3 अंकीय प्रश्न उत्तर – औंपनिवेशक शहर ( नगरीकरण , नगर – योजना , स्थापत्य ) – Class12th History Chapter 12

Index

1. ईंट मनके और अस्थियाँ

1. आरंभ 2. निर्वाह के तरीके 3. मोहनजोदड़ो 4. सामाजिक विभिन्नताओं का अवलोकन 5. शिल्प उत्पादन के विषय में जानकारी 6. माल प्राप्त करने सम्बन्धी नीतियाँ 7. मुहरें लिपि तथा बाट 8. प्राचीन सभ्यता 9. सभ्यता का अंत 10. हड़प्पा सभ्यता की खोज 11. अतीत को जोड़कर पूरा करने की समस्याएं मानचित्र बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर 1 अंकीय प्रश्न उत्तर 2 अंकीय प्रश्न उत्तर

2. राजा किसान और नगर

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

3. बंधुत्व जाति और वर्ग

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

4. विचारक विश्वास और इमारतें

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर 1 बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर 2

6. भक्ति सूफी और परम्पराएँ

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

7. एक साम्राज्य की राजधानी विजयनगर

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

8. उपनिवेशवाद और देहात

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

10. उपनिवेशवाद और देहात

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

11. विद्रोह और राज

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

13. महात्मा गाँधी और आन्दोलन

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

15. संविधान का निर्माण

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

Class 12th History Chapter 12 Important Question Answer 3 Marksऔपनिवेशक शहर(नगरीकरण, नगर-योजना, स्थापत्य)

प्रश्न 1. भारत के शहरी केन्द्रों में अठारहवीं शताब्दी में व्यापार तंत्र में आए परिवर्तनों का वर्णन कीजिए।
उत्तर : अठारहवी शताब्दी में व्यापार तंत्र में आए परिवर्तनों का वर्णन निम्न है :(i) कई यूरोपीय कम्पनियों ने विभिन्न स्थानों पर जैसे पणजी, मसूलीपटनम और पांडिचेरी में व्यापार शुरू किए।
(ii) जैसे-जैसे व्यापार बढ़ा, इन व्यापार तंत्रों के आस-पास का शहरीकरण हुआ।
(iii) जब अंग्रेजों ने बंगाल को अपने कब्जे में किया तब ईस्ट इंडिया का व्यापार बढ़ा। मद्रास, कलकत्ता और बंबई तेजी से आर्थिक राजधानी के रूप में विकसित हुईं।
(iv) नए स्थान और इमारतें अस्तिव में आए और बड़ी संख्या में लोग इन शहरों की ओर रोजगार के लिए आने लगे।
(v) अठारहवीं सदी के मध्य में सूरत ओर ढाका जैसे व्यापारिक केन्द्रों का पतन हुआ क्योंकि कई व्यापारिक केन्द्र नई जगहों पर स्थापित हो गए।

प्रश्न 2. बम्बई में सार्वजनिक भवनों के निर्माण में अंग्रेजों द्वारा प्रयुक्त की गई कोई दो स्थापत्य शैलियों का वर्णन करें। प्रत्येक का एक उदाहरण दें।
उत्तर : बंबई में सार्वजनिक भवनों के लिए मुख्य रूप से तीन स्थापत्य शैलियों का प्रयोग किया गया। इनमें से दो मुख्य शैलियाँ निम्नलिखित थीं
1.नवशास्त्रीय या नियोक्लासिकल शैली : बड़े-बड़े स्तंभों के पीछे रेखागणितीय संरचनाओं का निर्माण इस शैली की विशेषता थी। यह शैली मूल रूप से प्राचीन रोम की भवन-निर्माण शैली से निकली थी। भारत में ब्रिटिश साम्राज्य के लिए उसे विशेष रूप से अनुकूल माना जाता था। 1833 में बंबई का टाउन हॉल इसी शैली के अनुसार बनाया गया था। 1860 के दशक में बनाई गई बहुत-सी व्यावसायिक इमारतों के समूह को एल्फिसटन सर्कल कहा जाता था। बाद में इसका नाम बदलकर हॉर्निमान सर्कल रख दिया गया था।

