Class 12th Political Science भाग-2 Chapter 6 Important Question Answer 2 Marks लोकतांत्रिक व्यवस्था का संकट

प्रश्न 1. आपातकाल का जनसंचार माध्यमों पर क्या प्रभाव पड़ा ?
उत्तर : आपातकाल प्रावधानों के अंतर्गत प्राप्त अपनी शक्तियों पर अमल करते हुए सरकार ने प्रेस की आजादी पर रोक लगा दी। जन संचार माध्यमों का कामकाज बाधित हुआ। समाचार-पत्रों को कहा गया कि कुछ भी छापने से पहले अनुमति लेनी जरूरी है। इसे प्रेस सेंसरशिप के नाम से जाना जाता है। “इंडियन एक्सप्रेस” और “स्ट्रेटसमैन” जैसे अखबारों ने प्रेस पर लगी सेंसरशिप का विरोध किया। जिन समाचारों को छापने से रोका जाता था उनकी जगह ये अखबार खाली छोड़ देते थे। “सेमिनार” और “मेनस्ट्रीम” जैसी पत्रिकाओं ने सेंसरशिप के आगे घुटने टेकने की जगह बंद होना अच्छा समझा।

प्रश्न 2. राज्यों में राष्ट्रपति शासन से क्या अभिप्राय है?
उत्तर : जब किसी राज्य (प्रांत) में संवैधानिक संकट या अव्यवस्था उत्पन्न होने पर केंद्र सरकार भारतीय संविधान की धारा 356 के अंतर्गत किसी निर्वाचित राज्य सरकार को बर्खास्त करके उसका शासन गवर्नर राष्ट्रपति की ओर से करने लगता है तथा नई सरकार गठित होने तक ही सभी संवैधानिक शक्तियों एवं दायित्वों का निर्वाह करता है तो ऐसे शासनकाल को राज्यों में राष्ट्रपति का शासन कहा जाता है।

प्रश्न 3. 1975 में घोषित राष्ट्रीय आपातकाल के किसी एक कारण को न्यायोचित ठहराइए।
उत्तर : आपातकाल को न्यायोचित ठहराया जाना : “आपातकाल” की घोषणा भारतीय राजनीति का सर्वाधिक विवादास्पद प्रकरण है। आपातकाल के औचित्य के विषय में विभिन्न दृष्टिकोण हैं। आपातकाल की समाप्ति के बाद “शाह आयोग” ने अपनी जाँच में पाया कि इस दौरान अत्यधिक “अति” हुई है। 25 जून 1975 से पहले भारत में कभी भी “आंतरिक गड़बड़ी” की आशंका से आपातकाल की घोषणा नहीं की गई।

प्रश्न 4. चारु मजूमदार कौन था ?
उत्तर : चारु मजूमदार (1918-1972) भारतीय इतिहास में क्रान्तिकारी वादी एवं नक्सलवादी बगावत के प्रसिद्ध नेता हुए। उन्होंने भारतीय साम्यवादी पार्टी (C.P.I) छोड़ दी तथा मार्क्सवादी-लेनिनवादी कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया की स्थापना की । यह पार्टी देश में नक्सलवाद आंदोलन की प्रेरणास्रोत बनी। चारु मजूमदार माओवादी दर्शन में विश्वास रखते हुए हिंसक क्रांति के समर्थक थे।

प्रश्न 5. जब 1974 में हड़ताल के कारण रेलों का चलना, एक अथवा दो दिन के लिए नहीं, अपितु 20 दिन के लिए बंद हो गया था, तो उस समय लोगों और अर्थव्यवस्था पर क्या प्रभाव पड़ा ?
उत्तर : निश्चित ही बहुत से लोगों का आना-जाना दूभर हो जाएगा, लेकिन बात यहीं तक सीमित नहीं रहेगी। देश की अर्थव्यवस्था ठप्प हो जाएगी, क्योंकि रेलगाड़ियों के माध्यम से ही देश में एक जगह से दूसरी जगह सामानों की ज्यादातर ढुलाई होती है। इससे देश के रोजमर्रा के काम-काज के ठप्प हो जाने का खतरा पैदा हो गया।

प्रश्न 6. शाह जाँच आयोग का गठन कब और क्यों किया गया था ?
उत्तर : जनता पार्टी सरकार द्वारा मई, 1977 में जस्टिस जे. सी. शाह की अध्यक्षता में एक जाँच आयोग का गठन किया गया। वे उच्चतम न्यायालय के अवकाश प्राप्त मुख्य न्यायाधीश थे। इस आयोग का काम आपातकाल के दौरान सत्ता के दुरुपयोग तथा ज्यादतियों की जाँच करना था।

प्रश्न 7. 1975 में आपातकाल की घोषणा के पश्चात् “सेमिनार” और “मेनस्ट्रीम” जैसी पत्रिकायें छपना बंद क्यों हो गईं?
उत्तर : 1975 में आपातकाल की घोषणा के पश्चात् ‘सेमिनार’ और ‘मेनस्ट्रीम’ जैसी पत्रिकाएँ छपनी बंद हो गयी थीं। इन पत्रिकाओं ने ‘सेंसरशिप’ को मानने के बजाय अपने-अपने ..प्रकाशनों को बंद करना अपेक्षाकृत बेहतर समझा।

प्रश्न 8. 1975 में राष्ट्रीय आपातकाल घोषणा करते हुए सरकार ने क्या कारण बताए?
उत्तर : कारण : 1. विपक्षी दलों द्वारा लोकतान्त्रिक व्यवस्था को ठप्प करने की साजिश
2. विपक्षी दलों ने सेना और पुलिस को विद्रोह के लिए उकसाया।
3. पूँजीवादी ताकतों का सरकार के विरूद्ध होना ।

प्रश्न 9. चारू मजूमदार ने भारतीय साम्यवादी दल को क्यों छोड़ा?
उत्तर : चारू मजूमदार ने कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इण्डिया (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) की स्थापना की तथा भारतीय साम्यवादी दल को छोड़ दिया। उनका मत था कि भारत में लोकतंत्र एक छलावा मात्र है। इस दल ने क्रांति हेतु गुरिल्ला युद्ध की रणनीति अपनायी थी।

प्रश्न 10. प्रेस सेंसरशिप से क्या अभिप्राय है?

अथवा

आपातकाल में प्रेस सेंसरशिप का क्या तात्पर्य था?
उत्तर : आपातकालीन प्रावधानों के अन्तर्गत सरकार ने प्रेस की आजादी पर रोक लगा दी। समाचार पत्रों को कुछ भी छापने के पहले अनुमति लेना आवश्यक था। इसे प्रेस सेंसरशिप के नाम से जाना जाता है।

प्रश्न 11. 1975-1977 में लोकनायक जयप्रकाश नारायण किस प्रकार इतने लोकप्रिय हो गए थे?
उत्तर : जयप्रकाश नारायण 1975-77 के दौरान आपातकाल के विरोध में जननायक हो गए। 1975 में उन्होंने जनता के संसद-मार्च का नेतृत्व किया। वे जनता पार्टी के गठन में एक महत्त्वपूर्ण बिंदु थे।

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