Class 12th Political Science भाग-2 Chapter 1 Important Question Answer 3 Marks राष्ट्र-निर्माण की चुनौतियाँ

प्रश्न 1. किन चार देसी रियासतों ने शुरू-शुरू में भारतीय संघ में शामिल होने का विरोध किया था ? क्यों?
उत्तर : जूनागढ़, हैदराबाद, कश्मीर और मणिपुर की देसी रियासतों ने शुरू-शुरू में भारतीय संघ में शामिल होने का विरोध किया था। देसी रिसासतों की समस्या जटिल थी। कोई राजा अपनी सत्ता त्यामना नहीं चाहता था। वे अपनी प्रजा को लोकतांत्रिक अधिकार देना नहीं चाहते थे। ये रजवाड़े अपना स्वतंत्र अस्तित्व कायम रखना चाहते थे।
रजवाड़ों के शासकों को मनाने-समझाने में सरदार पटेल ने ऐतिहासिक भूमिका निभाई और अधिकतर रजवाड़ों को उन्होंने भारतीय संघ में शामिल होने के लिए राजी कर लिया। 15 अगस्त, 1947 से पहले ही ये रजवाड़े भारतीय संघ में शामिल हो गए। थे।

प्रश्न 2. भारतीय संघ में देसी रजवाड़ों के विलय में सरदार पटेल की भूमिका की व्याख्या कीजिए ।

अथवा

भारत के एकीकरण के लिए सरदार पटेल की भूमिका का उल्लेख कीजिए।

अथवा

रजवाड़ों को भारतीय संघ में शामिल करने के मूल आधार क्या थे? इस कार्य में किसने ऐतिहासिक भूमिका निभाई ?
उत्तर : (i) स्वतंत्र भारत के प्रथम गृह मंत्री की हैसियत से सरदार पटेल ने सबसे पहले 565 रजवाड़ों का भारत संघ में विलय करना ही अपना पहला कर्तव्य समझा।
(ii) सरदार पटेल के नेतृत्व में ही “राज्यों का दस्तावेज”. तैयार किया गया। उन्हीं ने राजाओं और राजकुमारों से इस दस्तावेज पर हस्ताक्षर करवाए, जनता का रक्त चूसने के लिए अंग्रेजों ने यह पुख्ता हथियार बनाया। राजाओं को इसके लिए सहमत करना बहुत कठिन था क्योंकि वे भारत सरकार अधिनियम 1935. और स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के कानूनी आधार पर अड़े हुए थे।

प्रश्न 3. 1947 में भारत विभाजन के तुरंत बाद रजवाड़ों के प्रति भारतीय सरकार का क्या दृष्टिकोण था ?
उत्तर : 1947 में भारत विभाजन के तुरंत बाद रजवाड़ों के प्रति भारतीय सरकार का दृष्टिकोण : छोटे-बड़े विभिन्न आकार के देशों में बँट जाने की इस संभावना के विरुद्ध आंतरिक सरकार ने कड़ा रुख अपनाया। देसी रजवाड़ों की इस चर्चा से तीन बातें सामने आती हैं

1.पहली बात तो यह कि अधिकतर रजवाड़ों के लोग भारतीय संघ में शामिल होना चाहते थे।
2.दूसरी बात यह कि भारत सरकार का रुख लचीला था और वह कुछ इलाकों को स्वायत्तता देने के लिए तैयार थी जैसा कि जम्मू-कश्मीर में हुआ। भारत सरकार ने विभिन्नताओं को सम्मान देने और विभिन्न क्षेत्रों की माँगों को संतुष्ट करने के लिए यह रुख अपनाया था।
3.तीसरी बात, विभाजन की पृष्ठभूमि में विभिन्न इलाकों के सवाल पर खींचतान जोर पकड़ रही थी और ऐसे में देश की क्षेत्रीय अखंडता-एकता का सवाल सबसे ज्यादा अहम हो उठा था शांतिपूर्ण बातचीत के जरिए लगभग सभी रजवाड़े जिनकी सीमाएँ आजाद हिन्दुस्तान की नई सीमाओं से मिलती थीं, 15 अगस्त, 1947 से पहले ही भारतीय संघ में शामिल हो गए। , हैदराबाद, कश्मीर और मणिपुर की रियासतों का विलय जूनागढ़, बाकियों की तुलना में थोड़ा कठिन साबित हुआ।

