Index

1. ईंट मनके और अस्थियाँ

1. आरंभ 2. निर्वाह के तरीके 3. मोहनजोदड़ो 4. सामाजिक विभिन्नताओं का अवलोकन 5. शिल्प उत्पादन के विषय में जानकारी 6. माल प्राप्त करने सम्बन्धी नीतियाँ 7. मुहरें लिपि तथा बाट 8. प्राचीन सभ्यता 9. सभ्यता का अंत 10. हड़प्पा सभ्यता की खोज 11. अतीत को जोड़कर पूरा करने की समस्याएं मानचित्र बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर 1 अंकीय प्रश्न उत्तर 2 अंकीय प्रश्न उत्तर

2. राजा किसान और नगर

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

3. बंधुत्व जाति और वर्ग

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

4. विचारक विश्वास और इमारतें

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर 1 बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर 2

6. भक्ति सूफी और परम्पराएँ

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

7. एक साम्राज्य की राजधानी विजयनगर

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

8. उपनिवेशवाद और देहात

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

10. उपनिवेशवाद और देहात

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

11. विद्रोह और राज

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

13. महात्मा गाँधी और आन्दोलन

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

15. संविधान का निर्माण

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

Class 12th History Chapter 11 Important Question Answer 3 Marks विद्रोही और राज(1857 का आंदोलन और उसके व्याख्यान)

प्रश्न 1. बहुत सारे स्थानों पर विद्रोही सिपाहियों ने नेतृत्व संभालने के लिए पुराने शासकों से क्या आग्रह किया ?
उत्तर : अंग्रेजों से लोहा लेने के लिए नेतृत्व और संगठन आवश्यक था। इस उद्देश्य से विद्रोहियों ने ऐसे लोगों की शरण ली जो अंग्रेजों से पहले नेताओं की भूमिका निभाते थे।
(1) सबसे पहले मेरठ के विद्रोही सिपाही दिल्ली गए और उन्होंने वृद्ध मुगल सम्राट से विद्रोह का नेतृत्व करने का आग्रह किया। बहादुर शाह इस समाचार पर भयभीत और बेचैन दिखाई दिए। उन्होंने नाममात्र का नेता बनने की जिम्मेदारी तभी स्वीकार की जब कुछ सिपाही शाही शिष्टाचार की अवहेलना करते हुए लाल किले के मुगल दरबार में जा घुसे थे।
(2) कानपुर में सिपाहियों और शहर के लोगों ने पेशवा बाजीराव द्वितीय के उत्तराधिकारी नाना साहिब को विद्रोह की बागडोर संभालने के लिए मजबूर कर दिया।
(3) झाँसी में रानी को आम जनता के दबाव में विद्रोह का नेतृत्व संभालना पड़ा।
(4) कुछ ऐसी ही स्थिति बिहार में आरा के स्थानीय जमींदार कुँवर सिंह की थी।
(5) अवध (लखनऊ) में नवाब वाजिद अली शाह जैसे लोकप्रिय शासक को गद्दी से हटा देने और उनके राज्य पर अधिकार कर लेने की यादें लोगों के मन में अभी भी ताजा थी । अत: लखनऊ में ब्रिटिश राज के ढहने के समाचार पर लोगों ने नवाब के युवा पुत्र बिरजिस कद्र को अपना नेता घोषित कर दिया था।

प्रश्न 2. 1857 के घटनाक्रम को निर्धारित करने में धार्मिक विश्वासों की किस हद तक भूमिका थी ?

