8 अंकीय प्रश्न उत्तर – ईंट मनके और सभ्यता Class 12th History Chapter 1

Index

1. ईंट मनके और अस्थियाँ

1. आरंभ 2. निर्वाह के तरीके 3. मोहनजोदड़ो 4. सामाजिक विभिन्नताओं का अवलोकन 5. शिल्प उत्पादन के विषय में जानकारी 6. माल प्राप्त करने सम्बन्धी नीतियाँ 7. मुहरें लिपि तथा बाट 8. प्राचीन सभ्यता 9. सभ्यता का अंत 10. हड़प्पा सभ्यता की खोज 11. अतीत को जोड़कर पूरा करने की समस्याएं मानचित्र बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर 1 अंकीय प्रश्न उत्तर 2 अंकीय प्रश्न उत्तर

2. राजा किसान और नगर

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

3. बंधुत्व जाति और वर्ग

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

4. विचारक विश्वास और इमारतें

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर 1 बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर 2

6. भक्ति सूफी और परम्पराएँ

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

7. एक साम्राज्य की राजधानी विजयनगर

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

8. उपनिवेशवाद और देहात

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

10. उपनिवेशवाद और देहात

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

11. विद्रोह और राज

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

13. महात्मा गाँधी और आन्दोलन

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

15. संविधान का निर्माण

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

ईंटें मनके और अस्थियाँ Class 12th History Chapter 1 Important Question Answer 8 Marks.

प्रश्न 1. पुरातत्त्वविद् हड़प्पाई समाज में सामाजिक आर्थिक भिन्नताओं का पता किस प्रकार लगाते हैं ? वे कौन-सी भिन्नताओं पर ध्यान देते हैं ?
How do archaeologists trace socio-economic differences in Harappan society ? What are the differences that they notice?

अथवा

पुरा वस्तुएँ (मानवाकृतियाँ), हड़प्पा काल की सामाजिक विभिन्नताओं के अंतर को पहचानने में किस प्रकार सहायक होती हैं ? वर्णन कीजिए।

अथवा 

हड़प्पा काल की सामाजिक भिन्नताओं को पहचानने में पुरावस्तुएँ किस प्रकार सहायक होती हैं ? संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर : पुरातत्वविद् हड़प्पाई समाज में सामाजिक-आर्थिक भिन्नताओं का पता कई प्रकार से लगाते हैं। इसके लिए वे मुख्यत: निम्नलिखित भिन्नताओं को आधार बनाते हैं
1. शवाधान : शवाधानों में मृतकों को दफनाते समय उनके साथ विभिन्न प्रकार की वस्तुएँ रखी जाती थीं। ये वस्तुएँ बहुमूल्य भी हो सकती हैं और साधारण भी। हड़प्पा स्थलों के जिन गों में शवों को दबाया गया था, वहाँ भी यह भिन्नता दिखाई देती है। बहुमूल्य वस्तुएँ मृतक की मजबूत आर्थिक स्थिति को व्यक्त करती हैं, जबकि साधारण वस्तुएँ उसकी साधारण आर्थिक स्थिति की प्रतीक हैं।
2. विलासिता की वस्तुएँ : सामाजिक भिन्नता को पहचानने की एक अन्य विधि है- पुरावस्तुओं का अध्ययन। पुरातत्वविद् इन्हें मोटे तौर पर उपयोगी तथा विलास की वस्तुओं में वर्गीकृत करते हैं। पहले वर्ग में उपयोग की वस्तुएँ शामिल हैं। इन्हें पत्थर अथवा मिट्टी आदि साधारण पदार्थों से आसानी से बनाया जा सकता है। इनमें चक्कियाँ, मृदभांड, सूइयाँ, झाँवा आदि शामिल हैं। ये वस्तुएँ प्रायः सभी बस्तियों में पाई गई हैं। पुरातत्वविद् उन वस्तुओं को कीमती मानते हैं, जो दुर्लभ हो अथवा महँगी हों या फिर स्थानीय स्तर पर न मिलने वाले पदार्थों से अथवा जटिल तकनीकों से बनी हों। इस दृष्टि में फयॉन्स के छोटे पात्र कीमती माने जाते थे क्योंकि इन्हें बनाना कठिन था। जिन बस्तियों में ऐसी कीमती वस्तुएँ मिली हैं, वहाँ के समाजों का स्तर अपेक्षाकृत ऊँचा रहा होगा।

