Class 12th Political Science Chapter 6 Important Question Answer 8 Marks अन्तर्राष्ट्रीय संगठन

प्रश्न 1. लीग ऑफ नेशन्स अपने प्रयासों में असफल क्यों रहा? आपके विचार में क्या संयुक्त राष्ट्र ने लीग ऑफ नेशन्स की तुलना में अपेक्षाकृत बेहतर भूमिका निभाई है? अपने उत्तर की पुष्टि कीजिए ।
उत्तर : लीग ऑफ नेशन्स अपने प्रयासों में असफल होने के कारण :
(i) राष्ट्र संघ (League of Nations) की कामयाबी के लिए यह जरूरी था कि अमरीका इसकी सदस्यता ग्रहण करता। अमरीका के द्वारा संघ की सदस्यता ग्रहण न करने से इसकी कामयाबी पर शुरू से ही सवालिया निशान लग गया था। वस्तुतः अमरीका की गैर मौजूदगी में राष्ट्र संघ उस टीम की भाँति था जिसका कोई कप्तान न हो। अमरीका के सदस्य न बनने से राष्ट्र संघ का अंतर्राष्ट्रीय स्वरूप ही समाप्त हो गया।
(ii) राष्ट्र संघ की सफलता के लिए आवश्यक था कि विश्व के सभी देश इसके सदस्य बनते। जर्मनी को फ्रांस की राजनीतिक जिद के कारण इसका सदस्य नहीं बनाया गया। 1925 में महात्मा गाँधी ने कहा था “राष्ट्र संघ क्या है? वास्तव में क्या यह इंग्लैंड और फ्रांस ही नहीं है? क्या अन्य शक्तियों की कोई गिनती है?” इसके अलावा, राष्ट्र संघ के पास अपनी सिफारिशों को लागू कराने के लिए अंतर्राष्ट्रीय सेना नहीं थी। यदि आर्थिक प्रतिबंधों को लागू कराने तथा अड़ियल देशों को सही मार्ग पर लाने के लिए राष्ट्र संघ के पास अपनी सेना होती तो संभवतः दुनिया द्वितीय विश्व युद्ध की विभीषिका से दूर रहती।
संयुक्त राष्ट्र ने लीग ऑफ नेशन्स की तुलना में अपेक्षाकृत बेहतर भूमिका निभाई है :
(i) जिन हालातों तथा बिंदुओं पर राष्ट्र संघ को नाकामी हासिल हुई थी, उन्हें दूर करने का प्रयास संयुक्त राष्ट्र ने किया है। संयुक्त राष्ट्र का मकसद अंतर्राष्ट्रीय विवादों को सुलझाना तथा राष्ट्रों के बीच सहयोग उत्पन्न करना है।
(ii) जहाँ राष्ट्र संघ में विश्व के तमाम देशों को सदस्य नहीं बनाया जा सका, वहीं संयुक्त राष्ट्र में 2006 तक सदस्य देशों की संख्या 192 थी। आज इमसें लगभग सभी स्वतंत्र देश शामिल हैं।
(iii) संयुक्त राष्ट्र सामाजिक-आर्थिक विकास से संबंधित विवादों को सुलझाने के साथ-साथ तमाम दुनिया में सामाजिक-आर्थिक विकास की संभावनाओं को बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। राष्ट्र संघ अमरीका की अनुपस्थिति में अपने अंतर्राष्ट्रीय स्वरूप को कायम नहीं रख सका।
(iv) राष्ट्र संघ दो विश्व युद्धों के बीच जो नहीं कर पाया था, उसे पाने का प्रयत्न संयुक्त राष्ट्र कर रहा है। संयुक्त राष्ट्र के अनेक अभिकरण सामाजिक, शैक्षिक, स्वास्थ्य तथा आर्थिक पहलुओं के विकास के संदर्भ में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

