याद रखने योग्य बातें – किसान,जमीनदारऔर राज्य{कृषि समाजऔर मुगल साम्राज्य – Class 12th History Chapter 8

Index

1. ईंट मनके और अस्थियाँ

1. आरंभ 2. निर्वाह के तरीके 3. मोहनजोदड़ो 4. सामाजिक विभिन्नताओं का अवलोकन 5. शिल्प उत्पादन के विषय में जानकारी 6. माल प्राप्त करने सम्बन्धी नीतियाँ 7. मुहरें लिपि तथा बाट 8. प्राचीन सभ्यता 9. सभ्यता का अंत 10. हड़प्पा सभ्यता की खोज 11. अतीत को जोड़कर पूरा करने की समस्याएं मानचित्र बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर 1 अंकीय प्रश्न उत्तर 2 अंकीय प्रश्न उत्तर

2. राजा किसान और नगर

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

3. बंधुत्व जाति और वर्ग

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

4. विचारक विश्वास और इमारतें

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर 1 बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर 2

6. भक्ति सूफी और परम्पराएँ

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

7. एक साम्राज्य की राजधानी विजयनगर

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

8. उपनिवेशवाद और देहात

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

10. उपनिवेशवाद और देहात

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

11. विद्रोह और राज

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

13. महात्मा गाँधी और आन्दोलन

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

15. संविधान का निर्माण

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर
  1. मुगल राज्य अपनी आय का बहुत बड़ा भाग कृषि उत्पादन से प्राप्त का इसलिए राजस्व निर्धारित करने वाले. राजस्व को वसूली भने जाले ठच्या हिसाब-किताब रखने वाले अधिकारी ग्रामीण समाज नियंत्रण में रखने का पूरा प्रयास करते थे।
  2. खेतिहर समाज की मूल इकाई गाँव थी। किसान साल भर फसल की चार से जुड़े कार्यों में जुटे रहते थे। इनमें जमीन को जुताई, बीज और फसल पकने पर उसकी कटाई करना आदि कार्य शामिल को इसके अतिरिक्त वे उन वस्तुओं के उत्पादन में भी शामिल थे।
  3. किसान अपने बारे में स्वयं नहीं लिखते थे। इसलिए 16वीं और 17वीं दो के कृषि इतिहास के लिए हमारे मुख्य स्रोत वे ऐतिहासिक ग्रंथ तथा दस्तावेज हैं।
  4. आइन-ए-अकबरी’ सबसे महत्वपूर्ण ऐतिहासिक ग्रंथों में एक था इसे अकबर के दरबारी इतिहासकार अबुल फजल ने लिखा था।
  5. ‘वन’ अथवा ‘आइन-ए-अकबरी’ का मुख्य उद्देश्य अकबर के साम्राज्य का एक एसा at an Ag ” ‘ शक्तिशाली सत्ताधारी वर्ग सामाजिक मेल-जोल बनाकर रखता सत्ताधारी वर्ग सामाजिक मेल-जोल बनाकर रखता था।
  6. ईस्ट इंडिया कंपनी के भी बहुत-से दस्तावेज हैं जो पूर्वी भारत में कृषि-संबंधों पर प्रकाश डालते हैं। इन सभी लोतों में किसानों, जमीदारों और राज्य के बीच समय-समय पर होने वाले संघर्षों के ब्योरे दर्ज हैं।
  7. 17वीं शताब्दी के स्रोत दो प्रकार के किसानों की जानकारी देते हैं-सुट्-काश्त तथा पाहि-काश्त। पहले प्रकार के किसान उन्हों गांवों में रहते थे जिनमें उनकी जमीन थी। पाहि-काश्त वे किसान थे जो दूसरे गाँवां से ठेके पर खेती करने आते थे।
  8. ( खेती व्यक्तिगत स्वामित्व के सिद्धांत पर आधारित थी। किसानों की जमीन उसी तरह खरीदी-बेची जा सकती थी जैसे अन्य संपत्ति धारकों की।
  9. सिंचाई साधनों के विकास में राज्य की सहायता भी मिलती थी। पंजाब में शाह नहर इसका उदाहरण है। किसान कृषि में ऐसी निकों का प्रयोग भी करते थे जो प्राथ: पशुबल पर आधारित होती थी ।
