Class 12th Political Science Chapter 8 Important Question Answer 3 Marks पर्यावरण और प्राकृतिक संसाधन

प्रश्न 1. ‘पृथ्वी सम्मेलन’ क्या था ? यह सम्मेलन कितना लाभप्रद सिद्ध हुआ ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर : पृथ्वी सम्मेलन जून, 1992, रियो-डि जिनेरियो: रियो-डि जिनेरियों (ब्राजील) में आयोजित ‘पृथ्वी शिखर सम्मेलन’ 3 जून से 14 जून, 1992 ई. को उत्तर व दक्षिण के देशों में पर्यावरण के मुद्दों को लेकर मतभेद का एक महत्त्पूर्ण विचार प्रस्तुत करता है। विकसित देशों का कहना है कि गरीबी और जनसंख्या विस्फोट के कारण ही पृथ्वी की यह हालत हुई है। दक्षिण के गरीब देशों में अभी भी उष्णकटिबंधीय घने जंगल हैं और अपनी बढ़ती जनसंख्या का पेट भरने के लिए वे जंगलों का सफाया करते हैं।
लाभप्रद : (i) जलवायु परिवर्तन, जैव-विविधता और वानिकी के नियमाचार निर्धारित हुए। (ii) इस विषय पर सहमति बनी कि आर्थिक वृद्धि से पर्यावरण को हानि नही होनी चाहिए। इसे टिकाऊ विकास का नाम दिया गया। (iii) रियो सम्मेलन में अंतर्राष्ट्रीय पर्यावरण कानून के निर्माण, प्रयोग और व्याख्या में विकासशील देशों की विशिष्ट आवश्यकताओं का ध्यान रखने को स्वीकार किया गया। इस सिद्धांत को “साझी जिम्मेदारी लेकिन अलग-अलग भूमिका” का नाम दिया गया।

प्रश्न 2. ग्लोबल वार्मिंग क्या है? इसके प्रभावों का वर्णन करें।
उत्तर : ग्लोबल वार्मिंग (Global Warming) अर्थात् वैश्विक तापवृद्धि से अभिप्राय कई कारणों से विश्व के तापमान के बढ़ने से है। वैश्विक तापवृद्धि क्लोरोफ्लोरो कार्बन कहलाने वाले कुछ रसायनों के फैलाव के कारण हो रही है। वैश्विक तापवृद्धि से समुद्रीतटीय देशों के डूबने का खतरा बढ़ गया है क्योंकि समुद्र तल की ऊँचाई बढ़ने लगी है। धरती के जीवन के लिए यह बात बड़ी प्रलयंकारी साबित होगी।
ग्लोबल वार्मिंग के दुष्प्रभाव : (1) आज पूरा विश्व ग्लोबल वार्मिंग और उसके प्रभावों से अच्छी तरह परिचित है। यदि उसके पड़ने वाले प्रभावों को ही लें, तो पूरे विश्व के पर्यावरण पर घातक प्रभाव पड़ सकते हैं।
(2) यदि इस बढ़ते तापमान को नहीं रोका गया तो विश्व के बड़े-बड़े तटीय शहर समुद्र में डूब जाएँगे।
(3) भले ही सभी देश अपने-अपने स्तर पर ग्लोबल वार्मिंग के दुष्प्रभावों का समाधान करने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन इसका सही समाधान तभी सम्भव हो पाएगा जब विश्व के बड़े औद्योगिक रूप में विकसित देश सहयोग करेंगे।
(4) वैश्विक तापमान बढ़ने से स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याएँ पैदा हो गई हैं।
(5) वैश्विक तापमान बढ़ने से तथा शुद्ध पर्यावरण मुहैया न होने से लोगों में मानसिक तथा हृदय संबंधित रोग, उच्च रक्तचाप आदि बीमारियों में बढ़ोतरी हो रही है।
(6) बच्चों का मानसिक विकास खतरे में आ गया है।
(7) विश्व में कृषि योग्य भूमि में वृद्धि नहीं हो रही है बल्कि भूमि का उपजाऊपन कम हो रहा है। उपजाऊ भूमि की कमी से तथा उसकी उत्पादकता में कमी आने के कारण खाद्यान्नों की विश्वव्यापी समस्या उत्पन्न हुई है।
(8) वैश्विक तापमान बढ़ने से कुछ बीमारियाँ जैसे एड्स, टी.बी., कैंसर, मलेरिया आदि महामारी का रूप धारण करने का खतरा पैदा कर सकती हैं।

