5 अंकीय प्रश्न उत्तर – राजा किसान और नगर – Class 12th History Chapter 2

Index

1. ईंट मनके और अस्थियाँ

1. आरंभ 2. निर्वाह के तरीके 3. मोहनजोदड़ो 4. सामाजिक विभिन्नताओं का अवलोकन 5. शिल्प उत्पादन के विषय में जानकारी 6. माल प्राप्त करने सम्बन्धी नीतियाँ 7. मुहरें लिपि तथा बाट 8. प्राचीन सभ्यता 9. सभ्यता का अंत 10. हड़प्पा सभ्यता की खोज 11. अतीत को जोड़कर पूरा करने की समस्याएं मानचित्र बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर 1 अंकीय प्रश्न उत्तर 2 अंकीय प्रश्न उत्तर

2. राजा किसान और नगर

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

3. बंधुत्व जाति और वर्ग

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

4. विचारक विश्वास और इमारतें

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर 1 बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर 2

6. भक्ति सूफी और परम्पराएँ

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7. एक साम्राज्य की राजधानी विजयनगर

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8. उपनिवेशवाद और देहात

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

10. उपनिवेशवाद और देहात

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

11. विद्रोह और राज

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

13. महात्मा गाँधी और आन्दोलन

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

15. संविधान का निर्माण

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

प्रश्न 1. ‘मनुस्मृति’ क्या है? इसमें राजा को क्या सलाह दी गई है?
उत्तर : मनुस्मृति आरंभिक भारत का सबसे प्रसिद्ध विधि ग्रंथ है। यह संस्कृत भाषा में है जिसकी रचना 200 ई० पू० से 200 ई० के बीच हुई थी। इसमें राजा को सलाह दी गई कि भूमि – विवादों से बचने के लिए सीमाओं की गुप्त पहचान बनाकर रखनी चाहिए। इसके लिए सीमाओं पर भूमि में ऐसी वस्तु दबा कर रखनी चाहिए जो समय के साथ नष्ट न हो।

प्रश्न 2. प्रारंभिक भारतीय इतिहास में छठी शताब्दी ई प. को प्रायः एक मुख्य निर्णायक मोड़ क्यों माना जाता है। दो कारण लिखिए।अथवा”छठी शताब्दी ई.पू. को भारतीय इतिहास में एक महत्त्वपूर्ण परिवर्तनकारी बिंदु माना जाता है । ” दो तथ्य देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर : 1. इस काल में प्रारंभिक उपनिषद लिखे गये भारतीय दर्शन का स्पष्ट रूप देने का प्रयास हुआ।2. इस समय देश में कई नये धर्म तथा संप्रदाय उदित हुए जिनमें जैन धर्म तथा बौद्ध धर्म सर्वाधिक प्रमुख एक धार्मिक क्रांति के रूप में सामने आए। बौद्ध धर्म तो कालांतर में भारत के बाहर भी अनेक देशों में फैला। इस समय अनेक महाजनपद (राजतंत्र के राज्य तथा कुछ गणतंत्र) उभरकर आये। भारत कबीलाई राज्यों के स्थान पर साम्राज्य की स्थापना की ओर बढ़ने लगा। मगध एक विशाल तथा शक्तिशाली राज्य उभर कर आया।

प्रश्न 3. छठी शताब्दी ई० पू० से कृषि उत्पादन बढ़ाने लिए प्रयोग किए गए किन्हीं दो तरीकों का वर्णन कीजिए।
उत्तर :(i) कृषि उत्पादन बढ़ाने के लिए गंगा और कावेरी की घाटियों के उर्वर क्षेत्र में हल का प्रयोग किया गया।(ii) भारी वर्षा वाले क्षेत्रों में उर्वर भूमि की जुताई लोहे के फाल वाले हलों से की जाने लगी।(iii) उत्पादन बढ़ाने का एक अन्य तरीका था-सिंचाई जो कुओं, तालाबों तथा कहीं-कहीं नहरों द्वारा की जाती थी।

