Index

Class 12th Geography

1. मानव भूगोल

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

2. विश्व जनसँख्या

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

3. जनसँख्या संघटन

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

4. मानव विकास

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

5. प्राथमिक क्रियाएं

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

6. द्वितीयक क्रियाएँ

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

7. तृतीयक तथा चतुर्थक क्रियाकलाप

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

8. परिवहन एवं संचार

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

9. अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

Class 12th Geography मानव भूगोल के मूल सिद्धान्त Chapter 5 प्राथमिक क्रियाएँ-याद रखने योग्य बिंदु

याद रखने योग्य बिंदु

1. भोजन वस्त्र, और आवास मनुष्य की मूलभूत आवश्यकतायें हैं। जीव के अस्तित्व के लिए इन आवश्यकताओं का पूरा होना आवश्यक है।
2.मनुष्य अपनी इन आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए अपने उद्भव काल से ही आर्थिक क्रियाकलापों में संलग्न रहा है।
3. आदि मानव अपनी आवश्यकताओं के लिए पूर्णतया प्रकृति पर निर्भर था। वह भोजन की खोज में एक स्थान से दूसरे स्थान जाता रहता था। उसके मुख्य क्रियाकलाप पशुओं का शिकार, पेड़-पौधों के फल, कंदमूल आदि एकत्र करना तथा जल स्रोतों के समीप मछली पकड़ना था।
4. मानव क्रियाकलापों के प्रकार (KinosQ of Human Activities) : मानव क्रियाकलापों को मुख्यतः चार भागों में विभाजित किया जा सकता है:
•प्राथमिक क्रियाकलाप (Primary Activities) : इसमें आखेट, संग्रहण, पशुचारण, मत्स्य पालन, खनन, वानिकी एवं कृषि कार्य आते हैं :
• द्वितीयक क्रियाकलाप (Secondary Activities) : इसके अन्तर्गत विनिर्माण उद्योग आते हैं जिनमें कच्चे माल को संशोधित किया जाता है और उपयोगी वस्तुएँ बनाई जाती हैं।
• तृतीयक क्रियाकलाप (Tertiary Activities) : इन क्रियाओं के अंतर्गत लोगों को प्रदान की जाने वाली सेवायें जैसे व्यापार, परिवहन, शिक्षा तथा स्वास्थ्य आदि आती हैं।
• चतुर्थक क्रियाकलाप (Quatarnary Activities) : इन क्रियाओं में उच्च बौद्धिक ज्ञान संबंधी कार्य जैसे अनुसंधान, सूचना प्रौद्यौगिकी एवं सूचना उत्पादन आदि शामिल हैं।
5.आखेट एवं संग्रहण (Hunting and Food Gathering) : पृथ्वी पर मानव के उद्भव के साथ जो क्रियाकलाप मानव द्वारा अपनी भूख को शान्त करने के लिए किया गया वह था- आखेट करना तथा संग्रहण करना। आज से 12000 वर्ष पहले पृथ्वी पर सभी मानव आखेटक तथा संग्राहक का जीवन व्यतीत कर रहे थे। ये लोग पृथ्वी के हर निवास क्षेत्र में फैले थे। वर्तमान समय में आखेट व संग्रहण जैसे आर्थिक क्रियाकलाप के क्षेत्र सीमित होकर केवल आर्कटिक वनों, विषुवतीय वन, मरुस्थल आदि में पाए जाते हैं।
6.पशुचारण (Pastoralism) : मनुष्य आखेट व संग्रहण के बाद जीव-जन्तुओं को पालतू बनाने लगा। पालतू जीव उसके लिए बहुत उपयोगी सिद्ध हुए। जीव-जन्तुओं को पालतू बनाना मनुष्य की बहुत बड़ी उपलब्धि थी। यह मानव सभ्यता के विकास में एक युगान्तकारी घटना थी। विश्व की घासभूमियाँ, पर्वतीय क्षेत्र, अरब व सहारा के मरुस्थल तथा उच्च पठारी प्रदेश चलवासी पशुचारण के प्रमुख क्षेत्र हैं। इन क्षेत्रों की जलवायु व धरातल की दशाओं के अनुसार गाय, बैल, भेड़, बकरी, ऊँट, रेन्डियर, घोड़े व गधे पालें जाते हैं।
7.खनन (Mining) : भूपर्पटी से मूल्यवान धात्विक व अधात्विक खनिजों को निकालने की प्रक्रिया को खनन कहते हैं। आर्थिक विकास की सभी अवस्थाओं में समाज कृषि, मछली पकड़ने तथा वानिकी के कार्यों में लगा रहा है लेकिन खनन का आरम्भ सांस्कृतिक विकास और आर्थिक आवश्यकता के पैदा होने के बाद ही हुआ है।
8. खनिज प्रकार तथा उनका महत्त्व (Minerale Types and their Importance) : खनिज एकरूप ठोस अजैव पदार्थ होता है। इसका एक निश्चित रासायनिक संघटन होता है। इनका निर्माण अजैव प्रक्रियाओं द्वारा प्रकृति में ही होता है। मानव सभ्यता के विकास में खनिजों का महत्त्वपूर्ण योगदान है। इतिहास के विभिन्न चरणों में खनिजों का महत्त्व रहा है।
खनिजों का वर्गीकरण (Classification of the Minerals) : खनिज दो प्रकार के होते हैं। ) धात्विक खनिज (Metallic Minerals ) : जैसे लोहा, तांबा, सोना, चाँदी आदि। (ii) अधात्विक खनिज (Non-metallic Minerals ) : जैसे गंधक, नमक, चूना पत्थर, डोलोमाइट इत्यादि। महत्त्व (Inportance) : (i) आधुनिक औद्योगिक विकास खनिजों के विभिन्न उद्देश्यों की पूर्ति के लिए उपयोग किए जाने का परिणाम है।
(ii) खनिज समाप्त होने वाले संसाधन हैं।
(iii) खनिजों का कई प्रकार से उपयोग होता है।
(iv) खनिजों का वितरण असमान है। कुछ ही देशों में खनिज अधिक मात्रा में मिलते हैं।
(v) अयस्कों की अशुद्धियाँ हटाकर उन्हें उपयोगी बनाया जाता है।
(vi) खनिज अनवीकरणीय संसाधन है।

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