प्रश्न 4. राष्ट्र निर्माण के प्रति नेहरू प्रस्ताव के कौन-से दो उद्देश्य थे ?
उत्तर : राष्ट्र निर्माण के प्रति नेहरू प्रस्ताव के दो मुख्य उद्देश्य निम्नलिखित थे :
1.पं. नेहरू देश का बौद्धिक विकास करने के पक्ष में थे, वे भारत को आधुनिक एवं विकसित राष्ट्र बनाना चाहते थे। इसके लिए उन्होंने समाज के प्रत्येक वर्ग के विकास पर बल दिया, विशेषकर महिलाओं के सामाजिक, राजनीतिक एवं आर्थिक विकास पर ।
2.पं. नेहरू देश निर्माण के लिए औद्योगीकरण के पक्ष में थे। उन्होंने राजनीतिक एवं आर्थिक समस्याओं को धार्मिक आधार की अपेक्षा वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा, उन्होंने विज्ञान तथा औद्योगीकरण का मानवतावादी सहिष्णुता तथा करुणा के आदर्शों के साथ तालमेल करने पर बल दिया।

प्रश्न 5. भारत की आजादी के समय राष्ट्र निर्माण में सबसे बड़ी बाधा क्या थी ?
उत्तर : स्वतंत्रता के तुरंत बाद राष्ट्र निर्माण की चुनौती सर्वाधिक प्रमुख थी। इसके लिए :
1.लोकतंत्र को मजबूत करना।
2.पाकिस्तान से आए शरणार्थियों की पुनर्वास संबंधी चुनौती |
3.साम्प्रदायिक एकता की चुनौती तथा 4. भारत में आर्थिक विकास संबंधी चुनौती का सामना करना आवश्यक था।

प्रश्न 6. द्वि-राष्ट्रीय सिद्धांत से क्या अभिप्राय है? ब्रिटिश इंडिया के विभाजन पर किसने जोर दिया ?
उत्तर : 1. द्वि-राष्ट्रीय सिद्धांत के अनुसार भारत किसी एक कौम नहीं, वरन् हिंदू तथा मुसलमानों दो कौमों का देश है।
2.मुस्लिम लीग द्वारा ब्रिटिश इंडिया के विभाजन पर जोर दिया गया।

प्रश्न 7. राज्य पुनर्गठन आयोग की रिपोर्ट का आधार क्या था ?
उत्तर : राज्य पुनर्गठन आयोग की रिपोर्ट का आधार था कि राज्य की सीमाएँ विभिन्न भाषाओं की सीमाओं को प्रदर्शित करें।

प्रश्न 8. भारत के विभाजन अथवा एक राष्ट्र के दो टुकड़ों-भारत तथा पाकिस्तान में बँटने से संबंधित नहीं दो परिणामों पर प्रकाश डालिए ।
उत्तर : भारत विभाजन के परिणाम :
1.अगस्त, 1947 में बड़े पैमाने पर एक जगह की आबादी दूसरी जगह जाने को मजबूर हुई थी। लाखों लोगों की आबादी का यह स्थानांतरण आकस्मिक, अनियोजित और त्रासदी से भरा था। मानव इतिहास के अब तक ज्ञात सबसे बड़े स्थानांतरणों में से यह एक था।
2.धर्म के नाम पर एक समुदाय के लोगों ने दूसरे समुदाय के लोगों को बेरहमी से मारा। करोड़ों की संपत्ति जला दी गई।
3.लाहौर, अमृतसर और कलकत्ता जैसे शहर सांप्रदायिक अखाड़े में तबदील हो गए। जिन इलाकों में ज्यादातर हिंदू अथवा सिख आबादी थी, उन इलाकों में मुसलमानों ने जाना छोड़ दिया। ठीक इसी तरह मुस्लिम बहुल आबादी वाले इलाकों से हिंदू और सिख भी नहीं गुजरते थे। वर्षों तक सांप्रदायिक सद्भाव बिगड़ा रहा।

