Notes Part 3 – ईंट मनके और अस्थियाँ – Class 12th History Chapter 1

Index

1. ईंट मनके और अस्थियाँ

1. आरंभ 2. निर्वाह के तरीके 3. मोहनजोदड़ो 4. सामाजिक विभिन्नताओं का अवलोकन 5. शिल्प उत्पादन के विषय में जानकारी 6. माल प्राप्त करने सम्बन्धी नीतियाँ 7. मुहरें लिपि तथा बाट 8. प्राचीन सभ्यता 9. सभ्यता का अंत 10. हड़प्पा सभ्यता की खोज 11. अतीत को जोड़कर पूरा करने की समस्याएं मानचित्र बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर 1 अंकीय प्रश्न उत्तर 2 अंकीय प्रश्न उत्तर

2. राजा किसान और नगर

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

3. बंधुत्व जाति और वर्ग

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

4. विचारक विश्वास और इमारतें

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर 1 बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर 2

6. भक्ति सूफी और परम्पराएँ

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

7. एक साम्राज्य की राजधानी विजयनगर

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

8. उपनिवेशवाद और देहात

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

10. उपनिवेशवाद और देहात

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

11. विद्रोह और राज

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

13. महात्मा गाँधी और आन्दोलन

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

15. संविधान का निर्माण

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

सामाजिक विभिन्नताओं का अवलोकन

शवाधान

  • मृतकों को शवों में दफनाया जाता था.
  • मृतकों को सामान्यतः गर्तों में दफनाया जाता था
  • कभी कभी गर्तों की बनावट एक दूसरे से भिन्न मिलती है
  • कुछ गर्तों की स्थलों पर सतहों पर ईंटों की चिनाई की गयी थी
  • परन्तु इतने मात्र साक्ष्यों के आधार पर वहां की सामाजिक विभिन्नता का पता कर पाना मुस्किल है

  • हडप्पा सभ्यता के कुछ कब्रों से मृदभांड देखने को मिलते हैं
  • आभूषण प्राप्त हुए हैं
  • एक पुरुष की खोपड़ी प्राप्त हुई है जिसके समीप तीन छल्ले जैस्पर के मनके तथा सैकड़ों की संख्या में सूक्ष्म मनके प्राप्त हुए हैं
  • सामान्यतः मृतकों के साथ तांबे के दर्पण दफनाये जाते थे
  • अधिकतर ये लोग मृतकों के साथ बहुमूल्य वस्तुएं नहीं दफनाते थे

विलासिता की वस्तुओं की खोज

  • पुरातत्विद उन वस्तुओं को कीमती मानते हैं जो दुर्लभ हों अथवा महंगी और साथ ही स्थानीय आधार पर अनुपलब्ध पदार्थों से बनायीं गयीं हों
  • फयांस एक ऐसा ही पदार्थ था जिसे घिसी हुई रेत से रंग और चिपचिपा पदार्थ मिलकर बनाया जाता था
  • यहाँ रोजमर्रा की प्रयोग की वस्तुओं का निर्माण जैसे तकलियाँ फयांस से बनायीं गयी थी, पायी गयी हैं.
  • ऐसी कोई भी महंगी वस्तु हड़प्पा और मोहनजोदड़ो से प्राप्त हुई होती हैं किसी छोटी बस्ती में इन्काप प्राप्त होना मुश्किल है.
  • ऐसा ही फयांस से निर्मित लघुपात्र जिसे शायद कोई सुगन्धित द्रव्य रखने के लिए प्रयोग लिया जाता हो मोहनजोदड़ो और हड़प्पा से ही प्राप्त हुआ है.
  • कहीं कहीं से सोना भी प्राप्त होता है जो कि शायद आज की ही तरह एक दुर्लभ और महंगी धातु रही होगी.
  • जो भी सोने के आभूषण हड़प्पा स्थलों पर प्राप्त हुए हैं वो सभी संचयों से ही प्राप्त हुए हैं.

शिल्प उत्पादन के विषय में जानकारी


  • चन्हुदड़ो में एक बस्ती मिली है जो शिल्प ज्ञान का एक महत्वपूर्ण केंद्र थी
  • मनके बनाना, शंख की कटाई करना, घतुकर्म, मुहरें बनाना, बाट बनाना आदि यहाँ किया जाता था
  • मनकों को कई पदार्थों से बनाया जाता था
  • कार्नीलियन जैस्पर स्फटिक, क्वार्ट्ज तथा सेलखड़ी जैसे पत्थर और तांबा कांसा तथा सोने जैसी धातुएं, शंख, फयांस,और पकी मिटटी, आदि के मनके बनाये जाते थे.
  • भिन्न आकार वाले मनके प्राप्त हुए हैं जैसे, चक्राकार, गोलाकार, धोलाकार, तथा खंडित
  • नागेश्वर तथा बालाकोट समुद्र-तट के समीप हैं, यहाँ शंख से निर्मित चूड़ियाँ, करछियाँ और पच्चीकारी की वस्तुएं बनायीं जाती थी.

उत्पादन केन्द्रों की पहचान

  • प्रस्तर पिंड, पूरे शंख तथा तांबा – अयस्क जैसे कच्चा माल औजार, अपूर्ण वस्तुएं त्याग गिया गया माल और कूड़ा करकट आदि से उत्पादन केन्द्रों की पहचान आसानी से की जा सकती है
  • कूड़ा- करकट शिल्प कार्यों के पहचान के लिए सबसे अच्छे संकेतक होते हैं
  • त्यागी गयी वस्तुएं भी उत्पादन केन्द्रों की पहचान करने का अच्छा स्त्रोत हैं.

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