1 अंकीय प्रश्न उत्तर – उपनिवेशवाद और देहात – Class12th History Chapter 10

Index

1. ईंट मनके और अस्थियाँ

1. आरंभ 2. निर्वाह के तरीके 3. मोहनजोदड़ो 4. सामाजिक विभिन्नताओं का अवलोकन 5. शिल्प उत्पादन के विषय में जानकारी 6. माल प्राप्त करने सम्बन्धी नीतियाँ 7. मुहरें लिपि तथा बाट 8. प्राचीन सभ्यता 9. सभ्यता का अंत 10. हड़प्पा सभ्यता की खोज 11. अतीत को जोड़कर पूरा करने की समस्याएं मानचित्र बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर 1 अंकीय प्रश्न उत्तर 2 अंकीय प्रश्न उत्तर

2. राजा किसान और नगर

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

3. बंधुत्व जाति और वर्ग

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

4. विचारक विश्वास और इमारतें

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर 1 बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर 2

6. भक्ति सूफी और परम्पराएँ

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

7. एक साम्राज्य की राजधानी विजयनगर

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

8. उपनिवेशवाद और देहात

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

10. उपनिवेशवाद और देहात

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

11. विद्रोह और राज

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

13. महात्मा गाँधी और आन्दोलन

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

15. संविधान का निर्माण

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

Class 12th History Chapter 10 Important Question Answer 1 Marks उपनिवेशवाद और देहात (सरकारी अभिलेखों का अध्ययन)

प्रश्न 1. पाँचवीं रिपोर्ट ब्रिटिश संसद में कब पेश की गई थी ? इसका क्या उद्देश्य था ?
उत्तर : ब्रिटिश संसद में पाँचवीं रिपोर्ट 1813 में पेश की गई थी। इसका उद्देश्य भारत में कंपनी की आर्थिक गतिविधियों को नियंत्रित करना था ताकि उनका लाभ ब्रिटिश राष्ट्र तथा ब्रिटिश उद्योगपतियों को भी मिल सके।

प्रश्न 2. ‘दक्कन दंगा आयोग’ का गठन क्यों किया गया था ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर : (i) जब विद्रोह दक्कन में फैला तो प्रारंभ में बंबई की सरकार ने उसे गंभीतापूर्वक नहीं लिया परंतु भारत सरकार ने बंबई की सरकार पर दबाव डाला कि वह दंगों के कारणों की खोज करने के लिए जाँच आयोग बैठाए।
(ii) आयोग ने दंगा पीड़ित जिलों में जाँच पड़ताल कराई, रैयत वर्गों, साहूकारों और साथी गवाहों के बयान लिए, भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में राजस्व की दरों, कीमतों और ब्याज के बारे में आँकड़े इकट्ठे किए और जिला कलेक्टरों द्वारा भेजी गई रिपोर्टों का संकलन किया। यह रिपोर्ट जिसे ‘दक्कन दंगा रिपोर्ट’ कहा जाता है, इतिहासकारों को उन दंगों का अध्ययन करने के लिए आधार सामग्री उपलब्ध कराती है।

प्रश्न 3. बंगाल के स्थायी बंदोबस्त के दो बुरे प्रभाव लिखिए।
उत्तर : (1) स्थायी बंदोबस्त में कृषकों के हितों की पूरी तरह अवहेलना की गई थी।
(ii) स्थायी बंदोबस्त के कारण सरकार को भविष्य में भारी , आर्थिक हानि उठानी पड़ी।

प्रश्न 4. जोतदार जमींदारों का विरोध कैसे करते थे? कोई दो बिंदु लिखिए। वे ऐसा क्यों करते थे ?
उत्तर-(i) जोतदार जमींदारों द्वारा गाँव की जमा लगान को बढ़ाने के प्रयत्नों का विरोध करते थे।
(ii) वे ज़मींदार के अधिकारियों को अपने कर्तव्यों का पालन करने से रोकते थे और उन पर निर्भर किसानों को अपने पक्ष में एकजुट रखते थे। जोतदार गाँव में अपना प्रभाव तथा नियंत्रण बढ़ाने के लिए ज़मींदारों का विरोध करते थे।

प्रश्न 5. ब्रिटेन द्वारा भारत से कपास मँगवाने के कोई दो कारण लिखें।
उत्तर : (i) भारत की कृषि एवं जलवायु दोनों ही कपास के लिए उपयुक्त थे। (ii) भारत में सस्ता श्रम उपलब्ध था।

