Index

1. ईंट मनके और अस्थियाँ

1. आरंभ 2. निर्वाह के तरीके 3. मोहनजोदड़ो 4. सामाजिक विभिन्नताओं का अवलोकन 5. शिल्प उत्पादन के विषय में जानकारी 6. माल प्राप्त करने सम्बन्धी नीतियाँ 7. मुहरें लिपि तथा बाट 8. प्राचीन सभ्यता 9. सभ्यता का अंत 10. हड़प्पा सभ्यता की खोज 11. अतीत को जोड़कर पूरा करने की समस्याएं मानचित्र बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर 1 अंकीय प्रश्न उत्तर 2 अंकीय प्रश्न उत्तर

2. राजा किसान और नगर

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

3. बंधुत्व जाति और वर्ग

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

4. विचारक विश्वास और इमारतें

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर 1 बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर 2

6. भक्ति सूफी और परम्पराएँ

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

7. एक साम्राज्य की राजधानी विजयनगर

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

8. उपनिवेशवाद और देहात

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

10. उपनिवेशवाद और देहात

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

11. विद्रोह और राज

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

13. महात्मा गाँधी और आन्दोलन

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

15. संविधान का निर्माण

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

Class 12th History Chapter 3 Important Question Answer 1 Marks बंधुत्व, जाति तथा वर्ग (आरंभिक समाज)

प्रश्न 1. “महाभारत की मूल कथा बंधुता और उत्तराधिकार संबंधी धारणा पर पुनः बल देती है।” स्पष्ट कीजिए।
उत्तर : महाभारत की मूल कथा बंधुता और उत्तराधिकार संबंधी धारणा पर पुनः बल देती है। पितृवंशिक व्यवस्था महाभारत से पहले भी विद्यमान थी परंतु कौरवों और पांडवों के मध्य भूमि और सत्ता को लेकर संघर्ष हुआ जिसका वर्णन महाभारत की मूल कथा में किया गया। दोनों ही दल कुरुवंश से संबंधित थे। अंत में युद्ध हुआ जिसमें पांडव विजयी हुए। इसके पश्चात् पितृवंशिक उत्तराधिकार को उद्घोषित किया गया। इस प्रकार पितृवंशिकता महाकाव्य का रचना से पूर्व विद्यमान थी परंतु महाभारत की मुख्य कथावस्तु न इस आदर्श को और सुदृढ़ किया। पितृवंशिकता में पुत्र पिता की मृत्यु बाद उनके संसाधनों पर अधिकार जमा सकते थे। के

प्रश्न 2. ब्राह्मणों द्वारा ऐसी दो नीतियों का उल्लेख कीजिए जो उन्होंने धर्मसूत्रों तथा धर्मशास्त्रों में चारों वर्णों के आदर्श जीविका के लिए दिए गए नियमों का पालन करवाने हेतु अपनायीं।
उत्तर : (i) ब्राह्मणों द्वारा कहा गया कि वर्ण व्यवस्था की उत्पत्ति एक दैवीय व्यवस्था है।
(ii) ब्राह्मणों ने लोगों को यह विश्वास दिलाने की कोशिश की कि उनकी प्रतिष्ठा जन्म पर आधारित है।

प्रश्न 3. ऋग्वेद से हमें क्या जानकारी मिलती है? यह किस काल में लिखा गया था?
उत्तर : ऋग्वैदिक काल या पूर्व वैदिक का काल है। यह वैदिक काल की प्रारंभिक व्यवस्था थी। ऋग्वेद के काल को 9000 वर्ष ईसा पूर्व से लेकर 1000 वर्ष पूर्व तक आंका गया है। किंतु अधिकांश विद्वानों की दृष्टि से यह लगभग तीन हजार वर्ष ईसा पूर्व रहा होगा।

