Class 12th Political Science Chapter 9 Important Question Answer 3 Marks वैश्वीकरण

प्रश्न 1. वैश्वीकरण की परिभाषा दीजिए। यह किस प्रकार अंतर्राष्ट्रीयकरण से भिन्न है?

अथवा

वैश्वीकरण की परिभाषा दीजिए। वैश्वीकरण की किसी एक आलोचना का उल्लेख कीजिए।
उत्तर : परिभाषा : वैश्वीकरण वह प्रक्रम है, जिसमें हम अपने निर्णयों को दुनिया के एक क्षेत्र में क्रियान्वित करते हैं, जो दुनिया के दूरवर्ती क्षेत्र में व्यक्तियों और समुदायों के लिए महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सरल शब्दों में, वैश्वीकरण की बुनियादी बात है – प्रवाह (flow)। प्रवाह कई प्रकार के हो सकते हैं, विश्व के एक भाग के विचारों का दूसरे भाग में पहुँचना, पूँजी का एक से ज्यादा जगहों पर जाना, वस्तुओं का कई-कई देशों में पहुँचना और उनका व्यापार तथा बेहतर आजीविका की तलाश में दुनिया के विभिन्न हिस्सों में आवाजाही। यहाँ सबसे जरूरी बात है–विश्वव्यापी पारस्परिक जुड़ाव, जो ऐसे प्रवाहों की निरंतरता से पैदा हुआ और कायम भी है।
वैश्वीकरण और अंतर्राष्ट्रीयकरण में भिन्नता :
(i) वैश्वीकरण, उदारीकरण, नई आर्थिक नीति और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी अर्थव्यवस्था को अन्य राष्ट्रों की अर्थव्यवस्था से जोड़ने की बात करता है। यह पूर्णतया तटकर और व्यापार अवरोधकों का विरोधी है।
(ii) दूसरी ओर अन्तर्राष्ट्रीय हितों के साथ-साथ अन्तर्राष्ट्रीय भाईचारा, अन्तर्राष्ट्रीय संस्थाओं, जैसे-संयुक्त राष्ट्र संघ, विश्व बैंक, मानव अधिकारों और पर्यावरण संबंधी समस्याओं के साथ-साथ अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर सहयोग तथा सूचना द्वारा आतंकवाद से लड़ने की बात करता है।
वैश्वीकरण की आलोचना :
1.यह विश्वव्यापी पूँजीवाद की एक विशेष अवस्था है जो अमीरों को और ज्यादा अमीर तथा गरीब को और ज्यादा गरीब बनाती है।
2.वैश्वीकरण परम्परागत सांस्कृतिक मूल्यों के लिए हानिकारक है। इसके चलते लोग अपने पुराने जीवन-मूल्यों तथा जीवन-शैली के मानकों से हाथ धो बैठेंगे।

प्रश्न 2. भारत को एक विश्व शक्ति कहना कहाँ तक उचित है?
उत्तर : भारत को एक विश्व शक्ति कहना पर्याप्त सीमा तक उचित है। जनसंख्या की दृष्टि से यह चीन के बाद विश्व का दूसरा सबसे बड़ा देश है। भू-भाग (क्षेत्रफल) की दृष्टि से यह दुनिया का सातवाँ बड़ा देश है। इसके पास विशाल प्राकृतिक संसाधन हैं। इसने स्वतंत्रता के उपरांत कृषि में आत्मनिर्भरता प्राप्त कर ली है। औद्योगिक क्षेत्र में यह प्रशंसनीय प्रगति कर चुका है। 1990 के दशक से ही (लगभग गत 21 वर्षों से) इसने नव अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था अपना ली है। यह वैश्वीकरण, उदारीकरण के साथ-साथ संयुक्त राष्ट्र संघ, विश्व बैंक, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष आदि संस्थाओं का सक्रिय सदस्य है। यह मानव अधिकारों के संरक्षण और विस्तार के लिए वचनबद्ध है।

