Index

Class 12th Geography

1. मानव भूगोल

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

2. विश्व जनसँख्या

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

3. जनसँख्या संघटन

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

4. मानव विकास

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

5. प्राथमिक क्रियाएं

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

6. द्वितीयक क्रियाएँ

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

7. तृतीयक तथा चतुर्थक क्रियाकलाप

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

8. परिवहन एवं संचार

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

9. अन्तर्राष्ट्रीय व्यापार

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

Class 12th Geography मानव भूगोल के मूल सिद्धान्त Chapter 6 प्राथमिक क्रियाएँ-याद रखने योग्य बिंदु

1.द्वितीयक क्रियाएँ (Secondary Activities) : प्राथमिक क्रियाकलाप से प्राप्त उत्पादों का प्रसंस्करण, नई वस्तुओं या उत्पादों की रचना और निर्माण की क्रिया को ही द्वितीयक क्रियाकलाप कहते हैं।
द्वितीयक क्रियाकलाप मानव अस्तित्व के लिए अत्यन्त महत्त्वपूर्ण बन गए हैं। ये क्रियाकलाप आर्थिक समृद्धि के लिए एक इंजन का कार्य करते हैं। ये निर्धनता और बेरोजगारी करते हैं तथा पारम्परिक समाज को आधुनिक समाज में बदल देते हैं।
2.उद्योग का अर्थ (Meaning of the Industry) : उद्योग से तात्पर्य जैविक तथा अजैविक पदार्थों का एक नये उत्पाद के रूप में यान्त्रिक तथा रासायनिक परिवर्तन है। चाहे यह कार्य शक्तिचालक मशीन द्वारा अथवा हाथ से किया गया हो। आधुनिक उद्योग की विशेषतायें निम्नलिखित हैं :
-जटिल विधियाँ
-शक्ति के साधनों का उपयोग
-परिष्कृत उत्पाद
-विशिष्ट तकनीक
-बड़ी संख्या में श्रमिक
-मशीनों का उपयोग
-विशाल मात्रा में वस्तुओं का निर्माण
3.उद्योगों का वर्गीकरण (Classification of Industry): विनिर्माण उद्योगों के वर्गीकरण के चार आधार हैं :(i) उद्योगों का आकार (Size of Industry )
(ii) उत्पादों का स्वरूप (Nature of the Product)
(iii) कच्चे माल को स्वरूप (Nature of the Raw Material)
(iv) स्वामित्व (Ownership)
(i) उद्योगों के आकार के आधार पर वर्गीकरण (Classification of Industry on the basis of Size) : उद्योगों आकार के आधार पर उद्योगों को तीन वर्गों में विभाजित किया जा सकता है:
(क) कुटीर उद्योग (Cottage Industry) : इस प्रकार के उद्योगों में खाद्य पदार्थ, चटाइयाँ, दरियाँ, जाल, टोपियाँ आदि वस्तुयें बनाई जाती हैं।
(ख) लघु उद्योग (Small Scale Industry) : ये छोटे पैमाने के उद्योग कहलाते हैं। इन उद्योगों में कागज उद्योग, कपड़ा उद्योग, मिट्टी के बर्तन, खिलौने आदि बनाए जाते हैं।
(ग ) बड़े पैमाने के उद्योग (Large Scale Industry) : इन उद्योगों में बड़ी मशीनों द्वारा बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है। लोहा व इस्पात उद्योग, मशीन औजार, रासायन उद्योग, चीनी उद्योग, वस्त्र उद्योग आदि इसके उदाहरण हैं।
(ii) उत्पाद के स्वरूप के आधार पर वर्गीकरण (Classification on the basis of Nature of the Product) :
( क ) आधारभूत उद्योग (Basic Industry) : इन उद्योगों में उत्पादों का प्रयोग अन्य उत्पादन प्राप्त करने के लिए किया जाता । है। जैसे लोहा और इस्पात उद्योग में मशीनें बनाई जाती हैं जो अन्य उद्योगों को चलाने में काम आती हैं।
