1 अंकीय प्रश्न उत्तर – महत्वपूर्ण प्रश्न – मानव भूगोल : प्रकृति एवं विषय क्षेत्र – Class12th Geography Chapter 1

Index

Class 12th Geography

1. मानव भूगोल

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

2. विश्व जनसँख्या

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

3. जनसँख्या संघटन

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

4. मानव विकास

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

5. प्राथमिक क्रियाएं

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

6. द्वितीयक क्रियाएँ

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

7. तृतीयक तथा चतुर्थक क्रियाकलाप

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

मानव भूगोल : प्रकृति एवं विषय क्षेत्र
Important Question Answer 8 Marks

प्रश्न 1. पर्यावरणीय निश्चयवाद का क्या अर्थ है? मानव के प्राकृतिकरण के द्वारा इस संकल्पना का विकास कैसे हुआ?
उत्तर : पर्यावरणीय निश्चयवाद या नियतिवाद विचारधारा के अनुसार मनुष्य के प्रत्येक कार्यकलाप को पर्यावरण से नियंत्रित माना जाता है। इसके अनुसार भौतिक कारक जैसे जलवायु, उच्चावच, प्राकृतिक वनस्पति आदि मानव के समस्त क्रियाकलापों और जीवनशैली आदि को नियंत्रित करते हैं।

मानव के प्राकृतिकरण के द्वारा मनुष्य अपने भौतिक पर्यावरण के साथ तकनीकी ज्ञान की सहायता से पारस्परिक संबंध रखता है। यह महत्त्वपूर्ण नहीं है कि मनुष्य ने क्या उत्पन्न किया है अपितु यह महत्त्वपूर्ण है कि उसने किन उपकरण और तकनीक की सहायता से उत्पन्न किया है।

प्राकृतिक नियमों को समझने के बाद ही मनुष्य ने तकनीकी विकास किया है। जिस प्रकार उसने आग का आविष्कार किया है उसी प्रकार डी.एन.ए. की जानकारी से बहुत-सी बीमारियों का पता चलता है। मनुष्य एक प्रकार से प्रकृति का दास कहलाता था। प्रकृति के अनुसार ही वह अपने आपको बनाता था। आदिमानव समाज तथा प्रकृति की शक्ति को पर्यावरणीय नियतिवाद कहा जाता है। यही मनुष्य का प्राकृतिकरण था।

प्रश्न 2. पर्यावरणीय निश्चयवाद के विचार को उपयुक्त उदाहरणों सहित स्पष्ट कीजिए ।
उत्तर : पर्यावरणीय निश्चयवाद की विचारधारा के अनुसार मनुष्य अपने पर्यावरण का दास है अर्थात् उसके सभी कार्यकलाप प्रकृति द्वारा नियंत्रित होते हैं। पर्यावरण में भौतिक कारक जैसे : धरातलीय स्वरूप, जलवायु, वनस्पति आदि सम्मिलित हैं। ये ही मनुष्य के समाज को एक स्वरूप प्रदान करते हैं। यहाँ तक कि उनकी विचारधारा भी उसके पर्यावरण की देन है। कालाहारी के बुश मैन, कांगी के पिग्मी और अरब के बहू अपने पर्यावरण के द्वारा ही नियंत्रित होते हैं। पर्यावरण विचारधारा के जनक हिपो क्रेटेस, अरस्तू स्टेको आदि विद्वान थे।

प्रश्न 3. संभववाद की अवधारणा को उपयुक्त उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए ।
उत्तर : संभावनावाद विचारधारा के अनुसार मनुष्य अपने पर्यावरण में परिवर्तन करने में समर्थ है तथा वह प्रकृतिदत्त अनेक संभावनाओं का इच्छानुसार अपने लिए उपयोग कर सकता है। मानव और पर्यावरण में परस्पर संबंध में यह विचारधारा मानव केंद्रित है। उदाहरण के लिए वर्षा के कार्य को सिंचाई द्वारा पूरा करना, पर्वतीय ढालों पर सीढ़ीदार खेत बनाकर खेती करना आदि। ऐसे उदाहरण जो प्राकृतिक पर्यावरण पर मनुष्य की श्रेष्ठता सिद्ध करते हैं। इस विचारधारा के अनुसार नियतिवाद का यह सिद्धांत कि मनुष्य प्रकृति का दास है, अस्वीकृत कर दिया गया।

प्रश्न 4. ‘नव-निश्चयवाद’ विचार की व्याख्या उपयुक्त उदाहरणों सहित कीजिए।
उत्तर : ‘नव-निश्चयवाद’ की अवधारणा को ग्रिफिथ टेलर ने सामने रखा था। उनका मानना था कि किसी देश द्वारा अपनाए गए सर्वोत्तम आर्थिक कार्यक्रम का बड़ा हिस्सा प्रकृति द्वारा निर्धारित होता है और यह भूगोलवेत्ता का कर्तव्य है कि वह इस कार्यक्रम की व्याख्या करे। देश के विकास की प्रगति को आगे बढ़ाने, धीमा या अवरुद्ध करने में मनुष्य सक्षम होता है। वह प्रगति की दिशा की बजाय दर को परिवर्तित करता है, तो वह बड़े शहर में यातायात नियंत्रक की तरह होता है और वह शायद ‘रुको और जाओ’ ग्रिफिथ टेलर के दर्शन ‘नव-निश्चयवाद’ को अधिक बेहतर स्पष्ट करता है। मनुष्य यदि बुद्धिमान हो, तो वह प्रकृति के कार्यक्रम का पालन कर सकता है, जो संभावनाओं के इस विवाद को स्वीकारता है कि पर्यावरण द्वारा स्थापित विस्तृत सीमा में से मनुष्य सबसे अंत में चयन कर सकता है।

