याद रखने योग्य बातें – एक साम्राज्य की राजधानी : विजयनगर – Class 12th History Chapter 7

Index

1. ईंट मनके और अस्थियाँ

1. आरंभ 2. निर्वाह के तरीके 3. मोहनजोदड़ो 4. सामाजिक विभिन्नताओं का अवलोकन 5. शिल्प उत्पादन के विषय में जानकारी 6. माल प्राप्त करने सम्बन्धी नीतियाँ 7. मुहरें लिपि तथा बाट 8. प्राचीन सभ्यता 9. सभ्यता का अंत 10. हड़प्पा सभ्यता की खोज 11. अतीत को जोड़कर पूरा करने की समस्याएं मानचित्र बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर 1 अंकीय प्रश्न उत्तर 2 अंकीय प्रश्न उत्तर

2. राजा किसान और नगर

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

3. बंधुत्व जाति और वर्ग

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

4. विचारक विश्वास और इमारतें

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर 1 बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर 2

6. भक्ति सूफी और परम्पराएँ

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

7. एक साम्राज्य की राजधानी विजयनगर

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

8. उपनिवेशवाद और देहात

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

10. उपनिवेशवाद और देहात

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

11. विद्रोह और राज

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

13. महात्मा गाँधी और आन्दोलन

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

15. संविधान का निर्माण

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

एक साम्राज्य की राजधानी : विजयनगर याद रखने योग्य बातें

  1. माना जाता है कि विजयनगर सामान्य को स्थापना 1336 में दो जब-इखिर जमा बुक्का ने की यो। इस्ल साम्राज्य की अस्थिर सीमाओं लग-अलग भाषाएँ बोलने वाले तथा अलग-अलग धार्मिक परंपराओं को मानने वाले लोग रहते थे।
  2. विजयनगर शासकों ने अपनी उत्तरी सीमाओं पर दक्कन के सुलतानों होसा के गजपति शासकों से संघर्ष किया 4वीं से 16वीं शताब्दी पन यद्धकता युशल अवशोना पर आधारित होती थी इसलिए प्रतिस्पर्धा राज्यों के लिए अरब तथा मध्य एशिया से उत्तम पोड़ों का अपात बहुत हो महत्त्व रखता था।
  3. 1498 इ पुर्तगाली व्यापारी उपमहाद्वीप के पश्चिमी तट पर आए और व्यापारिक तथा सामरिक केंद्र स्थापित करने का प्रयास करने लगे। में अरकों का बहुत हो कुशलतापूर्वक प्रयोग करते थे।
  4. विजयनगर अपने मसालों, वस्त्रों तथा रत्नों के लिए प्रसिद्ध था। ऐसे शहरों के लिए व्यापार प्रतिष्ठा का सूचक माना जाता था। यहाँ की ध की जनता में महंगी विदेशी वस्तुओं की काफी मांग थी।
  5. विजयनगर का पहला राजवंश संगम वंश कहलाता था। इस वंश ने 1485 ई० तक शासन किया उन्हें सुलवों ने उखाड़ फेंका, इसके बाद तुलुवों ने उनका स्थान लिया। कृष्णदेव राय तुलुव वंश का सबसे प्रसिद्ध राजा था।
  6. कृष्णदेव राय के शासन की मुख्य विशेषता विस्तार और सुदृढीकरण था।
  7. कृष्णदेव को कुछ शानदार मंदिरों के निर्माण तथा कई महत्वपूर्ण मंदिरों में भव्य गोपुरमों के निर्माण का श्रेय प्राप्त है। उसने अपनी माँ के नाम पर विजयनगर के समीप नगरपुरम नामक उपनगर भी बसाया। कृष्णदेव को मृत्यु के पश्चात् 1529 में राजकीय दाँचे में तनाव आने लगा। अत: 1542 तक केंद्र पर अराविंदु वंश का नियंत्रण स्थापित हो गया। 17वीं शताब्दी के अंत तक सत्ता पर इसी वंश का नियंत बना रहा।