प्रश्न 6. रैयतवाड़ी बंदोबस्त से आपका क्या तात्पर्य है ?
उत्तर : भू-राजस्व की वह प्रणाली, जिसमें रैयतों या किसानों तथा सरकार का सीधा संबंध होता था। इसमें जमींदार या अन्य कोई मध्यस्थ न था।

प्रश्न 7. उन स्रोतों के नाम लिखिए जो ब्रिटिश उपनिवेशवाद और भारतीय देहात के इतिहास के अध्ययन के लिए उपयोगी हैं।
उत्तर : स्रोतों के नाम : (i) सरकारी राजस्व अभिलेख। (it) सर्वेक्षण। (iii) पत्र- पत्रिकाएँ। (iv) सर्वेक्षकों द्वारा छोड़े गए विवरण। (v) यात्रियों द्वारा छोड़े गए विवरण। (vi) जाँच आयोगों द्वारा प्रस्तुत की गई रिपोर्ट।

प्रश्न 8. अंग्रेज़ों ने पहाड़ियों के स्थान पर संथालों को बसाने की नीति क्यों अपनाई?
उत्तरः अंग्रेज़ राजमहल की पहाड़ियों में जंगलों को साफ करके स्थायी कृषि करवाना चाहते थे। पहाड़ी लोग ऐसा करने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं थे, जबकि संथाल इसमें रुचि ले रहे थे। इसी कारण अंग्रेजों ने पहाड़ियों के स्थान पर संथालों को बसाने की नीति अपनाई।

प्रश्न 9. अंग्रेजों ने जंगलों का सफाया करने तथा वहाँ से पहाड़ियों को हटाने का निर्णय क्यों किया ? कोई दो कारण लिखिए।
उत्तर : (i) अंग्रेज जंगलों को साफ करके स्थायी कृषि का विस्तार करना चाहते थे ताकि राजस्व में वृद्धि हो सके।
(ii) वे जंगलों को उजाड़ मानते थे और वनवासियों को असभ्य, बर्बर, उपद्रवी और क्रूर समझते थे। इसलिए वे उन पर नियंत्रण पाना चाहते थे।

प्रश्न 10. चार्ल्स कार्नवालिस कौन था ? उसका संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर : चार्ल्स कार्नवालिस, अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम के दौरान ब्रिटिश सेना का कमांडर था। जब 1793 में बंगाल में इस्तमरारी बंदोबस्त लागू किया गया, उस समय कार्नवालिस बंगाल का गवर्नर जनरल था।

प्रश्न 11. पहाड़ियों के जीवन में वनों का क्या महत्त्व था ?
उत्तरः (i) वे इमली के पेड़ों के मध्य झोंपड़ियाँ बना कर रहते
(ii) वे वनों में शिकार करते थे एवं महुआ के फूल एकत्र करते थे।
(iii) उनके पशुओं के लिए पेड़ों के नीचे उगने वाले छोटे-छोटे पौधे चारे का काम करते थे।

प्रश्न 12.1855-56 की किन परिस्थितियों ने संथालों को जमींदारों के विरुद्ध विद्रोह करने पर मजबूर किया? किन्हीं दो का उल्लेख कीजिए।
उत्तर : 1. संथालों ने जिस भूमि पर खेती करना शुरू किया था वह उनके हाथों से निकलती जा रही थी। उनके द्वारा साफ की गई जमीन पर सरकार भारी कर लगा रही थी।
2.संथाल लोग यह महसूस करने लगे थे कि अपने आदर्श संसार तथा शासन की स्थापना के लिये जमींदारों के खिलाफ विरोध करने का समय आ गया है।

प्रश्न 13. पूर्व औपनिवेशिक काल में कस्बों को प्रायः ग्रामीण इलाकों से किस प्रकार विपरीत परिभाषित किया? किन्हीं दो अंतरों का उल्लेख कीजिए। (C.B.S.E. Delhi 2012)
उत्तर : (i) पूर्व औपनिवेशिक काल में कस्बों को आमतौर पर ग्रामीण इलाकों के विपरीत परिभाषित किया जाता है। ग्रामीण अंचलों में लोग प्रायः खेती, जंगलों में संग्रहण या पशुपालन के जरिए जीवन बिताते थे।
(ii) कस्बों में, ग्रामीण अंचलों के विपरीत, शिल्पकार, व्यापारी, प्रशासक तथा शासक रहते थे।