प्रश्न 4. किन लोगों को अस्पृश्य की श्रेणी में रखा गया था? मनुस्मृति और शास्त्रों में उनके लिए निर्धारित कर्तव्यों का वर्णन कीजिए।
उत्तर : समाज कुछ वर्गों को ‘अछूत’ या अस्पृश्य समझा जाता था। ब्राह्मणों का विचार था कि अनुष्ठान आदि कर्म पवित्र हैं और उन्हें संपादित करने वाले पवित्र लोग अस्पृश्यों से भोजन स्वीकार नहीं करते। अछूतों या अस्पृश्यों द्वारा ‘दूषित’ कार्य किए जाते थे, जैसे शवों की अत्येष्टि और मृत पशुओं को छूने वालों को चांडाल कहा जाता था। उन्हें चार वर्ण व्यवस्था वाले समाज में सबसे निम्न कोटि में रखा जाता था। चांडालों को देखना और उनको स्पर्श करना अपवित्रकारी माना जाता था मनुस्मृति के अनुसार चांडालों को नगर से बाहर रहना पड़ता था। वे फेंके हुए बर्तनों का प्रयोग करते थे, मरे हुए लोगों के वस्त्र और लोहे के आभूषण पहनते थे। बौद्ध भिक्षु फा-शिएन के अनुसार अस्पृश्यों को सड़क पर चल समय करताल बजाकर अपने आने की सूचना देनी पड़ती थी जिसे अन्य जन उन्हें देखने के दोष से बच जाएँ। श्वैन-त्सांग के अनुसार बधिक और सफाई करने वालों को नगर से बाहर रहना पड़ता था।

प्रश्न 5. महाभारत की मूल कथा का संबंध किससे है ?
उत्तर : महाभारत की मूल कथा का संबंध दो परिवारों के बीच हुए युद्ध से है। ये परिवार थे कौरव तथा पांडव जो आपस में बांधव (चचेरे भाई) थे। महाभारत के कुछ भाग विभिन्न सामाजिक समुदायों के आचार-व्यवहार के मानदंड तय करते हैं। इस ग्रंथ के मुख्य पात्र इन मानदंडों का अनुसरण करते हुए दिखाई देते हैं।

प्रश्न 6. लोगों को गोत्रों के अंतर्गत विभाजित करने के दो महत्त्वपूर्ण नियम कौन-से थे ?
उत्तर : (i) विवाह के पश्चात् स्त्री को पिता की बजाय अपने पति के गोत्र का माना जाता था। (i) एक ही गोत्र के सदस्य आपस में विवाह संबंध नहीं रख सकते थे।

प्रश्न 7. माता-पिता की मृत्यु के बाद, पैतृक जायदाद का विभाजन, मनुस्मृति के अनुसार, किस प्रकार होता था?

उत्तर : (i) मनुस्मृति के अनुसार, माता-पिता की मृत्यु के बाद पैतृक जायदाद का विभाजन सभी पुत्रों में समान रूप से बँटवारा करके किया जाता था।
(ii) लेकिन ज्येष्ठ पुत्र विशेष भाग का अधिकारी था। स्त्रियाँ पैतृक जायदाद में हिस्सेदारी की मांग नहीं कर सकती थीं।

प्रश्न 8. उपनिषदों में इंसानों और विश्व व्यवस्था के बीच रिश्तों से संबंधित पाई जाने वाली नई विचारधाराओं का संक्षेप में वर्णन कीजिए।

उत्तर : (i) उपनिषदों में उल्लिखित विचारधाराओं से विदित होता है कि लोग जीवन का अर्थ, मृत्यु के बाद जीवन की संभावना तथा पुनर्जन्म के विषय में जानने के लिए उत्सुक थे।
(ii) मनीषी परम यथार्थ की प्रकृति को समझने तथा अभिव्यक्त करने में लगे थे।
(iii) कुछ दार्शनिक वैदिक परंपरा से बाहर यह सवाल उठा रहे थे कि सत्य एक होता है या अनेक।
(iv) छांदोग्य उपनिषद में आत्मा की प्रकृति के बारे में एक श्लोक में उल्लेख है कि मेरी आत्मा धान या सरसों के बीज की गिरी से भी छोटी है।
(v) मन के अंदर छुपी मेरी यह आत्मा पृथ्वी से भी विशाल, क्षितिज से भी विस्तृत, स्वर्ग से भी बड़ी है तथा इन सभी लोकों से भी बड़ी है।