प्रश्न 2. मोहनजोदड़ो की कुछ विशिष्टताओं का वर्णन कीजिए।
Describe some of the distinctive features of Mohenjodaro.
उत्तर : मोहनजोदड़ो की कुछ विशिष्टताएँ निम्नलिखित हैं :
(क) गलियाँ : शहर में चौड़ी और सीधी सड़कें थीं सड़कें और गलियाँ एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं। गलियां एक-दूसरे को वर्णाकार और आयताकार खण्डों में काटती थी गलियों के दोनों ओर सभी घरों के साथ-साथ नालियाँ बनी हुईं थे शहर में गलियों का जाल बिछा हुआ था।
(ख) भवन : बस्ती को दो भागों में विभाजित किया गया था। एक छोटी बस्ती थी लेकिन उसे ऊँचाई पर बनाया गया था दूसरी बस्ती कहीं अधिक बड़ी थी लेकिन उसे नीचे बनाया था। छोटी बस्ती को दुर्ग और निचले बड़ी बस्ती को निचला शहर कहा जाता था। दुर्ग की संरचनाएँ कच्ची ईंटों के चबूतरे पर बनी थी। इसलिए इसकी ऊँचाई अधिक थी। दुर्ग को निचले शहर से अलग करने के लिए उसे दीवार से घेर दिया गया था। निचले शहर को भी दीवार से घेरा गया था। इसके अतिरिक्त कई भवनों को ऊँचे चबूतरे पर बनाया गया था जो नींव का कार्य करते थे। कच्ची और पक्की ईंटें एक निश्चित अनुपात की होती थी। प्रत्येक ईंटों की लंबाई और चौड़ाई, ऊँचाई की क्रमशः चार गुनी और दोगुनी होती थी|
(ग) जल-निकास व्यवस्था : मोहनजोदड़ो की जल-निकास प्रणाली उत्तम व्यवस्था वाली थी। सड़कों और गलियों को लगभग एक ग्रिड पद्धति में बनाया गया था तथा वे एक-दूसरे को समकोण बनाते हुए काटती थीं। गलियों और सड़कों के दोनों ओर नालियाँ बनी थी जिनमें घर से गन्दा पानी बहकर आता था। नालियाँ डंकी होतो थीं।
(घ) विशाल स्नानघर : मोहनजोदड़ो का सबसे प्रमुख सार्वजनिक स्थल विशाल स्नानागार था। कपड़े बदलने के लिए कमरे बने हुए थे। सीढ़ियाँ जलाशय के नीचे सतह तक बनी हुई थीं। स्नानागार का फर्श पक्की ईंटों का बना हुआ था। पानी एक बड़े कुएँ से जलाशय में आता था। शायद इस विशाल स्नानागार का उपयोग किसी धार्मिक कार्यों में स्नान के लिए किया जाता था।

प्रश्न 3. हड़प्पा सभ्यता में शिल्प उत्पादन के लिए आवश्यक कच्चे माल की सूची बनाइए तथा चर्चा कीजिए कि ये किस प्रकार प्राप्त किए जाते होंगे ?
List the raw materials required for craft production in the Harappan civilization and discuss how these might have been obtained

अथवा

“हड़प्पावासी शिल्प उत्पादन हेतु माल प्राप्त करने के F लिए विभिन्न तरीके अपनाते थे।” इस कथन के संदर्भ में शिल्प उत्पादन के लिए कच्चा माल प्राप्त करने के तरीकों को स्पष्ट कीजिए। 
उत्तर : हड़प्पा सभ्यता में शिल्प उत्पादन के लिए आवश्यक कच्चे माल की सूची :
1. चिकनी मिट्टी, 2. पक्की मिट्टी, 3. कार्निलियन या लाल रंग का सुन्दर पत्थर, 4. लाजवर्द मणि या नीले रंग का कीमती पत्थर, 5. सेलखड़ी, 6. जैस्पर, 7. स्फटिक, 8. क्वार्ट्ज, 9. तांबा, 10. कांसा, 11. सोना, 12. शंख, 13. लेप की सामग्री, 14. घिसाई. यालिश और छेद करने के औजार, 15. कुम्हार का चक्का, 16. तकलियाँ, 17. सूइयाँ, 18. झावा, 19. फयॉन्स, 20. मिट्टी के बर्तन, 21. मनके, 22. पीले रंग के कच्चे माल, 23. अस्थियाँ, 24. कपास या सूत, ऊन आदि, 25. टिन।
उपरोक्त मालों को प्राप्त करना 
(क) मुलायम और पक्की मिट्टियाँ स्थानीय स्रोतों से प्राप्त की जाती थीं।
(ख) विभिन्न प्रकार के पत्थरों को आस-पास के राज्यों से प्राप्त किया जाता था कार्निलियन को गुजरात के भड़ौच से प्राप्त किया जाता था। कुछ विशिष्ट पत्थर जैसे लाजवर्द मणि को अफगानिस्तान से मंगाया जाता था दक्षिणी राजस्थान तथा उत्तरी गुजरात से सेलखड़ी लायी जाती थी।
(ग) राजस्थान के खेतड़ी से ताँबा तथा दक्षिण भारत से सोना मंगाया जाता था। तांबा संभवत: ओमान से भी प्राप्त किया जाता था।
(घ) लकड़ी आस-पास के जंगलों से प्राप्त की जाती थी। कुछ अच्छे प्रकार की लकड़ी का आयात मैसोपोटामिया से भी किया जाता था।
(ङ) कताई के लिए कपास तथा ऊन क्रमश: खेतों तथा भेड़ों से प्राप्त की जाती थी।
(च) फयान्स मोहनजोदड़ो और हड़प्पा से प्राप्त किए जाते थे।
(छ) खिलौने बनाने तथा मनके बनाने में सेलखड़ी चूर्ण के लेप का प्रयोग किया जाता था जिसे सांचे में ढालकर विभिन्न प्रकार की आकृतियाँ तैयार की जाती थीं लेप स्थानीय वस्तुओं से तैयार कर लिया जाता था।
(ज) लोथल और धौलावीरा में घिसाई, पालिश और छेद करने के उपकरणों को बनाया जाता था।

