Class 12th Political Science Chapter 5 Important Question Answer 8 Marks समकालीन दक्षिण एशिया

प्रश्न 1. दक्षिण एशियाई देशों की समान समस्याओं का विश्लेषण कीजिए।
उत्तर : (i) दक्षेस के सदस्य कुछ छोटे देश मानते हैं कि ‘साफ्टा’ की ओट लेकर भारत उनके बाजार में सेंध मारना चाहता है और व्यावसायिक उद्यम तथा व्यावसायिक मौजूदगी के द्वारा उनके समाज और राजनीति पर असर डालना चाहता है।
दूसरी ओर, भारत सोचता है कि ‘साफ्टा’ से इस क्षेत्र के हर देश को फायदा होगा और क्षेत्र में मुक्त व्यापार बढ़ने से राजनीतिक मसलों पर सहयोग ज्यादा बेहतर होगा।
(ii) दक्षेस के सदस्य देशों में आपसी मतभेद बहुत अधिक हैं। कहीं सीमा विवाद तो कहीं पानी के बँटवारे को लेकर आपसी मनमुटाव बना रहता है। भारत पाकिस्तान द्वारा आयोजित आतंकवाद से परेशान है जबकि पाकिस्तान कश्मीर मुद्दे पर भारत से दुश्मनी रखता है। इन सब कारणों से सदस्य देशों के हाथ अवश्य मिल लेकिन दिल नहीं मिलते। दक्षेस को अपेक्षित सफलता न मिलने के यही कारण हैं।
(iii) दक्षिण एशिया के सभी देश एक-दूसरे पर विश्वास नहीं करते, इसलिए वे अंतर्राष्ट्रीय मंच पर एक स्वर में नहीं बोल पाते। उदाहरण के लिए, अंतर्राष्ट्रीय मंच पर भारत-पाक के विचार सदैव एक-दूसरे के विपरीत होते हैं। दोनों ही देश एक-दूसरे में कमियाँ निकालना शुरू कर देते हैं।
(iv) दक्षिण एशिया के सारे झगड़े सिर्फ भारत और उसके पड़ोसी देशों के बीच ही नहीं हैं बल्कि भूटान बांग्लादेश, म्यांमार और नेपाल के बीच में भी अनेक मुद्दों पर विवाद बने हुए हैं,जैसे-जातीय मूल के, नेपालियों के भूटान अप्रवास तथा रोहिंग्या लोगों के म्यांमार में अप्रवास के मसलों के मतभेद भी अंतर्राष्ट्रीय मंच पर उठते रहते हैं। बांग्लादेश और नेपाल के बीच हिमालयी नदियों के पानी के बँटवारे को लेकर मतभेद बने हुए हैं।
(v) दक्षेस के अन्य देशों को यह डर बना हुआ है कि भारत कहीं बड़े होने का दबाव हम पर न बना बैठे। इसका कारण दक्षिण एशिया का भूगोल है, जहाँ भारत बीच में स्थित है और अन्य देश भारत की सीमा के चारों तरफ हैं।
(vi) दक्षिण एशियाई देशों की एक प्रमुख समान समस्या निर्धनता और आर्थिक पिछड़ापन है। ये सभी देश गरीब हैं। मानव विकास सूचकांक में श्रीलंका की स्थिति कुछ बेहतर है पर अन्य देश अभी गरीबी, बीमारी, अभाव, पिछड़ापन आदि से जूझ रहे हैं।