प्रश्न 9. सातवाहन शासकों के अंतर्गत माताएँ कैसे महत्त्वपूर्ण थीं? उत्तर के पक्ष में एक उदाहरण दीजिए।
उत्तर : (i) सातवाहन राजाओं को उनके मातृनाम से चिह्नित किया जाता था।
(ii) इससे यह प्रतीत होता है कि माताएँ महत्त्वपूर्ण थीं। उदाहरण के लिए राजा गोतमी-पुत-सिरी-सातकनि। यहाँ गोतमी-पुत का अर्थ है ‘गोतमी का पुत्र’।

प्रश्न 10. पितृवंशिकता तथा मातृवंशिकता में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर : पितृवंशिकता से अभिप्राय ऐसी वंश परंपरा से है जो पिता के बाद पुत्र, फिर पौत्र तथा प्रपौत्र आदि से चलती है। इसके विपरीत मातृवंशिकता का प्रयोग हम तब करते हैं जब वंश परंपरा माँ से जुड़ी होती है।

प्रश्न 11. महाभारत के समय में विवाह के किन्हीं दो प्रकारों का उल्लेख कीजिए ।
उत्तर : (i) अंतर्विवाह : इसके अंतर्गत वैवाहिक संबंध समूह के मध्य ही होते हैं। यह समूह एक गोत्रकुल या एक जाति अथवा फिर एक ही जगह पर बसने वालों का हो सकता है।
(ii) बहिर्विवाह : यह अपने गोत्र से बाहर विवाह करने की पद्धति है।

प्रश्न 12. गांधारी कौन थी ? उसने दुर्योधन को क्या सलाह दी थी ? दुर्योधन पर इसका क्या प्रभाव पड़ा ?
उत्तर : गांधारी कौरवों की माँ थी। उसने अपने ज्येष्ठ (सबसे बड़े) पुत्र दुर्योधन को पांडवों के साथ युद्ध न करने की सलाह दी थी परंतु दुर्योधन पर इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा। उसने युद्ध किया और पराजित हुआ।

अथवा

बहुपत्नी प्रथा तथा बहुपति प्रथा में अंतर समझाइए।
उत्तर : बहुपत्नी प्रथा में एक पुरुष की एक से अधिक पलियाँ होती हैं। प्रायः राजा लोग इस प्रकार के विवाह करते थे। दूसरी ओर बहुपति प्रथा में एक स्त्री के अनेक पति होते हैं। उदाहरण के लिए द्रौपदी (महाभारत की पात्र) के पाँच पति थे।

प्रश्न 13. ब्राह्मणों ने सामाजिक वैषम्य (Social divide) को और अधिक प्रखर कैसे बनाया ? कोई दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर : ब्राह्मणों ने निम्नलिखित कार्यों द्वारा सामाजिक वैषम्य को और अधिक प्रखर बनाया :
(1) उन्होंने वर्गों के साथ-साथ समाज को जातियों में वर्गीकृत कर दिया जिनकी संख्या बहुत अधिक थी।
(2) उन्होंने विभिन्न ग्रंथों में वर्णित कहानियों के आधार पर लोगों को यह विश्वास दिलाने का प्रयत्न किया कि उनकी प्रतिष्ठा जन्म पर आधारित है।

प्रश्न 14. किन्हीं पाँच पहलुओं को स्पष्ट कीजिए जिनका इतिहासकार ग्रंथों का विश्लेषण करते समय ध्यान में रखते हैं।