प्रश्न 2. संयुक्त राष्ट्र के किन्हीं चार अति महत्त्वपूर्ण प्रमुख अंगों का उल्लेख कीजिए । संयुक्त राष्ट्र का कौन-सा अंग स्थापित हो चुका है ? संयुक्त राष्ट्र के किन्हीं तीन उद्देश्यों का मूल्यांकन कीजिए।
उत्तर : 1. संयुक्त राष्ट्र के अति महत्त्वपूर्ण अंग
(i) सुरक्षा परिषद : इसमें 15 सदस्य हैं। अमरीका, रूस, ब्रिटेन, फ्रांस तथा चीन इसके पाँच स्थायी सदस्य हैं जिन्हें वीटो (विशेषाधिकार) का अधिकार प्राप्त है। दस अस्थायी सदस्यों का चुनाव आम सभा द्वारा दो वर्षों के लिए किया जाता है। सुरक्षा परिषद के फैसले सभी सदस्यों पर बाध्यकारी हैं।
(ii) आम सभा : 192 देश इसके सदस्य हैं। इसकी सभा में प्रत्येक सदस्य को एक वोट हासिल है। महत्त्वपूर्ण निर्णयों के लिए दो-तिहाई तथा शेष के लिए सामान्य बहुमत आवश्यक है। इसके निर्णय सभी सदस्यों पर बाध्यकारी नहीं हैं।
(iii) सचिवालय : इसमें अन्य महत्त्वपूर्ण संगठनों के कार्यों के लिए अन्तर्राष्ट्रीय स्टाफ होता है। इसका प्रधान महासचिव होता है। इस समय इसके महासचिव द. कोरिया के बान-की-मून हैं। वे संयुक्त राष्ट्र के आठवें महासचिव हैं तथा 1971 के बाद इस पद पर आसीन होने वाले पहले एशियाई हैं। महासचिव की नियुक्ति सुरक्षा परिषद की सलाह पर सभा द्वारा पाँच वर्ष के लिए की जाती हैं।
(iv) अन्तर्राष्ट्रीय न्यायालय : इसमें 15 न्यायाधीश होते इनका चुनाव 9 वर्षों के लिए आम सभा तथा सुरक्षा परिषद दोनों में पूर्ण बहुमत के द्वारा होता है। इसका मुख्यालय हेग में है।
2.संयुक्त राष्ट्र का स्थगित होने वाला अंग : न्यास परिषद संयुक्त राष्ट्र की न्यास प्रणाली के अंतर्गत आने वाली अंतिम ‘ट्रस्ट टेरीटरी’ पलाउ के स्वतंत्र होने के साथ 1 नवंबर, 1944 से यह परिषद स्थगित हो गयी।
3.संयुक्त राष्ट्र के उद्देश्यों का मूल्यांकन
(i) अन्तर्राष्ट्रीय शांति तथा सुरक्षा को कायम रखना।
(ii) भिन्न-भिन्न राष्ट्रों के बीच मैत्रीपूर्ण संबंधों को बढ़ावा देना।
(iii) आपसी सहयोग द्वारा आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक तथा मानवीय ढंग की अन्तर्राष्ट्रीय समस्याओं को हल करना ।

