Class 12th Political Science Chapter 3 Important Question Answer 8 Marks समकालीन विश्व में अमेरिकी वर्चस्व

प्रश्न 1. 11 सितम्बर 2001 को संयुक्त राज्य अमरीका पर आतंकवादी हमला क्यों हुआ? इस पर अमरीका की प्रतिक्रिया क्या थी?
उत्तर : I. बिल क्लिंटन के राष्ट्रपति काल में अनेक सैनिक कार्यवाहियाँ हुई एक बड़ी सैनिक कार्यवाही नैरोबी (केन्या) और दारे-सलाम (तंजानिया) के अमरीकी दूतावासों पर बमबारी के जवाब में 1998 में हुई। अतिवादी इस्लामी विचारों से प्रभावित आतंकवादी संगठन ‘अलकायदा’ को इस बमबारी का जिम्मेदार ठहराया गया। इस बमबारी के कुछ दिनों के अन्दर राष्ट्रपति क्लिंटन ने ‘ऑपरेशन इनफाइनाइट रीच’ का आदेश दिया। इस अभियान के अंतर्गत अमरीका ने सूडान और अफगानिस्तान के अल-कायदा के ठिकानों पर कई बार क्रूज मिसाइल से हमले किए। अमरीका ने अपनी इस कार्यवाही के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ की अनुमति लेने या इस सिलसिले में अंतर्राष्ट्रीय कानूनों की परवाह नहीं की। अमरीका पर आरोप लगा कि उसने अपने इस अभियान में कुछ नागरिक ठिकानों पर भी निशाना साधा जबकि इनका आतंकवाद से कोई लेना-देना नहीं था। पीछे मुड़कर अब देखने पर लगता है कि यह तो एक शुरुआत भर थी।
II. 1. 9/11 के जवाब में अमेरिका ने फौरी कदम उठाये और भयंकर कार्यवाही की। अब क्लिंटन की जगह रिपब्लिकन पार्टी के जार्ज डब्ल्यू. बुश राष्ट्रपति थे। ये पूर्ववर्ती राष्ट्रपति एच.डब्ल्यू. बुश के पुत्र थे। क्लिंटन के विपरीत बुश ने अमरिकी हितो को लेकर कठोर रवैया अपनाया और इन हितों को बढ़ावा देने के लिए कड़े कदम उठाये।
2.’आतंकवाद के विरुद्ध विश्वव्यापी युद्ध’ के अंग के रूप में अमेरिका ने ‘ऑपरेशन एंड्यूरिंग फ्रीडम’ चलाया। यह अभियान उन सभी के खिलाफ चला जिन पर 9/11 का शक था। इस अभियान में मुख्य निशाना अल-कायदा और अफगानिस्तान के तालिबान शासन को बनाया गया। तालिबान शासन के पाँव जल्दी ही उखड़ गए लेकिन तालिबान और अल-कायदा के अवशेष अब भी सक्रिय हैं। 9/11 की घटना के बाद से अब तक इनकी तरफ से पश्चिमी मुल्कों में कई जगहों पर हमले हुए हैं। इससे इनकी सक्रियता की बात स्पष्ट हो जाती है।
3.अमेरिकी सेना ने पूरे विश्व में गिरफ्तारियाँ कीं। अक्सर गिरफ्तार लोगों के बारे में उनकी सरकार को जानकारी नहीं दी गई। गिरफ्तार लोगों को अलग-अलग देशों में भेजा गया और उन्हें खुफिया जेलखानों में बंदी बनाकर रखा गया। क्यूबा के निकट अमेरिकी नौसेना का एक ठिकाना ग्वांतानामो बे में है। कुछ बंदियों को वहाँ रखा गया। इस जगह रखे गए बंदियों को न तो अंतर्राष्ट्रीय कानूनों की सुरक्षा प्राप्त है और न ही अपने देश या अमेरिका के कानूनों की । संयुक्त राष्ट्र संघ के प्रतिनिधियों तक को इन बंदियों से मिलने की अनुमति नहीं दी गई।

प्रश्न 2. उपयुक्त उदाहरणों सहित अमरीकी वर्चस्व के तीनों प्रकारों (रूपों) को लिखिए तथा उनकी व्याख्या कीजिए ।