अथवा

“इतिहासकारों ने महाभारत का विश्लेषण करते समय अनेक पहलुओं पर विचार किया।” कथन को सिद्ध कीजिए।
उत्तर : (i) इतिहासकार किसी ग्रंथ का विश्लेषण करते समय अनेक पहलुओं पर विचार करते हैं और इस बात का परीक्षण करते हैं कि ग्रंथ की रचना किस भाषा में की गई है।
(ii) ग्रंथ की रचना आम लोगों द्वारा बोली जाने वाली भाषाओं पालि, प्राकृत या तमिल में की गई है या संस्कृत में की गई है जो पुरोहितों तथा विशिष्ट वर्ग द्वारा प्रयोग में लायी जाती थी।
(iii) इसके अलावा, इतिहासकार ग्रंथ के प्रकार का भी विश्लेषण करते हैं। वे देखते हैं कि क्या ये ग्रंथ ‘मंत्र’ थे जिन्हें अनुष्ठानकर्ताओं द्वारा पढ़ा और उच्चरित किया जाता था या ये ‘कथा’ ग्रंथ थे जिन्हें लोगों के द्वारा सुना और पढ़ा जा सकता था। (iv) इतिहासकार ग्रंथों के लेखकों के बारे में भी जानकारी हासिल करने का प्रयास करते हैं। वे लेखकों के दृष्टिकोण तथा विचारों का भी अध्ययन करते हैं ।

प्रश्न 15. महाकाव्य का क्या अर्थ है? प्राचीन भारत से संबंधित दो महाकाव्यों के नाम लिखिए।
उत्तर : वह विशाल काव्य-ग्रंथ जो प्रायः किसी देश या जाति अथवा प्रदेश समुदाय की उल्लेखनीय राजनैतिक घटनाओं पर आधारित होकर जीवन के अनेक पहलुओं की व्याख्या करता है महाकाव्य कहलाता है।
दो महाकाव्य : महाभारत और रामायण

प्रश्न 16. स्त्रीधन क्या था ?
उत्तर : स्त्री को विवाह के समय जो उपहार मिलते थे, उन पर उसी का अधिकार होता था। उसे स्त्रीधन कहा जाता था। इसे उसकी संतान विरासत के रूप में प्राप्त कर सकती थी। इस पर उसके पति का कोई अधिकार नहीं होता था।

प्रश्न 17. वर्ण-व्यवस्था के नियमों का पालन करवाने के लिए ब्राह्मणों ने कौन-कौन सी नीतियाँ अपनाई ?
उत्तर : वर्ण-व्यवस्था के नियमों का पालन करवाने के लिए ब्राह्मणों ने निम्नलिखित नीतियाँ अपनाई
(1) उन्होंने लोगों को बताया कि वर्ण- व्यवस्था एक दैवीय-व्यवस्था है।
(2) उन्होंने शासकों को यह उपदेश दिया कि वे अपने राज्य में इन नियमों का पालन करवाएँ।
(3) लोगों को यह विश्वास दिलाने का प्रयास किया गया कि उनकी प्रतिष्ठा जन्म पर आधारित है।

प्रश्न 18. पुराणों (Purans) की संख्या कितनी है? इनमें कितने बड़े और कितने छोटे हैं ? कुछ पुराणों के नाम लिखो।
उत्तर : पुराणों की कुल संख्या 36 है। इनमें 18 बड़े पुराण 18 पुराणों में कुछ के नाम यहाँ दिए जाते हैं जिनमें से मुख्य हैं हैं
1.विष्णु पुराण, 2. वायु पुराण, 3. महाकाव्य पुराण, 4. भविष्य पुराण, 5. ब्रह्म पुराण, 6. वामन पुराण, 7. स्कंद पुराण, आदि।