  1. नव-गॉथिक शैली : (1) नव-गॉथिक शेली की मुख्य विशेषताएँ ऊँची उठी हुई छतें, नोकदार मेहराबें और बारीक साज-सज्जा थी। (ii) इस शैली का जन्म विशेषकर मध्यकालीन गिरजा से हुआ था। इस शैली को इंग्लैंड में उन्नीसवीं शताब्दी के मध्य में दोबारा अपनाया गया। यह वही समय था जब बंबई में सरकार आधारभूत ढाँचे का निर्माण कर रही थी। इसके लिए यही शैली चुनी गई। सचिवालय, बंबई विश्वविद्यालय और उच्च न्यायालय जैसी कई शानदार इमारतें इसी शैली में बनाई गईं।

प्रश्न 3. “ब्रिटिश सरकार द्वारा मद्रास शहर का सजग विकास उसकी नस्ली श्रेष्ठता को प्रतिबिंबित करता है।” उचित तर्कों द्वारा इस कथन को सत्यापित करें।

अथवा

“ब्रिटिश सरकार ने अपनी जातीय श्रेष्ठता जताने के लिए सोच-समझकर मद्रास शहर का विकास किया।” उचित तर्क देकर इस कथन की पुष्टि कीजिए।
उत्तर : मद्रास शहर का विकास नि:संदेह अंग्रेजों की जातीय श्रेष्ठता को दर्शाता था।
(i) फोर्ट सेंट जॉर्ज (सेंट जॉर्ज किला) व्हाइट टाउन का केंद्र बन गया जहाँ अधिकतर यूरोपीय रहते थे। दीवारों और बुर्जों ने इसे एक विशेष प्रकार की घेरेबंदी प्रदान की।
(ii) किले में रहने का निर्णय रंग और धर्म के आधार पर किया जाता था।
(iii) कंपनी के लोगों को भारतीयों के साथ विवाह करने की अनुमति नहीं थी। यूरोपीय ईसाई होने के कारण डचों और पुर्तगालियों को वहाँ रहने की छूट थी।
(iv) प्रशासकीय और न्यायिक व्यवस्था भी गोरों के पक्ष में थी। संख्या की दृष्टि से कम होते हुए भी यूरोपीय लोग शासक थे।
(v) मद्रास का विकास वहाँ रहने वाले मुट्ठी भर गोरों की आवश्यकताओं और सुविधाओं को ध्यान में रखकर किया गया था।
(vi) ब्लैक टाउन का विकास किले के बाहर हुआ था। इस आबादी को भी सीधी पंक्तियों में बसाया गया था जो कि औपनिवेशिक शहरों की मुख्य विशेषता थी।

प्रश्न 4. लॉटरी कमेटी क्या थी ? इसके अधीन कलकत्ता के नगर-नियोजन के लिए क्या क्या पग उठाए गए ?
उत्तर : लॉर्ड वेलेजली के बाद नगर-नियोजन का काम सरकार की सहायता से लॉटरी कमेटी (1817) ने जारी रखा लॉटरी कमेटी का यह नाम इसलिए पड़ा क्योंकि यह कमेटी नगर सुधार के लिए पैसे की व्यवस्था जनता के बीच लॉटरी बेचकर करती थी।
लॉटरी कमेटी द्वारा नगर-नियोजन : लॉटरी कमेटी ने शहर का नया नक्शा बनवाया ताकि कलकत्ता को नया रूप दिया जा सके।
(ii) कमेटी की प्रमुख गतिविधियों में शहर के हिंदुस्तानी आबादी वाले हिस्से में सड़कें बनवाना और नदी किनारे से “अवैध कब्जे” हटाना शामिल था। 11
(iii) शहर के भारतीय हिस्से को साफ-सुथरा बनाने के लिए कमेटी ने बहुत-सी झोंपड़ियों को साफ कर दिया और गरीब मजदूरों को वहाँ से बाहर निकाल दिया। उन्हें कलकत्ता के बाहरी किनारे पर जगह दी गई।