प्रश्न 2. पाकिस्तान के साथ भारत के बदलते संबंधों की व्याख्या कीजिए।

अथवा

भारत व पाकिस्तान के संबंधों का वर्णन करें ।
उत्तर : (i) सन् 1965 में पाकिस्तान ने भारत पर आक्रमण कर दिया परन्तु भारत ने इसका मुँहतोड़ जवाब दिया और पाकिस्तान को बुरी तरह पराजित किया। अंत में सोवियत संघ के माध्यम से दोनों देशों के बीच ताशकन्द (Tashkent) (यह शहर अब उज्बेकिस्तान की राजधानी है) समझौता हुआ, जिसके परिणामस्वरूप भारत ने पाकिस्तान के जीते हुए क्षेत्र उसे वापस लौटा दिए।
(ii) सन् 1971 में बांग्लादेश की समस्या को लेकर भारत तथा पाकिस्तान के बीच पुन: युद्ध छिड़ गया। इस युद्ध में पाकिस्तान की फिर पराजय हुई और पाकिस्तान का एक बहुत बड़ा भाग उससे अलग हो गया अर्थात् बांग्लादेश नामक एक स्वतंत्र राज्य की स्थापना हुई। उसके पश्चात् भारत व पाकिस्तान दोनों देशों के प्रधानमंत्री शिमला में मिले और उन्होंने एक समझौते पर हस्ताक्षर। किए। इस समझौते के अनुसार दोनों देश इस बात पर सहमत हुए कि भविष्य में वे अपनी सभी समस्याओं का समाधान शांतिपूर्ण तथा मित्रतापूर्ण ढंग से करेंगे, तब से दोनों देशों के आपसी संबंधों में कुछ सुधार होना आरंभ हुआ।
(iii) सन् 1984 में श्री राजीव गाँधी भारत के प्रधानमंत्री बने। सन् 1985 में भारत तथा पाकिस्तान के कई मंत्रियों और अधिकारियों की एक-दूसरे के देशों में यात्राएँ हुईं, जिसके परिणामस्वरूप दोनों देशों के बीच व्यापार, कृषि, विज्ञान तथा तकनीकी के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने के लिए कई समझौते भी हुए। श्री राजीव गाँधी तथा जनरल जिया (पाकिस्तान के राष्ट्रपति) की कई बार मुलाकात हुई, परंतु उनका कोई ठोस परिणाम नहीं निकला। सन् 1988 में श्रीमती बेनजीर भुट्टो पाकिस्तान की प्रधानमंत्री बनीं। आशा थी कि पाकिस्तान में लोकतंत्र के बहाल होने से भारत-पाक संबंधों में सुधार होगा, परन्तु ऐसा नहीं हुआ। सन् 1990 में श्री नवाज शरीफ वहाँ के प्रधानमंत्री बने। उन्होंने भारत के प्रति जो रवैया अपनाया उससे दोनों देशों में कटुता बढ़ी।
(iv) जनवरी, 2003 में भारत के प्रभारी उच्चायुक्त सुधीर व्यास के साथ इस्लामाबाद में दुर्व्यवहार किये जाने के बाद पाक उच्चायोग के नई दिल्ली में वाणिज्य प्रभारी मंसूर सईद शेख तथा दो अन्य कर्मचारियों को 48 घंटे के अंदर देश छोड़ने का आदेश दिया गया। पाकिस्तान द्वारा भारत में आंतकवादी घटनाओं को बढ़ावा देना दोनों देशों के मध्य खराब संबंधों का प्रमुख कारण है। 26/11के मुंबई हमले के बाद दोनों देशों के मध्य तनातनी बहुत बढ़ गई है।
अंत में हम यह आशा करते हैं कि दोनों देशों के बीच संबंधों सुधार हो और दोनों देश अच्छे मित्रों व अच्छे पड़ोसियों की तरह रह सकें।

प्रश्न 3. पाकिस्तान में स्थायी लोकतंत्र के निर्माण की असफलता के लिए उत्तरदायी कारकों की व्याख्या कीजिए। पाकिस्तान में स्थायी लोकतांत्रिक ढाँचे का मार्ग प्रशस्त करने में सहायक किन्हीं दो लोकतंत्र-समर्थक कारकों का वर्णन कीजिए।

अथवा

पाकिस्तान में एक स्थायी लोकतांत्रिक व्यवस्था को बनाए रखने में असफल होने के लिए उत्तरदायी किन्हीं दो कारकों की व्याख्या कीजिए |
उत्तर : I. पाकिस्तान में लोकतंत्र की असफलता के लिए उत्तरदायी कारक :