प्रश्न 3. क्या आप मानते हैं कि पश्चिम की संस्कृति वैश्वीकरण के माध्यम से लोगों पर थोपी जा रही है? संक्षिप्त नोट लिखिए?
उत्तर : हाँ, क्योंकि वैश्वीकरण के परिणाम सिर्फ आर्थिक और राजनैतिक दायरो में ही नज़र नहीं आते, हम घर में बैठे हैं तब भी इसकी चपेट में होते हैं। वैश्वीकरण का प्रभाव हमारी पसंद व इच्छा दोनों पर पड़ता है। यह प्रक्रिया विश्व की संस्कृति को भय या खतरा पैदा कर सकती है, दूसरी तरफ वैश्वीकरण सांस्कृतिक समरूपता का काम करता है। इसका अर्थ हमें यह नहीं समझना चाहिए कि किसी विश्व संस्कृति का उदय हो रहा है। विश्व संस्कृति के नाम पर दरअसल शेष विश्व पर पश्चिमी संस्कृति लादी जा रही है।

प्रश्न 4.वैश्वीकरण के किन्हीं तीन लाभों की व्याख्या उदाहरण देकर कीजिए।
उत्तर : वैश्वीकरण के तीन लाभ :
(i) यद्यपि वैश्वीकरण के लिए कोई एक कारक जिम्मेदार नहीं, फिर भी प्रौद्योगिकी अपने आप में एक अपरिहार्य कारक साबित हुई है। इसमें कोई शक नहीं कि आज टेलीग्राफ, टेलीफोन और माइक्रोचिप के नवीनतम आविष्कारों ने विश्व के विभिन्न भागों के बीच संचार की क्रांति कर दिखाई है।
(ii) शुरू-शुरू में जब छपाई (मुद्रण) की तकनीक आयी थी तो उसने राष्ट्रवाद की आधारशिला रखी। इसी तरह आज हम यह अपेक्षा कर सकते हैं कि प्रौद्योगिकी का प्रभाव हमारे सोचने के तरीके पर पड़ेगा। हम अपने बारे में जिस ढंग से सोचते हैं औ हम सामूहिक जीवन के बारे में जिस तर्ज पर सोचते हैं प्रौद्योगिकी का उस पर असर पड़ेगा।
(iii) विचार, पूँजी, वस्तु और लोगों की विश्व के विभिन्न भागों में आवाजाही की आसानी प्रौद्योगिकी में हुई तरक्की के कारण संभव हुई है। इन प्रवाहों की गति में अंतर हो सकता है। उदाहरण के लिए, विश्व के विभिन्न भागों के बीच पूँजी और वस्तु की गतिशीलता लोगों की आवाजाही की तुलना में ज्यादा तेज और व्यापक होगी।

प्रश्न 5. भारत में वैश्वीकरण का विरोध क्यों हुआ? संक्षेप में बताइए।
उत्तर : वैश्वीकरण के आलोचकों के अनुसार वैश्वीकरण का लाभ कुछ थोड़े से लोगों को हुआ। देश के सभी लोग विशेषकर गरीब तथा किसानों को इसका लाभ नहीं पहुँचा। इसी कारण समय-समय पर कुछ किसानों द्वारा आत्महत्या की खबरें आती रहती हैं, इसलिए भारत में कुछ संगठनों एवं राजनैतिक दलों ने वैश्वीकरण की धारणा का विरोध किया है। भारत में विरोध करने वालों में वामपंथी दल, पर्यावरणवादी एवं कुछ स्वयंसेवी संगठन शामिल हैं।