प्रश्न 3. ‘वैश्विक सांझी संपदा’ से क्या अभिप्राय है? इसकी सुरक्षा के लिए कोई दो सुझाव दीजिए।

अथवा

विश्व की सांझी संपदा से क्या अभिप्राय है ? विश्व की सांझी संपदा के घटने के किन्हीं दो कारणों को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर : (i) वैश्विक सांझी संपदा का अभिप्राय : वैश्विक सांझी संपदा वह संसाधन है, जिस पर किसी एक का नहीं बल्कि पूरे समुदाय का हक होता है। यह सांझा चूल्हा, सांझा चरागाह, सांझा मैदान, सांझा कुआँ या नदी कुछ भी हो सकता है। इसी तरह विश्व के कुछ हिस्से और क्षेत्र किसी एक देश के संप्रभु क्षेत्राधिकार बाहर होते हैं। इसीलिए उनका प्रबंधन सांझे तौर पर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय द्वारा किया जाता है। इन्हें ‘वैश्विक संपदा’ या ‘मानवता की सांझी विरासत’ कहा जाता है। इसमें पृथ्वी का वायुमंडल, अंटार्कटिका, समुद्री सतह और बाहरी अंतरिक्ष शामिल हैं।
(ii) सुरक्षा के उपाय :
1.’वैश्विक संपदा’ की सुरक्षा के सवाल पर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग कायम करना टेढ़ी खीर है। इस दिशा में कुछ महत्त्वपूर्ण समझौते जैसे अंटार्कटिका संधि (1959), मांट्रियल न्यायाचार अथवा प्रोटोकॉल (1987) और अंटार्कटिक पर्यावरणीय न्यायाचार अथवा प्रोटोकॉल (1991) हो चुके हैं।
2.पारिस्थितिकी से जुड़े हर मसले के साथ एक बड़ी समस्या यह जुड़ी है कि अपुष्ट वैज्ञानिक साक्ष्यों और समय-सीमा को लेकर मतभेद पैदा होते हैं। ऐसे में एक सर्व-सामान्य पर्यावरणीय एजेंडे पर सहमति कायम करना मुश्किल होता है।
इस अर्थ में 1980 के दशक के मध्य में अंटार्कटिक के ऊपर ओजोन परत में छेद की खोज एक आँख खोल देने वाली घटना है।

प्रश्न 4. रियो सम्मेलन के किन्हीं दो परिणामों का उल्लेख कीजिए ।
उत्तर : 1. रियो सम्मेलन में जलवायु परिवर्तन, जैव विविधता और वानिकी के संबंध में कुछ नियमाचार निर्धारित हुए। इसमें ‘अजेंडा-21’ के रूप में विकास के कुछ तौर-तरीके भी सुझाए गए, लेकिन इसके बाद भी आपसी अंतर और कठिनाइयाँ बनी हुई हैं।
2.सम्मेलन में इस बात पर सहमति बनी कि आर्थिक वृद्धि से पर्यावरण को नुकसान न पहुँचे। इसे ‘टिकाऊ विकास’ का तरीका कहा गया, , लेकिन समस्या यह थी कि ‘टिकाऊ विकास’ पर अमल कैसे किया जाएगा। कुछ आलोचकों का कहना था कि ‘अजेंडा-21’ का झुकाव पर्यावरण संरक्षण को सुनिश्चित करने के बजाय आर्थिक वृद्धि की ओर है।