प्रश्न 19. मनुस्मृति के अनुसार पुरुष किस प्रकार धन अर्जित कर सकते थे ?
उत्तर : मनुस्मृति के अनुसार पुरुष इन सात तरीकों से धन अर्जित कर सकते थे- (1) विरासत, (2) खोज, (3) खरीद, (4) विजय प्राप्त करके (5) निवेश, (6) कार्य द्वारा, तथा (7) सज्जनों द्वारा दी गई भेंट को स्वीकार करके।

प्रश्न 20. उपनिषदों (Upnishads) की कुल संख्या बताइए।
उत्तर: 108

प्रश्न 21. महाकाव्य काल को इतिहासकार कौन- ‘-सा दूसरा नाम देते हैं ?
उत्तर : वीरकाल।

प्रश्न 22. मनुस्मृति के अनुसार माता-पिता की मृत्यु के बाद संपत्ति का बँटवारा किस प्रकार होना था ?
उत्तर : मनुस्मृति के अनुसार माता-पिता की मृत्यु के बाद पैतृक संपत्ति का सभी पुत्रों में समान रूप से बँटवारा किया जाना चाहिए परंतु सबसे बड़ा पुत्र एक विशेष भाग का अधिकारी था। स्त्रियाँ इस संपत्ति में हिस्सा नहीं माँग सकती थीं।

प्रश्न 23. वर्ण-व्यवस्था वाले समाज में चांडालों के क्या कर्तव्य थे ?
उत्तर : चांडालों के ‘कर्तव्यों’ की सूची मनुस्मृति में मिलती है। इसके अनुसार-
(i)उन्हें गाँव से बाहर रहना पड़ता था।
(ii) वे फेंके हुए बर्तनों का प्रयोग करते थे, मृत लोगों के वस्त्र तथा लोहे के आभूषण पहनते थे।
(iii) रात्रि में वे गाँव और नगरों में चल-फिर नहीं सकते थे। () उन्हें उन मृतकों की अंत्येष्टि करनी पड़ती थी जिनका कोई सगा संबंधी नहीं होता था। उन्हें जल्लाद के रूप में भी कार्य करना पड़ता था।

प्रश्न 24. “विश’ (Vish) पद का क्या अर्थ है ?
उत्तर : विश’ की संज्ञा वैश्यों को दी जाती थी। उत्तर वैदिक । काल में वैश्य लोग राजा को राजस्व या कर (Tar) देते थे। वहीं लोग व्यापारिक गतिविधियों में भाग लेते थे। देश का समस्त व्यापार उन्हीं के हाथों में था।

प्रश्न 25. इतिहासकार महाभारत की विषयवस्तु का कौन-कौन से दो मुख्य शीर्षकों में बाँटते हैं ? इनमें क्या अंतर है?
उत्तर : इतिहासकार महाभारत की विषयवस्तु को मुख्य रूप से आख्यान तथा उपदेशात्मक शीर्षकों में बाँटते हैं। आख्यान में कहानियों का संग्रह है, जबकि उपदेशात्मक भाग में सामाजिक आचार-विचार के मानदंडों का चित्रण है।

प्रश्न 26. मनुस्मृति के अनुसार स्त्रियों के लिए संपत्ति अर्जन करने के छः तरीके कौन-कौन से थे ?
उत्तर : (i) वैवाहिक अग्नि के सामने मिली भेंट।
(ii) वधुगमन के समय मिली भेंट।
(iii) स्नेह के प्रतीक के रूप में मिली भेंट।
(iv) भाई और माता-पिता द्वारा दिए गए उपहार।

प्रश्न 27. 1000 ई.पू. के लगभग ब्राह्मणीय पद्धति के अंतर्गत लोगों को गोत्रों में वर्गीकृत करने वाले दो महत्त्वपूर्ण वि6 नियमों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर : (i) 1000 ई.पू. के लगभग ब्राह्मणीय पद्धति के अंतर्गत प्रत्येक गाँव एक वैदिक ऋषि के नाम पर होता था विवाह के पश्चात् स्त्रियों को पिता के स्थान पर पति के गोत्र का माना जाता था।
(ii) एक ही गोत्र के सदस्य परस्पर वैवाहिक संबंध स्थापित नहीं रख सकते थे।