प्रश्न 6. उदाहरणों की सहायता से वैश्वीकरण के सांस्कृतिक प्रभाव को स्पष्ट कीजिए ।
उत्तर : (i) वैश्वीकरण से विश्व की संस्कृतियों को खतरा पैदा हो रहा है। विश्व पर पश्चिमी संस्कृति लादी जा रही है। उदाहरणतया अमरीका का प्रभाव ‘मैक्डोनॉल्डीकरण’ के रूप में है।
(ii) इससे विश्व की समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर धीरे-धीरे समाप्त हो रही है जो कि समस्त मानवता के लिए खतरा है।
(iii) वैश्वीकरण का सकारात्मक सांस्कृतिक प्रभाव भी है। क्योंकि कभी-कभी बाहरी प्रभावों से हमारी पसंद-नापसंद का दायरा बढ़ता है। उदाहरणतया बर्गर मसाला डोसा का विकल्प नहीं है, न ही बर्गर से कोई खतरा है परंतु इससे हमारी पसंद-नापसंद का दायरा बढ़ा है।

प्रश्न 7. भूमंडलीकरण की किन्हीं दो आलोचनाओं ( बुराइयों ) पर प्रकाश डालिए |
उत्तर : भूमंडलीकरण की आलोचना (बुराई) :
1.गला काट प्रतिस्पर्धा का सृजक और घरेलू उद्योगों का विनाशक : शिव-त्रिशूल की तरह त्रिकोणीय ‘नई आर्थिक नीति’ (अर्थात् उदारीकरण, निजीकरण और भूमंडलीकरण) को भारत सरकार ने वर्ष 1990 के दशक से अंगीकार किया है। इसने 1960 के दशक से घात लगाकर बैठे हुए बहुराष्ट्रीय निगमों (MNCs) के लिए अभिनंदन द्वार खोलकर गलाकाट प्रतिस्पर्धा की स्थिति उत्पन्न कर दी है। ये कंपनियाँ या निगम अत्यधिक समृद्ध होने तथा इनके उत्पादन के तरीके अति-जटिल होने एवं उत्पादों के विपणन की प्रक्रियाएँ विविधीकृत और विश्व व्याप्त होने के कारण इन्होंने भारत में अपनी उत्पादन इकाइयाँ खोल दी हैं। ये कंपनियाँ भारत की घरेलू कंपनियों एवं विनिर्माताओं की तुलना में अत्यधिक सस्ती दर पर तैयार माल और उत्पादों को बेचने लगी हैं। भारत सरकार ने भी इन्हें विशेष रियायतें देनी शुरू कर दी हैं। सरकार की इस उदारता ने छोटे घरेलू उद्योगों को उत्पादन बंद करने की स्थिति में पहुँचा दिया है।
2.बेरोजगारी की समस्या में बढ़ोत्तरी : बहुराष्ट्रीय कंपनियों के प्रति अंधभक्ति रखने वाली परन्तु राष्ट्रहित के प्रतिकूल सरकारी नीतियों ने केवल चंद धनी उद्योगपतियों और व्यापारिक घरानों को छोड़कर देश के अन्य सभी उद्यमियों, कामगारों तथा श्रमिकों को बेरोजगारी की अंधी खाई में धक्का दे दिया है। बेरोजगारी पिछले पन्द्रह वर्षों से लगातार बढ़ती जा रही है। हम इस बात को भी जानते हैं कि मृदा अपरदन, भू-अपकर्ष, रेगिस्तान के विस्तार होने जैसे कारणों से भूमि की उत्पादकता में वर्षानुवर्ष ह्रास दिखाई दे रहा है। यही कारण है कि भारत की जनसंख्या का एक बहुत बड़ा भाग प्रच्छन्न बेरोजगारी, अल्पकालिक रोजगार, न्यून रोजगार और अल्प बेरोजगारी जैसी दशाओं को झेल रहा है। किसानों को बलपूर्वक निर्वासित करके उनकी कृषि भूमि बहुराष्ट्रीय कंपनियों को देने की घटनाएँ (यथा-पश्चिम बंगाल के सिंगूर की घटना और महाराष्ट्र के विदर्भ जिले की घटना) समाचार-पत्रों द्वारा आए दिन प्रकाशित की जा रही हैं। इसके साथ ही किसानों की आत्महत्या करने जैसी मर्मान्तक पीड़ादायक घटनाएँ भी भूमंडलीकरण के प्रभाव की गाथा का बखान कर रही हैं। श्रम कानून निजीकरण नीति के अधीन पूरी तरह ढीले छोड़ दिए गए हैं। बी.पी.ओ. क्षेत्र और कॉल सेन्टर सहित सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र को छोड़कर अन्य सभी क्षेत्रों में भारतीय श्रमिकों का श्रम पददलित हो रहा है-विदेशी कंपनियाँ और देश के चंद ऊँचे कारोबारी घराने निर्ममता से उनके श्रम का शोषण कर रहे हैं। यह निजीकरण, भूमंडलीकरण और उदारीकरण का अभूतपूर्व चमत्कार नहीं तो और क्या है ?