प्रश्न 9. “बँटवारे” ने विरासत में क्या दिया ?
उत्तर : “बँटवारे” ने विरासत में देश के टुकड़े करवा दिए अर्थात् विभाजन की प्रक्रिया में त्रासदी, हिंसा, प्रतिहिंसा तथा पीड़ा मिली। इसी के साथ लोगों में एक-दूसरे के प्रति नफरत, अमन-चैन का गायब होना शामिल था। एक देश के लोग दूसरे देश की पलायन कर रहे थे जिससे लोगों में अविश्वास व संदेह का माहौल पैदा हो गया था।

प्रश्न 10. किन्ही दो उदाहरणों द्वारा यह दर्शाइए कि भारत द्वारा अपनायी गई संघात्मक व्यवस्था एक लचीली व्यवस्था है।
उत्तर : दो उदाहरण :
1.कठोर संविधान : संघीय व्यवस्था में संविधान का कठोर होना अति आवश्यक है। भारत का संविधान कठोर संविधान है, चाहे यह इतना कठोर नहीं जितना कि अमेरिका का संविधान। संविधान की महत्वपूर्ण धाराओं में संसद दो-तिहाई बहुमत से राज्यों के आधे विधानमंडलो के समर्थन पर ही संशोधन कर सकती है।
2.संविधान को सर्वोच्चता : संघात्मक सरकार में शाक्तियों का विभाजन संविधान द्वारा होता है। इसलिए संविधान का सर्वोच्चता होना अति आवश्यक है। संविधान की सर्वोच्चता का अर्थ है कि केंद्र तथा प्रांतीय सरकारें संविधान के अनुसार कार्य करें। न ता केंद्र का और न ही प्रातों को संविधान का उल्लंघन करने का अधिकार प्राप्त है। कोई भी व्यक्ति या व्यक्तियों का समुदाय या संस्था संविधान से ऊपर नहीं होते।

प्रश्न 11. महात्मा गाँधी ने 15 अगस्त, 1947 के दिन स्वतंत्रता दिवस के किसी भी जश्न में भाग क्यों नहीं लिया? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर : महात्मा गाँधी ने 15 अगस्त, 1947 के दिन आजादी के किसी भी जश्न में भाग नहीं लिया। वे कोलकाता के उन इलाकों में डेरा डाले हुए थे जहाँ हिंदुओं और मुसलमानों के बीच भयंकर दंगे हुए थे। सांप्रदायिक हिंसा से उनके मन को गहरी चोट लगी थी। यह देखकर उनका दिल टूट चुका था कि ‘अहिंसा’ और ‘सत्याग्रह’ के जिन सिद्धांतों के लिए वे आजीवन समर्पित भाव से काम करते रहे, वे ही सिद्धांत इस कठिन घड़ी में लोगों को एक सूत्र में पिरो सकने में नाकामयाब हो गए थे। गाँधी जी ने हिंदुओं और मुसलमानों जोर देकर कहा कि वे हिंसा का रास्ता छोड़ दें। कोलकाता में गाँधी जी की मौजूदगी से हालात बड़ी हद तक सुधर चले थे और आज़ादी का जश्न लोगों ने सांप्रदायिक सद्भाव के जज्बे से मनाया। लोग सड़कों पर पूरे हर्षोल्लास के साथ नाच रहे थे। गाँधीजी की प्रार्थना सभा में बड़ी संख्या में लोग जुटते थे। बहरहाल यह स्थिति ज्यादा दिनों तक कायम नहीं रही। हिंदुओं और मुसलमानों के बीच दंगे एक बार फिर से भड़क उठे और गाँधी जी अमन कायम करने के लिए ‘उपवास’ पर बैठ गए।