प्रश्न 3. शीत युद्ध के पश्चात् आए ऐसे किन्हीं छ: बदलावों का उल्लेख कीजिए जिनके कारण संयुक्त राष्ट्र की कार्यशैली को बेहतर बनाने के लिए सुधार लाना आवश्यक हो गया है।
उत्तर : शीत युद्ध के पश्चात् आए छः बदलाव :
(i) बड़ी आर्थिक ताकत होना चाहिए।
(ii) बड़ी सैन्य ताकत होना चाहिए।
(iii) संयुक्त राष्ट्र संघ के बजट में ऐसे देश का योगदान ज्यादा हो।
(iv) आबादी के लिहाज से बड़ा राष्ट्र हो।
(v) ऐसा देश जो लोकतंत्र और मानवाधिकारों का सम्मान करता हो ।
(vi) यह देश ऐसा हो कि अपने भूगोल, अर्थव्यवस्था और संस्कृति के लिहाज से विश्व की विविधता की नुमाइंदगी करता हो ।
स्पष्ट है कि इन मानदंडों में से हर एक की कुछ न कुछ वैधता है। सरकारें अपने-अपने हित और महत्त्वाकांक्षाओं के लिहाज से कुछ कसौटियों को फायदेमंद तो कुछ को नुकसानदेह मानती हैं। भले ही कोई देश सुरक्षा परिषद् की सदस्यता के लिए इच्छुक न हो, वह फिर भी बता सकता है कि इन कसौटियों में दक्कत है। सुरक्षा परिषद् की सदस्यता के लिए किसी देश की अर्थव्यवस्था कितनी बड़ी होनी चाहिए अथवा उसके पास कितनी बड़ी सैन्य ताकत होनी चाहिए? कोई राष्ट्र संयुक्त राष्ट्र संघ के बजट में कितना योगदान करे कि सुरक्षा परिषद् की सदस्यता हासिल कर सके? कोई देश विश्व में बड़ी भूमिका निभाने की कोशिश कर रहा हो तो उसकी बड़ी जनसंख्या इसमें बाधक है या सहायक? अगर लोकतंत्र और मानवाधिकार के प्रति सम्मान ही कसौटी हो तो इस मामले में बेहतरीन रिकार्ड वाले देशों की कतार लग जाएगी।

प्रश्न 4. संयुक्त राष्ट्र संबंधी ऐसे दो बुनियादी सुधारों का वर्णन कीजिए जिन पर लगभग सभी सहमत हैं कि शीत युद्ध के पश्चात् इनका होना अनिवार्य है।
उत्तर : संयुक्त राष्ट्र संघ के सामने दो तरह के बुनियादी सुधारों का मसला है। एक तो यह कि इस संगठन की बनावट और इसकी प्रक्रियाओं में सुधार किया जाए। दूसरे, इस संगठन के न्यायाधिकार में आने वाले मुद्दों की समीक्षा की जाए। लगभग सभी देश सहमत हैं कि दोनों ही तरह के ये सुधार जरूरी हैं।
(i) संगठन प्रक्रिया : बनावट और प्रक्रियाओं में सुधार के अंतर्गत सबसे बड़ी बहस सुरक्षा परिषद् के कामकाज को लेकर है। इससे जुड़ी हुई एक माँग यह है कि सुरक्षा परिषद् में स्थायी और अस्थायी सदस्यों की संख्या बढ़ायी जाए ताकि समकालीन विश्व राजनीति की वास्तविकताओं की इस संगठन में बेहतर, नुमाइंदगी हो सके। खासतौर से एशिया, अफ्रीका और दक्षिण अमरीका के ज्यादा देशों को सुरक्षा परिषद् में सदस्यता देने की बात उठ रही है। इसके अतिरिक्त, अमरीका और पश्चिमी देश संयुक्त राष्ट्र संघ के बजट से जुड़ी प्रक्रियाओं और इसके प्रशासन में सुधार चाहते हैं।
(ii) न्यायाधिकार प्रक्रिया : जहाँ तक संयुक्त राष्ट्र संघ में किन्हीं मुद्दों को ज्यादा प्राथमिकता देने अथवा उन्हें संयुक्त राष्ट्र संघ के न्यायाधिकार में लाने का सवाल है विशेषज्ञ चाहते हैं कि यह संगठन शांति और सुरक्षा से जुड़े मिशनों कुछ देश और में ज्यादा प्रभावकारी अथवा बड़ी भूमिका निभाए जबकि औरों की इच्छा है कि यह संगठन अपने को विकास तथा मानवीय भलाई के कामों (स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यावरण, जनसंख्या नियंत्रण, मानवाधिकार, लिंगगत न्याय और सामाजिक न्याय) तक सीमित रखे।

