी युद्धों के लिए उपयोग नहीं का सकते थे क्योंकि इस पर इंग्लैण्ड में प्रतिबंध था। एंग्लो-सैक्सर कृषक विभिन्न स्तरों के भू-स्वामियों के काश्तकार बन गए।

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