प्रश्न 12. “स्वतंत्र भारत के नेता राजनीति को समस्या के रूप में नहीं देखते थे; वे राजनीति को समस्या के समाधान का उपाय मानते थे। ” आप इस कथन से कहाँ तक सहमत हैं ?
उत्तर : हाँ, मैं इस कथन से सहमत हूँ। हर समाज के लिए यह फैसला करना जरूरी होता है कि उसका शासन कैसे चलेगा और वह किन कायदे-कानूनों पर अमल करेगा। चुनने के लिए हमेशा कई नीतिगत विकल्प मौजूद होते हैं। किसी भी समाज में कई समूह होते हैं। इनकी आकांक्षाएँ अक्सर अलग-अलग और एक-दूसरे के विपरीत होती हैं। ऐसे में हम विभिन्न समूहों के हितों के आपसी – टकराव से कैसे निपट सकते हैं? इसी सवाल का जवाब है-लोकतांत्रिक राजनीति | सत्ता और प्रतिस्पर्धा राजनीति की दो सबसे ज्यादा जाहिर चीजें हैं, लेकिन राजनीतिक गतिविधि का उद्देश्य जनहित का फैसला करना और उस पर अमल करना होता है और ऐसा होना भी चाहिए । हमारे नेताओं ने इसी रास्ते को चुनने का फैसला किया।

प्रश्न 13. भारत की स्वतंत्रता के समय कितनी देसी रियासतें थीं? रजवाड़ों के शासकों द्वारा भारतीय संघ में सम्मिलित होने के लिए किस प्रलेख पर हस्ताक्षर करने आवश्यक थे ? कौन-से चार देसी रजवाड़े भारतीय संघ में शामिल नहीं होना चाहते थे ?
उत्तर : (i) भारत की स्वतंत्रता के समय 565 देसी रियासतें थीं।
(ii) रजवाड़ों के शासकों द्वारा भारतीय संघ में सम्मिलित होने के लिए ‘इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन’ (सहमति-पत्र) पर हस्ताक्षर करने आवश्यक थे।
(iii) निम्नलिखित चार रजवाड़े भारतीय संघ में शामिल नहीं होना चाहते थे : 1. हैदराबाद, 2. जूनागढ़, 3. कश्मीर, 4. मणिपुर

प्रश्न 14. कश्मीर समस्या पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखो।

अथवा

कश्मीर समस्या (Kashmir Problem) पर एक लेख लिखो।
उत्तर : स्वतंत्रता से पूर्व कश्मीर भारत के उत्तर-पश्चिम कोने में स्थित एक देशी रियासत थी। 15 अगस्त, 1947 को भारत स्वतंत्र हुआ और पाकिस्तान की भी स्थापना हुई। पाकिस्तान ने पश्चिमी सीमा प्रांत के कबाइली लोगों को प्रेरणा देकर तथा उनकी सहायता करके 22 अक्टूबर, 1947 को कश्मीर पर आक्रमण कर दिया। कश्मीर के महाराजा हरि सिंह ने भारत से सहायता माँगी और कश्मीर को भारत में शामिल करने की प्रार्थना की। भारत में कश्मीर का विधिवत विलय हो गया परंतु पाकिस्तान का आक्रमण जारी रहा और पाकिस्तान ने कुछ हिस्से पर कब्जा कर लिया। भारतीय सेना ने पाकिस्तानी सेना को खदेड़ दिया। भारत सरकार ने कश्मीर का मामला संयुक्त राष्ट्र को सौंप दिया और जनवरी, 1949 को कश्मीर का युद्ध विराम हो गया। संयुक्त राष्ट्र संघ ने कश्मीर की समस्या को हल करने का प्रयास किया पर यह समस्या अब भी है। इसका कारण यह है कि भारत सरकार कश्मीर को भारत का अंग मानती है जबकि पाकिस्तान कश्मीर में जनमत संग्रह करवा कर यह निर्णय करना चाहता है कि कश्मीर भारत में मिलना चाहता है या पाकिस्तान के साथ परंतु पाकिस्तान की माँग गलत अन्यायपूर्ण है, इसलिए इसे माना नहीं जा सकता।