अथवा

1857 के विद्रोह के धार्मिक कारणों की विवेचना कीजिए।
उत्तर : (i) ईसाई पादरी भारतवासियों को लालच देकर उन्हें ईसाई बना रहे थे। इस कारण भारतीय अंग्रेजों के विरुद्ध हो गए।
(ii) विलियम बेंटिंक ने अनेक सामाजिक सुधार किए थे। उसने सती-प्रथा और बाल-विवाह पर रोक लगा दी। हिन्दुओं ने इन बातों को अपने धर्म के विरुद्ध समझा ।
(iii) अंग्रेजी शिक्षा के प्रसार के कारण भारतवासियों में असंतोष फैल गया। उन्हें विश्वास हो गया कि अंग्रेज उन्हें अवश्य ही ईसाई बनाना चाहते हैं।
(iv) ईसाई प्रचारक अपने धर्म का प्रचार करने के साथ हिंदू धर्म के ग्रंथों की निंदा करते थे। इस बात से भारतवासी भड़क उठे।
(v) 1856 ई. में एक ऐसा सैनिक कानून पास किया गया जिसके अनुसार सैनिकों को लड़ने के लिए समुद्र पार भेजा जा सकता था परंतु हिंदू सैनिक समुद्र पार जाना अपने धर्म के विरुद्ध समझते थे।
(vi) 1857 ई. में सैनिकों को नए कारतूस प्रयोग करने के लिए दिए गए। इन कारतूसों पर गाय या सूअर की चर्बी लगी हुई थी। इसलिए भारतीय सैनिकों में असंतोष इस सीमा तक बढ़ गया कि वे विद्रोह करने पर उतर आए।

प्रश्न 3. विद्रोहियों के बीच एकता स्थापित करने के लिए क्या तरीके अपनाए गए ?
उत्तर : विद्रोहियों के बीच एकता स्थापित करने के लिए विभिन्न तरीके अपनाए गए। विद्रोहियों द्वारा जिस प्रकार की घोषणाएँ की गईं उनमें किसी प्रकार के जाति और धर्म का भेदभाव नहीं किया गया था और समाज के सभी वर्गों का आह्वान किया गया था बहुत सारी घोषणाएँ मुस्लिम राजकुमारों या नवाबों की तरफ से या उनके नाम पर जारी की गई थीं लेकिन उन घोषणाओं में भी हिन्दुओं की भावनाओं का ख्याल रखा जाता था। यह विद्रोह एक ऐसे युद्ध के रूप में था जिसमें हिन्दुओं और मुसलमानों दोनों का नफा नुकसान बराबर था। इश्तहारों में अंग्रेजों के शासन से पहले के हिन्दू-मुस्लिम शासकों के अतीत का उदाहरण दिया जाता था और मुगल साम्राज्य के अन्तर्गत विभिन्न समुदायों के सहअस्तित्व का गौरवगान किया जाता था। बहादुरशाह के नाम से जारी की गई घोषणा में मुहम्मद और महावीर, दोनों की दुहाई देते हुए जनता से इस लड़ाई में पूरे तन-मन से शरीक होने का आह्वान किया गया था। अंग्रेजों ने हिन्दू और मुसलमानों के बीच खाई पैदा करने की पूरी कोशिश की परंतु इसमें वे रत्ती भर भी सफल नहीं हो सके। जनता उनकी चाल को अच्छी तरह समझ चुकी थी। अंग्रेज शासन ने दिसम्बर 1857 में पश्चिमी उत्तर प्रदेश स्थित बरेली में हिन्दुओं को मुसलमानों के खिलाफ भड़काने के लिए 50 ,000 रुपये खर्च किए, लेकिन वे अपनी इस कोशिश में पूरी तरह से विफल रहे।

