याद रखने योग्य बाते – जनसंख्या संघटन – Class12th Geography Chapter 3

Index

Class 12th Geography

1. मानव भूगोल

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

2. विश्व जनसँख्या

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

3. जनसँख्या संघटन

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

4. मानव विकास

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

5. प्राथमिक क्रियाएं

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

6. द्वितीयक क्रियाएँ

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

7. तृतीयक तथा चतुर्थक क्रियाकलाप

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

8. परिवहन एवं संचार

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

9. अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

Class 12th Geography मानव भूगोल के मूल सिद्धान्त Chapter 3 जनसंख्या संघटन-याद रखने योग्य बिंदु

याद रखने योग्य बिंदु

1.आयु संरचना (Age Structure) : किसी देश की जनसंख्या को विभिन्न आयु वर्गों में विभाजित करके अध्ययन करते है। भारत में जनसंख्या को तीन बड़े आयु वर्गों में रखा गया है।
1.बाल वर्ग- 0 से 14 वर्ष ।
2. प्रौढ़ वर्ग- 15 से 59 वर्ष।
3.वृद्ध वर्ग- 60 वर्ष से ऊपर।
-इन विभिन्न आयु वर्गों में विभाजित लोगों की संख्या को जनसंख्या की आयु संरचना कहते हैं। विभिन्न देशों में विभिन्न आयु वर्गों में लोगों की संख्या भी भिन्न-भिन्न होती है। लेकिन प्रौढ़ जनसंख्या के अनुपात में कम परिवर्तन दिखाई देते हैं। सबसे अधिक प्रादेशिक विभिन्नतायें बाल और वृद्ध वर्गों के अनुपात में पाई जाती हैं।
-60 वर्ष से ऊपर का आयु वर्ग जनसंख्या में वृद्धों की संख्या का संकेत देता है। इससे वृद्धों की देखभाल पर अधिक व्यय होने का संकेत मिलता है क्योंकि इस वर्ग को भी आश्रित जनसंख्या में गिना जाता है।
-विश्व में विभिन्न भागों में आयु संरचना के तीन वर्गों में से प्रौढ़ जनसंख्या का अनुपात सबसे कम परिवर्तनशील है। अन्य दो वर्गों में प्रादेशिक भिन्नतायें सबसे अधिक मिलती हैं।
2.आयु और लिंग पिरामिड (Age and Sex Pyramid) : जनसंख्या में स्त्री-पुरुष की संख्या के अनुपात को लिंग कहते हैं। इसमें प्रति हजार पुरुषों पर स्त्रियों की संख्या की गणना की जाती है जैसे 2001 की जनगणना के अनुपात अनुसार भारत में 1000 पुरुषों के पीछे केवल 933 स्त्रियाँ हैं।
किसी देश का लिंग अनुपात उस क्षेत्र की आर्थिक-सामाजिक स्थिति को जानने में बड़ा सहायक होता है। लिंग अनुपात का प्रभाव जनसंख्या की वृद्धि दर, व्यावसायिक संरचना व वैवाहिक दर पर पड़ता है। लिंग अनुपात को प्रवास तथा बालक-बालिकाओं की मृत्यु दरों में अन्तर प्रभावित करते हैं।
किसी देश की आयु-लिंग संरचना को एक पिरामिड की सहायता से दिखाया जा सकता है। इनके अध्ययन से उस देश की आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों की जानकारी मिलती है।
3.नगरीय तथा ग्रामीण जनसंख्या (Urban and Rural Population) : निवास स्थान के आधार पर किसी देश की जनसंख्या को ग्रामीण और नगरीय वर्गों में विभाजित किया जा सकता है। विकसित देशों की 75% से अधिक जनसंख्या नगरों में रहती है। संयुक्त राज्य अमेरिका की 79%, जापान की 78%, जर्मनी की 88%, न्यूजीलैंड की 78%, तथा सिंगापुर की 100% जनसंख्या नगरों में रहती है। विकासशील देशों में लगभग 70% लोग गाँवों में रहते हैं। भारत में 72% लोग, श्रीलंका में 70% तथा वियतनाम में 80% लोग गांवों में रहते हैं। 2004 में संसार की लगभग आधी जनसंख्या नगरीय थी।
4.साक्षरता (Literacy) : पढ़ने और लिखने की क्षमता या योग्यता को साक्षरता कहते हैं। जनांकिकीय भाषा में 15 वर्ष या उससे अधिक आयु वाले जो लोग अपने दैनिक जीवन में एक छोटे तथा सरल कथन को समझ कर पढ़ तथा लिख सकते हैं साक्षर कहलाते हैं। जो व्यक्ति केवल पढ़ सकता है लेकिन लिख नहीं सकता साक्षर नहीं कहलाता। भारत जनगणना विभग के अनुसार 7 वर्ष या उससे अधिक के आयु वर्ग के व्यक्तियों को ही साक्षर या निरक्षर माना जाता है।
5.जनसंख्या की व्यावसायिक संरचना (Occupational Structure of Population) : जनसंख्या का वह अनुपात जो किसी पारिश्रमयुक्त व्यवसाय में संलग्न रहकर जीविकापार्जन करता है, उसे सक्रिय अथवा कार्यशील जनसंख्या कहते हैं। इसी सक्रियजनसंख्या के आनुपातिक वितरण को व्यावसायिक संरचना कहते हैं। कार्यशील जनसंख्या को प्राथमिक, द्वितीयक, तृतीयक तथा चतुर्थक व्यावसायिक वर्गों में विभाजित किया जाता है। प्राथमिक व्यवसाय के अन्तर्गत कृषि, वानिकी तथा मत्सयन, द्वितीयक व्यवसाय में निर्माण उद्योग, तृतीयक व्यवसाय में परिवहन तथा संचार एवं अन्य सेवायें एवं चतुर्थक व्यवसाय में बौधिक व्यवसाय सम्मिलित हैं।
6. जनसंख्या और विकास (Population and Development) : किसी देश के विकास का स्तर वहाँ की जनसंख्या की गुणवत्ता पर निर्भर करता है। इसके साथ ही जनसंख्या के आकार तथा उत्पादन की प्रौद्योगिकी का प्रयोग भी इसमें सहायक है। मानव विकास का उद्देश्य जीवन की सभी गुणवत्ता को सुधारना है। जीवन की गुणवत्ता में सुधार के लिए सर्वप्रथम भोजन, वस्त्र और आवास जैसी मूलभूत आवश्यकताओं की समुचित पूर्ति जरूरी है। इसके बाद शिक्षा, स्वास्थ्य और मनोरंजन की आवश्यकता होती है।
7. मानव विकास (Human Development) : मानव विकास की सूचकांक की गणना व मापन जन्म पर जीवन प्रत्याशा के अधिकतम तथा न्यूनतम मूल्य, सामान्य साक्षरता स्तर तथा सकल घरेलू उत्पादन को अमेरिकी डालर की क्रयशक्ति समता के आधार पर आंकलित किया जाता है।

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