प्रश्न 15. आजादी के बाद भारत में किस प्रकार की शासन व्यवस्था को अपनाया गया ? संक्षेप में बताइए।
उत्तर : आजादी की लड़ाई में समाज के सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी रही। भारतीयों के लिए स्वतंत्रता का अर्थ जनता की सत्ता कायम करना था। इसलिए भारत में लोकतांत्रिक व्यवस्था को अपनाया। लोकतंत्र को चुनने का अर्थ था विभिन्नताओं को पहचानना और उन्हें स्वीकार करना। सभी व्यक्तियों को मताधिकार प्रदान किया गया। भारत में संसदीय प्रणाली की व्यवस्था की गई, नागरिकों को मौलिक अधिकार प्रदान किये गए तथा मौलिक अधिकारों की सुरक्षा की गारंटी दी गई। लोकतंत्र को स्थापित करने के लिए लोकतांत्रिक संविधान तैयार किया गया।

प्रश्न 16. सरदार वल्लभ भाई पटेल पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखो।
उत्तर : सरदार वल्लभ भाई पटेल आजादी के आंदोलन के सक्रिय नेता तथा महात्मा गाँधी के अनुयायी थे। स्वतंत्र भारत उप-प्रधानमंत्री बने तथा प्रथम गृहमंत्री बनने का गौरव इन्हें प्राप्त के था। इन्होंने देसी रियासतों को भारतीय संघ में मिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन्हें ‘लौह पुरुष’ के नाम से जाना जाता है।

प्रश्न 17. स्वतंत्रता, समानता, लोकतंत्र तथा भ्रातृत्व की धारणाओं में से उस एक को पहचानिए जिसके प्रति भारत स्वतंत्रता संग्राम के दौरान पूर्णतया प्रतिबद्ध था।
उत्तर : भारत स्वतंत्रता संग्राम के दौरान पूर्णतया विदेशी सत्ता उखाड़ फेंकने एवं देश की स्वतंत्रता के प्रति पूर्णतया प्रतिबद्ध था। देश का हर राजनीतिक दल, समूह तथा समुदाय अंग्रेजी सत्ता को देश के लिए सबसे ज्यादा हानिकारक, शोषणपूर्ण एवं पिछड़ेपन के लिए उत्तरदायी मानता था। लोग यह मानते थे कि देश की स्वतंत्रता के बाद अपना संविधान होगा। लोग स्वयं ही देश में सभी लोगों की स्वतंत्रता के लिए कार्य करेंगे तथा देश में संविधान के द्वारा नागरिकों को विभिन्न प्रकार की स्वतंत्रताएँ (राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक आदि) मिल जाएँगी। स्वतंत्रता के बाद देश में समानता, लोकतंत्र तथा भाईचारे के लिए कार्य ‘करना संभव होगा। स्वतंत्रता का अभाव देश की दासता के जीवन को देने वाला माना गया।

प्रश्न 18. भारत विभाजन के लिए उत्तरदायी कोई दो कारण बताइए।
उत्तर : भारत विभाजन के लिए उत्तरदायी दो कारण इस प्रकार थे :
(i) अंग्रेजी की ‘फूट डालो और शासन करो’ की नीति ने हिंदुओं और मुसलमानों में फूट के बीज बो दिए जो सांप्रदायिकता पर आधारित थे। (ii) भारत विभाजन के लिए दूसरा कारण मुस्लिम लीग द्वारा ‘द्वि-राष्ट्र सिद्धांत’ को आधार बनाना था। इस सिद्धांत के अनुसार भारत एक धर्म का नहीं, दो धर्मों का देश था- हिन्दू और मुसलमान। इसलिए मुस्लिम लीग ने मुसलमानों के लिए अलग देश पाकिस्तान की माँग की।