प्रश्न 5. औपनिवेशिक शहर ब्रिटिश शासकों की वाणिज्यिक संस्कृति को कैसे प्रतिबिंबित करते थे ? व्याख्या कीजिए।
उत्तर : औपनिवेशिक शहर नए शासकों की वाणिज्यिक संस्कृति को दर्शाते थे। राजनीतिक सत्ता और संरक्षण भारतीय शासकों की बजाय ईस्ट इंडिया कम्पनी के व्यापारियों के हाथ में जाने लगा। इन नए शहरों में दुभाषिए, बिचौलिए, व्यापारी और आपूर्तिकर्ता के रूप में काम करने वाले भारतीयों का भी एक माल महत्त्वपूर्ण स्थान था। नदी या समुद्र के किनारे आर्थिक गतिविधियों से गोदियों और घाटियों का विकास हुआ। समुद्र किनारे गोदाम, वाणिज्यिक कार्यालय, जहाजरानी उद्योग के लिए बीमा एजेंसियाँ, यातायात डिपो तथा बैंकों की स्थापना होने लगी। कंपनी के मुख्य प्रशासनिक कार्यालय समुद्र तट से दूर बनाए गए। कलकत्ता में स्थित राइटर्स बिल्डिंग इसी तरह का एक कार्यालय था। यहाँ “राइटर्स” से अभिप्राय क्लर्कों से है। यह ब्रिटिश शासन में नौकरशाही के बढ़ते महत्त्व का संकेत था। किले की चारदीवारी के आस-पास यूरोपीय व्यापारियों और एजेंटों ने यूरोपीय शैली के भव्य मकान बना लिए थे। कुछ यूरोपियों ने शहर की सीमा से सटे उपशहरी इलाकों में बगीचा घर (Garden House) बना लिए थे। शासक वर्ग के लिए नस्ली विभेद पर आधारित क्लब, रेसकोर्स और रंगमंच भी बनाए गए।

प्रश्न 6. औपनिवेशिक शासन में हिल स्टेशनों की स्थापना क्यों की गई ?
उत्तर : हिल स्टेशनों की स्थापना के कारण :(i) ये हिल स्टेशन फौजियों को ठहराने, सीमा की देख-रेख करने और शत्रु पर आक्रमण करने के लिए महत्त्वपूर्ण स्थान थे।
(ii) हिल स्टेशन कई मायनों में लाभप्रद थे। यहाँ की जलवायु ठंडी और मृदु थी जो इंग्लैण्ड की जलवायु से साम्य रखती थी।
(iii) अंग्रेज गर्म मौसम को बीमारियों की जड़ मानते थे। इसलिए हिल स्टेशन उनके लिए महत्त्वपूर्ण माने जाते थे।
(iv) इन हिल स्टेशनों को सेनेटोरियम के रूप में भी विकसित किया गया था। सिपाहियों को यहाँ विश्राम करने और इलाज करने के लिए भेजा जाता था।
(v) हिल स्टेशन ऐसे अंग्रेजों और यूरोपियनों के लिए भी आदर्श स्थान थे जो अपने घर जैसी मिलती-जुलती बस्तियाँ बसाना चाहते थे। उनकी इमारतें यूरोपीय शैली की होती थीं।