अथवा

सैन्य शक्ति के रूप में अमेरिकी वर्चस्व की व्याख्या कीजिए।
उत्तर : उदाहरण (Examples):( क ) सैन्य शक्ति के अर्थ में : सोवियत संघ ने जब क्यूबा में मिसाइलें लगा लीं तो अमेरिका ने उसे अपनी सैन्य शक्ति का वर्चस्व दिखाते हुए कहा कि या तो क्यूबा सोवियत संघ को मिसाइल हटाने के लिए तुरंत कहे और वह हटा ले नहीं तो युद्ध के लिए तैयार हो जाए।
इसी संदर्भ में 2006-07 में अमेरिका ने ईरान को बार-बार सैन्य शक्ति का हवाला देकर कहा कि या तो परमाणु परीक्षण बंद करे नहीं तो उसके विरुद्ध कभी भी सैनिक कार्यवाही की जा सकती है।
(ख) ढाँचागत ताकत के अर्थ में : अमेरिका अनेक देशों को कह चुका है कि वह विश्व के सभी समुद्री मार्गों को अंतर्राष्ट्रीय व्यापार के लिए पूर्णतया खुला रखें क्योंकि मुक्त व्यापार समुद्री व्यापारिक मार्गों के खुलेपन के बिना संभव नहीं है। यह धमकी वास्तव में वह जापान, ताइवान, खाड़ी देशों आदि को दे चुका है।
अमेरिका अपनी ढाँचागत ताकत को दिखाने के लिए अनेक छोटे-बड़े देशों को कह चुका है कि ‘जो भी उदारीकरण और वैश्वीकरण को नहीं अपनाएगा या परमाणु परीक्षण निषेध संधि पर हस्ताक्षर नहीं करेगा उसे विश्व बैंक या अंतर्राष्ट्रीय मौद्रिक कोष आदि से ऋण देने के बारे में या तो कटौती की जा सकती है या उस पर पूर्ण प्रतिबंध लग सकता है।’ जनसंचारमाध् जानकारी मिलती है कि अमेरिका समय-समय पर आर्थिक प्रतिबंध लगाता रहा है।
(ग) सांस्कृतिक वर्चस्व के अर्थ में : अमेरिकी विचारधारा अर्थात् पूँजीवादी विचारधारा सभी पूर्व साम्यवादी यूरोपीय देशों पर लाद दी गई और वह उनसे सहमति बनवाने में सफल रहा। अमेरिका अंतर्राष्ट्रीय मंचों से कई बार स्पष्ट कर चुका है कि जो भी राष्ट्र नई अर्थव्यवस्था अर्थात् उदारीकरण और वैश्वीकरण को नहीं अपनाएगा उन देशों में बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ निवेश नहीं करेंगी और अमेरिका भी यह चाहता है। वह धीरे-धीरे सभी पूर्व साम्यवादी देशों यहाँ तक कि वर्तमान रूस और चीन को भी किसी सीमा तक अपने तीसरे अर्थ के वर्चस्व अर्थात सांस्कृतिक वर्चस्व में लाने में कामयाब हो रहा है। अमेरिका का घोर विरोधी चीन बड़ी तेजी से उदारीकरण, विदेशी निवेश आदि की ओर बढ़ रहा है।

प्रश्न 3. विश्व राजनीति में संयुक्त राज्य अमेरिका के वर्चस्व के लिए उत्तरदायी कारकों का परीक्षण कीजिए।

