Index

1. ईंट मनके और अस्थियाँ

1. आरंभ 2. निर्वाह के तरीके 3. मोहनजोदड़ो 4. सामाजिक विभिन्नताओं का अवलोकन 5. शिल्प उत्पादन के विषय में जानकारी 6. माल प्राप्त करने सम्बन्धी नीतियाँ 7. मुहरें लिपि तथा बाट 8. प्राचीन सभ्यता 9. सभ्यता का अंत 10. हड़प्पा सभ्यता की खोज 11. अतीत को जोड़कर पूरा करने की समस्याएं मानचित्र बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर 1 अंकीय प्रश्न उत्तर 2 अंकीय प्रश्न उत्तर

2. राजा किसान और नगर

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

3. बंधुत्व जाति और वर्ग

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

4. विचारक विश्वास और इमारतें

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर 1 बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर 2

6. भक्ति सूफी और परम्पराएँ

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

7. एक साम्राज्य की राजधानी विजयनगर

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

8. उपनिवेशवाद और देहात

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

10. उपनिवेशवाद और देहात

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

11. विद्रोह और राज

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

13. महात्मा गाँधी और आन्दोलन

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

15. संविधान का निर्माण

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

Class 12th Political Science भाग-2 Chapter 9 Important Question Answer 3 Marks भारतीय राजनीति : नए बदलाव

प्रश्न 1. संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन के बारे में आप क्या जानते हैं ?
उत्तर : संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) का गठन मई, 2004 में कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों ने किया। इस गठबंधन का अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गाँधी को बनाया गया तथा कांग्रेस के नेता डॉ. मनमोहन सिंह को प्रधानमंत्री बनाने का निर्णय लिया गया। 22 मई, 2004 को इन्होंने अपनी सरकार बनाई। इस गठबंधन ने अपने न्यूनतम साझा कार्यक्रम में सभी सहयोगी दलों की मुख्य नीतियों को शामिल किया।

प्रश्न 2. ‘कालेलकर आयोग’ की रिपोर्ट क्या थी
उत्तर : पिछड़े वर्ग की स्थिति को सुधारने के लिए 1953 में काका कालेलकर आयोग की स्थापना की गई जिसने 1955 में अपनी रिपोर्ट दी। आयोग की सिफारिशें लागू नहीं की गईं, क्योंकि स्वयं कालेलकर ने राष्ट्रपति को यह लिखा था, “मैं निश्चित रूप से किसी समुदाय के लिए सरकारी सेवाओं में आरक्षण के खिलाफ हूँ।” इनके अनुसार सेवाएँ नौकरों के लिए नहीं होती, वे तो सारे समाज की सेवा के लिए होती हैं।

प्रश्न 3. 2014 के लोक सभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी की पराजय के किन्हीं दो कारणों का विश्लेषण कीजिए ?
उत्तर : 2014 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस पार्टी की पराजय के कारण : (i) भ्रष्टाचार घोटाले, मुद्रास्फीति को नियंत्रित करने और आर्थिक मंदी से निपटने में अक्षमता के कारण कांग्रेस अपने शासनकाल के दौरान पूरी तरह से बदनाम हो चुकी थी, जिसका असर कांग्रेस के शासन पर पूरी तरह से पड़ रहा था। 2014 के लोकसभा चुनावों में हार का प्रमुख कारण माने गए।
(ii) कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी का यह ऐलान अध्यक्ष पद राहुल गाँधी के नाम, दूसरी तरफ चुनावों की जिम्मेदारी भी राहुल को देना जिसके कारण पार्टी में मतभेद हो गया।

प्रश्न 4. जनता दल के बारे में संक्षेप में लिखो।
उत्तर : 1980 के दशक के अन्त में अनेक नेता एक ऐसे नये राजनीतिक दल का निर्माण करने का प्रयास कर रहे थे, जो कांग्रेस का विकल्प बन सके। 26 जुलाई, 1988 में चार विपक्षी दलों जनता पार्टी, लोकदल, कांग्रेस (स) और जन मोर्चा के विलय से एक नये राजनीतिक दल की स्थापना की गई। इस नये दल का नाम समाजवादी जनता दल रखा गया। 11 अक्टूबर, 1988 को बंगलौर में समाजवादी जनता दल का नाम बदलकर ‘जनता दल’ कर दिया गया। श्री विश्वनाथ प्रताप सिंह को जनता दल का प्रधान मनोनी किया गया।ये कारण भी कांग्रेस की पराजय के कारण बने ।

प्रश्न 5. 1986 से किन नागरिक मसलों ने भारतीय जनता पार्टी को सुदृढ़ता प्रदान की ?