प्रश्न 5. एक ध्रुवीय विश्व में संयुक्त राष्ट्र की भूमिका का वर्णन कीजिए |
उत्तर : 1991 में सोवियत संघ के विघटन के पश्चात् एक ध्रुवीय विश्व में अमेरिका सबसे अधिक शक्तिशाली देश है। कोई भी अन्य देश उसे चुनौती देने में सक्षम नहीं है। संयुक्त राष्ट्र संघ में भी अमेरिका का प्रभुत्व है क्योंकि वह इसमें सबसे ज्यादा योगदान देता है। साथ ही, संयुक्त राष्ट्र संघ अमेरिका की धरती पर स्थित है। इसके कई नौकरशाह अमरीका के नागरिक हैं। किसी भी प्रतिकूल प्रस्ताव पर अमरीका वीटो का प्रयोग कर सकता है परंतु इन सब तथ्यों के बावजूद संयुक्त राष्ट्र संघ की भूमिका महत्त्वपूर्ण है। जैसा कि निम्नलिखित तथ्यों से स्पष्ट होता हैं :
1.संयुक्त राष्ट्र संघ अमेरिका और शेष विश्व के देशों के मध्य वार्ता करवाने में सहायता करता है।
2.संयुक्त राष्ट्र संघ के द्वारा विभिन्न आर्थिक, सामाजिक समस्याओं के लिए सभी देशों को संगठित किया जा सकता है।
3. आज विश्व में ‘पारस्परिक निर्भरता’ में वृद्धि के कारण भविष्य में संयुक्त राष्ट्र संघ की भूमिका की वृद्धि की संभावना हैं।
4. संयुक्त राष्ट्र संघ में सहायता से अमेरिका की नीतियों पर अंकुश चाहे न लगे परंतु आलोचना की जा सकती है और मध्य मार्ग भी निकाला जा सकता है।

प्रश्न 6.1945 में इसकी स्थापना से लेकर संयुक्त राष्ट्र के विकास की कहानी लिखिए। यह अपनी शाखाओं तथा एजेंसियों की सहायतला से किस प्रकार कार्य करती है ?
उत्तर : 1945 में इसे स्थापित किया गया। 51 देशों द्वारा संयुक्त राष्ट्रसंघ के घोषणापत्र पर दस्तखत करने के साथ इस संगठन की स्थापना हो गई। दो विश्वयुद्धों के बीच ‘लीग ऑव नेशंस’ जो नहीं कर पाया था उसे कर दिखाने की कोशिश संयुक्त राष्ट्रसंघ ने की। संयुक्त राष्ट्रसंघ का उद्देश्य है अंतर्राष्ट्रीय झगड़ों को रोकना और राष्ट्रों के बीच सहयोग की राह दिखाना। इसकी स्थापना के पीछे यह आशा काम कर रही थी कि यह संगठन विभिन्न देशों के बीच जारी ऐसे झगड़ों को रोकने का काम करेगा जो आगे चलकर युद्ध का रूप ले सकते हैं और अगर युद्ध छिड़ ही जाए तो शत्रुता के दायरे को सीमित करने का काम करेगा। इसके अलावा, चूँकि झगड़े अक्सर सामाजिक-आर्थिक विकास के अभाव में खड़े होते हैं इसलिए संयुक्त राष्ट्रसंघ की एक मंशा पूरे विश्व में सामाजिक-आर्थिक विकास की संभावनाओं को बढ़ाने के लिए विभिन्न देशों को एक साथ लाने की है।
2006 तक संयुक्त राष्ट्रसंघ के सदस्य देशों की संख्या 192 थी। इसमें लगभग सभी स्वतंत्र देश शामिल हैं।
संयुक्त राष्ट्रसंघ की कई शाखाएँ और एजेंसियाँ हैं। सदस्य देशों के बीच युद्ध और शांति तथा वैर-विरोध पर आम सभा में भी चर्चा होती है और सुरक्षा परिषद् में भी। सामाजिक और आर्थिक मुद्दों से निबटने के लिए कई एजेंसियाँ हैं जिनमें विश्व स्वास्थ्य संगठन (वर्ल्ड हेल्थ आर्गनाइजेशन-WHO), संयुक्त राष्ट्रसंघ विकास कार्यक्रम (यूनाइटेड नेशंस डेवलपमेंट प्रोग्राम – UNDP), संयुक्त राष्ट्रसंघ मानवाधिकार आयोग (यूनाइटेड नेशंस ह्यूमन राइट्स कमीशन – UNHRC), संयुक्त राष्ट्रसंघ शरणार्थी उच्चायोग (यूनाइटेड नेशंस हाई कमीशन फॉर रिफ्यूजीज UNHCR), संयुक्त राष्ट्रसंघ शरणार्थी उच्चायोग (यूनाइटेड नेशंस हाई कमीशन फॉर रिफ्यूजीज UNHCR), संयुक्त राष्ट्रसंघ बाल कोष (यूनाइटेड नेशंस चिल्ड्रेन्स फंड-UNICEF) और संयुक्त राष्ट्रसंघ शैक्षिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठन (यूनाइटेड नेशंस एजुकेशनल, सोशल एंड कल्चरल आर्गनाइजेशन – UNESCO) शामिल हैं।

