शासक और इतिवृत > मुग़ल शासक और साम्राज्य

स्त्रोत - क्रोनिकल्स (इतिवृत/इतिहास)

  • नियुक्त शासक होने की दृष्टि के प्रसार प्रचार का तरीका
  • दरबारी इतिहासकारों को विवरण लेखन का कार्य सौंपा गया
  • बादशाह के समय की घटनाओं का लेखा जोखा दिया गया
  • शासन में मदद के लिए ढेरों जानकारियां इक्कट्ठा की गयीं
  • घटनाओं का अनवरत कालानुक्रमिक विवरण
  • अपरिहार्य स्त्रोत
  • तथ्यात्मक सूचनाओं का खजाना
  • मूल-पाठों का उद्देश्य – उन आशयों को संप्रेषित करना था जिन्हें मुग़ल शासक अपने क्षेत्र में लागू करना चाहते थे
  • इनसे झलक मिलती है – कैसे शाही विचारधाराएँ रची और प्रचारित की जाती थीं.

मुग़ल शासक और साम्राज्य

  • मुग़ल और तैमूर नाम
  • पहला तैमूर शासक बाबर चंगेज खान का सम्बन्धी था
  • 16वीं शताब्दी में यूरोपियों ने शासकों का वर्णन करने के लिए मुग़ल शब्द का प्रयोग किया  | 
  • रडयार्ड किपलिंग की पुस्तक में युवा नायक मोगली

ज़हीरुद्दीन मुहम्मद उर्फ बाबर की उपलब्धियां

  • महज़ 12 वर्ष की आयु में फ़रगना घाटी का शासक बन गया।
  • बाबर कुषाणों के बाद ऐसा पहला शासक हुआ जिसने काबुल एवं कंधार को अपने पूर्ण नियंत्रण में रख सका।
  • भारत में अफ़ग़ान एवं राजपूत शक्ति को समाप्त कर ‘मुगल साम्राज्य’ की स्थापना की, जो लगभग 330 सालों तक चलता रहा।
  • हिंदुस्तान में पहली बार तुलगमा युद्ध नीति का प्रयोग बाबर ने किया।
  • हिंदुस्तान में पहली बार तोपखाने का प्रयोग बाबर ने किया
  • सड़कों की माप के लिए बाबर ने ‘गज़-ए-बाबरी’ के प्रयोग का शुभारम्भ किया।

नसीरुद्दीन हुमायूँ (1530-40, 1555-56)

हुमायूँ एक मुगल शासक था। प्रथम मुग़ल सम्राट बाबर का पुत्र नसीरुद्दीन हुमायूँ था। यद्यपि उन के पास साम्राज्य बहुत साल तक नही रहा, पर मुग़ल साम्राज्य की नींव में हुमायूँ का योगदान है।

  • जन्म की तारीख और समय: 6 मार्च 1508, काबुल, अफ़ग़ानिस्तान
  • मृत्यु की जगह और तारीख: 27 जनवरी 1556, दिल्ली
  • दफ़नाने की जगह: हुमायूँ का मकबरा, नई दिल्ली
  • बच्चे: अकबर, बख्शी बानो बेगम, ज़्यादा
  • पत्नी: माह चुचक बेगम (विवा. 1546), हमीदा बानो बेगम (विवा. 1541–1556), बेगा बेगम (विवा. 1527–1556)
  • माता-पिता: बाबर, महम बेगम
  • भाई: कामरान मिर्ज़ा, गुलबदन बेगम, ज़्यादा

जलालुद्दीन अकबर (1556-1605)

  • साम्राज्य का विस्तार, सुदृढीकरण किया
  • हिन्दुकुश पर्वत तक सीमाओं का विस्तार किया
  • सफाविओं और उज्बेकों की विस्तारवादी योजनाओं पर लगाम लगाया

जहाँगीर (1605-27)