प्रश्न 9. वैश्वीकरण की परिभाषा दीजिए तथा वैश्वीकरण कैसे एक बहु-आयामी अवधारणा है ?
उत्तर : वस्तुओं, सेवाओं व पूँजी और विचारों का स्वतंत्र प्रवाह अर्थात् बेरोक-टोक एक देश से दूसरे देश में जाना वैश्वीकरण कहलाता है।
वैश्वीकरण कई तरह से बहुआयामी अवधारणा है।
1. इसका सम्बन्ध आर्थिक वैश्वीकरण, खुला बाजार, पूर्ण प्रतियोगिता एवं उदारीकरण से है।
2.वैश्वीकरण मानव गतिशीलता, पूँजी की गतिशीलता, प्रौद्योगिकी लेन-देन तथा पूर्ण वजन रहित अर्थव्यवस्था का समर्थन करता है।
3. वैश्वीकरण सांस्कृतिक गतिशीलता की भी समर्थक है।

प्रश्न 10. वैश्वीकरण के राजनीतिक परिणामों के सन्दर्भ में राज्य की बदलती भूमिका व शक्तियों के बारे में बताइए ।

अथवा

वैश्वीकरण के कारण विकासशील देशों में राज्य की बढ़ती या कम होती भूमिका का वर्णन करो ।
उत्तर : 1. वैश्वीकरण के कारण विकासशील देशों में राज्य की भूमिका में अवश्य परिवर्तन आया है। वर्तमान वैश्वीकरण के युग में कोई भी विकासशील देश आत्मनिर्भर नहीं हो सकता। अतः वैश्वीकरण के युग में प्रत्येक विकासशील देश को इस प्रकार की विदेश एवं आर्थिक नीति का निर्माण करना पड़ता है, जिससे कि दूसरे देशों से अच्छे सम्बन्ध बनाये जा सकें। पूँजी निवेश के कारण विकासशील देशों ने भी अपने बाजार विश्व के लिए खोल दिए है।
2.राज्य द्वारा बनाई जानी वाली आर्थिक नीतियों पर भी वैश्वीकरण का स्पष्ट प्रभाव देखा जा सकता है। प्रत्येक देश आर्थिक नीति को बनाते समय विश्व में होने वाले आर्थिक घटनाक्रम तथा विश्व संगठनों, जैसे- विश्व बैंक तथा विश्व व्यापार संगठन के प्रभाव में रहता है। राज्यों द्वारा बनाई जाने वाली निजीकरण की नीतियाँ, कर्मचारियों की छँटनी, सरकारी अनुदानों में कमी तथा कृषि से सम्बन्धित नीतियों पर वैश्वीकरण का स्पष्ट प्रभाव देखा जा सकता है। वैश्वीकरण के कारण विकासशील देशों में राज्य की गतिविधि कुछ क्षेत्रों में अधिक तथा कुछ क्षेत्रों में कम हुई है।