प्रश्न 19. भारत में विविधता के प्रति बुनियादी सिद्धांत क्या हैं ?
उत्तर : विभिन्न प्रकार की विभिन्नताओं को रखते हुए एकता सूत्र में बँधे एक ऐसे भारत को गढ़ने की थी जिसमें भारतीय समाज की सारी विविधताओं के लिए स्थान हो । भारत अपने आकार और विविधता में किसी महादेश के बराबर था। यहाँ अलग-अलग बोली बोलने वाले लोग थे, उनकी संस्कृति अलग थी और वे अलग-अलग धर्मों के अनुयायी थे। उस वक्त आमतौर पर यही माना जा रहा था कि इतनी विविधताओं से भरा कोई देश ज्यादा दिनों तक एकजुट नहीं रह सकता।

प्रश्न 20. पांडिचेरी तथा गोवा भारत में कैसे शामिल हुए?

अथवा

पांडिचेरी तथा गोवा के भारत में शामिल होने की घटना पर एक नोट लिखो।
उत्तर : स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् पांडिचेरी फ्रांस तथा गोवा पुर्तगाल के अधीन थे। फ्रांस पांडिचेरी को भारत में शामिल करने के पक्ष में नहीं था। परिणामस्वरूप भारतीय सैनिकों ने कार्यवाही करके पांडिचेरी को भारतीय संघ में शामिल कर लिया। इसी तरह पुर्तगाल भी गोवा पर से अपना अधिकार छोड़ना नहीं चाहता था। अतः पुर्तगाल ने भारत द्वारा पेश किये गए सभी प्रस्तावों का विरोध किया। परिणामस्वरूप 18 दिसम्बर, 1961 को भारतीय सेना ने गोवा, दमन व दीयू को पुर्तगाल से मुक्त करा कर भारत में शामिल कर लिया। भारतीय प्रधानमंत्री ने इसे मात्र पुलिस कार्यवाही की संज्ञा दी। लगभग 3000 पुर्तगाली सैनिक युद्धबन्दी बना लिए गए, जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया। 1987 में गोवा भारत का 25वाँ राज्य बन गया।

प्रश्न 21. भारत संघ में हैदराबाद के विलय का विवरण दीजिए।

अथवा

विभाजन के पश्चात् हैदराबाद रियासत भारतीय संघ का भाग कैसे बनी?
उत्तर : हैदराबाद :
1.15 अगस्त, 1947 को जब भारत स्वतंत्र हुआ उस समय हैदराबाद की रियासत बहुत बड़ी थी। यह रियासत चारों तरफ हिंदुस्तानी इलाके से घिरी थी। हैदराबाद की रियासत के लोगों के – बीच निजाम के शासन के खिलाफ एक आंदोलन ने जोर पकड़ा। तेलंगाना इलाके के किसान निजाम के दमनकारी शासन से खासतौर पर दुखी थे। वे निजाम के खिलाफ उठ खड़े हुए।
2.हैदराबाद के शासक को ‘निज़ाम’ कहा जाता था और वह दुनिया के सबसे दौलतमंद लोगों में शुमार किया जाता था। निजाम चाहता था कि हैदराबाद की रियासत को आजाद रियासत का दर्जा दिया जाए। निज़ाम ने सन् 1947 के नवम्बर में भारत के साथ यथास्थिति बहाल रखने का एक समझौता किया। यह समझौता एक साल के लिए था। इस बीच भारत सरकार से हैदराबाद के निजाम की बातचीत जारी रही।
3.रजाकारों ने लूटपाट मचाई और हत्या तथा बलात्कार पर उतारू हो गए। 1948 के सितम्बर में भारतीय सेना निजाम के सैनिकों पर काबू पाने के लिए हैदराबाद आ पहुँची। कुछ रोज तक रुक-रुक कर लड़ाई चली और इसके बाद निजाम ने आत्मसमर्पण कर दिया। निजाम के आत्मसमर्पण के साथ ही हैदराबाद का भारत में विलय हो गया।

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