  • शाह जहाँ पाँचवे मुग़ल शहंशाह था। शाह जहाँ अपनी न्यायप्रियता और वैभवविलास के कारण अपने काल में बड़े लोकप्रिय रहे। किन्तु इतिहास में उनका नाम केवल इस कारण नहीं लिया जाता। शाहजहाँ का नाम एक ऐसे आशिक के तौर पर लिया जाता है जिसने अपनी बेग़म मुमताज़ बेगम के लिए विश्व की सबसे ख़ूबसूरत इमारत ताज महल बनाने का यत्न किया।
  • जन्म की तारीख और समय: 5 जनवरी 1592, लाहौर, पाकिस्तान
  • मृत्यु की जगह और तारीख: 22 जनवरी 1666, आगरा फोर्ट, आगरा
  • दफ़नाने की जगह: ताज महल, आगरा
  • पत्नी: इज़्ज़-उन-निस्सा (विवा. 1617–1666), ज़्यादा
    बच्चे: औरंगज़ेब, जहाँनारा बेग़म, दारा सिकोह, ज़्यादा
  • दादा या नाना: अकबर, मरियम उज़-ज़मानी, मारवाड़ के उदय सिंह,

शाहजहाँ (1628-58)

  • शाह जहाँ पाँचवे मुग़ल शहंशाह था। शाह जहाँ अपनी न्यायप्रियता और वैभवविलास के कारण अपने काल में बड़े लोकप्रिय रहे। किन्तु इतिहास में उनका नाम केवल इस कारण नहीं लिया जाता। शाहजहाँ का नाम एक ऐसे आशिक के तौर पर लिया जाता है जिसने अपनी बेग़म मुमताज़ बेगम के लिए विश्व की सबसे ख़ूबसूरत इमारत ताज महल बनाने का यत्न किया।
  • जन्म की तारीख और समय: 5 जनवरी 1592, लाहौर, पाकिस्तान
  • मृत्यु की जगह और तारीख: 22 जनवरी 1666, आगरा फोर्ट, आगरा
  • दफ़नाने की जगह: ताज महल, आगरा
  • पत्नी: इज़्ज़-उन-निस्सा (विवा. 1617–1666), ज़्यादा
  • बच्चे: औरंगज़ेब, जहाँनारा बेग़म, दारा सिकोह, ज़्यादा
    दादा या नाना: अकबर, मरियम उज़-ज़मानी, मारवाड़ के उदय सिंह,

औरंगजेब (1658-1707)

  • मुहिउद्दीन मोहम्मद, जिन्हें आम तौर पर औरंगज़ेब या आलमगीर के नाम से जाना जाता था, भारत पर राज करने वाला छठा मुग़ल शासक था। उसका शासन 1658 से लेकर 1707 में उनकी मृत्यु तक चला। औरंगज़ेब ने भारतीय उपमहाद्वीप पर आधी सदी के लगभग समय तक राज किया। वो अकबर के बाद सबसे अधिक समय तक शासन करने वाला मुग़ल शासक था।
  • जन्म की तारीख और समय: 3 नवंबर 1618, दाहोद
  • मृत्यु की जगह और तारीख: 3 मार्च 1707, भिंगर, अहमदनगर
  • दफ़नाने की जगह: टॉम्ब ऑफ़ मुघल एम्पेरोर औरंगज़ेब आलमगीर, खुल्दाबाद
  • बच्चे: बहादुर शाह प्रथम, मुहम्मद अकबर, ज़्यादा
  • पत्नी: नवाब बाई (विवा. 1638–1691), ज़्यादा
  • किताबें: फ़तवा-ए-आलमगीरी
  • माता-पिता: शाह जहाँ, मुमताज़ महल

औरंगजेब की मृत्यु के बाद

  • 1707 में औरंगजेब की मृत्यु हुई
  • राजनीतिक शक्तियां घटने लगीं
  • राजधानी नगरों से नियंत्रित विशाल साम्राज्य की जगह क्षेत्रीय शक्तियों ने अधिक स्वायतत्ता अर्जित की
  • अंतिम वंशज बहादुर शाह जफ़र 1857

Class 12th History Chapter 11 Important Question Answer 1 Marks विद्रोही और राज(1857 का आंदोलन और उसके व्याख्यान)

प्रश्न 1.1857 की क्रांति के दो तात्कालिक कारण बताइए।

उत्तर : (i) अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कंपनी की दोषपूर्ण और शोषणपूर्ण आर्थिक नीतियाँ। (ii) चर्बी वाले कारतूसों को प्रयोग करने से सिपाहियों द्वारा इन्कार।

प्रश्न 2. 1857 के विद्रोह की समाप्ति पर अंग्रेजों के प्रतिशोध और सबक सिखाने की चाह कैसे प्रतिबिंबित होती है ?