प्रश्न 28. ‘आश्रम’ (Ashram) के बारे में आप क्या जानते हैं ?
उत्तर : वैदिक काल में प्रत्येक व्यक्ति की आयु को 100 वर्ष मानकर उसे चार भागों (आश्रमों) में बाँट दिया गया। इन आश्रमों का विभाजन अग्रलिखित ढंग से किया जाता था :
(i) ब्रह्मचर्य आश्रम पहले 25 वर्ष की आयु तक।
(ii) गृहस्थ आश्रम 25 से 50 वर्ष की आयु तक।
(iii) वानप्रस्थ आश्रम 50 से 75 वर्ष की आयु तक।
(iv) संन्यास आश्रम 75 से 100 वर्ष की आयु तक।

प्रश्न 29. ‘यज्ञ’ (Yagya) शब्द का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर : अग्नि के हवन कुंड के सामने तल्लीनता एवं तन्मयता से बैठकर मंत्रोच्चारण करना तथा किसी निश्चित उद्देश्य की प्राप्ति के लिए अग्नि में आहुतियाँ डालना यज्ञ कहलाता है।

प्रश्न 30. आचार-संहितायें क्यों तैयार की गई ?
उत्तर : (i) नगरीकरण के साथ दूर-दूर के लोगों के बीच विचारों का आदान-प्रदान होने लगा। फलस्वरूप विश्वासों और व्यवहारों में अंतर आने लगा।
(ii) इस चुनौती के जवाब में ब्राह्मणों ने समाज के लिए विस्तृत आचार-संहितायें तैयार की।

प्रश्न 31. अश्वमेघ (Ashwmegha) का क्या अर्थ है ?
उत्तर : ‘अश्वमेघ’ का शाब्दिक अर्थ है-अश्व -घोड़ा, व मेघ-बादल अर्थात् बादल रूपी घोड़ा। जिस प्रकार बादल वायुमंडल में स्वेच्छा से विचरण करता रहता है, उसी प्रकार ‘अश्वमेघ यज्ञ का घोड़ा अपनी इच्छा से कहीं भी घूमता (दौड़ता) रहता ‘है।
अश्वमेघ’ प्राचीन काल में एक यज्ञ विशेष का नाम था, जिसमें घोड़े के माथे पर एक जयपत्र बाँधा जाता था और उसे स्वच्छन्द रूप से छोड़ दिया जाता था (शक्तिशाली व प्रतापी राजाओं द्वारा यह कार्य किया जाता था) घोड़े का अपने यहाँ दौड़कर वापस आने का अर्थ था-राजा का निर्विरोध शासन स्थापित होना। यदि कोई घोड़े को पकड़ लेता था तो उसे घोड़े के स्वामी (राजा) से युद्ध करना पड़ता था।

प्रश्न 32. प्राचीन समाज में गोत्र के महत्त्व के किन्हीं दो बिंदुओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर-गोत्र का महत्व :
1.’गोत्र’ शब्द का अर्थ है : कुल, वंश, परिवार अथवा खानदान। दूसरे शब्दों में एक ही पूर्वज की संतान या उत्तराधिकारियों को एक ही गोत्र का माना जाता है, अतः वैदिक काल में एक ही गोत्र के लोगों में वैवाहिक संबंध स्थापित नहीं हो सकते थे क्योंकि दोनों (वर तथा वधू) की धमनियों में एक ही पूर्वज का रक्त होता था। ऐसा करना नीति संगत न था।
2.एक ही परिवार या कबीले के लोग समान वर्ण के होते थे, व्यावहारिक रूप से उसी गोत्र के सदस्य माने जाते थे जो एक ही गोत्र से संबंधित लोग होते थे उन्हें एक महान वैदिक ऋषि का वंशज या उत्तराधिकारी माना जाता था। अन्य वस्तुओं के साथ-साथ उनसे उम्मीद की जाती थी कि वे उस गोत्र के साथ परस्पर विवाह न करें।