प्रश्न 7. 19वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में औपनिवेशिक शहरों के स्वरूप में क्या बदलाव आया ?
उत्तर : 19वीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में औपनिवेशिक शहरों के स्वरूप में बदलाव :(i) 1857 के विद्रोह के पश्चात् अंग्रेज भारतीयों से आशंकित रहने लगे। इसलिए वे अपनी बस्तियाँ अलग बनाने का विचार करने लगे।
(ii) पुराने कस्बों के आसपास चरागाहों और खेतों को साफ कर दिया गया और सिविल लाइन्स नाम से नए शहरी इलाके विकसित किये गये। यहाँ केवल गोरों को बसाया गया।
(iii) छावनियों को सुरक्षित स्थानों के रूप में विकसित किया गया। यहाँ यूरोपीय कमान के अंतर्गत भारतीय सैनिक तैनात किये गये। ये मुख्य शहर से जुड़े थे और यूरोपीयों के लिए सुरक्षित स्थान थे।
(iv) सिविल लाइन्स को स्वास्थ्यप्रद बनाया गया।

प्रश्न 9. स्थापत्य शैलियाँ ऐतिहासिक दृष्टि से किस प्रकार महत्त्वपूर्ण हैं ?
उत्तर : (i) स्थापत्य शैलियों से अपने समय के सौंदर्यात्मक आदर्शों तथा उनमें निहित विविधताओं का पता चलता है।
(ii) ये शैलियाँ तथा इमारतें उन लोगों की सोच के बारे में भी बताती हैं जो उन्हें बना रहे थे।
(iii) इमारतों के माध्यम से सभी शासक अपनी शक्ति का प्रदर्शन करना चाहते हैं। इस प्रकार एक विशेष समय की स्थापत्य शैली को देखकर हम यह जान सकते हैं कि उस समय सत्ता को किस दृष्टि से देखा जाता था और वह इमारतों तथा उनकी विशिष्टताओं द्वारा किस प्रकार अभिव्यक्त होती थी।
(iv) स्थापत्य शैलियों से केवल प्रचलित रुचियों का ही पता नहीं चलता। वे उन्हें बदलती भी हैं। वे नयी शैलियों को लोकप्रियता प्रदान करती हैं। उदाहरण के लिए बहुत-से भारतीय यूरोपीय स्थापत्य शैलियों को आधुनिकता एवं सभ्यता का प्रतीक मानते हुए उन्हें अपनाने लगे थे परन्तु इस बारे में सभी की सोच एक जैसी नहीं थी। अनेक भारतीयों को यूरोपीय आदर्शों पर आपत्ति थी और उन्हें देशी शैलियों को बचाए रखने का प्रयास किया दूसरी ओर कई लोगों ने पश्चिम के कुछ ऐसे विशेष तत्वों को अपना लिया जो उन्हें आधुनिक दिखाई देते थे और उन्हें स्थानीय परंपराओं के तत्वों में समाहित कर दिया।

प्रश्न 10. भवन निर्माण की नव-गॉथिक शैली की क्या विशिष्टताएँ थीं?
उत्तर : नव-गॉथिक शैली की विशेषताएँ :(i) इसमें ऊँची उठी हुई छतें, नोकदार मेहराबें और बारीक साज-सज्जा होती थी।
(ii) इस शैली का जन्म इमारतों में, विशेष रूप से गिरंजों से हुआ था, जो मध्यकाल में उत्तरी यूरोप में बनाए गए।
(iii) नव-गॉथिक शैली को इंग्लैण्ड में 19वीं सदी के मध्य
(iv) जब औपनिवेशिक सरकार बम्बई में बुनियादी ढाँचे का निर्माण कर रही थी, उस समय इसी शैली को चुना गया।
(v) बम्बई में सचिवालय, बम्बई विश्वविद्यालय और उच्च न्यायालय जैसी कई शानदार इमारतें समुद्र के किनारे इसी शैली में बनाई गईं।