अथवा

आप किस तरह से अमेरिका की शक्ति का आकलन एक प्रमुख शक्ति के रूप में करेंगे?
उत्तर : 1. साम्यवाद के प्रसार को रोकना (To check spread of communism) – इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए उसने खुलेआम कहा कि वह स्वयं तथा पश्चिमी यूरोपीय देशों से मिलकर सोवियत संघ तथा पूर्वी यूरोप को विदेशी नीतियों पर प्रहार करेगा, जिन्हें वह साम्यवाद को बढ़ावा देने वाले समझेगा। उस उन सारे व्यक्तियों, शासनाध्यक्षों, सैनिक अधिकारियों, राजनीतिक दलों आदि के विरोध के लिए अपनी गुप्तचर संस्था का उपयोग किया, जो अमेरिका तथा पूँजीवादी व्यवस्था के प्रति शत्रुतापूर्ण रवैया अपनाए हुए थे।
2.अमेरिकी विदेश नीति का दूसरा उद्देश्य सैनिक हितों से सम्बन्धित था (The Second Objective was related with Military Interests) : अमेरिका चाहता था कि अधिक-से-अधिक देश सैन्य-संधियों द्वारा उसके साथ जुड़ जाएँ। उसने नाटो, सीएटो, सेंटो आदि सैनिक समझौतों द्वारा यूरोप, अमेरिकी, एशियाई और लैटिन अमेरिकी देशों को अपने साथ मिला लिया। उसने मिसाइल छोड़ने तथा अन्य नवीनतम हथियारों का प्रयोग करने के लिए विभिन्न देशों में सैनिक अड्डे बनाए।
3.लोकतंत्र (Democracy): लोकतांत्रिक गणतंत्रीय सरकारों को समर्थन दिया। अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र संघ तथा अन्य अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर साम्राज्यवाद तथा उपनिवेशवाद का विरोध किया तथा उन सरकारों के तख्ते पलटवा दिए जो लोकतांत्रिक सरकारों एवं गणतंत्रीय सरकारों की नीतियों का समर्थन नहीं करते थे।
4.ऋण (Loans ) : अमेरिका अन्य देशों को अपनी शर्तों पर ऋण तथा आर्थिक सहायता देता था, फिर चाहे आर्थिक मदद यूरोपीय देशों को दी जाती या लैटिन अमेरिकी देशों को या एशियाई देशों को। सबके लिए शर्त थी कि वह सोवियत संघ के विरुद्ध अमेरिकी पक्ष को समर्थन देंगे। क्यूबा, वियतनाम तथा कोरिया में उनका पक्ष लिया गया, जो अमेरिका के साथ थे।

प्रश्न 4. सोवियत संघ के विघटन के पश्चात् उभरी नई विश्व व्यवस्था का आकलन कीजिए ।
उत्तर : सोवियत संघ के विघटन के बाद उभरी नई विश्व व्यवस्था :
विश्व में नई व्यवस्था का उदय या संयुक्त राष्ट्र संघ की आड़ में अमरीकी वर्चस्व का आरंभ : सोवियत संघ के विघटन के पश्चात् संयुक्त राष्ट्र संघ की आड़ में अमरीकी वर्चस्व उभरने लगा था। कुछ राजनीतिज्ञों का मानना है कि इस वर्चस्व की शुरुआत वस्तुतः संयुक्त राष्ट्र संघ बनने (1945) से ही हो गई थी लेकिन विश्व में अमरीकी वर्चस्व की स्पष्ट जानकारी सोवियत संघ का विघटन 1991 में होने के बाद हुई। इस कथन की पुष्टि में अगस्त, 1990 के खाड़ी युद्ध की घटना का निम्नवत उल्लेख किया जा सकता है :
खाड़ी युद्ध में संयुक्त राष्ट्र संघ की भूमिका : उक्त घटना में इराक ने कुवैत पर आक्रमण कर दिया था और वह कुवैत के महत्त्वपूर्ण ठिकानों पर कब्जा करता जा रहा था। संयुक्त राष्ट्र संघ ने कूटनीतिक तरीकों से इराक के राष्ट्रपति सद्दाम हुसैन को समझा-बुझाकर युद्ध विराम करने की सलाह दी लेकिन वह न माने और उन्होंने आखिरी दम तक युद्ध विराम न करने की कसम खा ली, यह देखकर संयुक्त राष्ट्र संघ ने पश्चिम के सदस्य देशों को आदेश दिया कि वे बल प्रयोग करके कुवैत को आजाद कराएँ ।
प्रथम खाड़ी-युद्ध नाम से चर्चित इस घटना में विश्व के 34 देशों की छः लाख साठ हजार नौ सौ सैनिकों वाली विशाल संयुक्त सेना ने ‘आपरेशन डेजर्ट स्टार्म’ के तहत इराक पर चढ़ाई कर दी । यह देखने को मिला कि इस विशाल सेना का प्रधान सेनापति अमरीका के जनरल नार्मन स्वार्जकॉव बने थे और इस संयुक्त सेना के लगभग 75% सैनिक अमरीकी फौज के ही थे। इस सेना ने शीघ्र ही इराकी सेना को कुवैत की भूमि से पीछे खदेड़ दिया और कुवैत को मुक्त करा लिया। ऐसा प्रतीत होता है कि संयुक्त राष्ट्र संघ को ढाल बनाकर अमरीका ने ही ऐसा निर्णय लिया होगा अर्थात् संयुक्त राष्ट्र संघ अमरीका के दबाव में काम करता है।
दूसरी बात यह देखी गई कि इस युद्ध में अमरीका का उत्कृष्ट सामरिक और प्रौद्योगिकी वर्चस्व उजागर हुआ। इसमें अमरीका द्वारा बनाए गए तथाकथित “स्मार्ट बम” प्रयोग हुए और इसको ‘कंप्यूटर युद्ध” नाम दिया गया। समूचे विश्व में पहली बार दूरदर्शन पर युद्ध के भीषण दृश्य दिखाए गए। युद्ध पश्चात् प्रकाशित रिपोर्ट से यह जानकारी भी मिलती है कि अमरीका ने इसमें खर्च करने के स्थान पर जर्मनी, जापान और सऊदी अरब जैसे देशों से धन की उगाही भी की और काफी लाभ कमाया। निष्कर्ष : खाड़ी युद्ध की उक्त घटना से दो बातें सुस्पष्ट हो जाती हैं कि :
(i) संयुक्त राष्ट्र संघ अमरीका के दबाव में आकर निर्णय लेता है।
(ii) अमरीका का पूरे विश्व में सामरिक और प्रौद्योगिक वर्चस्व है।
(iii) विश्व के अन्य देश अमरीका की इच्छा के आगे झुकने को विवश हैं (उदाहरण : युद्ध में भाग लेने वाले मित्र देशों से युद्ध-व्यय की वसूली करके लाभ कमाना )