अथवा

शाहबानो मामला क्या था? इस पर भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस विरोधी क्या रुख अपनाया ?
उत्तर : (i) 1986 में ऐसी दो बातें हुईं जो एक हिन्दूवादी पार्टी के रूप में भाजपा की राजनीति के लिहाज से प्रधान हो गईं। इसमें पहली बात 1985 के शाहबानो मामले से जुड़ी है। यह मामला एक 62 वर्षीया तलाकशुदा मुस्लिम महिला शाहबानो का था। उसने अपने भूतपूर्व पति से गुजारा भत्ता हासिल करने के लिए अदालत में अर्जी दायर की थी।
(ii) सर्वोच्च अदालत ने शाहबानो के पक्ष में फैसला सुनाया। पुरातनपंथी मुसलमानों ने अदालत के इस फैसले को अपने ‘पर्सनल लॉ’ में हस्तक्षेप माना। कुछ मुस्लिम नेताओं की माँग पर सरकार ने मुस्लिम महिला (तलाक से जुड़े अधिकारों) अधिनियम (1986) पास किया। इस अधिनियम के द्वारा सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को निरस्त कर दिया गया।
(iii) सरकार के इस कदम का कई महिला संगठनों, मुस्लिम महिलाओं की जमात तथा अधिकांश बुद्धिजीवियों ने विरोध किया। भाजना ने कांग्रेस सरकार के इस कदम की आलोचना की और इसे अल्पसंख्यक समुदाय को दी गई अनावश्यक रियायत तथा ‘तुष्टिकरण’ करार दिया। इससे भारतीय जनता पार्टी को काफी लोकप्रियता मिली।

प्रश्न 6. ‘1980 के दशक के अन्त के वर्षों में, भारत की राजनीतिक व्यवस्था में पाँच प्रमुख बदलाव आए।’ उपरोक्त कथन के संदर्भ में किन्हीं तीन बदलावों का परीक्षण कीजिए।
उत्तर : 1980 के दशक के आखिर के सालों में देश में ऐसे पाँच बड़े बदलाव आए जिनका हमारी आगे की राजनीति पर गहरा असर पड़ा।
प्रथम, 1990 के दशक में एक महत्त्वपूर्ण घटना 1989 के चुनावों में कांग्रेस की हार थी। 1989 में ही उस परिघटना की समाप्ति हो गई थी, जिसे राजनीति के विद्वान अपनी खास शब्दावली में ‘कांग्रेस प्रणाली’ कहते हैं।
दूसरा,बड़ा बदलाव राष्ट्रीय राजनीति में ‘मंडल मुद्दे’ का उदय था। 1990 में राष्ट्रीय मोर्चा की नई सरकार ने मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू किया। इन सिफारिशों के अंतर्गत प्रावधान किया गया कि केन्द्र सरकार की नौकरियों में अन्य पिछड़ा वर्ग’ को आरक्षण दिया जाएगा।
तीसरे, विभिन्न सरकारों ने इस दौर में जो आर्थिक नीतियाँ अपनाईं वे बुनियादी तौर पर बदल चुकी थीं। इसे ढाँचागत समयोजन कार्यक्रम अथवा नए आर्थिक प्रकार के नाम से जाना गया। इस कालांश (अवधि) की एक बात यह थी कि मई, 1991 में राजीव गाँधी की हत्या हो गई और इसके परिणामस्वरूप कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व में परिवर्तन हुआ। राजीव गाँधी चुनाव अभियान के सिलसिले में तमिलनाडु के दौरे पर थे। तभी लिट्टे से जुड़े श्रीलंकाई तमिलों ने उनकी हत्या कर दी।
1991 के चुनावों में कांग्रेस सबसे बड़ी विजयी पार्टी के रूप में सामने आई। राजीव गाँधी की मृत्यु के बाद कांग्रेस पार्टी ने नरसिम्हा राव को प्रधानमंत्री चुना।

