Class 12th Political Science भाग-2 Chapter 7 Important Question Answer 1 Marks जन-आंदोलनों का उदय

प्रश्न 1. दलित पैंथर्स के द्वारा उठाए गए किन्हीं दो मुद्दों का उल्लेख कीजिए ।
उत्तर : 1. आजादी के बीस साल बाद भी दलित समुदाय को जातिगत भेदभाव की पीड़ाओं के अनुभव से गुजरना पड़ रहा था। इसके विरुद्ध आक्रोश की अभिव्यक्ति के लिए साहित्यिक मंच प्रदान करना। 2. दलितों को सामाजिक एवं आर्थिक न्याय दिलाने के लिए भूमिहीन दलितों, गरीब किसानों तथा शहरी औद्योगिक मजदूरों को संगठित करना।

प्रश्न 2. भारतीय किसान यूनियन से सम्बद्ध किसान, भारत के अधिकाशं अन्य किसानों से किस प्रकार भिन्न थे।
उत्तर : बीकेयू के अधिकांश सदस्य एक खास समुदाय के थे। इस संगठन ने जातिगत समुदायों को आर्थिक मसले पर एकजुट करने के लिए” जाति-पंचायत” की परंपरागत संस्था का उपयोग किया। किसी औपचारिक सांगठनिक ढाँचे के अभाव के बावजूद बीकेयू अपने को लंबे समय तक कायम रख सका क्योंकि यह संगठन अपने सदस्यों के जातिगत-वंशगत संपर्क-जाल पर आधारित था। बीकेयू के लिए धनराशि और संसाधन इन्हीं संपर्कतंत्रों से जुटाए जाते थे और इन्हीं के सहारे बी.केयू को गतिविधियाँ भी संचालित होती थीं।

प्रश्न 3. द्रविड़ आंदोलन की किन्हीं दो विशेषताओं को उजागर कीजिए ।
उत्तर : (i) यह आंदोलन भारत के क्षेत्रीय आंदोलनों में सबसे ताकतवर आंदोलन था। भारतीय राजनीति में यह आंदोलन क्षेत्रीयवादी भावनाओं की सर्वप्रथम और सबसे प्रबल अभिव्यक्ति था।
(ii) आंदोलन के नेतृवर्ग के एक हिस्से की आकांक्षा एक स्वतंत्र द्रविड़ राष्ट्र बनाने की थी पर आंदोलन ने कभी सशस्त्र संघर्ष की राह नहीं अपनायी। नेतृत्व ने अपनी माँग आगे बढ़ाने के लिए सार्वजनिक बहसों और चुनावी मंच का ही इस्तेमाल किया।

प्रश्न 4. सूचना के अधिकार का अधिनियम बनवाने में मजदूर किसान शक्ति संगठन (एम.के.एस.एस.) की क्या भूमिका थी?
उत्तर : (i) सूचना के अधिकार का अधिनियम बनवाने में मजदूर किसान शक्ति संगठन (एम.के.एस.एस.) ने महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई। (ii) 1990 में एम. के. एस. एस. द्वारा राजस्थान में अकाल राहत कार्य तथा श्रमिकों के हिसाब-किताब का ब्यौरा माँगा गया। ग्रामवासियों ने बिलों तथा वाउचर की प्रतिलिपि माँगी तथा उन सभी श्रमिकों के नाम भी माँगे जिन्हें विद्यालयों, औषधालयों, छोटे बाँधों तथा सामुदायिक केंद्रों के निर्माण के लिए वेतन दिया जाता था। एम. के. एस. एस. के द्वारा 1994 तथा 1996 में जन सुनवाई का आयोजन किया गया जहाँ प्रशासन को जनता के बीच अपना पक्ष रखने के लिए कहा गया।

