3 अंकीय प्रश्न उत्तर – मानव भूगोल : प्रकृति एवं विषय क्षेत्र – Class12th Geography Chapter 1

Index

Class 12th Geography

1. मानव भूगोल

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

2. विश्व जनसँख्या

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

3. जनसँख्या संघटन

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

4. मानव विकास

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

5. प्राथमिक क्रियाएं

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

6. द्वितीयक क्रियाएँ

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

7. तृतीयक तथा चतुर्थक क्रियाकलाप

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

8. परिवहन एवं संचार

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

9. अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

Class 12th Geography Part-1 Chapter 2 Important Question Answer 3 Marks मानव भूगोल : प्रकृति एवं विषय क्षेत्र

प्रश्न 1. प्रकृति के मानवीकरण का संक्षेप में तीन बिंदुओं द्वारा वर्णन कीजिए।
उत्तर : प्रकृति के मानवीकरण से तात्पर्य है कि प्रकृति ही मनुष्य के कार्यकलापों पर अपना प्रभाव डालती है अर्थात् मनुष्य प्रकृति का दास बनकर रह जाता है। उसके सभी क्रियाकलाप प्रकृति द्वारा नियंत्रित होते हैं। यह इन तीन बिंदुओं से स्पष्ट हो जाता है :
(i) मनुष्य के सभी क्रियाकलाप उसके पर्यावरण द्वारा नियंत्रित होते हैं। जैसे मानव के रहन-सहन तथा कार्य जलवायु, उच्चावच आदि द्वारा प्रभावित होते हैं।
(ii) प्रकृति (भौतिक कारक जैसे धरातल का स्वरूप, जलवायु, वनस्पति आदि) या पर्यावरण ही मनुष्य के समाज को एक स्वरूप प्रदान करता है। उसका खान-पान, रहन-सहन, वेशभूषा, आवास आदि सभी पर्यावरण के द्वारा निर्धारित होते हैं । यहाँ तक कि मनुष्य की विचारधारा भी उसके पर्यावरण की ही देन है।
(iii) आदिवासी लोग संसार में सब जगह अपने पर्यावरण के ही दास हैं। जैसे कालाहारी के बुशमैन, कांगो के पिग्मी अपने पर्यावरण द्वारा ही नियंत्रित होते थे।

प्रश्न 2. मानव भूगोल की परिभाषा दीजिए। प्रकृति प्रदत्त संसाधनों के प्रयोग करने पर मानवों द्वारा निर्मित भौतिक संस्कृति के तत्वों के चार उदाहरण दीजिए।
उत्तर : मानव भूगोल (Human Geography) : मानव भूगोल मानव समाजों और धरातल के बीच संबंधों का संश्लेषित अध्ययन है।
मनुष्य प्रौद्योगिकी की सहायता से अपने भौतिक पर्यावरण से अन्योन्य क्रिया करता है। यह महत्त्वपूर्ण नहीं है कि मानव क्या उत्पन्न करता है और निर्माण करता है बल्कि यह महत्त्वपूर्ण है कि मानव किन उपकरणों और तकनीकी की सहायता से उत्पादन और निर्माण करता है। प्रौद्योगिकी किसी भी समाज के सांस्कृतिक विकास के स्तर की सूचक होती है। उदाहरण के लिए मानव ने घर्षण और ऊष्मा की सहायता से अग्नि की खोज की। इसी प्रकार डी.एन.ए. और आनुवंशिकी के रहस्य का पता लगाया। अधिक तीव्र गति से चलने वाले वायुयान बनाये, आदि।