प्रश्न 5. वैश्विक संपदा’ से क्या अभिप्राय है? ऐसा क्यों कहा जाता है कि वैश्विक संपदा की सुरक्षा के सवाल पर अंतर्राष्ट्रीय सहयोग आसान नहीं है?
उत्तर : वैश्विक संपदा से अभिप्राय : वैश्विक सांझी संपदा वह संसाधन है, जिस पर किसी एक का नहीं बल्कि पूरे समुदाय का अधिकार होता है। यह सांझा चूल्हा, सांझा चरागाह, सांझा मैदान, सांझा कुआँ या नदी कुछ भी हो सकता है। इसी तरह विश्व के कुछ हिस्से और क्षेत्र किसी एक देश के संप्रभु क्षेत्राधिकार से बाहर होते हैं। इसीलिए उनका प्रबंधन सांझे तौर पर अंतर्राष्ट्रीय समुदाय द्वारा किया जाता है। इन्हें ‘वैश्विक संपदा’ या ‘मानवता की सांझी विरासत’ कहा जाता है। इसमें पृथ्वी का वायुमंडल, अंटार्कटिका, समुद्री सतह और बाहरी अंतरिक्ष शामिल हैं।

वैश्विक संपदा की सुरक्षा का सवाल :
(i) यह एक विशाल संघर्ष है, इसे एक मिशनरी भावना से व्यक्तिगत स्तर पर, गैर-सरकारी, स्वयंसेवी संस्थाओं के स्तर पर, स्थानीय सरकारों और निकायों के स्तर पर, जिला स्तरों पर, , प्रांतीय या राज्य स्तर पर, राष्ट्रीय या देशीय स्तर पर और अंततः अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रयास करने की आवश्यकता है।
(ii) मानव व्यर्थ के अहं (egoes), संघर्षों, टकरावों, लड़ाइयों और युद्धों से बचें और साझी संपदा और संसाधनों पर निरंतर अनुसंधान और खोज कार्य किए जाने चाहिए, ताकि इनमें छुपी हुई प्राकृतिक संपदा, संसाधनों, जलसंपदा आदि का उपयोग सभी के कल्याण के लिए किया जा सके और मानव की भावी पीढ़ियों के भविष्य को आश्वस्त होकर सुनिश्चित और सुरक्षित बनाया जा सके।

प्रश्न 9. ‘जो पर्यावरण को दूषित करे, वही इसका भुगतान भी करे।’ किन्हीं दो उपयुक्त तर्कों द्वारा इस कथन का समर्थन कीजिए।

अथवा

“सांझी परंतु अलग-अलग जिम्मेदारियाँ”। इस धारणा से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर : ‘जो पर्यावरण को दूषित करे, वही इसका भुगतान करे।’ यह कथन निम्नलिखित तर्कों द्वारा स्पष्ट किया जा सकता है :
(i) पर्यावरण के संरक्षण को लेकर उत्तरी और दक्षिणी गोलार्द्ध के देशों के रवैये में अंतर है। उत्तर के विकसित देश पर्यावरण के मसले पर उसी रूप में चर्चा करना चाहते हैं, जिस दशा में पर्यावरण आज मौजूद है। ये देश चाहते हैं कि पर्यावरण के संरक्षण में हर देश की जिम्मेदारी बराबर हो। दक्षिण के विकासशील देशों का तर्क है कि विश्व में पारिस्थितिकी को नुकसान अधिकांशतया विकसित देशों के औद्योगिक विकास से पहुँचा है। यदि विकसित देशों ने पर्यावरण को ज्यादा नुकसान पहुँचाया है तो उन्हें इस नुकसान की भरपाई की जिम्मेदारी भी ज्यादा उठानी चाहिए।
(ii) सन् 1992 में हुए पृथ्वी सम्मेलन में इस तर्क को मान लिया गया और इसे सांझी जिम्मेदारी, लेकिन अलग-अलग भूमिका का सिद्धांत कहा गया। इस संदर्भ में रियो घोषणापत्र का कहना है–“धरती के पारिस्थितिकी तंत्र की अखंडता और गुणवत्ता की बहाली, सुरक्षा और संरक्षण के लिए विभिन्न देश विश्व-बंधुत्व की भावना से आपस में सहयोग करेंगे। पर्यावरण के विश्वव्यापी अपक्षय में विभिन्न राज्यों का योगदान अलग-अलग है। इसे देखते हुए विभिन्न राज्यों की सांझी किंतु अलग-अलग जिम्मेदारी होगी। विकसित देशों के समाजों का वैश्विक पर्यावरण पर दबाव ज्यादा है और इन देशों के पास विपुल प्रौद्योगिक एवं वित्तीय संसाधन हैं। इसे देखते हुए टिकाऊ विकास के अंतर्राष्ट्रीय आयास में विकसित देश अपनी खास जिम्मेदारी स्वीकार करते हैं। “