उत्तर : (i) अंग्रेजों ने ‘फूट डालो एवं राज करो’ की नीति को अपनाया।
(ii) अंग्रेज भारतीयों को घृणा के दृष्टिकोण से देखने लगे।

प्रश्न 3. 1857 की क्रांति (विद्रोह) के कोई दो सामाजिक कारण बताओ।
उत्तर : 1. रूढ़िवादी भारतीयों को अंग्रेजों द्वारा सती प्रथा को समाप्त करने (1829) तथा विधवा- विवाह को वैधता प्रदान करने की नीति पर आपत्ति थी।
2.भारतीयों को लगता था कि अंग्रेज़ पश्चिमी विज्ञान तथा पश्चिमी (अंग्रेज़ी) शिक्षा के माध्यम से भारत का पश्चिमीकरण कर रहे हैं।

प्रश्न 4. 1857 की क्रांति के दो महत्त्वपूर्ण परिणाम बताइए
उत्तर : (i) 1857 ई. की क्रांति में हिन्दू-मुसलमान कंधे से कंधा मिलाकर अंग्रेजों के विरुद्ध लड़े।
(ii) 1857 ई. की क्रांति ने कंपनी शासन का अंत करके कुछ वर्षों बाद स्वराज्य-प्राप्ति के लिए प्रयास करने की पृष्ठभूमि तैयार की।

प्रश्न 4.1857 के विद्रोह के ‘जन विद्रोह’ होने के दो कारण बताइए।
उत्तर: (i) भारतीय औपनिवेशिक शासन, दुष्चरित्र, उनकी कूटनीतियों के कारण असन्तुष्ट थे।
(ii) अंग्रेजों के आर्थिक शोषण से भारतीय जनता तंग आ गई थी। इन्होंने भारत के परम्परागत ढाँचे को नष्ट कर दिया था जिसके फलस्वरूप किसान, दस्तकार, हस्तशिल्पी, जमींदार तथा देशी राजा आदि को निर्धनता की आग में झोंक दिया गया था।

प्रश्न 6. 1857 ई. के विद्रोह के कोई दो राजनीतिक कारण बताएँ।
उत्तर : (i) ईस्ट इंडिया कंपनी द्वारा अधिक -से-अधिक भारतीय रियासतों को ब्रिटिश साम्राज्य में सम्मिलित करने की नीति।
(ii) अंग्रेजों द्वारा बहादुर शाह जफर द्वितीय के साथ किया जाने वाला अपमानजनक व्यवहार।

प्रश्न 7. 1857 ई. के विद्रोह के दो प्रमुख कारण क्या थे ?
उत्तर : (i) अंग्रेजों ने लगभग संपूर्ण भारत पर अधिकार कर लिया था।
(ii) अंग्रेजों द्वारा भारतीयों के किए जा रहे लगातार शोषण के कारण उनमें व्यापक रोष फैला।

प्रश्न 8.1857 के विद्रोह के दौरान बहादुरशाह द्वितीय को भारत का सम्राट क्यों घोषित किया गया था?
उत्तर-1857 के विद्रोह के पश्चात् बहादुरशाह द्वितीय को सम्राट घोषित करने का कारण यह था कि बहादुरशाह द्वितीय मुगल वंश का अंतिम शासक था। उसके बादशाहत के सभी अधिकार छीनने के लिए अंग्रेजों ने घोषणा कर दी थी। विद्रोह में भाग लेने के लिए वह एक प्रतिष्ठित और सही व्यक्ति था।

प्रश्न 9. 1857 के विद्रोह में अवध के तालुकदार क्यों शामिल हुए ?
उत्तर : 1857 के विद्रोह में अवध के तालुकदार के शामिल होने के कारण : 1857 के विद्रोह में अवध के तालुकदार इसलिए शामिल हुए कि लार्ड डलहौजी ने 1857 में अवध का अधिग्रहण कर लिया था। इसके साथ ही वे अंग्रेजों की कूटनीति से बहुत भयभीत थे।