प्रश्न 33. वर्ण और जाति में क्या अंतर था ? इनमें एक समान अंतर भी बताओ।
उत्तर : 1. वर्ण केवल चार थे, जबकि जातियों की संख्या निश्चित नहीं थी।
2.वर्ण व्यवस्था में समाज के सभी समुदाय शामिल नहीं थे परंतु जातीय व्यवस्था में उन समुदायों को भी शामिल कर लिया गया जो वर्ण-व्यवस्था का अंग नहीं थे।
समानता : वर्ण तथा जाति दोनों ही जन्म पर आधारित थीं।

प्रश्न 34. धर्मशास्त्रों के अनुसार ब्राह्मणों की दो आदर्श जीविकाओं का उल्लेख कीजिये।
उत्तर : धर्मशास्त्र के अनुसार ब्राह्मणों की दो आदर्श जीविकाओं का उल्लेख इस प्रकार है। :
1.अध्ययन, वेदों की शिक्षा।
2.यज्ञ करना और करवाना तथा दान लेना एवं दान देना।

प्रश्न 35, मध्य एशिया से आए शकों को ब्राह्मण क्या मानते थे? उनके सुप्रसिद्ध शासक का नाम व उसका एक योगदान लिखिए।
उत्तर : शक जो मध्य एशिया से भारत आए ब्राह्मण मलेच्छ, बर्बर अथवा अन्य देशीय मानते थे। उनके सुप्रसिद्ध शासक का नाम राजा रूद्रदामन था जिसके द्वारा सुदर्शन सरोवर के जीर्णोद्धार का वर्णन मिलता है।

प्रश्न 36 धर्म-शास्त्रों के अनुसार क्षत्रियों के किन्हीं दो आदर्श कार्यों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर : धर्म-शास्त्रों के अनुसार क्षत्रियों के आदर्श कार्य इस प्रकार थे : (i) युद्ध करना, (ii) लोगों को सुरक्षा प्रदान करना, (iii) न्याय करना, (iv) वेद पढ़ना, (v) यज्ञ करवाना, (vi) दान-दक्षिणा देना।

प्रश्न 37. महाभारत की एक सबसे चुनौतीपूर्ण उपकथा का उल्लेख कीजिए।
उत्तर : महाभारत की सबसे चुनौतीपूर्ण उपकथा द्रौपदी से पांडवों का विवाह है। यह विवाह बहुपति प्रथा का उदाहरण है। इतिहासकारों के अनुसार यह प्रथा संभवत: किसी समय शासकों के विशिष्ट वर्ग में मौजूद थी।

प्रश्न 38. ऋग्वेद के ‘पुरुषसूक्त’ के अनुसार वर्ण-व्यवस्था के चार वर्णों का उदय किस प्रकार हुआ था ?
उत्तर : ‘पुरुषसूक्त’ के अनुसार वर्ण-व्यवस्था के चार वर्णों का उदय आदि मानव ‘पुरुष’ बलि से हुआ था। उसका मुँह ब्राह्मण बना तथा उसकी भुजा से क्षत्रिय बना। वैश्य उसकी जंघा थे और उसके पैरों से शूद्र की उत्पत्ति हुई।

प्रश्न 39. ब्राह्मणों द्वारा विभिन्न वर्गों के लिए निर्धारित नियमों का पालन करवाने के लिए अपनाई गई किन्हीं दो नीतियों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर : ब्राह्मणों द्वारा विभिन्न वर्णों के लिए निर्धारित नियमों का पालन करवाने के लिए अपनाई गई दो नीतियों का उल्लेख इस प्रकार है :
(क) एक, वर्ण व्यवस्था की उत्पत्ति एक दैवीय व्यवस्था है।
(ख) दूसरा, वे शासकों को यह उद्देश्य देते थे कि वे इस व्यवस्था के नियमों का अपने राज्य में अनुसरण करें।