प्रश्न 7. मण्डल आयोग की मुख्य सिफारिशें क्या थीं? इसको किस प्रकार कार्यान्वित किया गया ?
उत्तर : I. मंडल आयोग की सिफारिशें (Recommen dations of Mandal Commission) : इस आयोग द्वारा निम्नलिखित सिफारिशें दी गईं :
(1) पिछड़ी जातियों को सरकारी नौकरियों में 27 प्रतिशत आरक्षण दिया जाए।
(2) केन्द्र तथा राज्य सरकारों द्वारा संचालित सभी वैज्ञानिक, तकनीकी और व्यावसायिक संस्थानों में पिछड़ी जातियों के लिए 27% सीटें आरक्षित की जाएँ।
(3) पिछड़े वर्गों को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए सरकार द्वारा अलग से वित्तीय संस्थानों की स्थापना की जाए।
(4) भारत सरकार द्वारा 7 अगस्त, 1990 को सिफारिशों को लागू करने की घोषणा ।
II. कार्यान्वयन : बी. पी. मंडल आयोग ने अपनी रिपोर्ट सन् 1980 में पेश की थी तथा इसे संसद के सामने अप्रैल, 1982 में रखा गया था। कांग्रेस सरकार ने इस प्रतिवेदन को न तो अस्वीकृत किया और न ही स्पष्ट रूप से स्वीकार किया। वास्तव में इसे चुपचाप अलमारी में रख दिया गया था। जनवरी, 1990 में सत्ता में आने के बाद राष्ट्रीय मोर्चा सरकार ने आयोग की सिफारिशों को लागू करने के कदम उठाए। इसने सभी राज्य सरकारों से उनके विचार पूछे तथा अंतत: प्रधानमंत्री वी. पी. सिंह ने 7 अगस्त, 1990 को घोषणा की और 17 अप्रैल, 1990 को नौकरियों में 27% आरक्षण की मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू करने के औपचारिक आदेश जारी कर दिए गए। अब नौकरियों में अनुसूचित जातियों तथा जनजातियों के लिए 22.5% तथा अन्य पिछड़े वर्गो के लिए 27% आरक्षण होगा।

प्रश्न 8. 1989 से 1992 के बीच देश की किन्हीं चार मुख्य घटनाओं का संक्षेप में वर्णन कीजिए।

अथवा

“20वीं शताब्दी के आठवें दशक के अंत में, हमारे देश में अनेक घटनाओं को घटते देखा गया है, जिन्होंने भारतीय राजनीति पर गहरी छाप छोड़ी है। ” ऐसी किन्हीं तीन घटनाओं का आकलन कीजिए।

अथवा

भारतीय राजनीति में 1989 से हुई किन्हीं चार प्रमुख घटनाओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर : भारतीय राजनीति में 1989 में हुए चार प्रमुख घटना (बदलाव) जिसने आगे की राजनीति पर गहरा असर डाला।
प्रथम, 1990 के दशक में एक महत्त्वपूर्ण घटना 1989 के चुनावों में कांग्रेस की हार थी। 1989 में ही उस परिघटना की समाप्ति हो गई थी, जिसे राजनीति के विद्वान अपनी खास शब्दावली में ‘कांग्रेस प्रणाली’ कहते हैं।
दूसरा, बड़ा बदलाव राष्ट्रीय राजनीति में ‘मंडल मुद्दे’ का उदय था। 1990 में राष्ट्रीय मोर्चा की नई सरकार ने मंडल आयोग की सिफारिशों को लागू किया। इन सिफारिशों के अंतर्गत प्रावधान किया गया कि केंद्र सरकार की नौकरियों में अन्य पिछड़ा वर्ग’ को आरक्षण दिया जाएगा।
तीसरे, विभिन्न सरकारों ने इस दौर में जो आर्थिक नीतियाँ अपनाईं, वे बुनियादी तौर पर बदल चुकी थीं। इसे ढाँचागत समायोजन कार्यक्रम अथवा नए आर्थिक प्रकार के नाम से जाना गया। इस कालांश की एक बात यह थी कि मई, 1991 में राजीव गाँधी की हत्या हो गई और इसके परिणामस्वरूप कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व में परिवर्तन हुआ। राजीव गाँधी चुनाव अभियान के सिलसिले में तमिलनाडु के दौरे पर थे। तभी लिट्टे से जुड़े श्रीलंकाई तमिलों ने उनकी हत्या कर दी।
1991 में चुनावों में कांग्रेस सबसे बड़ी विजयी पार्टी के रूप में सामने आई। राजीव गाँधी की मृत्यु के बाद कांग्रेस पार्टी ने नरसिम्हा राव को प्रधानमंत्री चुना।
चौथे, घटनाओं के एक सिलसिले की परिणति अयोध्या स्थित एक विवादित ढाँचे (बाबरी मस्जिद के रूप में प्रसिद्ध) के विध्वंस के रूप में हुई। यह घटना 1992 के दिसंबर महीने में घटी। कालांतर में इस घटना ने देश की राजनीति में कई परिवर्तनों को जन्म दिया।

प्रश्न 9. गुजरात में 2002 में मुस्लिम विरोधी हिंसा क्यों हुई ? इस हिंसा के क्या परिणाम हुए ?