  1. पाकिस्तान में पहले संविधान के बनने के बाद देश के शासन की बागडोर जनरल अयूब खान ने अपने हाथों में ले ली और जल्दी ही अपना निर्वाचन भी करा लिया। उनके शासन के खिलाफ जनता का गुस्सा भड़का और ऐसे में उन्हें अपना पद छोड़ना पड़ा। इससे एक बार फिर सैनिक शासन का रास्ता साफ हुआ और जनरल याहिया खान ने शासन की बागडोर सँभाली।
  2. याहिया खान के सैनिक शासन के दौरान पाकिस्तान को बांग्लादेश संकट का सामना करना पड़ा और 1971 में भारत के साथ पाकिस्तान का युद्ध हुआ। युद्ध के परिणामस्वरूप पूर्वी पाकिस्तान टूटकर एक स्वतंत्र देश बना और बांग्लादेश कहलाया।
  3. इसके बाद पाकिस्तान में जुल्फिकार अली भुट्टो के नेतृत्व में एक निर्वाचित सरकार बनी जो 1971 से 1977 तक कायम रही। 1977 में जनरल जिया उल हक ने इस सरकार को गिरा दिया।
  4. 1982 के बाद जनरल जिया-उल-हक को लोकतंत्र-समर्थक आंदोलन का सामना करना पड़ा और 1988 में एक बार फिर बेनजीर भुट्टो के नेतृत्व में लोकतांत्रिक सरकार बनी। पाकिस्तान में इसके बाद की राजनीति बेनजीर भुट्टो की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी और मुस्लिम लीग के नवाज शरीफ की आपसी होड़ के इर्द-गिर्द घूमती रही । निर्वाचित लोकतंत्र की यह अवस्था 1999 तक कायम रही।
  5. 1999 में एक बार फिर सेना ने दखल दिया और जनरल परवेज मुशर्रफ ने प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को हटा दिया। 2001 में परवेज मुशर्रफ ने अपना निर्वाचन राष्ट्रपति के रूप में कराया। पर वे ज्यादा दिन तक लोकतंत्र समर्थक कारकों का सामना नहीं कर सके और उन्हें अपना पद छोड़ना पड़ा। वर्तमान में पाकिस्तान में एक चुनी हुई सरकार कार्य कर रही है।
  6. पाकिस्तान में लोकतंत्र के स्थायी न बन पाने के कई कारण हैं। यहाँ सेना, धर्मगुरु और भू-स्वामी अभिजनों का सामाजिक दबदबा है। इसकी वजह से कई बार निर्वाचित सरकारों को गिराकर सैनिक शासन कायम हुआ। पाकिस्तान की भारत के साथ तनातनी रहती है। इस वजह से सेना-समर्थक समूह ज्यादा मजबूत हैं और अक्सर ये समूह दलील देते हैं कि पाकिस्तान के राजनीतिक दलों और लोकतंत्र में खोट है। राजनीतिक दलों के स्वार्थ साधन तथा लोकतंत्र की धमाचौकड़ी से पाकिस्तान की सुरक्षा खतरे में पड़ेगी। इस तरह ये ताकतें सैनिक शासन को जायज ठहराती हैं। लोकतंत्र तो खैर पाकिस्तान में पूरी तरह सफल नहीं हो सका है लेकिन इस देश में लोकतंत्र का जज्बा मजबूती के साथ कायम रहा।

II. लोकतंत्र समर्थक दो कारक :(1) पाकिस्तान में अपेक्षाकृत एक स्वतंत्र और साहसी प्रेस मौजूद है।
(2) वहाँ मानवाधिकार आंदोलन भी काफी मजबूत है। ये दोनों कारक पाकिस्तान में सैन्य शासन को स्थायी नहीं बनने देते।

प्रश्न 4, “ श्रीलंका में जातिगत संघर्ष होते हुए भी लोकतांत्रिक व्यवस्था कायम कर रखी है एवं अच्छी आर्थिक वृद्धि और मानव विकास के ऊँचे स्तर को हासिल किया है। ” व्याख्या कीजिए।

अथवा

“स्वतंत्रता के पश्चात् से, जातीय संघर्ष होते हुए भी, श्रीलंका ने आर्थिक वृद्धि तथा मानवीय विकास का उच्च स्तर प्राप्त किया।” इस कथन के पक्ष में तर्क दीजिए।
उत्तर : श्रीलंका में जातीय संघर्ष और लोकतंत्र (Ethnic) Conflict and Democracy in Sri Lanka) :