प्रश्न 14. इस्तमरारी बंदोबस्त के बाद कुछ प्रारंभिक दशकों में जमींदार अपनी राजस्व माँग को अदा करने में बराबर कोताही क्यों करते रहे? कोई दो कारण संक्षेप में स्पष्ट कीजिए।
उत्तर : (i) इस्तमरारी बंदोबस्त के बाद शुरुआती दशकों में जमींदार अपनी राजस्व की माँग को अदा करने में लगातार कोताही करते रहे। इसका नतीजा यह हुआ कि राजस्व की बकाया राशि बढ़ती गई।
(ii) ऊँची माँग 1790 के दशक में लागू की गई थी। उस समय कृषि की पैदावार की कीमतें कम थीं जिससे रैयत के लिए जमींदार को उनकी देय रकम देना मुश्किल था। जब जमींदार किसानों से राजस्व इकट्ठा नहीं कर सकता था तो वह कंपनी को तयशुदा रकम कैसे चुका सकता था।

प्रश्न 15. रैयत (किसान) नये जमींदार की बजाय अपने पुराने ज़मींदार के प्रति ही वफादार बने रहते थे क्यों? कोई दो कारण लिखो।
उत्तर: 1. रैयत स्वयं को पुराने जमींदार से जुड़ा हुआ महसूस करते थे और उसी को ही अपना अन्नदाता मानते थे।
2.जमींदारी की बिक्री से उनके स्वाभिमान तथा गौरव को चोट पहुँचती थी।

प्रश्न 16. बुकानन कौन था ? उसका संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर : फ्रांसिस बुकानन एक चिकित्सक था जो भारत में 1794 में आया। उन्होंने 1794 से 1815 तक बंगाल चिकित्सा सेवा में कार्य किया। कुछ वर्षों तक वे भारत के गवर्नर जनरल लाड वेलेजली के शल्य-चिकित्सक रहे। उन्होंने अपने प्रवास के दौरान कलकत्ता (अब कोलकाता) में एक चिड़ियाघर की स्थापना की जो अलीपुर चिड़ियाघर कहलाया। वे कुछ समय के लिए वानस्पतिक उद्यान के प्रभारी रहे। उन्होंने बंगाल सरकार के अनुरोध पर ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी के अधिकार क्षेत्र में आने वाली भूमि को विस्तृत सर्वेक्षण किया। वे 1815 में बीमार हो गए और इंग्लैंड चले गए। बुकानन अपनी माता जी की मृत्यु के पश्चात् उनकी जायदाद के वारिस बने और उन्होंने उनके वंश के नाम ‘हैमिल्टन’ को अपना लिया। इसलिए उन्हें अक्सर बुकानन-हैमिल्टन भी कहा जाता है।

प्रश्न 17.राजमहल की पहाड़ियों में रहने वाले पहाड़िया लोगों को पहाड़ियों में भीतर की ओर चले जाने को क्यों मजबूर किया गया? इसका उनके जीवन पर क्या प्रभाव पड़ा? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर : (i) ब्रिटिश अधिकारियों ने 1770 में पहाड़िया लोगों को निर्मूल कर देने की क्रूर नीति अपनायी तथा उनका संहार शुरू कर दिया गया।
(ii) शांति स्थापना के अभियानों के दौरान पहाड़िया लोग स्वयं को शत्रुतापूर्ण सैन्यबलों से बचाने के लिए तथा बाहरी लोगों से लड़ाई जारी रखने के लिए पहाड़ों के भीतरी भागों में चले गए।
(iii) संथाल बाशिंदों द्वारा निचली पहाड़ियों पर कब्जा कर लिया गया। इसके कारण पहाड़िया लोगों को राजमहल की पहाड़ियों में और भीतर की ओर चले जाना पड़ा।
(iv) पहाड़िया लोगों को ऊपरी पहाड़ियों के चट्टानी और अधिक बंजर क्षेत्रों तथा भीतरी शुष्क इलाकों तक सीमित कर दिया गया।
(v) पहाड़िया लोगों के भीतर की तरफ चले जाने से उनके रहन-सहन तथा जीवन पर बुरा असर पड़ा तथा वे गरीब हो गए। उर्वर जमीन उनसे छीन ली गई। अब वे झूम खेती करने की स्थिति में नहीं रह गए।