(ख)उपभोक्ता वस्तु उद्योग (Consumer gooosQ industry) : इन उद्योगों में दैनिक वस्तुओं के उपभोग की वस्तुएँ बनाई जाती हैं, जैसे रेडियो, टी.वी., वस्त्र आदि ।
(ii) कच्चे माल के आधार पर वर्गीकरण (Classification on the basis of Raw Material) : ये उद्योग निम्नलिखित हैं :
(क) कृषि, आधारित उद्योग (Agro-based Industries) : इन उद्योगों में कच्चे माल के रूप में कृषि पदार्थों का प्रयोग किया जाता है। जैसे- वस्त्र उद्योग, चीनी उद्योग ।
(ख) वन-आधारित उद्योग (Forest-based Industries) : इन उद्योगों में कच्चे माल के रूप में वन उत्पादों का प्रयोग होता है। जैसे- कागज उद्योग, फर्नीचर उद्योग |
(ग) धातु अथवा खनिज-आधारित उद्योग (Mineral-based Industries) : ये उद्योग कच्चे माल के लिए खनिजों आधारित होते हैं। जैसे- लोहा तथा इस्पात उद्योग आदि ।
(iv) स्वामित्व के आधार पर वर्गीकरण (Classification on the basis of Ownership) :
(क) सार्वजनिक क्षेत्र के उद्योग (Public Sector Industries) : इस प्रकार के उद्योग सरकारी क्षेत्र में होते हैं।
(ख) निजी उद्योग (Private Sector Industries) : इन उद्योगों का स्वामित्व व्यक्ति या व्यक्तियों के हाथ में होता है।
(ग) संयुक्त क्षेत्र के उद्योग (Joint Sector Industries) : इन उद्योगों का स्वामित्व व्यक्तियों अथवा कम्पनियों तथा सरकार मिलकर रखते हैं।
4.उद्योगों के स्थानीयकरण को प्रभावित करने वाले कारक (Factors affecting the Localisation of Industries) : उद्योगों की अवस्थिति अनेक भौगोलिक तथा अभौगोलिक कारकों द्वारा नियंत्रित होती है। भौगोलिक कारकों में उच्चावच, कच्चा माल, ऊर्जा स्रोत, श्रम बाजार तथा परिवहन के साधन महत्त्वपूर्ण हैं। अभौगोलिक कारकों में सरकारी नीतियाँ, पूँजी, बैंकिंग तथा प्रबन्ध व्यवस्था प्रमुख है।
5.प्रमुख उद्योग (Major Industries) :
लोहा तथा इस्पात उद्योग (Iron and Steel Industry) : यह एक आधारभूत उद्योग है जो अन्य उद्योगों के लिए मशीनें, उपकरण आदि तैयार करता है। विश्व में लोहा तथा इस्पात उद्योग का सबसे अधिक केन्द्रीयकरण, संयुक्त राष्ट्र अमेरिका में महान झीलों के क्षेत्र में तथा अटलांटिक तटीय क्षेत्र में, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, बेल्जियम, जर्मनी के सार रूट क्षेत्र में रूस हुआ के यूराल क्षेत्र में तथा भारत के छोटानागपुर प्रदेश में है। चीन लौह असस्क का अग्रणी उत्पादक देश है। जापान में लोहा तथा इस्पात उद्योग क्यूशू और होंशू द्वीपों में केन्द्रित है।
पेट्रो रसायन उद्योग (Petro Chemical Industry) : यह उद्योग खनिज तेल पर आधारित होता है। परिष्करणशालाओं के निकट उद्योग जैसे प्लास्टिक, रासायनिक उर्वरक, कृत्रिम रेशे आदि उद्योग हैं। इस उद्योग मुख्यतः उत्तर अमेरिका तथा यूरोप के देशों में हुई थी। बाद में यह उद्योग रूस, मध्य एशियाई देशों, पश्चिम एशिया के ईरान तथा भारत में विकसित
6. बदलते परिवेश (Changing TrenosQ) : उद्योगों की अवस्थिति के क्षेत्र में परंपरागत कारकों के महत्त्व में विशेषकर विकसित विश्व में निरन्तर कमी आई है। अब पर्यावरण को टिकाऊ बनाने की प्रक्रिया को अधिक महत्त्वपूर्ण मानकर खनन और लौह इस्पात जैसे भारी उद्योग आर्थिक विकास के लिए महत्त्वपूर्ण नहीं है।
7. नये औद्योगिक क्षेत्र (New Industrial regions) : नये औद्योगिक के क्षेत्र में संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन, फ्रांस,जापान आदि में विकसित हुए हैं। इसके अतिरिक्त भारत में भी नये क्षेत्रों में औद्योगीकरण हुआ है।

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