प्रश्न 5. प्रकृति का मानवीयकरण कैसे हो जाता है? उदाहरण सहित स्पष्ट करें।
उत्तर : मानव क्रियाओं की छाप प्रत्येक स्थान पर देखी जा सकती है। उच्च स्थानों जैसे पर्वतों तथा समतल क्षेत्रों जैसे मैदानों में स्वास्थ्य केंद्र, विशाल नगरीय विस्तार, चरागाह, उद्यान आदि देखे जा सकते हैं। तटीय भागों में बंदरगाह, महासागरीय मार्ग तथा अंतरिक्ष में उपग्रह आदि। ये सब मानव क्रियायें हैं। प्रकृति अवसर प्रदान करती है और मनुष्य इसका लाभ उठाता है। इस प्रकार धीरे-धीरे प्रकृति मानवकृत हो जाती है और मानव छाप उस पर पड़नी आरंभ हो जाती है।

प्रश्न 6. प्रौद्योगिकी समाज के सांस्कृतिक विकास के स्तर की सूचक किस प्रकार है? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर : मानव प्रकृति के नियमों को बेहतर समझने के बाद ही प्रौद्योगिकी का विकास कर पाया है। उदाहरण के लिए घर्षण और ऊष्मा की संकल्पनाओं ने अग्नि की खोज में हमारी मदद की है। इसी प्रकार डी.एन.ए. और आनुवंशिकी के रहस्यों की समझ ने हमें बीमारियों से लड़ने के योग्य बनाया है। अधि क तीव्र गति से चलने वाले यान विकसित करने के लिए हम वायु की गति के नियमों का प्रयोग करते हैं। प्रकृति का ज्ञान प्रौद्योगिकी को विकसित करने में महत्त्वपूर्ण है। प्रौद्योगिकी मनुष्य पर पर्यावरण की बंदिशों को कम करती है।
प्रारंभिक अवस्थाओं में मनुष्य प्राकृतिक पर्यावरण से अत्यधिक प्रभावित हुआ था, क्योंकि प्रौद्योगिकी का स्तर अत्यंत निम्न था तथा मानव सामाजिक विकास की अवस्था भी आदिम थी।

प्रश्न 7. प्रौद्योगिकी मनुष्य पर पर्यावरण की बंदिशों को किस प्रकार कम करती है? उदाहरण सहित स्पष्ट करें।
उत्तर : मनुष्य भौतिक वातावरण से तकनीक सहायता के साथ पारस्परिक प्रभाव डालता है। यह महत्त्वपूर्ण मनुष्य ने क्या उत्पादन किया है बल्कि यह महत्त्वपूर्ण है कि किस तकनीक और उपकरण के साथ उत्पादन किया है।
मानव प्रकृति का दास रहा है लेकिन अब प्रौद्योगिकी की सहायता से उसने प्रकृति पर विजय प्राप्त कर ली है। प्राकृतिक नियमों को समझने के बाद ही उसने तकनीक का सहारा लिया। प्रकृति का ज्ञान तकनीकी विकास के लिए बहुत आवश्यक है और तकनीक ही मनुष्य पर प्रकृति की पकड़ कम करती है। आज डी. एन. ए. तकनीक की सहायता से ही बहुत-सी बीमारियों का पता चलता है।

प्रश्न 8. नियतिवाद, संभावनावाद तथा नवनियतिवाद किस प्रकार एक-दूसरे से भिन्न है ?
उत्तर : नियतिवाद (Determinism) : 1. इस विचारधारा के अनुसार मनुष्य के प्रत्येक क्रियाकलाप को पर्यावरण से नियंत्रित किया जाता है। इसके अनुसरण करने वाले मानते हैं कि भौतिक कारक जैसे- जलवायु, उच्चावच, प्राकृतिक वनस्पति आदि मानव के समस्त क्रियाकलापों और जीवन शैली आदि को नियंत्रित करते हैं।
2.नियतिवाद सामान्यतया मानव को एक निष्क्रिय कारक समझता है जो पर्यावरणीय कारकों से प्रभावित है।
2..संभावनावाद (Possibilism) : इस विचारधारा के अनुसार मनुष्य अपने पर्यावरण में परिवर्तन करने में समर्थ है तथा वह प्रकृतिदत्त अनेक संभावनाओं का इच्छानुसार अपने लिए उपयोग कर सकता है। मानव एवं पर्यावरण को परस्पर सम्बन्ध में यह विचारधारा मानव केन्द्रित है।
3..नव नियतिवाद (Neo-Determinism) : यह विचारधारा उपरोक्त दोनों विचारधाराओं की चरम अवस्था के बीच का दर्शन है। ग्रिफिथ टेलर ने माना है कि मानव एक निश्चित सीमा तक ही पर्यावरण को प्रभावित कर सकता है। इसी प्रकार उसने मानव की बुद्धि कुशलता को भी पर्यावरण को प्रभावित करने में एक सीमा तक सक्षम माना है। भूगोलवेत्ता का प्रमुख दायित्व एक सलाहकार का है न कि प्रकृति की योजना की व्याख्या करना।

You cannot copy content of this page
Scroll to Top