प्रश्न 4. अंग्रेजों ने विद्रोह को कुचलने के लिए क्या कदम उठाए ?
उत्तर : अंग्रेजों ने विद्रोह को कुचलने के लिए निम्न कदम उठाए :
(i) उत्तर भारत को दोबारा जीतने के लिए टुकड़ियों को रवाना करने से पहले अंग्रेजों ने उपद्रव शांत करने के लिए फौजियों की आसानी के लिए कई कानून पारित कर दिए थे।
(ii) मई और जून 1857 में पास किए गए कई कानूनों के द्वारा न केवल समूचे उत्तर भारत में मार्शल लॉ लागू कर दिया गया बल्कि फौजी अफसरों और यहाँ तक कि आम अंग्रेजों को भी ऐसे हिंदुस्तानियों पर मुकदमा चलाने और उनको सजा देने का अधिकार दे दिया गया जिन पर विद्रोह में शामिल होने का शक था।
(iii) कानून और मुकदमे की सामान्य प्रक्रिया रद्द कर दी गई थी और यह स्पष्ट कर दिया गया था कि विद्रोह की केवल एक ही सजा हो सकती है-सजा-ए-मौत।
(iv) इन नए विशेष कानूनों और ब्रिटेन से मँगाई गई नयी टुकड़ियों से लैस अंग्रेज सरकार ने विद्रोह को कुचलने का काम शुरू कर दिया। विद्रोहियों की तरह वे भी दिल्ली के सांकेतिक महत्त्व को बखूबी समझते थे। लिहाजा, उन्होंने दोतरफा हमला बोल दिया। एक तरफ कलकत्ते (कोलकाता) से, दूसरी तरफ पंजाब से दिल्ली की तरफ कूच हुआ हालांकि पंजाब कमोबेश शांत था।
(v) दिल्ली को कब्जे में लेने की अंग्रेजों की कोशिश जून 1857 में बड़े पैमाने पर शुरू हुई लेकिन यह मुहिम सितंबर के आखिर में जाकर पूरी हो पाई। दोनों तरफ से जमकर हमले किए गए और दोनों पक्षों को भारी नुकसान उठाना पड़ा। इसकी एक वजह यह थी कि पूरे उत्तर भारत के विद्रोही राजधानी को बचाने के लिए दिल्ली में आ जमे थे।

प्रश्न 5. 1857 पर बनी कोई फिल्म देखिए और लिखिए कि उसमें विद्रोह को किस तरह दर्शाया गया है। उसमें अंग्रेजों, विद्रोहियों और अंग्रेजों के भारतीय वफादारों को किस तरह दिखाया गया है ? फिल्म किसानों, नगरवासियों, आदिवासियों, जमींदारों और ताल्लुकदारों के बारे में क्या कहती है ? फिल्म किस तरह की प्रतिक्रिया को जन्म देना चाहती है ?
उत्तर : 1857 पर बनी मनोज कुमार की फिल्म क्रांति देखी जा सकती है। इसके बारे में अशोक मेहता या विनायक दामोदर अथवा इतिहासकार आहलूवालिया की लिखी पुस्तकें भी पढ़ी जा सकती हैं। भारतीय फिल्मों में “मंगल पांडे ” जो पिछले वर्ष आमीर खान के नायक की भूमिका के कारण अधिक चर्चित रही. को भी देखा जा सकता है। उस फिल्म में भारतीय सिपाहियों की दिनचर्या, उनमें अंसतोष, अपने धर्म के प्रति जागृति तथा तथाकथित निम्न जाति के लोगों को लोटा न देने की प्रवृत्ति, सामान्य अंग्रेज अधिकारियों और भारतीयों में परस्पर लगाव और विद्रोह के साथ व्यापक शत्रुता के साथ-साथ किसानों की दीनदशा, गरीबी नगरवासियों, आदिवासियों पर अधिकारियों और जमींदारों, ताल्लुकदारों द्वारा किए जाने वाले अत्याचारों को दिखाती है। 1857 के गदर पर बनी अनेक फिल्में लोगों में राष्ट्रभक्ति, ब्रिटिश शासन के प्रति घृणा और अंग्रेजों द्वारा विद्रोहियों को बड़ी क्रूरता से कुचलना, सरेआम विद्रोहियों को फाँसी लटकाना या तोप के मुँह के साथ बाँधकर जीवंत लोगों को उड़ा देना, लोगों के दिल और दिमाग पर ब्रिटिश सत्ता का भय और आतंक पैदा करना विशेषकर दिखाया गया है।

You cannot copy content of this page
Scroll to Top

Live Quiz : बंधुत्व जाति और वर्ग | 04:00 pm