5 अंकीय प्रश्न उत्तर – ईंट मनके और सभ्यता Class 12th History Chapter 1

Index

1. ईंट मनके और अस्थियाँ

1. आरंभ 2. निर्वाह के तरीके 3. मोहनजोदड़ो 4. सामाजिक विभिन्नताओं का अवलोकन 5. शिल्प उत्पादन के विषय में जानकारी 6. माल प्राप्त करने सम्बन्धी नीतियाँ 7. मुहरें लिपि तथा बाट 8. प्राचीन सभ्यता 9. सभ्यता का अंत 10. हड़प्पा सभ्यता की खोज 11. अतीत को जोड़कर पूरा करने की समस्याएं मानचित्र बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर 1 अंकीय प्रश्न उत्तर 2 अंकीय प्रश्न उत्तर

2. राजा किसान और नगर

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

3. बंधुत्व जाति और वर्ग

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

4. विचारक विश्वास और इमारतें

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर 1 बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर 2

6. भक्ति सूफी और परम्पराएँ

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

7. एक साम्राज्य की राजधानी विजयनगर

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

8. उपनिवेशवाद और देहात

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

10. उपनिवेशवाद और देहात

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

11. विद्रोह और राज

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

13. महात्मा गाँधी और आन्दोलन

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

15. संविधान का निर्माण

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

ईंटें मनके और अस्थियाँ Class 12th History Chapter 1 Important Question Answer 3 Marks.

प्रश्न 1. हड़प्पा संस्कृति का ज्ञान हमें किन स्रोतों से होता है?
उत्तर : हड़प्पा संस्कृति की जानकारी के अनेक स्रोत है-
 (i) विभिन्न स्थलों की खुदाई से प्राप्त सड़कों, गलियों, भवनों, स्नानागारों आदि के द्वारा नगर योजना, वास्तुकला और लोगों के रहन-सहन के विषय में जानकारी मिलती है।
 (ii) कला शिल्प की वस्तुएँ जैसे-तकलियाँ, मिट्टी के खिलौने, धातु की मूर्तियाँ, आभूषण, मृद्भाण्ड आदि से विभिन्न व्यवसायों एवं सामाजिक दशा के विषय में जानकारी प्राप्त होती है।
(iii) मिट्टी की मुहरों से धर्म, लिपि आदि का ज्ञान होता है। 

प्रश्न 2. हड़प्पावासियों द्वारा सिंचाई के लिए प्रयोग में लाये जाने वाले साधनों के नामों का उल्लेख कीजिए।उदाहरण भी दीजिए। 
उत्तर : हड़प्पावासियों द्वारा मुख्यतः नहरें, कुएँ और जल संग्रह करने वाले स्थानों को सिंचाई के रूप में प्रयोग में लाया जाता था।
उदाहरणार्थ : 
(i) अफगानिस्तान में शौर्तुपई नामक स्थल से हड़प्पाई नहरों के चिह्न प्राप्त हुए हैं।
(ii) हड़प्पा के लोगों द्वारा सिंचाई के लिए कुओं का भी इस्तेमाल किया जाता था।
(iii) गुजरात के धोलावीरा नामक स्थान से पानी की बावली (तालाब) मिला है। इसे कृषि की सिंचाई के लिए पानी देने के लिए जल संग्रह के लिए प्रयोग किया जाता था।

प्रश्न 3, अवतल चक्कियों का क्या उपयोग था ? 
उत्तर : (i) हड़प्पा स्थलों विशेष रूप से मोहनजोदड़ो में अनेक अवतल चक्कियाँ मिली है। विद्वानों का अनुमान है कि इनकी सहायता से अनाज पीसा जाता था।
(ii) ये चक्कियों मुख्यतः कठोर, अग्निज अथवा बलुआ पत्थर से निर्मित थीं। दो मुख्य प्रकार की चक्कियां मिली हैं। एक वे हैं जिन पर छोटा पत्थर आगे-पीछे चलाया जाता था जिससे निचला पत्थर खोखला हो गया था तथा दूसरी वे हैं जिनका प्रयोग संभवतः केवल सालन या तरी बनाने के लिए जड़ी-बूटियों तथा मसालों को कूटने के लिए किया जाता था।

प्रश्न 4. आप कैस कह सकते हैं कि हड़प्पा सभ्यता के लोग सफाई पसंद करते थे ? 
उत्तर: निम्नलिखित बातों से पता चलता है कि हड़प्पा सभ्यता के लोग सफाई पसंद करते थे
(i) लगभग प्रत्येक घर में एक स्नानगृह होता था।
(ii) गर्दै पानी की निकासी की उचित व्यवस्था थी।
(iii) गलियों की नालियाँ ढकी हुई थीं और उनकी नियमित रूप से सफाई होती थी।
(iv) मोहनजोदड़ो के दुर्ग पर मिले विशाल स्नानागार विशेष अवसरों पर सामूहिक स्नान करते थे।

प्रश्न 5. हड़प्पा सभ्यता की जानकारी में हमें किन-किन साक्ष्यों से सहायता मिलती है ? 
उत्तर : हड़प्पा सभ्यता की जानकारी में हमें केवल भौतिक साक्ष्यों से ही सहायता मिलती है। इनमें निम्नलिखित साक्ष्य शामिल हैं-
(i) नगरों तथा भवनों के अवशेष।
(ii) मृदभांड, औजार, आभूषण तथा घरेलू सामान।
(iii) शवाधान तथा जानवरों की हड्डियाँ।
(iv) मोहरें तथा बाट।