प्रश्न 10. 1857 के विद्रोह की असफलता के दो कारण बताइए।
उत्तर-1. क्रांतिकारियों में संगठन और आपसी तालमेल का अभाव था।
2.सभी क्रांतिकारियों का एक सामान्य उद्देश्य नहीं था। कोई तो अपनी पेंशन बंद होने के कारण लड़ रहा था और कोई अपना राज्य छिन जाने के कारण लड़ रहा था।

प्रश्न 11. 1857 की क्रांति के तीन सैनिक कारण बताओ।
उत्तर : 1. 1840 के दशक में अंग्रेज अफसरों में श्रेष्ठता का भाव पैदा होने लगा और वे सिपाहियों को कमतर नस्ल का मानने लगे। परिणामस्वरूप उनके प्रति गाली-गलौज और शारीरिक हिंसा सामान्य बात बन गई।
2.चिकनाईयुक्त कारतूसों के प्रचलन से सैनिकों को गहरी चोट पहुँची थी।
3.सिपाहियों का ग्रामीण जनता से गहरा संबंध था। अतः विद्रोह के समय ग्रामीण जनता ने सिपाहियों का साथ दिया।

प्रश्न 12. 1857 की क्रांति को प्रारंभ करने के लिए अंग्रेजों के द्वारा समाज सुधार के कार्य कहाँ तक उत्तरदायी थे ?
उत्तर : 1. बाल विवाह, सती प्रथा, पर्दा प्रथा पर रोक, विधवाओं का फिर से विवाह करवाना, लड़कियों को शिक्षित करना आदि कुछ ऐसे कार्य थे, जिनसे कट्टरपंथी हिन्दू अंग्रेजों के विरुद्ध हो गये थे।
2.पाश्चात्य शिक्षा से मुल्ला-मौलवी और ब्राह्मण समझते थे कि उनकी पाठशालाओं और मदरसों को तोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। साथ ही उनकी धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है।

प्रश्न 13. 1857 ई. की क्रांति एक सैनिक विद्रोह था. अथवा स्वतंत्रता संग्राम (राष्ट्रीय संघर्ष) ? अपने उत्तर की पुष्टि दो तर्क देकर कीजिए।
उत्तर : 1857 ई. की क्रांति स्पष्ट रूप से एक स्वतंत्रता संघर्ष था।
तर्क : 1. इसमें सैनिकों की अपेक्षा गैर-सैनिकों ने अधिक भाग लिया।
2.इस क्रांति में हर धर्म, जाति और समूह के लोग अंग्रेजी शासन के विरुद्ध लड़े थे।

प्रश्न 14. 1857 के विद्रोह के कोई दो धार्मिक कारण बताइए।
उत्तर : 1. भारतीयों को लगता था कि वे जिन परंपराओं का आदर करते आ रहे थे अथवा जिन बातों को पवित्र मानते आ रहे थे, उन्हें समाप्त किया जा रहा है।
2.ईसाई प्रचारकों की गतिविधियों ने उनकी सोच को और भी पक्का बना दिया।
अतः अब वे अंग्रेजी शासन से मुक्ति चाहते थे।

प्रश्न 15. चर्बी के कारतूस की व्याख्या कीजिए।
उत्तर : कारतूसों में लगा चिकना पदार्थ सूअर और गाय की चर्बी थी। नयी इनफील्ड बंदूकों में गोली भरने से पूर्व कारतूस को दाँत से छीलना पड़ता था। हिन्दू और मुसलमान दोनों ही क्रमश: गाय और सूअर की चर्बी से अपने-अपने धर्म पर आघात समझते थे। अतः उनका भड़कना स्वाभाविक था।

प्रश्न 16. विलय नीति की विद्रोह उभारने में क्या भूमिका थी ?
उत्तर : देशी राज्यों के अंग्रेजी राज्य में विलय के कारण उनकी सेना को भंग कर दिया गया। 1856 ई. में अवध के विलीनीकरण के कारण 60,000 सैनिकों को नौकरी से हटा दिया गया। अतः ऐसी स्थिति में बेकार शासक विद्रोह फैलाने और लोगों को भड़काने में भरपूर सहायता कर रहे थे।