प्रश्न 11. अंग्रेजों ने भारत में सफाई एवं स्वच्छता पर क्यों ध्यान दिया ?
उत्तर : अंग्रेजों द्वारा भारत में सफाई एवं स्वच्छता पर ध्यान देने के कारण :(i) ब्लैक टाउन प्राय: गंदे रहते थे और गोरों के इलाकों में सफाई पर ही ध्यान दिया जाता था परन्तु प्लेग और हैजा जैसी महामारियों के फैलने और हजारों लोगों की मृत्यु के कारण औपनिवेशिक अधिकारियों को स्वच्छता और सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए अधिक कड़े कदम उठाने की आवश्यकता पड़ी।
(ii) अफसरों को भय था कि कहीं ये बीमारियाँ ब्लैक टाउन से व्हाइट टाउन में न फैल जाएँ।
(iii) 1860-70 के दशकों में सफाई एवं स्वच्छता पर ध्यान दिया गया और कड़े प्रशासकीय कदम उठाये गये और भारतीय शहरों में निर्माण गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाया।
(iv) इसी समय भूमिगत पाइप आधारित जलापूर्ति, निकासी और नाली व्यवस्था का निर्माण किया गया।

प्रश्न 12. “अठारहवीं शताब्दी के दौरान व्यापार तंत्रों में परिवर्तन शहरी केंद्रों के इतिहास में परिलक्षित होने लगे।” इस कथन का औचित्य निर्धारित कीजिए।

अथवा

मुगलों द्वारा बनाए गए शहरों में अठारहवीं शताब्दी में आए परिवर्तनों की व्याख्या कीजिए ।
उत्तर : अठारहवीं शताब्दी में परिवर्तन :
(i) राजनीतिक तथा व्यापारिक पुनर्गठन के साथ पुराने नगर पतनोन्मुख हुए और नए नगरों का विकास होने लगा। मुगल सत्ता के क्रमिक क्षरण के कारण ही उसके शासन से संबंध नगरों का अवसान हो गया| मुगल राजधानियों, दिल्ली और आगरा ने अपना राजनीतिक प्रभुत्व खो दिया। नयी क्षेत्रीय ताकतों का विकास क्षेत्रीय राजधानियों 1-लखनऊ, हैदराबाद, सेरिंगपट्म, पूना (पूर्णे), नागपुर, बड़ौदा तथा तंजौर (तंजावुर) के बढ़ते महत्त्व में परिलक्षित हुआ।
(ii) व्यापार तंत्रों में बदलाव : व्यापार तंत्रों में परिवर्तन शहरी केंद्रों के इतिहास में परिलक्षित हुए यूरोपीय व्यापारिक कंपनियों ने पहले, मुगल काल में ही विभिन्न स्थानों पर आधार स्थापित कर लिए थे। पुर्तगालियों ने 1510 में पणजी में डचों ने 1605 में मछलीपट्नम में, अंग्रेजों ने मद्रास में 1639 में तथा फ्रांसीसियों ने 1673 में पाँडिचेरी (आज का पुदुचेरी) में। व्यापारिक गतिविधियों में विस्तार के साथ ही इन व्यापारिक केंद्रों के आस-पास नगर विकसित होने लगे।
(iii) व्यापार में वृद्धि : 1757 में प्लासी के युद्ध के बाद जैसे-जैसे अंग्रेजों ने राजनीतिक नियंत्रण हासिल किया और इंग्लिश ईस्ट इंडिया कंपनी का व्यापार फैला, मद्रास, कलकत्ता तथा बम्बई जैसे औपनिवेशिक बंदरगाह शहर तेजी से नयी आर्थिक राजधानियों के रूप में उभरे। ये औपनिवेशिक प्रशासन और सत्ता के केंद्र भी बन गए।