प्रश्न 4. हड़प्पाई समाज में शासकों द्वारा किये जाने वाले संभावित कार्यों की चर्चा कीजिए ।
Discuss the functions that may have been performed by rulers in Harappan society. 
उत्तर : हड़प्पाई समाज में सत्ता के केंद्र किस प्रकार के थे या सत्ताधारी लोग कौन थे, इस संबंध में पुरातात्विक साक्ष्यों से पूर्ण जानकारी नहीं मिलती है। कुछ पुरातत्वविदों का मानना है कि हड़प्पाई समाज में शासक नहीं होते थे। सभी लोगों की सामाजिक स्थिति एक समान थी। दूसरे पुरातत्वविदों का मानना है कि यहाँ कई शासक थे, जैसे-मोहनजोदड़ो, हड़प्पा आदि के अपने अलग-अलग राजा होते थे। कुछ विद्वानों का मत है कि हड़प्पाई समाज एक ही राज्य था। सबसे अंतिम परिकल्पना सबसे युक्तिसंगत प्रतीत होती है क्योंकि ऐसा संभव नहीं है कि समुदाय इकट्टे मिलकर विभिन्न कार्यों का निर्णय लेते होंगे और उसे कार्यान्वित करते होंगे। हड़प्पा के शासक के द्वारा किए जाने वाले कार्यों में शामिल था-नियोजित नगर बनाना, विभिन्न प्रकार के शिल्पों का व्यवस्थीकरण, कच्चे माल के समीप बस्तियाँ बसाना, देश के विभिन्न भागों में अभियान योजना, दूर-दराज के देशों के साथ संपर्क बनाना, विभिन्न वस्तुओं का आयात करना आदि।

प्रश्न 5. चर्चा कीजिए कि पुरातत्त्वविद् किस प्रकार अतीत का पुनर्निर्माण करते हैं ?
Discuss how archaeologists reconstruct the past.

अथवा

“किसी पुरावस्तु की उपयोगिता की समझ प्रायः आधुनिक समय में प्रयुक्त वस्तुओं से उनकी समानता पर आधारित होती है।” उचित साक्ष्यों की सहायता से इस कथन का औचित्य निर्धारित कीजिए। 
उत्तर : पुरातत्वविदों द्वारा अतीत का पुनर्निर्माण निम्नलिखित तथ्यों के आधार पर किया जाता है
(क) हड़प्पा सभ्यता की लिपि को अभी तक नहीं पढ़ा जा सका है। इसलिए इन सभ्यता स्थलों से प्राप्त साक्ष्यों, जैसे-मृदभांड, औजार, आभूषण और अन्य वस्तुओं के आधार पर अतीत का पुनर्निर्माण करते हैं।
(ख) खुदाई द्वारा हड़प्पा सभ्यता के काल का ज्ञान।
(ग) पक्की मिट्टी की मूर्तिकाएँ और मोहरें हड़प्पाई लोगों की धार्मिक प्रथाओं पर काफी प्रकाश डालते हैं।
(घ) खुदाई में मिले मिट्टी के बर्तनों का अतीत जानने में महत्त्वपूर्ण स्थान है।
(ङ) चाक पर बने हुए मिट्टी के बर्तन इस बात की ओर इंगित करते हैं कि यह संस्कृति पूर्णतया विकसित थी।
(च) प्राप्त मूर्तियों जैसी आकृतियों से अतीत के सामाजिक जीवन को समझने में सहायता मिलती है।
(छ) कीमती आभूषणों से आर्थिक दशा की जानकारी मिलती है।
(ज) शवाधानों से प्राप्त विभिन्न सामग्रियों से सामाजिक भिन्नता की जानकारी मिलती है।
(झ) बैलगाड़ीनुमा खिलौनों से यह ज्ञात होता है कि हड़प्पाई लोग आने-जाने या सामान ढोने के लिए किस प्रकार के यातायात साधनों का प्रयोग करते थे।
(ब) अस्थिपिंजरों से हड़प्पाई लोगों के शव-विसर्जन और धार्मिक विश्वासों की जानकारी मिलती है।