प्रश्न 17. 1857 के विद्रोह में पंडितों और मौलवियों ने विद्रोह का क्यों समर्थन किया ? कोई सा एक कारण लिखो।
उत्तर : 1857 के विद्रोह में पंडितों और मौलवियों ने विद्रोह का समर्थन इसलिए किया क्योंकि ईसाई मिशनरियों की गतिविधियों में काफी तीव्रता आ गई थी। इसलिए उन्हें अपने धर्म का अस्तित्व खतरे में लगा।

प्रश्न 18. 1857 के विद्रोह की कोई एक प्रमुख कमजोरी का उल्लेख कीजिए।
उत्तर : 1857 का विद्रोह संपूर्ण भारत में नहीं फैला। यह विद्रोह उत्तरी तथा मध्य भारत के कुछ प्रांतों तक ही सीमित था। अनेक भारतीय शासकों ने अंग्रेजों को अपना समर्थन दिया। यदि ऐसा न होता तो इस विद्रोह का परिणाम कुछ और ही होता।

प्रश्न 19. लैप्स के सिद्धांत से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर : लैप्स के सिद्धांत के अधीन जब देशी आश्रित राज्य के शासक की बिना उत्तराधिकारी के मृत्यु हो जाती थी तो उसके राज्य को अंग्रेजी साम्राज्य में मिला लिया जाता था। ऐसे में उसके गोद लिए पुत्र को उसका उत्तराधिकारी नहीं माना जाता था।

प्रश्न 20. 1857 ई. में विद्रोह करने वाला प्रथम सैनिक कौन था ? उसे फाँसी कब दी गई थी ?
उत्तर : (i) 1857 ई. में विद्रोह करने वाला प्रथम सैनिक मंगल पांडे था।
(ii) उसे 8 अप्रैल, 1857 ई. को फाँसी दी गई थी।

प्रश्न 21. प्रथम स्वतंत्रता संग्राम का भारतीय इतिहास में क्या महत्त्व है ?
उत्तर : 1. इस संग्राम में भारतीय जनता तथा सैनिकों ने मिलकर शत्रु का सामना किया था। 2. इस संग्राम में सब जातियों ने मिलकर स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए संघर्ष किया था।

प्रश्न 22. सन् 1801 में अंग्रेजों द्वारा अवध पर अधिग्रहण की नीति के प्रावधानों को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर : (i) 1801 ई. में अवध पर सहायक संधि थोप दी गई। इस संधि की शर्त के अनुसार नवाब को अपनी सेना खत्म करने के लिए कहा गया।
(ii) नवाब को अपनी रियासत में अंग्रेज टुकड़ियों के रहने की इजाजत देनी पड़ी।
(iii) नवाब को रियासत के दरबार में उपस्थित ब्रिटिश रेजीडेंट की सलाह पर काम करने की शर्त माननी पड़ी।
(iv) अंग्रेज रियासत की आंतरिक तथा बाहरी चुनौतियों से रक्षा करेंगे।
(v) नवाब न तो किसी और शासक के साथ संधि करेगा और न ही अंग्रेजों की इजाजत के बिना किसी युद्ध में हिस्सा लेगा।

प्रश्न 23. अवध का विद्रोह इतना अधिक व्यापक क्यों था?
उत्तर : 1. अवध का नवाब वाजिद अली शाह बहुत ही लोकप्रिय था। उसे हटा दिए जाने से लोगों में असंतोष था।
2.अंग्रेज़ों की भारतीय सेना में अधिकतर सैनिक अवध से ही थे। वे अवध की घटनाओं से दु:खी थे।
3.अवध को अंग्रेज़ी राज्य में मिला लिये जाने से वहाँ के सभी दरबारी तथा प्रशासनिक कर्मचारी बेकार हो गए। उनमें अंग्रेजों के विरुद्ध भारी रोष फैला हुआ था।

प्रश्न 24. कुंवर सिंह कौन था ? उनका संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर : कुँवर सिंह आरा (जगदीशपुर), बिहार में एक स्थानीय जमींदार थे। वह बड़े जमींदार होने के कारण लोगों में राजा के नाम से विख्यात थे। कुंवर सिंह की उम्र बहुत थी तो भी उसने आजमगढ़ तथा बनारस में अंग्रेजी फौज को पराजित किया। उसने छापामार युद्ध पद्धति से अंग्रेजों के दाँत खट्टे कर दिये। उसने ब्रिटिश सेनापति मार्कर को पराजित कर गंगा पार अपने प्रमुख किले जगदीशपुर पहुँचने में सफलता प्राप्त की । अप्रैल 1858 में उनकी मृत्यु हो गई।