प्रश्न 18. रिकार्डो का भू-स्वामित्व का विचार बम्बई दक्कन में किस प्रकार लागू किया गया? समीक्षा कीजिए।
उत्तर : रिकार्डो का भू-स्वामित्व का विचार : समीक्षा (i) 1820 के दशक तक इंग्लैंड में डेविड रिकार्डो एक जाने-माने अर्थशास्त्री के रूप में विख्यात थे । औपनिवेशिक अधिकारियों ने अपने महाविद्यालयी जीवन में रिकार्डो के विचारों का अध्ययन किया था।
(ii) रिकॉर्ड के विचारों के अनुसार भूस्वामी को उस समय लागू औसत लगानों को प्राप्त करने का ही हक होना चाहिए। जब भूमि से औसत लगान से अधिक प्राप्ति होने लगे तो भूस्वामी को । अधिशेष आय होगी जिस पर सरकार को कर लगाने की आवश्यकता होगी। यदि कर नहीं लगाया गया तो किसान किरायाजीवी में बदल जाएँगे और उनकी अधिशेष आय की भूमि के सुधार में उत्पादक रीति से निवेश नहीं होगा।
(iii) भारत में अनेक ब्रिटिश अधिकारियों ने सोचा कि बंगाल के इतिहास ने रिकार्डो के सिद्धांत की पुष्टि कर दी है। वहाँ जमींदार लोग किरायाजीवियों के रूप में बदल गए प्रतीत हुए क्योंकि उन्होंने अपनी जमीनें पट्टे पर दे दीं और किराये की आमदनी पर निर्भर रहने लगे।
(iv) जो राजस्व प्रणाली बम्बई दक्कन में लागू की गई उसे “रैयतवाड़ी’ कहा जाता है। बंगाल में लागू की गई प्रणाली के विपरीत, इस प्रणाली के अंतर्गत राजस्व की राशि सीधे रैयत के साथ तय की जाती थी। साथ ही, भिन्न-भिन्न प्रकार की भूमि से होने वाली औसत आय का अनुमान लगा लिया जाता था।
(v) रिकॉर्ड के भू-स्वामित्व के अंतर्गत रैयत की राजस्व अदा करने की क्षमता का आकलन कर लिया जाता था और सरकार के हिस्से के रूप में उसका एक अनुपात निर्धारित कर दिया जाता था। इसके अतिरिक्त हर 30 साल के बाद जमीनों का फिर से सर्वेक्षण किया जाता था और राजस्व की दर तदनुसार बढ़ा दी जाती थी।

प्रश्न 19. 1830 के बाद रैयत समुदाय को ऋणदाताओं द्वारा ऋण न दिए जाने के अनुभवों की आलोचनात्मक परख कीजिए।
उत्तर : (i) दक्कन में रैयतवाड़ी राजस्व प्रणाली लागू की गई थी। इसके अंतर्गत राजस्व की राशि सीधे रैयत के साथ निश्चित की जाती थी। यह 30 वर्ष के बाद जमीनों का सर्वेक्षण करने के पश्चात् बढ़ाई जाती थी। अतः यह स्थायी नहीं थी।
(ii) 1820 में राजस्व अधिक निश्चित होने के कारण कई किसान अपनी जमीनें छोड़कर चले गए। इसके अतिरिक्त वर्षा अधिक या कम होने से फसलें खराब हो जाती थीं परंतु अधिकारी राजस्व की वसूली में सख्ती करते थे अत: किसान साहूकारों से ऋण लेकर राजस्व दे देते थे परंतु समय के साथ उनका ऋण बढ़ता जाता था। वे कर्ज के बोझ से भयंकर रूप से दब रहे थे।