प्रश्न 40. महाभारत की मूलकथा के रचयिता कौन थे? महाभारत के पाँचवीं शताब्दी ई. पूर्व से लेकर 400 शताब्दी के बीच पूर्ण होने के विभिन्न चरणों का वर्णन कीजिए।
उत्तर : (i) महाभारत की मूल कथा के रचयिता भाट सारथी थे जिन्हें ‘सूत’ कहा जाता था।
(ii) पाँचवीं सदी ई.पू. से ब्राह्मणों ने इस कथा परंपरा पर अपना अधिकार कर लिया तथा इसकी रचना की।
(iii) यह वह काल था जब महाभारत की कथा कुरु तथा पांचाल के इर्द-गिर्द घूमती थी।
(iv) 200 ई.पू. से 200 ईसवी के मध्य महाभारत के रचनाकाल का एक और चरण आता है। इस समय विष्णु देवता की आराधना महत्त्वपूर्ण होती जा रही थी। श्रीकृष्ण जो महाभारत के प्रमुख नायकों में हैं, उन्हें विष्णु का रूप बताया गया था।
(v) संभवत: प्रारंभ में इस महाकाव्य में 10 हजार से कम श्लोक रहे होंगे जो बढ़कर 1 लाख हो गये। ऋषि व्यास को साहित्यिक परंपरा में इस बृहत रचना का रचयिता स्वीकार किया जाता है।

प्रश्न 41. बारहवीं से सातवीं शताब्दी ई. पूर्व के मिलने वाले घरों के बारे में डॉ. लाल के दो अवलोकनों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर-1951-52 में पुरातववेत्ता बी. बी. लालू ने मेरठ जिले (उ. प्र.) के हस्तिनापुर नामक एक गाँव में उत्खनन किया। सम्भवतः यह महाभारत के उल्लेखित पाण्डवों की राजधानी हस्तिनापुर थी।बी. बी. लाल को यहाँ आबादी के पाँच स्तरों के साक्ष्य प्राप्त हुए थे जिनमें से दूसरा और तीसरा स्तर हमारे विश्लेषण के लिए महत्त्वपूर्ण है। दूसरे स्तर (लगभग बारहवीं से सातवीं शताब्दी ई. पू.) पर मिलने वाले घरों के बारे में लाल कहते हैं” जिस सीमित क्षेत्र का उत्खनन हुआ वहाँ से आवास गृहों की कोई निश्चित परियोजना नहीं मिलती किन्तु मिट्टी की बनी दीवारें और कच्ची मिट्टी की ईंटें अवश्य मिलती हैं। सरकंडे की छाप वाले मिट्टी के पलस्तर की खोज इस बात की ओर इशारा करती है कि कुछ घरों की दीवारें सरकंडों की बनी थी जिन पर मिट्टी का पलस्तर चढ़ा दिया जाता था।

प्रश्न 42. ‘प्रारंभिक समाजों में 600 ई.पू. से 600 ई. तक, राजनीतिक सत्ता या राजत्व का उपयोग हर वह व्यक्ति कर सकता था, जो समर्थन और संसाधन जुटा सके।’ कीजिए।
उत्तर : (i) यद्यपि शास्त्रों के अनुसार केवल क्षत्रिय राजा हो सकते थे तथापि अनेक महत्त्वपूर्ण राजवंशों की उत्पत्ति अन्य वर्णों से भी हुई थी।
(ii) वास्तव में राजनीतिक सत्ता का उपयोग हर वह व्यक्ति कर सकता था जो समर्थन तथा संसाधन जुटा सके। राजत्त्व क्षत्रिय कुल में जन्म लेने पर शायद ही निर्भर करता था।


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