1.ब्रिटेन से आज़ादी प्राप्त करने (1948) के बाद से लेकर अब तक श्रीलंका में लोकतंत्र कायम है। लेकिन, श्रीलंका को एक कठिन चुनौती का सामना करना पड़ा। यह चुनौती न तो सेना की थी और न ही राजतंत्र की। श्रीलंका को जातीय संघर्ष का सामना करना पड़ा जिसकी माँग है कि श्रीलंका के एक क्षेत्र को अलग राष्ट्र बनाया जाये।
2.आज़ादी के बाद से (श्रीलंका को उन दिनों सिलोन कहा जाता था) श्रीलंका की राजनीति पर बहुसंख्यक सिंहली समुदाय के हितों की नुमाइंदगी करने वालों का दबदबा रहा है। ये लोग भारत छोड़कर श्रीलंका आ बसी एक बड़ी तमिल आबादी के खिलाफ हैं। तमिलों का बसना श्रीलंका के आज़ाद होने के बाद भी जारी रहा। सिंहली राष्ट्रवादियों का मानना था कि श्रीलंका में तमिलों के साथ कोई ‘रियायत’ नहीं बरती जानी चाहिए क्योंकि श्रीलंका सिर्फ सिंहली लोगों का है। तमिलों के प्रति उपेक्षा भरे बर्ताव से एक उग्र तमिल राष्ट्रवाद की आवाज बुलंद हुई।
3.1983 के बाद से उग्र तमिल संगठन ‘लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम’ (लिट्टे) श्रीलंकाई सेना के साथ सशस्त्र संघर्ष कर रहा है। इसने ‘तमिल ईलम’ यानी श्रीलंका के तमिलों के लिए एक अलग देश की माँग की है। श्रीलंका के उत्तर-पूर्वी हिस्से पर लिट्टे का नियंत्रण है।
4.श्रीलंका की समस्या भारतवंशी लोगों से जुड़ी है। भारत की तमिल जनता का भारतीय सरकार पर भारी दबाव है कि वह श्रीलंकाई तमिलों के हितों की रक्षा करे। भारतीय सरकार ने समय-समय पर तमिलों के सवाल पर श्रीलंका की सरकार से बातचीत की कोशिश की है।
5.1987 में भारतीय सरकार श्रीलंका के तमिल मसले में प्रत्यक्ष रूप से शामिल हुई। भारत की सरकार ने श्रीलंका से एक समझौता किया तथा श्रीलंका सरकार और तमिलों के बीच रिश्ते सामान्य करने के लिए भारतीय सेना को भेजा। आखिर में भारतीय सेना लिट्टे के साथ संघर्ष में फँस गई। भारतीय सेना की उपस्थिति को श्रीलंका की जनता ने भी कुछ ख़ास पसंद नहीं किया। श्रीलंकाई जनता ने समझा कि भारत श्रीलंका के अंदरूनी मामलों में दखलंदाजी कर रहा है। 1989 में भारत ने अपनी ‘शांति सेना’ लक्ष्य हासिल किए बिना वापस बुला ली ।
6.श्रीलंका के इस संकट का हिंसक चरित्र बरकरार है। बहरहाल, अंतर्राष्ट्रीय मध्यस्थ के रूप में नार्वे और आइसलैंड जैसे स्केंडिनेवियाई देश युद्धरत दोनों पक्षों को फिर से आपस में बातचीत करने के लिए राजी कर रहे हैं। श्रीलंका का भविष्य इन्हीं वार्ताओं पर निर्भर करेगा। (याद रहे कि श्रीलंका में 2009 में लिट्टे का सफाया कर दिया गया है और अब वहाँ पूर्ण शांति है।)
आर्थिक वृद्धि व मानव विकास की स्थिति : संघर्षों की चपेट में होने के बाद भी श्रीलंका ने अच्छी आर्थिक वृद्धि और विकास के उच्च स्तर को हासिल किया है। जनसंख्या की वृद्धि दर पर सफलतापूर्वक नियंत्रण करने वाले विकासशील देशों में श्रीलंका प्रथम है। दक्षिण एशिया के देशों में सबसे पहले श्रीलंका ने ही अपनी अर्थव्यवस्था का उदारीकरण किया। गृहयुद्ध से गुजरने के बावजूद कई सालों से इस देश का प्रति व्यक्ति क घरेलू उत्पाद दक्षिण एशिया में सबसे ज्यादा है। अंदरूनी संघर्ष के झंझावातों को झेलकर भी श्रीलंका ने लोकतांत्रिक राजव्यवस्था कायम रखी है।

