Class 10 Civics Chapter 5 जन संघर्ष और आंदोलन

नेपाल में लोकतंत्रा की स्थापना
लोकतंत्र का अर्थ:-
 लोकतंत्र का अर्थ है एक ऐसा शासन जो लोगों का शासन हो , लोगों के लिए हो और लोगों के द्वारा चुनी गई सरकार का शासन हो।
नेपाल में उठे आंदोलन का उद्देश्य:- नेपाल में 1990 के दशक में लोकतंत्र स्थापित हुआ।राजा को औपचारिक रूप से इस राज्य का प्रधान बना रहा परन्तु वास्तविक सत्ता का प्रयोग लोगों द्वारा चुने गए प्रतिनिधि करते थे नेपाल के राजा वीरेंद्र ने देश का संवैधानिक नेता बनना स्वीकार कर लिया था। परन्तु एक रहस्यमय कटने के बाद जब वहां के राजा वीरेंद्र की हत्या हो गई तो नेपाल में एक राजनीतिक संकट पैदा हो गया नया शासक राजा ज्ञानेन्द्र लोकतान्त्रिक शासन को स्वीकार करने को तैयार नहीं था इसलिए फरवरी दो हजार पांच एसपी को उसने तत्कालीन प्रधानमंत्री को अपदस्थ करके जनता द्वारा निर्वाचित सरकार को भंग कर दिया। अप्रैल दो हजार छे में नेपाल में एक जन आंदोलन शुरू हो गया है क्योंकि वहां के लोग लोकतंत्र बारी चाहते थे और सत्ता की बागडोर राजा के हाथ से लेकर दोबारा जनता के हाथ में सौंपना चाहते थे।इस आंदोलन ने राजा को अपने उन आदेशों को वापस लेने के लिए बाध्य कर दिया, जिन आदेशों के द्वारा राजा ने लोकतान्त्रिक सरकार को समाप्त कर दिया था

नेपाल में लोकतंत्रा की स्थापना:-

  • नेपाल में लोकतंत्रा 1990 के दशक में कायम हुआ।
  • राजा वीरेन्द्र ने संवैधानिक राजतंत्र को स्वीकार लिया।
  • राजा वीरेन्द्र की हत्या के बाद राजा ज्ञानेंद्र ने लोकतंत्र को स्वीकार नहीं किया।
  • राजा वीरेंद्र ने जनता द्वारा निर्वाचित सरकार को भंग कर दिया गया।
  • 2006 में जो आंदोलन चला उसका लक्ष्य शासन की बागडोर राजा के हाथ में से लेकर दोबारा जनता के हाथों में सौंपना था, यानि कि लोकतंत्र की पुनः स्थापना करना । संसद की बड़ी राजनीतिक पार्टियों ने मिलकर एक सेवेनपार्टी अलायंस बनाया और नेपाल की राजधानी काठमांडू में चार दिन के बंद का ऐलान किया।
  • 21 अप्रैल के दिन आंदोलनकारियों ने राजा को अल्टीमेटम दे दिया। 24 अप्रैल 2006 अल्टीमेटम का अंतिम दिन था। इस दिन राजा तीनों माँगों को मानने के लिए बाध्य हुआ।
  • एस.पी.ए. ने गिरिजा प्रसाद कोइराला को अंतरिम सरकार का प्रधानमंत्राी चुना गया । राजा की समस्त शक्तियाँ वापस ले ली गई । इस संघर्ष को नेपाल का लोकतंत्र के लिए दूसरा संघर्ष कहा गया है।