प्रश्न 10. “ भारत सरकार पर्यावरण से संबंधित विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से, वैश्विक प्रयासों में भाग लेती रही है।” इस कथन के समर्थन हेतु कोई चार उदाहरण दीजिए।
उत्तर : भारत की सरकार विभिन्न कार्यक्रमों के जरिए पर्यावरण से संबंधित वैश्विक प्रयासों में शिरकत कर रही है: (i) मिसाल के लिए भारत ने अपनी ‘नेशनल ऑटो-फ्यूल पॉलिसी’ के अंतर्गत वाहनों के लिए स्वच्छतर ईंधन अनिवार्य कर दिया है।
(ii) 2001 में ऊर्जा संरक्षण अधिनियम पारित हुआ। इसमें ऊर्जा के ज्यादा कारगर इस्तेमाल की पहलकदमी की गई है।
(iii) ठीक इसी तरह 2003 के बिजली अधिनियम में पुनर्नवा (Renewable) ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया गया है।
(iv) हाल में प्राकृतिक गैस के आयात और स्वच्छ कोयले के उपयोग पर आधारित प्रौद्योगिकी को अपनाने की तरफ रुझान बढ़ा है। इससे पता चलता है कि भारत पर्यावरण सुरक्षा के लिहाज से ठोस कदम उठा रहा है।
(v) भारत बायोडीजल से संबंधित एक राष्ट्रीय मिशन चलाने के लिए भी तत्पर है। इसके अंतर्गत 2011-12 तक बायोडीजल तैयार होने लगेगा और इसमें 1 करोड़ 10 लाख हेक्टेयर भूमि का इस्तेमाल होगा। पुनर्नवीकृत होने वाली ऊर्जा के सबसे बड़े कार्यक्रमों में से एक भारत में चल रहा है।

प्रश्न 11. अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पर्यावरण के मुद्दों पर भारत के पक्ष की व्याख्या कीजिए।
उत्तर : भारत के पक्ष : (i) भारत की सरकार विभिन्न कार्यक्रमों के जरिए पर्यावरण से संबंधित वैश्विक प्रयासों में शिरकत कर रही है। मिसाल के लिए भारत ने अपनी नेशनल ऑटो-फ्यूल पॉलिसी’ के अंतर्गत वाहनों के लिए स्वच्छतर ईंधन अनिवार्य कर दिया है।
(ii) 2001 में ऊर्जा संरक्षण अधिनियम पारित हुआ। इसमें ऊर्जा के ज्यादा कारगार इस्तेमाल की पहलकदमी की गई है।
(iii) ठीक इसी तरह 2003 के बिजली अधिनियम में पुनर्नवा (Renewable) ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया गया है।
(iv) हाल में प्राकृतिक गैस के आयात और स्वच्छ कोयले के उपयोग पर आधारित प्रौद्योगिकी को अपनाने की तरफ रुझान बढ़ा है। इससे पता चलता है कि भारत पर्यावरण सुरक्षा के लिहाज से ठोस कदम उठा रहा है।
(v) भारत बायोडीजल से संबंधित एक राष्ट्रीय मिशन चलाने के लिए भी तत्पर है। इसके अंतर्गत 2011-12 तक बायो डीजल तैयार होने लगेगा और इसमें 1 करोड़ 10 लाख हेक्टेयर भूमि का इस्तेमाल होगा। पुनर्नवीकृत होने वाली ऊर्जा के सबसे बड़े कार्यक्रमों में से एक भारत में चल रहा है।