  8. कई नायका ने विजयनगर के शासकों की प्रभुसत्ता के आगे समर्पण किया था परंतु वे प्रायः विद्रोह का देते थे और इन्हें सैनिक कार्यवाही द्वारा हो दबाया जाता था ।
  9. अमर-नायक-प्रणाल्ी विजयनगर साम्राज्य को एक नई राजनीतिक खोज थी। इस प्रणाली के कई तत्त्व संभवत: दिल्ली अमर-नायक सैनिक कमांडर थे। उन्हें राज्य द्वारा प्रशासन के लिए राज्य क्षेत्र दिए जाते थे वे किसानों, शिल्पियों तथा सल्तनत की इक्का प्रणाली से लिए गए थे।
  10. अमर-नायक सैनिक कमांडर थे। उन्हें राज्य द्वारा प्रशासन के लिए राज्य-क्षेत्र दिए जाते थे। वे किसानों, शिल्पियों तथा व्यापारियों से भू-राजस्व तथा अन्य कर वसूल करते थे।
  11. अमर-नायक राजा को वर्ष एक बार भेट भेजा करते थे। अपनी स्वामिभक्ति प्रकट करने के लिए राजदरबार में के साथ स्वप अपस्थित होते.थे।
  12. विजयनगर राहर मिजयनगर साम्राज्य को राजधानी भो। अधिकाश राजधानियों की तरह यह भी एक विशिष्ट भौतिक र तथा स्थापत्य शैली से सुसज्जित शहर था।
  13. विजयनगर के सबसे महत्वपूर्ण तौजों में एक हील का निर्माण 15वीं शताब्दी के आरंभिक वर्षों में हुआ था। इसे -‘कमलपुरम् जलाशय’ कहा जाता है।
  14. विजयनगर शहर की एक मह वपूर्ण विशेषता यहाँ की एक विशाल किलेबंदी थी जिसे दीवारों से पेरा गया था। 15वी হ में फारस से कालीकाट (कोजीकोड) आए दूत अब्दुर्रान्जाक ने दुर्गा की सात पंक्तियों का उल्लेख किया है।
  15. विजयनगर को दूसरों किलेबंदी नमरीय सेड के आणविक पण से चयों ओर बनो हुई थी और तोसरी से शासकौय केद्र भेरा गया था।
  16. किले बंद बस्ती में जाने वाले प्रवेश द्वार पर बनी मेहराब और हार के ऊपर बनी गुंबद संभवतः तुर्की सुलतानों को स्थापत्य = के नमूने भे। कला-इतिहासकार इस शैली को इंडो-इसलामिक (हिंद-इस्लामी ) शैली कहते हैं।
  17. क्षेत्र के सर्वेक्षण पता चलता है कि पूरे शहरी क्षेत्र में बहुत से पूजा-स्थल और छोटे मंदिर थे जो विविध संप्रदायों से र रखते थे। सर्वक्षण से यह भी संकेत मिलता है कि कुएँ, बरसात के पानी वाले जलाशय तथा मंदिरों के जलाशय संभवत: स्ना नगर-निवासियों के लिए जल के स्रोत थे।
  18. “राजा का भवन” नामक संरचना राजकीय क्षेत्र में सबसे विशाल है। इसके दो सबसे प्रभावशाली मंच हैं जिन्हें ” सभाम तथा महानवमी डिब्या” कहा जाता है।
  19. लोटस (कमल) महल राजकीय केंद्र के सबसे सुंदर भवनों में एक है। इसे यह नाम 19वीं शताब्दी के अंग्रेज यात्रियों ने दिय था।
  20. राजकीय केंद्र में स्थित मंदिरों में से ‘हजार राम मंदिर’ अत्यंत दर्शनीय है। इसका प्रयोग संभवत: केवल राजा और उसके परिका द्वारा ही किया जाता था।
  21. विजयनगर के शासक भगवान विरुपाक्ष की ओर से शासन करने का दावा करते थे। सभी राजकीय आदेशों पर प्राय: कना लिपि में “श्री विरुपाक्ष” शब्द अंकित होता था।
  22. मंदिर स्थापत्य में कई नए तत्त्वों का समावेश हुआ इनमें विशाल स्तर पर बनाई गई संरचनाएँ शामिल हैं। ये संरचनाएँ राजको सत्ता की प्रतीक थीं।
  23. मंदिर परिसरों में भी एक महत्त्वपूर्ण विशेषता रथ-गलियाँ हैं जो मंदिर के गोपुरम् से सीधी रेखा में जाती हैं। इन गलियों का फर्श पत्थर के टुकड़ों से बनाया गया था। इनके दोनों ओर स्तंभ वाले मंडप थे जिनमें व्यापारी अपनी दुकानें लगाया करते थे।
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