वर्ग विशेष के हित समूह और जन सामान्य के हित समूह:-
हित समूह का अर्थ:-
हित समूह समाज के किसी खास हिस्से अथवा समूह के हितों को बढावा देने मे प्रयत्नशील होते हैं।
वर्ग-विशेष:- हित समूह आमतौर पर समाज के किसी विशेष हिस्से या समूह के हितों को बढ़ावा देते हैं।उन्हें वर्ग विशेष का हित समूह कहा जाता है। ये समाज के किसी खास तबके मसलन मजदूर, कर्मचारी, व्यवसायी, उद्योगपति, धर्म विशेष के अनुयायी अथवा किसी खास जाति का प्रतिनिधित्व करते है।
विशेषता:- वर्ग विशेष के ही समूह का मुख्य देश पूरे समाज का नहीं वरन अपने सदस्यों की बेहतरी और कल्याण करना होता है। ये पूरे समाज का नहीं बल्कि अपने सदस्यों की बेहतरी के लिए कार्य करते है।
जन सामान्य के हित समूह:- जन सामान्य के हित समूह केवल एक ही तबके के हितों का ध्यान नहीं रखते वरन वे सर्व सामान्य हितों का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे संगठन किसी खास हित के बजाय सामूहिक हित का प्रतिनिधित्व करते हैं।

  • अपने हितों की बजाय सामूहिक हितों का ध्यान रखना
  • उदाहरण के लिए:- बामसेफ – बैकवर्ड एंड मायनॅारिटी कम्यूनिटी एम्पलाइज फेडरेशन।

दबाव समूह :- जब कुछ लोग अपने विशेष उद्देश्यों की पूर्ति के लिए संगठन बनाते हैं तो ऐसे संगठनों को दबाव समूह यही समूह का नाम दिया जाता है। ये दबाव समूह ने एक तरीकों से राजनीतिक पद पर दबाव डालते हैं।

१.ये दबाव समूह थोड़े समय के लिए ही अस्तित्व में आते हैं और अपने सीमित उद्देश्यों की पूर्ति के प्रचार समाप्त हो जाते हैं।

२. किसी भी लोकतंत्रीय सरकार में ऐसे दबाव समूह बनते रहते हैं कभी वकील लोग कभी अध्यापक लोग कभी दुकानदार अपने अपने हितों की पूर्ति के लिए दबाव समूह बनाते रहते हैं।

३. राजनीतिक दल और सरकार पर दबाव डालकर अपने हितों के पक्ष में प्रदर्शन भी करते हैं।

बोलीविया में आंदोलन:- बोलीविया लातिनी अमेरिका का एक गरीब देश है। सन 2000 में वहां एक जन संघर्ष शुरू हुआ जो जन साधारण में ‘जल युद्ध’ के नाम से प्रसिद्ध हुआ। वहां की सरकार ने 1999 कोचबामबा नामक नगर में जलापूर्ति का अधिकारिक बहुराष्ट्रीय कंपनी को बेच दिया। इस कंपनी ने शीघ्र ही पानी की कीमत में चार गुना इजाफा कर दिया। इससे सब अोर त्राही त्राही मच गई। फिर क्या था लोगों ने शीघ्र ही सन 2000 में एक जन संघर्ष छेड़ दिया। देखते ही देखते अनेक श्रमिक संगठनों,सामुदायिक नेताओं और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने एक गठबंधन की स्थापना की। पहले शहर भर में चार दिन की हड़ताल की गई परन्तु जब कुछ हाथ न लगा तो हड़तालों का ताता लग गया।फरवरी 2000 और फिर अप्रैल 2000 में हड़तालें हुई। जैसे जैसे सरकार बर्बरता पर उतर आई वैसे वैसे ही है संघर्ष और तीव्र होता चला गया। लोगों ने बहुराष्ट्रीय कंपनी के कर्मचारियों का ऐसा घेराव किया और उन्हें ऐसा डराया कि वे शहर छोड़कर भाग गए। विवश होकर सरकार को दोबारा जलापूर्ति का काम नगर पालिका को सौंपना पड़ा। पानी का यह संघर्ष बोलीविया के जल युद्ध के नाम से जाना जाता है।

प्रश्नों के उत्तर दें।
1.
 सेवेन पार्टी अलायंस क्या था?
2. नेपाल के लोगों की मुख्य माँगे क्या थी?
3. नेपाल के आंदोलन का मुख्य उद्देश्य क्या था?
4. आंदोलनकारियों ने राजा को अल्टीमेटम कब दिया?
5. नेपाल में लोकतंत्र की स्थापना कैसे हुई?