प्रश्न 12. अन्टार्कटिक पर किन देशों का नियंत्रण है?
उत्तर : विश्व के सबसे सुदूर ठंडे और झंझावती महादेश अंटार्कटिका पर किसका स्वामित्व हो ? इसके बारे में दो दावे किये जाते हैं। कुछ देश जैसे-ब्रिटेन, अर्जेण्टीना, चिली, नार्वे, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड ने अंटार्कटिक क्षेत्र पर अपने संप्रभु अधिकार का वैधानिक दावा किया। अन्य अधिकांश देशों ने इससे उलटा रुख अपनाया कि अंटार्कटिक प्रदेश विश्व की सांझी संपदा है और यह किसी भी देश के क्षेत्राधिकार में शामिल नहीं है। इस मतभेद के रहते अंटार्कटिक के पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र सुरक्षा के नियम बने और अपनाये गए। ये नियम कल्पनाशील और दूरगामी प्रभाव वाले हैं। अंटार्कटिक और पृथ्वी के ध्रुवीय क्षेत्र पर्यावरण सुरक्षा के विशेष क्षेत्रीय नियमों के अंतर्गत आते हैं।

प्रश्न 14. चीन, भारत और अन्य विकासशील देशों को क्योटो प्रोटोकॉल की बाध्यताओं से मुक्त क्यों रखा गया था?
उत्तर : (i) विकसित देशों तथा उत्तरी गोलार्द्ध के देशों ने इस सच्चाई एवं भारत के सुझाव को मान लिया है कि ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन के मामलों में मुख्यतः वे देश जिम्मेदार हैं, जिनके यहाँ औद्योगीकरण चरम विकास पर पहुँचा है। (ii) 2005 के जून में ग्रुप-आठ के देशों की बैठक में भारत ने ध्यान दिलाया कि विकासशील देशों की प्रति व्यक्ति ग्रीनहाउस गैस की उत्सर्जन दर विकसित देशों की तुलना में नाममात्र है। साझी परंतु अलग-अलग जिम्मेदारी के सिद्धांत के अनुरूप भारत का विचार है कि उत्सर्जन दर में कमी करने की सबसे ज्यादा जिम्मेदारी विकसित देशों की है, क्योंकि इन देशों ने एक लंबी अवधि से बहुत उत्सर्जन किया है।

प्रश्न 15. वैश्विक राजनीति में पर्यावरणीय महत्त्व के किन्हीं चार मुद्दों की व्याख्या कीजिए ।
उत्तर : वैश्विक राजनीति में पर्यावरण महत्त्व के चार मुद्दे-
(i) दुनिया भर में अब कृषि-भूमि का विस्तार कर पाना संभव नहीं है। उपलब्ध जमीन के एक बड़े हिस्से की उर्वरता कम हो रही है। चरागाहों के चारे खत्म होने को हैं और मत्स्य-भंडार घट रहा है। जलाशयों की जलराशि बड़ी तेजी से कम हुई है और जल प्रदूषण बढ़ गया है। खाद्य उत्पादन में लगातार कमी आ रही है।
(ii) संयुक्त राष्ट्र संघ की विश्व विकास रिपोर्ट (2006) के अनुसार विकासशील देशों की एक अरब बीस करोड़ जनता को स्वच्छ जल उपलब्ध नहीं होता और यहाँ की दो अरब करोड़ आबादी साफ-सफाई की सुविधा से वंचित है। इस वज़ह से 30 लाख से ज़्यादा बच्चे हर साल मौत के शिकार होते हैं ।
(iii) वनों की कटाई हो रही है और लोग विस्थापित हो रहे हैं। जैव-प्रजातियों के मामले में समृद्ध प्राकृतिक-वासों को नष्ट किए जाने से जीव-जंतु और पेड़-पौधों की कई प्रजातियाँ लुप्त हो चुकी हैं या संकटापन्न श्रेणी में हैं।
(iv) धरती के ऊपरी वायुमंडल में ओज़ोन गैस की मात्रा लगातार घट रही है। इसे ओज़ोन परत में छेद होना भी कहते हैं। इससे पारिस्थितिकी तंत्र और मनुष्य के स्वास्थ्य पर एक बड़ा खतरा मँडरा रहा है।

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