अथवा

गुजरात के मुस्लिम विरोधी दंगे को लोकतंत्र के लिए खतरा माना जाता है, क्यों?
उत्तर : गुजरात में 2002 में मुस्लिम विरोधी हिंसा 2002 के फरवरी-मार्च में गुजरात के मुसलमानों के खिलाफ बड़े पैमाने पर हिंसा हुई। गोधरा स्टेशन पर घटी एक घटना इस हिंसा का तात्कालिक उकसावा साबित हुई। अयोध्या की ओर से आ रही एक ट्रेन की बोगी रामभक्त कारसेवकों से भरी हुई थी और इसमें आग लग गई या आशंका जतायी गई कि इसमें आग लगा दी गई थी। जो भी हो, इस दर्दनाक एवं निन्दनीय दुर्घटना में सत्तावन व्यक्ति इस आग में मर गए। यह संदेह करके कि बोगी में आग मुसलमानों ने लगायी होगी आगे जो भी हुआ, वह और भी निन्दनीय एवं दर्दनाक था। अगले दिन गुजरात के कई भागों में •मुसलमानों के खिलाफ बड़े पैमाने पर हिंसा हुई। हिंसा का तांडव लगभग एक महीने तक जारी रहा। लगभग 1100 व्यक्ति, जिनमें ज्यादातर मुसलमान थ, इस हिंसा में मारे गए। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने हिंसा को रोकने, भुक्तभोगियों को राहत देने तथा हिंसा करने वालों पर कानूनी कार्रवाई करने में असफल रहने का आरोप लगाते हुए गुजरात सरकार की आलोचना की। भारत के चुनाव आयोग ने गुजरात विधानसभा के चुनावों को रोकने का फैसला किया।
केंद्र में सत्ताधारी सरकार तथा गुजरात के भारतीय जनता सरकार विरोधी राजनीतिक दलों ने यह उम्मीद लगा रखी थी कि नरेंद्र मोदी के विरुद्ध जनादेश आएगा तथा उनके राजनीतिक जीवन का अंत हो जाएगा लेकिन हुआ बिल्कुल इसके विपरीत। गुजरात के मतदाताओं ने भारी बहुमत से भाजपा तथा नरेंद्र मोदी को विजय दिलाई लेकिन घृणा का दुष्प्रचार अब भी राजनीतिक रोटियाँ सेकने वाले तथा वोटों की राजनीति करने वाले कर ही रहे हैं। जो भी हो, हिंसा और प्रतिहिंसा का यह कुकृत्य जायज नहीं ठहराया जा सकता

प्रश्न 10. 2004 के लोकसभा चुनावों के पश्चात अधिकांश राजनैतिक दलों के बीच उभरती सहमति के किन्हीं तीन तत्वों की व्याख्या कीजिए।

अथवा

‘प्रमुख राजनीतिक दलों में गम्भीर मतभेदों के बावजूद सहमति के नए आयामों के उत्थान को रुचिपूर्ण ढंग से देखा जा रहा है।’ इस कथन के संदर्भ में किन्हीं तीन सहमति की धारणाओं का वर्णन कीजिए |
उत्तर : 2004 के लोकसभा के चुनावों के बाद अनेक महत्त्वपूर्ण मसलों पर अधिकतर दलों के बीच एक व्यापक सहमति बनी है। कड़े मुकाबले और संघर्ष के बावजूद अधिकतर दलों के बीच एक सहमति उभरती सी जान पड़ रही है। इस सहमति में निम्न बातें हैं :
(i) नई आर्थिक नीति पर सहमति : कई समूह नई आर्थिक नीति के खिलाफ हैं, लेकिन ज्यादातर राजनीतिक दल इन नीतियों के पक्ष में हैं। अधिकतर दलों का मानना है कि नई आर्थिक नीतियों से देश समृद्ध होगा और भारत विश्व की एक आर्थिक शक्ति बनेगा। इनमें दो प्रमुख राष्ट्रीय पार्टियों भाजपा तथा कांग्रेस में सहमति है।
(ii) पिछड़ी जातियों के राजनीतिक और सामाजिक दावे की स्वीकृति : राजनीतिक दलों ने पहचान लिया है कि पिछड़ी जातियों के सामाजिक और राजनीतिक दावे को स्वीकार करने की जरूरत है। इस कारण आज सभी राजनीतिक दल शिक्षा और रोजगार में पिछड़ी जातियों के लिए सीटों के आरक्षण के पक्ष में हैं। राजनीतिक दल यह भी सुनिश्चित करने के लिए तैयार हैं कि ‘अन्य पिछड़ा वर्ग’ को सत्ता में समुचित हिस्सेदारी मिले।
(iii) देश के शासन में प्रान्तीय दलों की भूमिका की स्वीकृति : प्रान्तीय दल और राष्ट्रीय दल का भेद अब लगातार कम होता जा रहा है। प्रान्तीय दल केन्द्रीय सरकार में साझेदार बन रहे हैं और इन दलों ने पिछले बीस वर्षों में देश की राजनीति में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

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