प्रश्न 5. “राष्ट्रपति क्लिंटन ने ‘लोकतंत्र के प्रोत्साहन’ (Democracy Promotion) तथा ‘विश्व व्यापार’ (World Trade) जैसे ‘नरम मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया।” किन्हीं दो अवसरों पर प्रकाश डालिए जब उन्होंने सैनिक बल का प्रयोग किया।
उत्तर : 1. क्लिंटन के दौर में भी अमरीका जब-तब फौजी ताकत के इस्तेमाल के लिए तैयार दिखा। इस तरह की एक बड़ी घटना 1999 में हुई। अपने प्रान्त कोसोवो में युगोस्लाविया ने अल्बानियाई लोगों के आंदोलन को कुचलने के लिए सैन्य कार्रवाई की। कोसोवो में अल्बानियाई लोगों की बहुलता है। इसके जवाब में अमरीकी नेतृत्व में नाटो के देशों ने युगोस्लावियाई क्षेत्रों पर द महीने तक बमबारी की। स्लोबदान मिलोसेविच की सरकार गिर गयी और कोसोवो पर नाटो की सेना काबिज हो गई।
2.क्लिंटन के दौर में दूसरी बड़ी सैन्य कार्यवाही नैरोबी (केन्या) और दारे-सलाम (तंजानिया) के अमरीकी दूतावासों पर बमबारी के जवाब में 1998 में हुई। अतिवादी इस्लामी विचारों से प्रभावित आतंकवादी संगठन अल-कायदा को इस बमबारी का जिम्मेदार ठहराया गया। इस बमबारी के कुछ दिनों के अंदर राष्ट्रपति क्लिंटन ने ‘ऑपरेशन इनफाइनाइट रीच’ का आदेश दिया। इस अभियान के अंतर्गत अमरीका ने सूडान और अफगानिस्तान के अल-कायदा के ठिकानों पर कई बार क्रूज मिसाइलों से हमले किए।

You cannot copy content of this page
Scroll to Top

Live Quiz : बंधुत्व जाति और वर्ग | 04:00 pm