प्रश्न 6. जीव-पुरातत्वविदों द्वारा किए गए अध्ययन हड़प्पा संस्कृति के बारे में क्या उजागर करते हैं?
उत्तर : 1. हड़प्पा स्थलों से प्राप्त जानवरों की हड्डियों में मवेशियों, भेड़, बकरी, भैंस तथा सूअर की हड्डियाँ शामिल हैं। जीव-पुरातत्वविदों द्वारा किए गए अध्ययनों से संकेत मिलता है कि ये सभी जानवर पालतू थे।
2. इसके अलावा, हड़प्पा स्थलों से जंगली प्रजातियों जैसे वराह, हिरण तथा घड़ियाल की हड्डियाँ भी मिली हैं। लेकिन इस बात के निश्चित संकेत नहीं मिलते हैं कि हड़प्पा निवासी खुद इन जानवरों का शिकार करते थे या शिकारी समुदायों से इनका माँस प्राप्त करते थे।

प्रश्न 7. हड़प्पाई लोगों के बाट का संक्षेप में परिचय दीजिए।
उत्तर : हड़प्पाई लोगों के बाट : विनिमय बाटों की एक सूक्ष्म या परिशुद्ध प्रणाली द्वारा नियंत्रित थे। ये बाट सामान्यत: चर्ट नामक पत्थर से बनाये जाते थे और आम तौर पर ये किसी भी तरह के निशान से रहित घनाकार होते थे। इन बाटों के निचले मानदंड द्विआधारी (1, 2, 4, 8, 16, 32 इत्यादि 12,800 तक) थे जबकि ऊपरी मानदंड दशमलव प्रणाली का अनुसरण करते थे। छोटे बाटों का प्रयोग संभवतः आभूषणों और मनकों को तौलने के लिए किया जाता था। धातु से बने तराजू के पलड़े भी मिले हैं।

प्रश्न 8. हड़प्यावासियों द्वारा कृषि की उपज बढ़ाने के लिए अपनाए गए किन्हीं दो तरीकों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर : (i) दो फसलें उगाना : कालीबंगन में खेत में हल की रेखाएँ समकोण पर एक-दूसरे को काटती हैं। इससे यह अनुमान लगाया जाता है कि एक साथ दो अलग फसलें उगाई जाती थी।
(ii) सिंचाई : अफगानिस्तान के शुगर में नहरों के अवशेष प्राप्त हुए हैं परंतु पंजाब और सिंध में कोई प्रमाण प्राप्त नहीं हुआ गुजरात (धौलावीरा) में जलाशय होने से अनुमान है कि इनका प्रयोग सिंचाई के लिए किया जाता होगा अतः यह अनुमान लगाया जाता है कि अर्ध शुष्क क्षेत्रों के कारण सिंचाई नहरों, कुओं और जलाशयों से की जाती होगी।

प्रश्न 9. मोहनजोदड़ो के आवासीय भवनों की विशिष्ट विशेषताओं को स्पष्ट कीजिए। 
उत्तर : (i) मोहनजोदड़ो की बस्तियाँ दो भागों में विभाजित थीं। एक भाग छोटा लेकिन ऊँचाई पर बनाया गया था। दूसरा कहीं अधिक बड़ा लेकिन नीचे बनाया गया था। पुरातत्वविदों ने इन बस्तियों को क्रमश: दुर्ग और निचला शहर का नाम दिया है।
(ii) मोहनजोदड़ो का निचला शहर आवासीय भवनों के उदाहरण प्रस्तुत करता है। इनमें से कई एक आँगन पर केंद्रित थे जिसके चारों ओर कमरे बने थे। संभवत: आँगन खाना पकाने और कताई करने जैसी गतिविधियों का केंद्र था, खास तौर से गर्म और शुष्क मौसम में।

प्रश्न 10. हड़प्पावासियों ने किस सीमा तक उपमहाद्वीप तथा उसके आगे व्यापारिक संबंध स्थापित किए थे ? स्पष्ट कीजिए। 
उत्तर :(i) पुरातात्विक खोजों से पता चलता है कि ताँबा संभवत: अरब प्रायद्वीप के दक्षिण-पश्चिम किनारे पर स्थित ओमान से लाया जाता था। ओमानी ताँबे और हड़प्पाई पुरावस्तुओं दोनों में निकल के अंश मिले हैं।
(ii) इसके अतिरिक्त एक बड़ा हडप्पाई मर्तबान, जिसके ऊपर काली मिट्टी की एक परत चढ़ाई गई थी, ओमानी स्थलों से मिला है। यह अनुमान है कि हड्प्पा सभ्यता के लोग इनमें रखे सामान का ओमानी ताँबे से विनिमय करते थे।
(iii) यह अनुमान है कि ओमान, बहरीन या मेसोपोटामिया से संपर्क सामुद्रिक मार्ग से रहा होगा क्योंकि मेसोपोटामिया के लेख मेलुहा (हड़प्पाई क्षेत्र) को नाविकों का देश कहते हैं। इनमें मेलुहा से प्राप्त उत्पादों-कार्नीलियन, लाजवर्द मणि, ताँबा, सोना तथा विविध प्रकार की लकड़ियों का उल्लेख है। इसके अलावा मुहरों पर जहाजों तथा नावों के चित्र प्राप्त हुए हैं।

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