प्रश्न 3. प्रकृति और मानव किस प्रकार एक-दूसरे से जटिलता से जुड़े हुए हैं? उदाहरण सहित स्पष्ट करें।
उत्तर : मानव और भौतिक पर्यावरण एक-दूसरे से जुड़े हैं। मानव के पास तकनीकी ज्ञान है। वह अपने तकनीकी ज्ञान द्वारा प्रकृति से पदार्थ प्राप्त करता है। प्रकृति प्रदत्त वस्तुओं का मानव अपने ज्ञान के द्वारा उपयोग करता है। प्रकृति मानव को प्रभावित करती है। वह प्रकृति के अनुसार ही अपने आपको पर्यावरण में ढालता है। वह कठोर पर्यावरण में भी अपने तकनीकी ज्ञान के आधार पर रहता है। कम या अधिक तापमान को सावधानीपूर्वक नियंत्रित करता है। आज मनुष्य ने डी.एन.ए. और आनुवंशिकी के रहस्यों को समझकर अनेक बीमारियों पर विजय प्राप्त की है। आदिमानव समाज तथा प्रकृति की शक्तियों को पर्यावरणीय नियतिवाद कहा जाता है। इस प्रकार मानव और प्रकृति एक-दूसरे से जुड़े हैं

प्रश्न 4. निश्चयवाद के विचार की उपयुक्त उदाहरणों सहित व्याख्या करें ।
उत्तर : निश्चयवाद विचारधारा के अनुसार मनुष्य के प्रत्येक क्रियाकलाप को पर्यावरण से नियंत्रित किया जाता है। इसके अनुसरण करने वाले मानते हैं कि भौतिक कारक जैसे जलवायु, उच्चावच, प्राकृतिक वनस्पति आदि, मानव के समस्त क्रियाकलाप और जीवनशैली आदि को नियंत्रित करते हैं। उदाहरण के लिए टुंड्रा क्षेत्र के एस्किमो लोग बर्फ के मकान भोजन वालरस, ह्वेल तथा सील मछली होता है। मछली का तेल वे अपने उपयोग में लाते हैं जबकि सहारा, थार जैसे गर्म मरुस्थल के लोग जानवरों के ऊपर निर्भर करते हैं। इनमें भेड़, बकरी तथा ऊँट आदि होते हैं।
निश्चयवादी सामान्यतया मानव को एक निष्क्रिय कारक समझता है जो पर्यावरणीय कारकों से प्रभावित है।

प्रश्न 5. “प्रकृति का ज्ञान प्रौद्योगिकी को विकसित करने के लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। ” तीन उदाहरण देते हुए इस कथन की पुष्टि कीजिए |
उत्तर : प्रौद्योगिकी किसी समाज के सांस्कृतिक विकास के स्तर की सूचक होती है। मानव प्रकृति के नियमों को बेहतर ढंग से समझने के बाद ही प्रौद्योगिकी का विकास कर पाया। उदाहरणतया घर्षण और ऊष्मा की संकल्पनाओं ने अग्नि की खोज में हमा सहायता की । इसी प्रकार डी.एन.ए. और आनुवांशिकी के रहस्यों की समझ ने हमें अनेक बीमारियों पर विजय पाने के योग्य बनाया। अधिक तीव्र गति से चलने वाले यान विकसित करने के लिए हम वायु गति के नियमों का प्रयोग करते हैं। अतः प्रकृति • प्रौद्योगिकी को विकसित करने के लिए महत्त्वपूर्ण है और प्रौद्योगिकी मनुष्य पर पर्यावरण की बंदिशों को कम करती है।

प्रश्न 6. ‘ज्योग्राफिया जनरेलिस’ ( सामान्य भूगोल) किसने लिखा ?

अथवा

‘ज्योग्राफिया जनरेलिस’ नामक पुस्तक को किसने लिखा? इस पुस्तक में भूगोल विषय को किन दो भागों में बाँटा गया है? उनके विषय में लिखिए।
उत्तर : ‘ज्योग्राफिया जनरेलिस’ पुस्तक को वैज्ञानिक आधार पर बर्नार्ड वेरेनियस ने लिखा है। यह पुस्तक भूगोल को दो भागों में बाँटती हैं। 1. सामान्य तथा 2. विशिष्ट |
1.सामान्य भूगोल में सम्पूर्ण पृथ्वी को एक इकाई मानकर इसके लक्षणों का विवेचन किया गया है।
2.विशिष्ट भूगोल में प्रदेशों की रचना पर बल दिया गया है। उन्होंने प्रादेशिक विषय वस्तु को तीन उपभागों में प्रस्तुत किया है- खगोलीय लक्षण, स्थलीय लक्षण तथा मानवीय लक्षण तथा मानवीय लक्षण|