  10. खेती मौसम के दो मुख्य चक्रों के दौरान की जाती थी एक खरीफ (पतझड़ में) और दूसरी रवी (बसंत में)। सूखे इलाको और मांजर जमीन को छोड़कर अधिकतर स्थानों पर साल में कम-से-कम दो फसलें उगाई जाती थीं।
  11. .यो शताब्दी में बाहरी सम्मार से क कई कम भारीय उपमहादोष यतुंचार मक्का भारत में.मेमा और आया। टमाटर, मान और मिर्च जैसी माया यो नई दुनिया में भारत पहुंची।
  12. किसान क पनी जमीन पर ्या स्वानित्य होता व्या। जज तक इनाके सामाविक आन्ल्च का पशन है ग्रामीण समुदाय का अगास समुदाय के तीन पटका-मंतितर किसान पच्चायत और गांव का मुखिया
  13. पशुपतर और बागवानी में बाते मुनाफे के कारण और, मुन्वर और माली सो जातिय सामाजिक सी पुणे प्रदेशों में पशुपालक तच्या माहारी जातियों को किसानों जैसी सामाजिक स्थिति पाने लगा।
  14. गांव की पंचायत गांव के मनाँको सभा होती थी। प्रायः वे गांव के महत्वपूर्ण लोग हुज्जा करते थे जिनकाहोती थी।
  15. पंचायत का मुखिया अपने पद पर तभी तक बना बताया जब तक गांव केजों को उसपर माता डाला रखने पर बुजुर्ग उसे पद से हटा सकते थे। गांव के आय-व्यय का हिसाब-किताब अपनी निगरानी म तयार कर का मुख्य काम था।
  16. पचाया का जुर्माना लगाने तथा किसी दोषी को समुदाय से निष्कालित करने जैसे धिकार प्राप्त थ समदाय से एक कदा कदम था जो एक सौमित समय के लिए लागू किय जाता था।
    कुमार, लोहार, बदई, यहाँ तक कि सुनार जैसे ग्रामीण दस्वकार भी अपनी सेवाएं गाँव के लोगों को दले यो की दस्तकारों को उनको सेवाओं के बदले अपनी फसल का एक हिस्सा दे देते थे या फिर बेकार पड़ा खेती लायक एक टुकड़ा।
  17. गुगतकात में महिलाएँ और पुरुष कधे से कथा मिलाकर खेतों में काम करते थे। पुरुष खेत जोतते थे त्या हाल थकि महिलाएँ युआई, निराई और क्या के साथ-साथ पो हुई फसल से दाना निकालने का काम करतो यो
  18. समसामयिक रचनाएँ जंगल में रहने वालों के लिए ‘जगली’ शब्द का प्रयोग करती है परंतु जंगली होने का था कि ये असभ्य थे। उन दिनों इस शब्द का प्रयोग ऐसे लोगों के लिए होता था जिनका निर्वाह जंगल के और स्थानांतरित खेती से होता था।
  19. वाणिज्यिक खेती का प्रसार एक ऐसा बाहरी कारक सा जो जगलवासियों के जीवन को भी प्रभावित करता था। शद, और लाख आदि जंगली उत्पादों की बहुत अधिक माँग भी। लाख जैसी कुछ वस्तुएँ तो 17वीं शताब्दी में भारत से करता थे। उत्पादो होने वाले निर्यात की मुख्य पस्तुएँ थी।
  20. पुगल भारत में जमीदारों की आय का स्रोत तो कृषि था, परंतु वे कृषि उत्पादन में प्रत्यक्ष भागीदारी नहीं करते थे, वे जमीन के स्वामी होते थे। ग्रामीण समाज में ऊँची स्थिति के कारण उन्हें कुछ विशेष सामाजिक और आर्थिक सुविधा
  21. सैनिक संसाधन तमादारों की शक्ति का एक अन्य साधन था। अधिकांश जमीदारों के पास अपने किलें भी थे और सैनिक टुकड़ियाँ भी थीं, जिसमें घुड़सवारों, तोपखाने ओर पैदल सिपाहियों के जत्थे शामिल होते थे।
  22. भू-राजस्व मुगल साम्राज्य की आय का प्रमुख स्रोत था। इसलिए कृषि उत्पादन पर नियंत्रण रखने के लिए और तेजी से । साम्राज्य में राजस्व के आकलन तथा वसूली के लिए एक प्रशासनिक तंत्र का होना आवश्यक था। इस तंत्र में ‘दीवान भूमिका बहुत ही महत्त्वपूर्ण थी।
  23. राजस्व निर्धारित करते समय राज्य अपना हिस्सा अधिक-से-अधिक रखने की कोशिश करता था परंतु स्थानीय रिशी देखते हुए कभी-कभी इतनी वसूली कर पाना संभव नहीं हो पाता था।
  24. भारत के लोगों और मुगल साम्राज्य के बारे में विस्तृत जानकारी देकर आइन ने स्थापित परंपराओं को पीछे छोड़ दिया इस तरह ।7वीं शताब्दी के भारत के अध्ययन के लिए

किसान,जमीनदारऔर राज्य{कृषि समाजऔर मुगल साम्राज्य} याद रखने योग्य

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