प्रश्न 6.आरंभिक तथा विकसित हड़प्पा संस्कृतियों में कृषि के कई तत्त्व समान थे।” सोदाहरण व्याख्या कीजिए।
उत्तर : “आरंभिक तथा विकसित हड़प्पा संस्कृतियों में कई तत्त्व समान थे।” इस कथन की व्याख्या निम्नलिखित बिंदुओं के आधार पर की जा सकती है :
(i)विकसित हड़प्पा से पहले भी इस क्षेत्र में अनेक संस्कृतियाँ अस्तित्व में थीं। ये संस्कृतियाँ अपनी विशिष्ट मृद भाण्ड शैली से संबंधित थीं तथा इनके संदर्भ में हमें कृषि पशुपालन तथा कुछ शिल्पकारी के साक्ष्य भी प्राप्त होते हैं। बस्तियाँ आमतौर पर छोटी थीं तथा इनमें बड़े आकार की संरचनाएँ लगभग न के बराबर थीं।
(ii) विकसित हड़प्पा संस्कृति कुछ ऐसे स्थानों पर पनपी जहाँ पहले आरंभिक हड़प्पा संस्कृतियाँ थीं। इन संस्कृतियों में अनेक तत्व जिनमें निर्वाह करने के तरीके सम्मिलित हैं, समान थे। हड़प्पा सभ्यता के निवासी अनेक प्रकार के पेड़-पौधों से प्राप्त उत्पाद और जानवरों जिनमें मछली भी शामिल हैं. से प्राप्त भोजन करते थे। – विकसित हड़प्पा सभ्यता में प्रतिदिन के उपयोग की वस्तुएँ शामिल हैं जिन्हें पत्थर या मिट्टी जैसे सामान्य पदार्थों से आसानी से बनाया जा सकता था। इनमें मृदभाण्ड, चक्कियाँ, सुइयाँ झाँवा आदि शामिल हैं।

प्रश्न 7, मोहनजोदड़ो के वास्तुकला संबंधी लक्षण किस प्रकार नियोजन की ओर संकेत करते हैं? उपयुक्त उदाहरणों द्वारा पुष्टि कीजिए। 
उत्तर : (i) मेके के अनुसार “निश्चित रूप से यह (जल निकास प्रणाली) अब तक की खोजी गई सर्वथा प्राचीन प्रणाली है।” इसके अंतर्गत हर एक आवास को नालियों से जोड़ा गया था। मुख्य नाले गारे में जमाई गई ईंटों से बने थे और इन्हें ऐसी ईंटों से ईका गया था जिन्हें सफाई के लिए हटाया जा सकता था।
(ii) बहुत लंबे नालों में कुछ अंतरालों के पश्चात् सफाई के लिए हौदियों बनाई गई थीं। इस निकास प्रणाली की तुलना हम आज की जल निकास प्रणाली से कर सकते हैं। यह उत्तम निकास प्रणाली एक नगर योजना का प्रमाण है।
(iii) उल्लेखनीय बात यह है कि यह निकास प्रणाली छोटी बस्तियों जैसे लोथल में प्राप्त हुई है जहाँ पर आवासों के निर्माण के लिए तो कच्ची ईंटों का प्रयोग हुआ था परंतु नालियों का निर्माण पकी ईंटों द्वारा किया गया था।