6. वर्गविशेषी हित समूह और जन सामान्य हित समूह में क्या अंतर है?
7.जन सामान्य हित समूह की एक उदाहरण दो।
8. लोक कल्याणकारी समूह किसे कहते हैं?
9. दबाव-समूह और आंदोलन राजनीति को किस तरह प्रभावित करते हैं ?

उत्तर:-

1. नेपाल में भंग की गई संसद की सभी राजनीतिक पार्टियों ने मिलकर एक सेक्टर डेल्ही गठबंधन बनाया था जिसे सेवन पार्टी एलायंस कहा गया।

2. नेपाल में लोगों की मुख्य मांगे निम्नलिखित थी :–

१. लोकतंत्र को पुनः बहाल करना।

२.राजा से सभी शक्तियां वापस लेकर जनता के द्वारा चुनी गई सरकार के हाथों में देना।

3. नेपाल में अप्रैल दो हजार छे को आंदोलन शुरू करने का मुख्य उद्देश्य लोकतंत्र को पुनः बहाल करना था।

4. आंदोलनकारियों ने राजा को अल्टीमेटम 21अप्रैल 2006 को दिया।

5. नेपाल में लोकतंत्र की स्थापना एक जन आंदोलन के द्वारा हुई।

6. वर्ग विशेष के हित समूह का उद्देश्य पूरे समाज का नहीं बल्कि अपने सदस्यों की बेहतरी और कल्याण करना होता है जबकि जन सामान्य हित समूह का उद्देश्य पूरे समाज की बेहतरी और कल्याण करने के लिए कार्य करना होता है।

7. ‘बामसेफ’ नामक समूह जन सामान्य के हित का एक समूह है।

8. लोक कल्याणकारी ही सम्मोहन समूहों को कहते हैं जो जन सामान्य के हितों को बढ़ावा देने वाले संगठन होते हैं।

9. जब कुछ लोग अपने विशेष उद्देश्यों की पूर्ति के लिए संगठित होते हैं तो इनके इन संगठनों को हित समूह या दबाव समूह को आ जाता है परंतु जब इन समूहों का आकार बढ़ जाता है और उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए उनकी जाते हैं तो वे आंदोलन का रूप धारण कर लेते हैं परंतु दोनों का उद्देश्य सरकार में शामिल होना नहीं वरन सरकार को प्रभावित करना होता है वे कार्य निम्नलिखित ढंग से करते हैं:-

१. विभिन्न दबाव समूह और आंदोलन अपने लक्ष्य की पूर्ति के लिए जनता की सहानुभूति और समर्थन प्राप्त करने का प्रयत्न करते हैं। ऐसे में वे बैठक करते हैं, जुलूस निकालते हैं, और सूचना अभियान चलाते हैं।

२. केवल जनता को ही नहीं ऐसे दबाव सम मीडिया को भी प्रभावित करने का प्रयत्न करते हैं ताकि मीडिया उनके मसलों पर ध्यान दें और ऐसे में सरकार और जनता का ध्यान उनकी ओर आकर्षित हो।

३. ऐसे दबाव समूह और आंदोलन केवल सूचना अभियान तक ही सीमित नहीं रहते है वरन वे धरना भी देते हैं, हड़ताल भी करते हैं, और सरकारी कामकाज में बाधा भी डालते हैं, ताकि सरकार उनकी मांगों को जल्दी से माने। बहुत से मजदूर संगठन कर्मचारी संघ आदि ऐसे ही तरीकों को अपनाते हैं, ताकि सरकार पर दबाव बना रहे।

૪. कुछ दबाव समूह आंदोलन अपनी बात को लोगों तक पहुंचाने के लिए सरकार को जगाने और सोए हुए को हिलाने के लिए महंगे विज्ञापनों का भी सहारा लेते हैं।

५. कुछ दबाव समूह और आंदोलन विपक्ष के नेताओं को भी अपने पक्ष में लाने का प्रयत्न करते हैं और उनसे भाषण बाजी तक करवा देते हैं।अपना वोट बैंक बनाने के लिए विभिन्न राजनीतिक दल भी इन दबाव समूहो को अपने पक्ष में करने का प्रयत्न करते हैं।

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