प्रश्न 20. आप कैसे कह सकते हैं कि पहाड़िया लोगों की जीवनी जंगल से जुड़ी हुई थी ?
उत्तर : पहाड़िया लोगों की जीवनी जंगल से जुड़ी हुई थी इसका स्पष्टीकरण निम्न प्रमुख कथनों से होता है। पहाड़िया लोग जंगल से खाने के लिए महुआ के फूल इकट्ठे करते थे, बेचने के लिए रेशम के कोया और राल और-काठकोयला बनाने के लिए लकड़ियाँ इकट्ठी करते थे। वे इमली के पेड़ों के बीच बनी अपनी झोंपड़ियों में रहते थे और आम के पेड़ों की छाँह में आराम करते ही वे पूरे प्रदेश को अपनी निजी भूमि मानते थे और यह भूमि उनकी पहचान और जीवन का आधार थी। वे बाहरी लोगों के प्रवेश का प्रतिरोध करते थे। उनके मुखिया लोग अपने समूह में. एकता बनाए रखते थे, आपसी लड़ाई-झगड़े निपटा देते थे और अन्य जातियाँ तथा मैदानी लोगों के साथ लड़ाई छिड़ने पर अपनी जनजाति का नेतृत्व करते थे।

प्रश्न 21. ब्रिटिश सरकार ने दक्कन विद्रोह के दमन के लिए कौन-से पग उठाए ?
उत्तर : (i) उसने विद्रोही किसानों के गाँवों में पुलिस थाने स्थापित कर दिए।
(ii) उसने विद्रोहियों के दमन के लिए सेना को बुला लिया। (iii) उसने विद्रोही नेताओं को कड़ी सजाएँ दीं।

प्रश्न 22. पहाड़िया लोग बराबर मैदानी क्षेत्रों पर आक्रमण क्यों करते रहते थे ?
उत्तर : पहाड़िया लोग बराबर मैदानी क्षेत्रों पर आक्रमण करते थे क्योंकि : (i) पहाड़ियों द्वारा ये आक्रमण अधिकतर अपने आपको विशेष रूप से अभाव या अकाल के वर्षों में जीवित रखने के लिए किए जाते थे।
(ii) ये हमले मैदानों में बसे हुए समुदायों पर अपनी ताकत दिखलाने का भी एक तरीका थे।
(iii) इसके अतिरिक्त, ऐसे आक्रमण बाहरी लोगों के साथ अपने राजनीतिक संबंध बनाने के लिए भी किए जाते थे।

प्रश्न 23. डेविड रिकार्डो कौन था ? उसके अनुसार लगान पारित का अधिकार भू-स्वामी को कब होना चाहिए ?
उत्तर : डेविड रिकार्डों 1820 के दशक तक इंग्लैंड में एक के जाने-माने अर्थशास्त्री के रूप में विख्यात थे। रिकार्डो के विचारों के अनुसार भू-स्वामी को उस समय लागू ई ‘औसत लगानों’ को प्राप्त करने का ही हक होना चाहिए। जब वर्षा भूमि से ‘औसत लगान’ से अधिक प्राप्त होने लगे तो भूस्वामी को री अधिशेष आय होगी जिस पर सरकार को कर लगाने की से आवश्यकता होगी। यदि कर नहीं लगाया गया तो किसान किराया ण जीवी में बदल जायेंगे और उनकी अधिशेष आय का भूमि के सुधार में उत्पादन रीति से निवेश नहीं होगा।

प्रश्न 24. 19वीं शताब्दी के प्रारंभ में जमींदारों की .) स्थिति को मजबूत बनाने में किन दो कारकों ने सहायता पहुँचाई ?
उत्तर : (i) 19वीं शताब्दी के प्रारंभ में मंदी की स्थिति समाप्त हो गई और कृषि उपज की कीमतें ऊँची हो गई।
(ii) राजस्व के भुगतान संबंधी-नियमों को लचीला बना दिया गया।

प्रश्न 25. अंग्रेजी सरकार ने बंबई दक्कन में कौन-सी भू-राजस्व प्रणाली लागू की ? यह किस दृष्टि से बंगाल के स्थायी (इस्तमरारी) बंदोबस्त से भिन्न थी ?