प्रश्न 5. मंडल आयोग की महत्त्वपूर्ण सिफारिशों का उल्लेख कीजिए ।

अथवा

मंडल आयोग की किन्हीं दो संस्तुतियों ( सुझावों ) को लिखिए।

अथवा

मंडल कमीशन की किन्ही दो सिफारिशों को उजागर कीजिए।
उत्तर : जनता पार्टी द्वारा नियुक्त बी.पी. मंडल की अध्यक्षता में मंडल आयोग की 1978 में की गई तीन प्रमुख सिफारिशें निम्नलिखित थीं :
(i) अन्य पिछड़ी जातियों (Other Backward Classes) को सरकारी सेवाओं में 27 प्रतिशत आरक्षण प्रदान किया जाए।
(ii) केंद्रीय तथा राज्य सरकारों द्वारा शासित वैज्ञानिक, तकनीकी तथा व्यावसायिक संस्थाओं में अन्य पिछड़ी जातियों के लिए 27% आरक्षण निश्चित किया जाए।
(iii) अन्य पिछड़ी जातियों के आर्थिक सहयोग के लिए सरकार चाहे तो एक पृथक् आर्थिक संस्था का गठन करे।

प्रश्न 6. आंध्र प्रदेश में चले शराब विरोधी आन्दोलन ने देश का ध्यान कुछ गंभीर मुद्दों की तरफ खींचा। ये मुद्दे क्या थे?
उत्तर : आंध्र प्रदेश में चल रहे शराब विरोधी आंदोलन ने निम्नलिखित मुद्दों की तरफ देश का ध्यान खींचा :
1. शराब व्यवसाय के कारण राजनीति और अपराध के बीच गहरा संबंध बन गया था। चूँकि राज्य सरकार को ताड़ी बिक्री से राजस्व की प्राप्ति होती थी। इसलिए वे इस पर प्रतिबंध नहीं लगाते थे।
2.इस आंदोलन ने महिलाओं को घरेलू हिंसा के मुद्दों को उठाने का मौका दिया।
3.इस आंदोलन ने दहेज प्रथा, कार्यस्थल एवं सार्वजनिक स्थलों पर यौन उत्पीड़न की तरफ भी देश का ध्यान आकर्षित किया।

प्रश्न 7. राष्ट्रीय महिला आयोग का गठन कब हुआ? इसके अधीन कौन-कौन से उपायों को सम्मिलित किया जिनके द्वारा महिलाओं के अधिकारों की रक्षा हो?
उत्तर : महिलाओं के अधिकार और कानूनी अधिकारों की सुरक्षा के लिए 1990 में संसद ने महिलाओं के लिए राष्ट्रीय आयोग की स्थापना के लिए कानून बनाया जो 31 जनवरी, 1992 को अस्तित्व. में आया। इसके अंतर्गत कानून की समीक्षा, अत्याचारों की विशिष्ट व्यक्तिगत शिकायतों में हस्तक्षेप और जहाँ कहीं भी उपयुक्त और संभव हो महिलाओं के हितों की रक्षा के उपाय सम्मिलित हैं।

प्रश्न 8. स्वतंत्रता के बाद महिलाओं की स्थिति में क्या-क्या परिवर्तन आया है ?
उत्तर : स्वतंत्रता के बाद महिलाओं की स्थिति को असमानता से समानता तक लाने के जागरूक प्रयास होते रहे हैं। वर्तमान काल में महिलाओं को पुरुषों के साथ समानता का दर्जा प्राप्त है। महिलाएँ किसी भी प्रकार की शिक्षा या प्रशिक्षण को चुनने के लिए स्वतंत्र हैं परंतु ग्रामीण समाज में अभी भी महिलाओं के साथ भेदभाव किया जाता है जिसे दूर किया जाना चाहिए। यद्यपि कानूनी तौर पर महिलाएँ पुरुषों के समान अधिकार रखती हैं परंतु द काल से चली आ रही पुरुष प्रधान व्यवस्था में व्यावहारिक रूप में महिलाओं के साथ अभी भी भेदभाव किया जाता है।