प्रश्न 4. खरोष्ठी लिपि को कैसे पढ़ा गया? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर : (i) पश्चिमोत्तर के अभिलेख खरोष्ठी लिपि में लिखे गए हैं।(ii) इस इलाके में हिंद-यूनानी राजाओं द्वारा (लगभग द्वितीय-प्रथम शताब्दी ई.पू.) बनवाए गए सिक्कों से जानकारी प्राप्त करने में सरलता हुई है।(iii) यूरोपीय विद्वान जो यूनानी भाषा की जानकारी रखते थे, उन्होंने अक्षरों का मिलान किया था।(iv) यूनानी तथा खरोष्ठी दोनों ही लिपियों में ‘अपोलोडोटस’ का नाम लिखने में एक ही प्रतीक ‘अ’ का प्रयोग किया गया था।(v) जेम्स प्रिंसेप ने खरोष्ठी में लिखे अभिलेखों की भाषा की पहचान प्राकृत के रूप में की थी। इसी कारण लंबे अभिलेखों को पढ़ना आसान हो गया।

प्रश्न 5. मौर्य साम्राज्य का उदय कब और किसके द्वारा हुआ ? इसमें एक प्रमुख स्थान किसके द्वारा जोड़ा गया?
उत्तर : मगध के विकास के साथ-साथ मौर्य साम्राज्य का उदय हुआ। मौर्य साम्राज्य के संस्थापक चन्द्रगुप्त मौर्य (लगभग 321 ई. पू.) का शासन पश्चिमोत्तर में अफगानिस्तान और बलूचिस्तान तक फैला था। उनके पौत्र असोक ने-जिन्हें आरंभिक भारत का सर्वप्रसिद्ध शासक माना जा सकता है-कलिंग (आधुनिक उड़ीसा) पर विजय प्राप्त की।

प्रश्न 6. गंदतिन्दु जातक में दी गई राजत्व की अवधारणाओं का परीक्षण कीजिए।
उत्तर : (i) गंदतिन्दु जातक में बताया गया है कि एक कुटिल राजा की प्रजा किस प्रकार दुखी रहती है। इनमें वृद्ध स्त्रियाँ, पुरुष, किसान, पशुपालक, ग्रामीण बालक तथा जानवर भी शामिल हैं। जब राजा अपनी पहचान बदल कर जनता के बीच गया तो एक-एक करके सभी लोगों ने अपने दुखों के लिए राजा को भला-बुरा कहा।(ii) लोगों की शिकायत थी कि रात के समय डकैत उन पर हमला करते हैं तथा दिन में कर इकट्ठा करने वाले अधिकारी। इन हालातों से बचने के लिए लोग अपने-अपने गाँव छोड़कर जंगलों में बस गए। इससे पता चलता है कि राजा तथा प्रजा के बीच संबंध तनावपूर्ण रहते थे।

प्रश्न 7. सेल्यूकस के साथ चंद्रगुप्त मौर्य के संघर्ष के क्या दो परिणाम हुए? 
उत्तर : सेल्यूकस का चंद्रगुप्त के साथ संघर्ष 305 ई. पू. में हुआ जब उसने भारत पर आक्रमण किया था। इस संघर्ष के दो प्रमुख परिणाम थे: (i) सेल्यूकस की हार जिसके परिणामस्वरूप उसे चंद्रगुप्त मौर्य को वर्तमान हेरात. काबुल, कंधार और बिलोचिस्तान के चार प्रांत सौंपने पड़े। (ii) चंद्रगुप्त मौर्य ने उसके बदले में सेल्यूकस को 500 हार्थी भेंट किये।

प्रश्न 8. चंद्रगुप्त मौर्य की चार सफल विजय कौन-कौन सी थीं?
उत्तर : 1. पंजाब विजय ( Victory of the Punjab): चंद्रगुप्त मौर्य ने सिकंदर की मृत्यु के पश्चात् पंजाब को जीत लिया।2. मगध की विजय (Pictory of Magadh): चंद्रगुप्त मौर्य ने कौटिल्य ( चाणक्य) की सहायता से मगध के अंतिम राजा घनानंद की हत्या करके मगध को जीत लिया।3. बंगाल विजय (Victory of Bengal ): चंद्रगुप्त मौर्य ने पूर्वी भारत में बंगाल को जीत कर अपने अधिकार में कर लिया।4. दक्षिणी भारत पर विजय (Victory on South): जैन साहित्य के अनुसार आधुनिक कर्नाटक तक उसने अपनी विजय-पताका फहराई थी।

प्रश्न 9. असोक के अभिलेख किन-किन भाषाओं व लिपियों में लिखे जाते थे? उनके विषय क्या थे ? 
उत्तर : (i) असोक के अभिलेख जनता की पालि और प्राकृत भाषाओं में लिखे हुए होते थे। इनमें ब्रह्मी-खरोष्ठी लिपियों का प्रयोग हुआ था। इन अभिलेखों में असोक का जीवन-वृत्त, उसकी आंतरिक तथा बाहरी नीति एवं उसके राज्य के विस्तार संबंधी जानकारी हैं।(ii) इन अभिलेखों में सम्राट असोक के आदेश अंकित होते थे।