प्रश्न 7.1992 में संयुक्त राष्ट्र की आम सभा में स्वीकृत प्रस्ताव में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से संबंधित कौन-सी तीन शिकायतों का जिक्र किया गया था ? सुरक्षा परिषद की नई स्थायी सदस्यता के लिए प्रस्तावित किन्हीं तीन मानदंडों का वर्णन कीजिए ।
उत्तर : सन् 1992 में संयुक्त राष्ट्रसंघ की आम सभा में एक प्रस्ताव स्वीकृत हुआ। प्रस्ताव में तीन मुख्य शिकायतों का जिक्र था :
1.सुरक्षा परिषद् अब राजनीतिक वास्तविकताओं की नुमाइंदगी नहीं करती।
2.इसके फैसलों पर पश्चिमी मूल्यों और हितों की छाप होती है और इन फैसलों पर चंद देशों का दबदबा होता है।
3. सुरक्षा परिषद् में बराबर का प्रतिनिधित्व नहीं है।
संयुक्त राष्ट्रसंघ के ढाँचे में बदलाव की इन बढ़ती हुई माँगों के मद्देनजर एक जनवरी 1997 को सुंयक्त राष्ट्रसंघ के महासचिव कोफी अन्नान ने जाँच शुरू करवाई कि सुधार कैसे कराए जाएँ। मिसाल के तौर पर यही कि क्या सुरक्षा परिषद् के नए सदस्य चुने जाने चाहिए। इसके बाद के सालों में सुरक्षा परिषद् की स्थायी और अस्थायी सदस्यता के लिए मानदंड सुझाए गए। इनमें से कुछ निम्नलिखित हैं
सुझाव आए कि एक नए सदस्य को :
1.बड़ी आर्थिक ताकत होना चाहिए।
2.बड़ी सैन्य ताकत होना चाहिए।
3.संयुक्त राष्ट्रसंघ के बजट में ऐसे देश का योगदान ज्यादा
4.आबादी के लिहाज से बड़ा राष्ट्र हो ।
5.ऐसा देश जो लोकतंत्र और मानवधिकारों का सम्मान करता हो ।
6.यह देश ऐसा हो कि अपने भूगोल, अर्थव्यवस्था और संस्कृति के लिहाज से विश्व की विविधता की नुमाइंदगी करता हो।