प्रश्न 8. हड़प्पा सभ्यता में 1900 ई.पू. के बाद आए किन्हीं दो बदलावों का उल्लेख कीजिए। ये परिवर्तन कैसे आ सके ? स्पष्ट कीजिए। 
उत्तर : हड़प्पा सभ्यता में 1900 ई०पू० के बाद आए बदलाव :
 (i) हड़प्पा स्थलों की भौतिक संस्कृति में बदलाव आया था। उदाहरण के लिए, सभ्यता की विशिष्ट पुरावस्तुओं-बाटों, मुहरों तथा विशिष्ट मनकों का समाप्त हो जाना। लेखन, लंबी दूरी का व्यापार तथा शिल्प विशेषज्ञता भी समाप्त हो गई।
(ii) सामान्यतः थोड़ी वस्तुओं के निर्माण के लिए थोड़ा ही माल प्रयोग में लाया जाता था। आवास निर्माण की तकनीकों का ह्रास हुआ और बड़ी सार्वजनिक संरचनाओं का निर्माण अब बंद हो गया। ये पुरावस्तुएँ एवं बस्तियाँ एक ग्रामीण जीवन शैली की ओर संकेत करती हैं और इन संस्कृतियों को “उत्तर हड़प्पा” या “अनुवर्ती” संस्कृतियाँ कहा गया है।
परिवर्तन के कारण : इसके कई कारण हैं। इनमें जलवायु परिवर्तनों, वनों की कटाई, अत्यधिक बाढ़ नदियों का सूख जाना या मार्ग परिवर्तन एवं भूमि का अत्यधिक उपयोग भी सम्मिलित है, लेकिन ये कारण समस्त सभ्यता के पतन की व्याख्या के लिए उपयुक्त नहीं हो सकते हैं।

प्रश्न 9. “शवाधान हड़प्पा सभ्यता में व्याप्त सामाजिक विषमताओं को समझने का एक बेहतर स्रोत है ।” व्याख्या करें।
उत्तर : (i) शवाधान का अध्ययन सामाजिक विषमताओं को परखने की एक विधि है। मिस्र के पिरामिडों का अध्ययन जिस प्रकार उस सभ्यता के सामाजिक जीवन पर प्रकाश डालता है उसी प्रकार हड़प्पा सभ्यता में भी शवाधान एक विशेष महत्त्व रखते हैं।
(ii) हड़प्पा स्थलों से मिले शवाधानों में आमतौर पर मृतकों को गों में दफनाया जाता था। इन गर्तों की बनावट एक दूसरे से भिन्न होती थी। कुछ गीतों की सतह पर ईंटों की चिनाई के अवशेष भी मिले हैं।
(iii) कुछ कब्रों में कंकाल के पास मृदभांड तथा आभूषण मिले हैं जो इस ओर संकेत करते हैं कि इन वस्तुओं का प्रयोग मृत्युपरांत किया जा सकता है। पुरुष एवं स्त्री दोनों के शवाधानों से आभूषण मिले हैं। हाल के उत्खनन में एक शवाधान से पुरुष खोपड़ी के साथ शंख के तीन छल्ले, मनके, जैस्पर के मनके इत्यादि प्राप्त हुए हैं। कुछ शवों को ताँबे के दर्पण के साथ दफनाया गया है।
निष्कर्षत: यह कहा जा सकता है कि शवों के साथ बहुमूल्य वस्तुओं को दफनाने का प्रचलन नहीं था। मृतक के सामाजिक स्तर पर पता शवाधानों की बनावट एवं पाए गए अवशेषों से लग जाता है।

प्रश्न 10. हड़प्पावासियों ने किस सीमा तक उपमहाद्वीप तथा उसके आगे व्यापारिक संबंध स्थापित किए थे ? स्पष्ट कीजिए। 
उत्तर :(i) पुरातात्विक खोजों से पता चलता है कि ताँबा संभवत: अरब प्रायद्वीप के दक्षिण-पश्चिम किनारे पर स्थित ओमान से लाया जाता था। ओमानी ताँबे और हड़प्पाई पुरावस्तुओं दोनों में निकल के अंश मिले हैं।
(ii) इसके अतिरिक्त एक बड़ा हडप्पाई मर्तबान, जिसके ऊपर काली मिट्टी की एक परत चढ़ाई गई थी, ओमानी स्थलों से मिला है। यह अनुमान है कि हड्प्पा सभ्यता के लोग इनमें रखे सामान का ओमानी ताँबे से विनिमय करते थे।
(iii) यह अनुमान है कि ओमान, बहरीन या मेसोपोटामिया से संपर्क सामुद्रिक मार्ग से रहा होगा क्योंकि मेसोपोटामिया के लेख मेलुहा (हड़प्पाई क्षेत्र) को नाविकों का देश कहते हैं। इनमें मेलुहा से प्राप्त उत्पादों-कार्नीलियन, लाजवर्द मणि, ताँबा, सोना तथा विविध प्रकार की लकड़ियों का उल्लेख है। इसके अलावा मुहरों पर जहाजों तथा नावों के चित्र प्राप्त हुए हैं।

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