प्रश्न 10. कलिंग युद्ध का क्या प्रभाव पड़ा?
उत्तर : असोक ने कलिंग (आधुनिक उड़ीसा) के राजा के साथ एक युद्ध किया। ई. पू. 261 में लडे गये कलिंग युद्ध के दूरगामी प्रभाव निम्नलिखित थे :1. इस युद्ध में असोक विजयी रहा लेकिन उसने अपार जन हानि देखी। सदैव के लिए असोक ने युद्ध लड़ना छोड़ दिया।2. उसने भेरी घोष के स्थान पर धम्म घोष’ की नीति अपनाई।3. कलिंग का मगध राज्य में विलय हो गया। 

प्रश्न 11, प्रभावती गुप्त कौन थी? उसके संबंध में कौन-सा एक विरला उदाहरण मिलता है?
उत्तर : प्रभावती गुप्त आरंभिक भारत के एक प्रसिद्ध शासक चंद्रगुप्त द्वितीय (375-415 ई०) की पुत्री थी। उसका विवाह दक्कन पठार के वाकाटक परिवार में हुआ था। उसने भूमि-दान दिया था जो किसी महिला द्वारा दान का विरला उदाहरण है।

प्रश्न 12. मौर्य साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था की किन्हीं दो विशेषताओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर : (i) मौर्य समाज की साम्राज्य में सर्वोच्च स्थिति थी। सरकार के सभी अंग जैसे विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका और सेना व वित्त पर उसी का नियंत्रण था। उसके काल में अधिकारीगण आधुनिक उदार, लोकतांत्रिक सरकार के आधुनिक मंत्रियों की तरह शक्ति संपन्न नहीं थे और उनका अस्तित्व पूर्णतया सम्राट की मर्जी पर निर्भर था।(ii) प्रत्येक शासक का स्वभाव अथवा व्यवहार भिन्न-भिन्न होता था। चंद्रगुप्त मौर्य नि:संदेह एक अधिक कठोर और अनुशासनप्रिय सम्राट था तो उसकी तुलना में अशोक अधिक उदार, शांत स्वभाव का सम्राट था।

प्रश्न 13, राजा या प्रभावशाली लोग भूमिदान क्यों देते थे ? इस संबंध में विभिन्न इतिहासकारों के क्या मत हैं ?
उत्तर : (i) कुछ इतिहासकारों के अनुसार यह नए क्षेत्रों में कृषि के विस्तार की एक नीति थी।(ii) कुछ अन्य इतिहासकारों का मत है कि जब किसी राजा का अपने सामंतों पर नियंत्रण ढीला पड़ जाता था तो वह भूमिदान देकर अपने लिए नए समर्थक जुटाता था।(iii) ऐसा भी माना जाता है कि कुछ राजा भूमिदान देकर अपनी शान और शक्ति का आडंबर रचते थे। 

प्रश्न 14. चंद्रगुप्त विक्रमादित्य कौन था? उसकी मुख्य उपलब्धिय पर प्रकाश डालिए।
अथवा“चंद्रगुप्त द्वितीय के शासन काल में गुप्त साम्राज्य अपने उत्कर्ष पर पहुँच गया।” कैसे?

उत्तर : चंद्रगुप्त विक्रमादित्य (चंद्रगुप्त द्वितीय), समुद्रगुप्त का पुत्र था। उसने 380 ई. से 410 ई. तक शासन किया।सबसे पहले उसने बंगाल पर अपनी विजय पताका फहराई। इसके पश्चात् वल्कीक जाति और अवंति गणराज्य पर विजय प्राप्त की। उसकी सबसे महत्त्वपूर्ण सफलताएँ थीं-मालवा, काठियावाड़ और गुजरात। शकों को हराकर उसने विक्रमादित्य की पदवी धारण की। संस्कृत का महान विद्वान कालिदास उसी के दरबार में रहता था। उसके शासन काल में सुव्यवस्था थी। प्रजा सुखी और समृद्ध थी।