प्रश्न 5. विश्व शांति बनाये रखने में संयुक्त राष्ट्र की भूमिका का परीक्षण करें।

अथवा

संयुक्त राष्ट्र संघ ने किस सीमा तक विश्व में शांति, स्थापित करने में सफलतापूर्वक भूमिका निभाई है? व्याख्या कीजिए ।
उत्तर : संयुक्त राष्ट्र संघ की विश्व में शांति स्थापित करने की भूमिका : संयुक्त राष्ट्र की विधिवत् स्थापना 24 अक्टूबर, 1945 ई. को हुई। इसकी स्थापना का मुख्य उद्देश्य की स्थापना था अपनी स्थापना के बाद अब तक की संयुक्त राष्ट्र की कुछ प्रमुख उपलब्धियाँ निम्नलिखित हैं :
1.इसने फिलिस्तीन समस्या का हल किया और यहूदियों के लिए 1948 ई. में इजरायल राज्य की स्थापना की। संयुक्त राष्ट्र ने कोरिया तथा हिंद-चीन के युद्ध को समाप्त कराया और कोरिया की स्वाधीनता पर आँच नहीं आने दी। इसने इंडोनेशिया से डच सेनाओं को वापस लौटने के लिए मजबूर किया। इस प्रकार 1948 ई. में स्वतंत्र इंडोनेशिया का उदय हुआ। संयुक्त राष्ट्र ने 1948 और 1965 में कश्मीर की सीमा पर भारत और पाकिस्तान के युद्ध को बंद कराया। इसने इंग्लैंड और मिस्र के बीच स्वेज नहर के झगड़े का अंत कराया। इसने मलाया, लीबिया, ट्यूनीशिया, घाना तथा ओगोलैंड आदि देशों को स्वतंत्र करने में पूरी-पूरी सहायता की ।
2.संयुक्त राष्ट्र ने कांगो में शांति स्थापित कराने में पूरी-पूरी सहायता की। इसने सोवियत रूस और अमेरिका (दो-गुटों) के आपसी मतभेदों और तनावों को कम किया। इसने विनाशकारी शस्त्रों की रोकथाम के लिए समय-समय पर बड़े राष्ट्रों के शिखर सम्मेलन बुलाए। संयुक्त राष्ट्र संघ ने ईरान और इराक के बीच आठ वर्षों से चले आ रहे युद्ध को 1988 ई. में समाप्त करवा कर एक और सफलता प्राप्त की।
3.192 देश आज संयुक्त राष्ट्र के सदस्य हैं। यह दुनिया का सबसे बड़ा प्रभावशाली अंतर्राष्ट्रीय मंच है। यहाँ पर अंतर्राष्ट्रीय शांति, सुरक्षा, सामाजिक-आर्थिक समस्याओं पर खुले मस्तिष्क से वाद-विवाद और विचार-विमर्श होता है। नि:संदेह इससे अंतर्राष्ट्रीय वातावरण को सौहार्द्र बनाये रखने में प्रशंसनीय मदद मिली है। यह सही है कि कुछ राष्ट्रों के पास अणु और परमाणु बम हैं लेकिन यह भी सही है कि बड़ी शक्तियों के प्रभाव के कारण पर्याप्त सीमा तक सर्वाधिक भयंकर हथियारों के निर्माण और रासायनिक व जैविक हथियारों के प्रयोग और निर्माण को रोकने में सफलता इस संस्था को मिली है।
4.आज साम्यवादी विचारधारा लगभग शांत है। सोवियत संघ और चीन सहित अनेक पूर्व साम्यवादी यूरोपीय देश वैश्वीकरण, उदारीकरण और नई अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक नीति और अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रहे हैं।
5.अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक जैसी संयुक्त राष्ट्र की एजेंसियाँ पिछड़े और गरीब राष्ट्रों को ऋण, भुगतान और आपातकाल में अनेक प्रकार की सहायता उपलब्ध करा रही हैं।
6.आज संयुक्त राष्ट्र संघ शिक्षा प्रचार, स्वास्थ्य सेवाओं में बढ़ोत्तरी, महामारियों को रोकने आदि में अहम् भूमिका निभा रहा है। आतंकवाद, धर्मांधता और शस्त्रीकरण के स्थान पर आर्थिक-सामाजिक विकास और लोकतंत्र के प्रसार और सशक्तिकरण को मजबूत करना है तो संयुक्त राष्ट्र संघ का प्रयोग और अधिक मानव मूल्यों, विश्व बंधुत्व, पारस्परिक सहयोग की भावना से किया जाना चाहिए।

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