प्रश्न 29. मानव भूगोल के अध्ययन में वाइडल डी ला ब्लॉश का क्या योगदान है ?
उत्तर : वाइडल डी-ला ब्लॉश के अनुसार मानव भूगोल की परिभाषा इस प्रकार है- मानव भूगोल प्रकृति एवं मनुष्य के बीच पारस्परिक सम्बन्धों को एक नई समझ देता है। उन्होंने मानव भूगोल में संभावनावाद की नींव रखी। जब प्रकृति की तुलना में मनुष्य को महत्त्वपूर्ण स्थान प्रदान किया जाए और जब मानव को निष्क्रिय से सक्रिय शक्ति के रूप में देखा जाए तो यह धारणा संभावनावाद कहलाती है। यद्यपि संभावनावाद की संकल्पना प्रथम विश्व युद्ध से पहले की गई लेकिन वाइडल डी. ला ब्लाश ने व्यवस्थित तरीके से इस विचारधारा का प्रचार-प्रसार किया। उनके अनुसार मनुष्य की जीवन शैली मनुष्य और उसके निवास स्थान के सम्बन्धों को नियंत्रित करने वाले भौतिक ऐतिहासिक और सामाजिक प्रभावों का समन्वित परिणाम है। उन्होंने समान पर्यावरण के भीतर मानव समूह के अन्तर को स्पष्ट करने का प्रयास किया। उन्होंने बताया कि विभिन्नतायें भौतिक, पर्यावरण के दबाव के प्रतिफल नहीं अपितु दूसरे कारकों जैसे मानव मूल्य एवं आदतों में परिवर्तन का परिणाम हैं। यही संकल्पना सम्भावनावादियों के लिए आधारभूत दर्शन बनी।

प्रश्न 30. मानव भूगोल के विकास में ‘स्थानीय संगठन उपागम’ के वृहत् लक्षणों का वर्णन कीजिए |
उत्तर : स्थानीय संगठन उपागम के लक्षण निम्नलिखित हैं 1. इसका समय 1950 के दशक से 1960 के दशक तक रहा।
2.कम्प्यूटर और परिष्कृत सांख्यिकीय विधियों के प्रयोग के लिये विशिष्ट मानचित्र और मानवीय परिघटनाओं के विश्लेषण में प्रायः भौतिकी के नियमों का अनुप्रयोग किया जाता था।
3. इस अवस्था को विभिन्न मानवीय क्रियाओं के मानचित्र योग्य प्रतिरूपों की पहचान करना इसका मुख्य उद्देश्य था।

अथवा

“मानवीय क्रियाओं की छाप सर्वत्र है।” कोई तीन उदाहरण देकर इस कथन की पुष्टि कीजिए।
उत्तर : यह कथन सत्य है कि मानवीय क्रियाओं की छाप सर्वत्र हैं। मानवीय क्रियाओं को समय के साथ लोग अपने पर्यावरण और प्राकृतिक बलों को समझने लगते हैं। अपने सामाजिक और सांस्कृतिक विकास के साथ मानव बेहतर और आर्थिक सक्षम प्रौद्योगिकी का विकास करते हैं। उदाहरण के लिये विकास के लिये अब मशीनों, कम्प्यूटर आदि का उपयोग होने लगा है। पर्यावरण से प्राप्त संसाधनों के द्वारा वे सम्भावनाओं को जन्म देते हैं। मानवीय क्रियायें सांस्कृतिक भूदृश्य की संरचना करती हैं। इसलिये मानवीय क्रियाओं की छाप सर्वत्र है। उच्च भूमियों पर स्वास्थ्य विश्राम स्थल जैसे शिमला में विशाल नगरीय प्रसार महानगर इसके उदाहरण हैं। खेत, फलोद्यान, मैदानों व तरंगित पहाड़ियों में चरागाह तटों पर पत्तन व महासागरीय तल पर समुद्री मार्ग तथा अन्तरिक्ष से उपग्रह इत्यादि हैं।

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