प्रश्न 9. मई, 1961 में केन्द्र सरकार के काका कालेलकर आयोग की सिफारिशें अस्वीकार करने के बाद राज्य सरकारों को क्या परामर्श दिया था ?
उत्तर : केंद्र सरकार ने मई, 1961 में अन्य पिछड़ी जातियों की अखिल भारतीय सूची को समाप्त करते हुए अनुसूचित जातियों तथा जन-जातियों के अतिरिक्त किसी भी जाति को आरक्षण न देने का निर्णय लिया। अगस्त, 1961 में इसने राज्य सरकारों को परामर्श दिया कि यदि वे पिछड़ी जातियों के निर्धारण की कोई कसौटी तय नहीं कर पायी हैं तो इसके लिए जाति के बजाय आर्थिक आधार को अपनाना अच्छा होगा।

प्रश्न 10. भारत सरकार की किस कार्यवाही से मछुआरों के जीवन में एक बड़ा संकट खड़ा हो गया? उन्होंने राष्ट्रीय स्तर पर कौन-सा संघ बनाया ?
उत्तर : (i) मछुआरों के जीवन में उस समय बड़ा संकट खड़ा हो गया जब भारत सरकार ने यांत्रिक ट्रेलर्स तथा ‘बॉटम ट्राउलिंग’ जैसी प्रौद्योगिकियों के द्वारा व्यापक स्तर पर भारतीय समुद्र में मछली पकड़ने की अनुमति दे दी। (ii) मछुआरों ने राष्ट्रीय स्तर पर ‘नेशनल फिशवर्कर्स’ फोरम’ या एन. एफ.एफ. बनाया।

प्रश्न 11. दलित पैंथर्स का मुख्य लक्ष्य क्या था?
उत्तर : दलित पैंथर्स का मुख्य उद्देश्य देश की आजादी के बाद के वर्षों में दलित समूह के साथ जातिगत आधार पर हो रही असमानता के व्यवहार और भौतिक साधनों के विषय में हो रहे अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाना था ताकि उन्हें सामाजिक और आर्थिक न्याय पूरी तरह से प्राप्त हो सके और इन क्षेत्रों (सामाजिक, आर्थिक) में सभी प्रकार के हो रहे उत्पीड़न को रोका जा सके।

प्रश्न 12. ‘नेशनल फिशवर्कर्स फोरम’ की स्थापना क्यों की गई ?
उत्तर : ‘नेशनल फिशवर्कर्स फोरम’ की स्थापना का उद्देश्य राष्ट्रीय स्तर पर (विशेषकर भारत के पूर्वी और पश्चिमी सामुद्रिक तटीय क्षेत्रों में) मछुआरा समुदाय से जुड़े हजारों परिवारों की रोजी-रोटी को राज्य सरकारों द्वारा मशीनीकृत मत्स्य आखेट और बड़े पैमाने पर भारतीय समुद्र में मत्स्य दोहन के लिए विकसित प्रौद्योगिकी को सीमित करना था ताकि गरीब मछुआरों की रोजी-रोटी को बचाया जा सके।

प्रश्न 13. क्या ताड़ी विरोधी आंदोलन एक महिला आंदोलन था। अपने उत्तर के समर्थन में एक तर्क दीजिए।
उत्तर : ताड़ी विरोधी आंदोलन महिलाओं का एक स्वतः स्फूर्त आंदोलन था। ये महिलाएँ अपने आस-पड़ोस में मदिरा की बिक्री पर पाबंदी की माँग कर रही थीं। वर्ष 1992 के सितम्बर और अक्टूबर माह में ग्रामीण महिलाओ ने शराब के खिलाफ लड़ाई छेड़ रखी थी। इस आंदोलन ने ऐसा रूप धारण किया कि इसे राज्य में ताड़ी-विरोधी आंदोलन के रूप में जाना गया।

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