प्रश्न 5. 1971 का युद्ध भारत पर कैसे थोपा गया था? संक्षिप्त व्याख्या कीजिए ।

अथवा

भारत और पाकिस्तान के बीच विवाद के किन्हीं दो प्रमुख मुद्दों का वर्णन कीजिए जिनके कारण 1971 का युद्ध हुआ।
उत्तर : 1971 का युद्ध भारत पर निम्नलिखित तरीके से थोपा गया था :
(i) 1970 के शुरुआती समय में पाकिस्तान में गंभीर आंतरिक संकट पैदा हो गया। देश के पहले आम चुनाव में बिखरा हुआ निर्णय आया। पश्चिमी पाकिस्तान में जुल्फिकार भुट्टो की पार्टी विजयी हुई, जबकि पूर्वी पाकिस्तान में शेख मुजीब-उर-रहमान की अवामी लीग को जबरदस्त कामयाबी हासिल हुई।
(ii) पूर्वी पाकिस्तान की बंगाली आबादी ने पश्चिमी पाकिस्तान के व्यवहार के खिलाफ वोट दिया। पश्चिमी पाकिस्तान के शासक पूर्वी पाकिस्तान के लोगों को दूसरे दर्जे का नागरिक समझते थे। वे लोकतांत्रिक निर्णय को जो उनके पक्ष में नहीं था, वैध नहीं मानते थे। इसके अलावा, वे अवामी लीग की ‘संघ’ बनाने की माँग को मानने के लिए तैयार नहीं थे।
(iii) 1971 के प्रारंभ में, पाकिस्तानी सेना ने शेख मुजीब को गिरफ्तार कर लिया तथा पूर्वी पाकिस्तान के लोगों पर भय का शासन किया। इस अत्याचारी शासन के खिलाफ ‘बांग्लादेश’ की आजादी के लिए पूर्वी पाकिस्तान के लोगों ने आंदोलन शुरू कर दिया।
(iv) 1971 के तमाम समय में भारत को लगभग 80 लाख शरणार्थियों की समस्या का सामना करना पड़ा जो पूर्वी पाकिस्तान से भागकर भारत आये थे। भारत ने बांग्लादेश के संघर्ष में नैतिक समर्थन प्रदान किया। पाकिस्तान ने भारत पर आरोप लगाया कि वह (भारत) पाकिस्तान के विभाजन की साजिश कर रहा है।
(v) अमरीका तथा चीन ने पाकिस्तान का समर्थन किया। अमरीका-पाकिस्तान-चीन के ध्रुव का माकूल जवाब देने के लिए भारत ने अगस्त, 1971 में सोवियत संघ के साथ ‘शांति और मित्रता’ की संधि की। महीनों के कूटनीतिक तनावों तथा सैनिक गठबंधनों के खिलाफ दिसंबर, 1971 में भारत तथा पाकिस्तान के बीच व्यापक स्तर पर युद्ध शुरू हो गया।

प्रश्न 6. चीन तथा संयुक्त राज्य अमरीका, दक्षिणी एशिया की राजनीति में किस प्रकार अहम् भूमिका निभाते हैं? व्याख्या कीजिए ।
उत्तर : चीन और संयुक्त राज्य अमरीका दक्षिण एशिया की राजनीति में अहम भूमिका निभाते हैं।
(1) पिछले दस वर्षों में भारत और चीन के संबंध बेहतर हुए हैं। चीन की रणनीतिक साझेदारी पाकिस्तान के साथ है और यह भारत-चीन संबंधों में एक बड़ी कठिनाई है। विकास की जरूरत और वैश्वीकरण के कारण एशिया महादेश के ये दो बड़े देश ज्यादा नजदीक आये हैं। सन् 1991 के बाद से इनके आर्थिक संबंध ज्यादा मजबूत हुए हैं।
(2) शीतयुद्ध के बाद दक्षिण एशिया में अमरीकी प्रभाव तेजी से बढ़ा है। अमरीका ने शीतयुद्ध के बाद भारत और पाकिस्तान दोनों से अपने संबंध बेहतर किए हैं। वह भारत-पाक के बीच लगातार मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है। दोनों देशों में आर्थिक सुधार हुए हैं और उदार नीतियाँ अपनाई गई हैं। इससे दक्षिण एशिया में अमरीकी भागीदारी ज्यादा गहरी हुई है।
(3) अमरीका में दक्षिण एशियाई मूल के लोगों की संख्या अच्छी-खासी है। फिर, इस क्षेत्र की जनसंख्या और बाजार का आकार भी भारी-भरकम है। इस कारण इस क्षेत्र की सुरक्षा और शांति के भविष्य से अमरीका के हित भी बंधे हुए हैं।
बहरहाल, दक्षिण एशिया को संघर्षो की आशंका वाले क्षेत्र के रूप में पहचाना जाता रहेगा अथवा यह एक ऐसे क्षेत्रीय गुट के रूप में उभरेगा जिसके सांस्कृतिक गुण-धर्म तथा व्यापारिक हित एक हैं- यह बात किसी बाहरी शक्ति से ज्यादा के लोगों और सरकारों पर निर्भर है।

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