प्रश्न 11. आप कहाँ तक सहमत हैं कि वैश्वीकरण के सांस्कृतिक परिणाम केवल नकारात्मक ही होते हैं? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर : 1. वैश्वीकरण के सांस्कृतिक प्रभाव सिर्फ नकारात्मक हैं। संस्कृति कोई जड़ वस्तु नहीं होती। हर संस्कृति हर समय बाहरी प्रभावों को स्वीकार करती रहती है। कुछ बाहरी प्रभाव नकारात्मक होते हैं, क्योंकि इससे हमारी पसंदों में कमी आती है। कभी-कभी बाहरी प्रभावों से हमारी पसंद-नापसंद का दायरा बढ़ता है तो कभी इनसे परंपरागत सांस्कृतिक मूल्यों को छोड़े बिना संस्कृति का परिष्कार होता है। बर्गर मसाला डोसा का विकल्प नहीं है, इसलिए बर्गर से वस्तुतः कोई खतरा नहीं है। इससे हुआ मात्र इतना है कि हमारे भोजन की पसंद में एक चीज और शामिल हो गई है।
2.दूसरी तरफ, नीली जीन्स भी हथकरघा पर बुने खादी के कुर्ते के साथ खूब चलती है। यहाँ हम बाहरी प्रभाव से एक अनूठी बात देखते हैं कि नीली जीन्स के ऊपर खादी का कुर्ता पहना जा रहा है। मजेदार बात तो यह है कि इस अनूठे पहरावे को अब उसी देश को निर्यात किया जा रहा है, जिसने हमें नीली जीन्स दी है।

जीन्स के ऊपर कुर्ता पहने अमरीकियों को देखना अब संभव है। 3. सांस्कृतिक समरूपता वैश्वीकरण का एक पहलू है तो वैश्वीकरण से इसका उलटा प्रभाव भी पैदा हुआ है। वैश्वीकरण से हर संस्कृति कहीं ज्यादा अलग और विशिष्ट होती जा रही है। इस प्रक्रिया को सांस्कृतिक विभिन्नीकरण कहते हैं। इसका मतलब यह नहीं कि संस्कृतियों के मेलजोल में उनकी ताकत का सवाल गौण है, परन्तु इस बात पर भी ध्यान देना चाहिए कि सांस्कृतिक प्रभाव एकतरफा नहीं होता।

प्रश्न 14. वैश्वीकरण को परिभाषित कीजिए ? वैश्वीकरण की धारणा के अंतर्गत आने वाले किन्ही तीन प्रवाहों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर : वैश्वीकरण की परिभाषा : वस्तुओं, सेवाओं तथा पूँजी और विचारों का स्वतंत्र प्रवाह अर्थात् बेरोक-टोक एक देश से दूसरे देश में जाना वैश्वीकरण कहलाता है।
वैश्विकरण के अंतर्गत आने वाले तीन प्रवाह : (i) विश्व के एक हिस्से के विचारों का दूसरे हिस्सों में पहुँचाना । (ii) पूँजी का एक से ज्यादा जगहों पर जाना। (iii) वस्तुओं का कई-कई देशों में पहुँचना । विचार, पूँजी, वस्तु और लोगों की विश्व के विभिन्न भागों में आवाजाही की आसानी प्रौद्योगिकी में हुई तरक्की के कारण संभव हुई है। इन प्रवाहों की गति में अंतर हो सकता है। उदाहरण के लिए विश्व के विभिन्न भागों के बीच पूँजी और वस्तु की गतिशीलता लोगों की आवाजाही की तुलना में ज्यादा तेज और व्यापक होगी। संचार-साधनों की तरक्की और उनकी उपलब्धता मात्र से वैश्वीकरण अस्तित्व में आया हो। ऐसी बात नहीं। यहाँ जरूरी बात यह है कि विश्व के विभिन्न भागों के लोग अब समझ रहे है कि वे आपस में जुड़े हुए हैं।

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