प्रश्न 25. 1857 के विद्रोह से पूर्व कई अफवाहों तथा भविष्यवाणियों ने भारतीयों में बेचैनी उत्पन्न की। इनमें से किन्हीं दो अफवाहों अथवा भविष्यवाणियों का उल्लेख. कीजिए।
उत्तर : 1. यह अफवाह जोरों पर थी कि अंग्रेजों ने हिंदुओ तथा मुसलमानों का धर्म भ्रष्ट करने के लिए बाजार में मिलने वाले आर्ट में गाय और सूअर की हड्डियों का चूरा मिलवा दिया है। 2. यह भविष्यवाणी की गई कि प्लासी की लड़ाई के 100 साल पूरे होते ही 23 जून, 1857 को अंग्रेजी राज का अंत हो जायेगा।

प्रश्न 26. मंगल पांडे कौन था ? उसका संक्षिप्त परिचय दीजिए।
उत्तर : मंगल पांडे (Mangal Pandey) : भारतीय इतिहास में प्राय: मंगल पांडे को 1857 के विद्रोह का प्रथम जनक, महान देशभक्त तथा क्रांतिकारी माना जाता है। वह बैरकपुर (बंगाल) की 34वीं (सैन्य) बटालियन का एक साधारण सिपाही ही था। उसने अपनी छावनी में चर्बी वाले कारतूस की बात पहुँचाई, तथा अंग्रेज अधिकारियों के धर्म विरोधी आदेश की अवहेलना की ) सारजेन्ट मेजर हगसन के आदेशानुसार जब किसी भी भारतीय सैनिक ने पांडे को कैद नहीं किया तो उसने हगसन तथा लैफ्टिनैंट बाम को उसके घोड़े सहित ढेर कर दिया। कालान्तर में उसे कैद कर लिया गया तथा 8 अप्रैल, 1857 को फाँसी दे दी गई। उसकी वीरता एवं कुर्बानी ने कालान्तर में मेरठ सैनिक छावनी के विप्लव की भूमिका तैयार की।

प्रश्न 27. 1857 के विद्रोह में साहूकार तथा धनी लोग विद्रोहियों के क्रोध का शिकार क्यों बने ?
उत्तर : विद्रोही साहूकारों तथा धनी लोगों को किसानों का उत्पीड़क तथा अंग्रेजों के. पिठू मानते थे। इसलिए ये लोग विद्रोहियों का शिकार बने। अधिकतर स्थानों पर उनके घर-बार लूटकर ध्वस्त कर दिए गए।

प्रश्न 28. 1857 के विद्रोह का महत्त्व समझाइए। दो बिंदुओं का उल्लेख कीजिए।
उत्तर : (i) भारत में ईस्ट इंडिया कंपनी के शासन का अंत हो गया। (if) भारतीय सेना का पुनर्गठन किया गया।

प्रश्न 29. 1857 के प्रारंभ में उत्तरी भारत में फैलाई गई किन्हीं दो अफवाहों के विषय में बताइए।
उत्तर : (i) चर्बी वाले कारतूस। (ii) ईसाई मिशनरियों की गतिविधियाँ।

प्रश्न 30. सिपाही 1857 में कब और क्यों लाल किले के दरवाजे पर बादशाह बहादुर शाह से मिलने आए ?
उत्तर : मेरठ छावनी से सिपाहियों का जत्था दिल्ली या लाल किले फाटक पर 11 मई, 1857 को पहुँचा । वे तत्कालीन मुगल सम्राट जिसका अभी भी देश के अधिकांश लोगों में सम्मान था, से आशीर्वाद प्राप्त करके उसे (विद्रोह) को वैधता प्रदान कराना चाहते थे। किले में घुसे इन सिपाहियों की माँग थी कि बादशाह उन्हें अपना आशीर्वाद दे! विवश सम्राट के पास उनकी माँग मानने के अतिरिक्त कोई चारा न था। इस तरह इस विद्रोह ने एक वैधता प्राप्त की ली क्योंकि अब इसे मुगल बादशाह के नाम पर चलाया जा सकता था।

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