प्रश्न 15. इलाहाबाद स्तंभ के ऐतिहासिक महत्त्व का मूल्यांकन कीजिए ।
उत्तर : इलाहाबाद का स्तंभ (Allahabad’s inscription) : इलाहाबाद के स्तंभ लेख से गुप्त काल के विषय में जानकारी प्राप्त होती है। इसमें समुदाय की विजयें और चरित्र अंकित है। हरिसेन नामक कवि ने संस्कृत में इसे लिखा। उस काल की राजनैतिक, सामाजिक व आर्थिक अवस्था, भाषा व साहित्य की उन्नति एवं उसकी नौ विजयों का वर्णन है।

प्रश्न 16. जूनागढ़ शिलालेख के महत्त्व का उल्लेख कीजिए। 
उत्तर : जूनागढ़ का शिलालेख, गुजरात में जूनागढ़ के समीप मिला था। उस समय की प्रचलित लिपि ब्राह्मी थी। इसी लिपि में वह शिलालेख लिखा हुआ था। इस शिलालेख में असोक के धर्म, नैतिक नियमों एवं शासन संबंधी नियमों का विवरण मिला है। लोगों की जानकारी के लिये ही इस शिलालेख को जनसाधारण की भाषा पालि में खुदवाया था।

प्रश्न 17.ऐहोल अभिलेख का ऐतिहासिक महत्त्व क्या है?
उत्तर : इस अभिलेख में चालुक्य राजा पुलकेशिन द्वितीय के दरबारी कवि रति कीर्ति ने संस्कृत में उसके पराक्रम का विवरण लिखा है जिसके अनुसार गुजरात के लट, मैसूर के गंगा आदि राजाओं को हराया गया था। दक्षिण के चेर, चोल और पांड्य शासकों को भी हराया गया था। सन् 620 ई. में उसने हर्ष को नर्मदा नदी के तट पर हराया। जब पुलकेशिन द्वितीय ने पल्लव शासन नरसिंह वर्मन से टक्कर ली, तो फिर उसके पश्चात् सन् 642 ई. में लड़ता हुआ युद्ध क्षेत्र में उसके हाथों मारा गया।

प्रश्न 18. प्रशस्तियों से गुप्त शासकों की तथ्यात्मक जानकारी किस प्रकार मिलती है?  
उत्तर : प्रशस्तियों की रचना शासकों की प्रशंसा करने के लिए लिखे गए लेख हैं। इनसे हमें राजाओं के शासन के बारे में जानने में बहुत महत्त्वपूर्ण सहायता मिलती है।उदाहरण : प्रयाग प्रशस्ति से हमें गुप्त राजा समुद्रगुप्त के बारे में बहुत कुछ जानने को मिलता है।

प्रश्न 19, हरिषेण कौन था?
उत्तर : हरिषेण गुप्त सम्राट समुद्रगुप्त का राजकवि था। उसने समुद्रगुप्त की प्रशंसा में प्रयाग प्रशस्ति लिखी थी जो इलाहाबाद स्तंभ अभिलेख के नाम से विख्यात है। यह प्रशस्ति संस्कृत में है। प्रश्न 43. मौर्योत्तर युग में कौन-कौन से प्रमुख शिल्प थे? उत्तर : इस युग में वस्त्र बनाने, रेशम बुनने, अस्त्रों एवं विलास सामग्री का निर्माण, सुनार, रंगरेजी (कपड़ा रंगना), धातु – शिल्पियों, दंत शिल्पियों, जौहरियों, मूर्तिकारों, मछुओं, लोहारों, गंधियों (इत्र बनाने व बेचने वालों) के कार्य प्रमुख थे।

प्रश्न 20. उन तरीकों की व्याख्या कीजिए जिनसे प्राचीन काल में राजा उच्च प्रतिष्ठा प्राप्त कर लेते थे।
उत्तर : प्राचीन काल में राजा उच्च प्रतिष्ठा प्राप्त करने के लिए निम्न विशेष तरीकों को अपनाते थे :1. सर्वप्रथम वे स्वयं को देवी-देवताओं से जोड़ लेते थे। यह काम सबसे पहले कुषाण वंश के शासकों ने किया।2. राजा अपनी मूर्तियाँ बनवाते थे।3. अपने नाम के सिक्के बनवाते थे।4. गुप्त वंश के शासकों ने उच्च प्रतिष्ठा प्राप्त करने के लिए इतिहास, साहित्य, अभिलेखों एवं सिक्कों की सहायता ली।5. कुछ राजाओं ने राजकवियों की मदद से अपनी प्रशंसा में प्रशस्तियाँ भी लिखवाई। हरिषेण द्वारा रचित ‘प्रभाग प्रशस्ति’ जो सम्राट समुद्रगुप्त के लिए लिखी गई, एक अच्छा उदाहरण है।

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