अथवा

बंबई दक्कन में ब्रिटिश (अंग्रेजों) द्वारा लागू की गई राजस्व प्रणाली का नाम बताइए तथा उसकी एक विशेषता भी बताइए।
उत्तर : अंग्रेजी सरकार द्वारा बंबई दक्कन में लागू की गई राजस्व प्रणाली को रैयतवाड़ी कहा जाता है। बंगाल के स्थायी बंदोबस्त के विपरीत, इस प्रणाली में राजस्व की राशि जमींदार की बजाय सीधे रैयत के साथ निश्चित की जाती थी।

अथवा

गाँवों में जोतदारों की शक्ति जमींदारों की शक्ति से अधिक क्यों थी ? कोई दो कारण बताइए।
उत्तर : (i) जमींदार शहरों में रहते थे। इसके विपरीत जोतदार गरीब गाँववासियों के साथ गाँवों में रहते थे। इस प्रकार गाँववासियों के एक बड़े भाग पर उनका सीधा नियंत्रण था।
(ii) जमींदारों की नीलाम होने वाली जमींदारियाँ प्राय: जोतदार ही खरीदते थे।

प्रश्न 26. बम्बई दक्कन में ब्रिटिश द्वारा लागू की गई राजस्व प्रणाली का नाम बताइए तथा उसकी एक विशेषता भी बताइए।
उत्तर : I. नाम : जो राजस्व प्रणाली बंबई दक्कन में लागू की गई, उसे रैयतवाड़ी कहा जाता है।
II. चारित्रिक विशेषता :
इस प्रणाली के अन्तर्गत राजस्व की राशि सीधे रैयत के साथ तय की जाती थी। भिन्न-भिन्न प्रकार की भूमि में होने वाली औसत आय का अनुमान लगा लिया जाता था। रैयत की राजस्व अदा करने की क्षमता का आकलन कर लिया जाता था और सरकार के हिस्से के रूप में उसका एक अनुपात निर्धारित कर दिया जाता था। हर 30 साल के बाद जमीनों का फिर से सर्वेक्षण किया जाता था और राजस्व की दर उसके अनुसार (तदानुसार) बढ़ा दी जाती थी। इसलिए राजस्व की माँग अब फिर स्थायी नहीं रही थी।

प्रश्न 27. 1830 के दशक में किसान ऋण लेने पर क्यों विवश हो गए? कोई दो कारण बताइए।
उत्तरः 1. 1832 के बाद कृषि उत्पादों के मूल्यों में तेज़ी से गिरावट आई और लगभग डेढ़ दशक तक यही स्थिति बनी रही। इसके परिणामस्वरूप किसानों की आय में गिरावट आई।
2.1832-34 के वर्षों में देहाती इलाके अकाल की चपेट में गए जिसमें जनधन की भारी क्षति हुई। किसानों के पास इस संकट का सामना करने के लिए खाद्यान्न नहीं था। दूसरी ओर राजस्व की बकाया राशियाँ आसमान को छूने लगीं। ऐसी स्थिति में किसानों के लिए ऋण ही एकमात्र उपाय था।

प्रश्न 28. इतिहास के पुनर्निर्माण में सरकारी रिपोर्टों के प्रयोग में क्या सावधानी बरती जानी चाहिए ? इसकी जाँच के लिए क्या किया जाना चाहिए ?
उत्तर : (i) इतिहास के पुनर्निर्माण में सरकारी रिपोर्टों के प्रयोग में उनकी विश्वसनीयता के बारे में सावधानी बरती जानी चाहिए।
(ii) इसकी जाँच के लिए उनकी समाचार-पत्रों, गैर-सरकारी विवरणों, कानूनी रिकॉर्डों तथा मौखिक स्रोतों से तुलना की जानी चाहिए।

प्रश्न 29. दक्कन दंगा रिपोर्ट को इतिहासकारों के लिए क्यों महत्त्वपूर्ण माना जाता है ?
उत्तर : (i) इसमें इतिहासकारों के लिए उन दंगों का अध्ययन करने संबंधी बहुमूल्य जानकारी दी गई है।
(ii) इसमें भिन्न-भिन्न क्षेत्रों में राजस्व की दरों, कीमतों एवं ब्याज के संबंध में विस्तृत आँकड़े दिए गए हैं।

प्रश्न 30. बंबई दक्कन में 1820 के दशक में लागू की गई राजस्व प्रणाली (रैयतवाड़ी) के कोई दो दोष बताओ।
उत्तर : (i) राजस्व की माँग इतनी अधिक थी कि बहुत-से स्थानों पर किसान अपने गाँव छोड़कर नए क्षेत्रों में चले गए।
(ii) घटिया जमीन और कम वर्षा वाले प्रदेशों में समस्या और भी विकट थी। जब वर्षा नहीं होती थी और फसल खराब हो जाती थी तो किसानों के लिए राजस्व चुका पाना असंभव हो जाता था।

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