प्रश्न 13. पूर्व-औपनिवेशिक भारत के कस्बों के स्वरूप की व्याख्या कीजिए।
उत्तर : पूर्व-औपचारिक काल में कस्बों तथा गाँवों में अंतर : (i) कस्बों को सामान्यतः ग्रामीण इलाकों के विपरीत परिभाषित किया जाता था। वे विशिष्ट प्रकार की आर्थिक गतिविधियों और संस्कृतियों के प्रतिनिधि बनकर उभरे। लोग ग्रामीण अंचलों में खेती, जंगलों में संग्रहण या पशुपालन के द्वारा जीवन निर्वाह करते थे। इसके विपरीत कस्बों में शिल्पकार, व्यापारी, प्रशासक तथा शासक रहते थे। कस्बों का ग्रामीण जनता पर प्रभुत्व होता था आर वे खेती से प्राप्त करों और अधिशेष के आधार पर फलते-फूलत थे। अक्सर कस्बों और शहरों की किलेबंदी की जाती थी जा ग्रामीण क्षेत्रों से इनकी पृथकता को चिह्नित करती थी।
(ii) कस्बों और गाँवों के बीच की पृथकता अनिश्चित होती थी। किसान तीर्थ करने के लिए लंबी दूरियाँ तय करते थे और कस्बों से होकर गुजरते थे। वे अकाल के समय कस्बों में इकट्ठे भी हो जाते थे। इसके अतिरिक्त लोगों और माल का कस्बों से गाँवों की ओर विपरीत गमन भी था। जब कस्बों पर आक्रमण होते थे तो लोग ग्रामीण क्षेत्रों में शरण लेते थे। व्यापारी और फेरीवाले कस्बों से माल गाँव ले जाकर बेचते थे, जिनके द्वारा बाजारों का फैलाव और उपभोग की नयी शैलियों का सृजन होता था।

प्रश्न 14. अठारहवीं शताब्दी के मध्य से नगरों का रूप परिवर्तन क्यों और कैसे हुआ ?
उत्तर : अठारहवीं शताब्दी के मध्य से नगरों के परिवर्तन का एक नया चरण आरंभ हुआ। व्यापारिक गतिविधियों के अन्य स्थानों पर केंद्रित हो जाने से सत्रहवीं शताब्दी में विकसित सूरत, मछलीपटनम तथा ढाका पतनोन्मुख हो गए।
1757 में प्लासी के युद्ध के बाद जैसे-जैसे अंग्रेजों का राजनीतिक नियंत्रण मजबूत हुआ और ईस्ट इंडिया कंपनी का व्यापार बढ़ा, मद्रास, कलकत्ता तथा बंबई आदि औपनिवेशिक बंदरगाह नगर तेजी से नई आर्थिक राजधानियों के रूप में उभरने लगे। ये शहर औपनिवेशिक प्रशासन और सत्ता के केंद्र भी बन गए। नए भवनों और संस्थानों का विकास हुआ तथा शहरी केंद्रों को नए तरीकों से व्यवस्थित किया गया। इनमें नए रोजगार विकसित हुए और लोग निरंतर इन शहरों की ओर आने लगे। लगभग 1800 तक ये नगर जनसंख्या की दृष्टि से भारत के विशालतम शहर बन गए।

प्रश्न 15. औपनिवेशिक शहर ब्रिटिश शासकों की वाणिज्यिक संस्कृति को कैसे प्रतिबिम्बित करते थे ? व्याख्या कीजिए।
उत्तर : औपनिवेशिक शहर नए शासकों की वाणिज्यिक संस्कृति को प्रतिबिम्बित करते थे। राजनीतिक सत्ता और संरक्षण भारतीय शासकों के स्थान पर ईस्ट इंडिया कंपनी के व्यापारियों के हाथ में जाने लगा। दुभाषिए, बिचौलिए, व्यापारी और माल आपूर्तिकर्ता के रूप में काम करने वाले भारतीयों का भी नए शहरों में एक महत्त्वपूर्ण स्थान था। नदी या समुद्र के किनारे आर्थिक गतिविधियों से गोदियों ओर घाटों का विकास हुआ समुद्र किनारे गोदाम, वाणिज्यिक कार्यालय, जहाजरानी उद्योग के लिए बीमा एजेंसियाँ, यातायात डिपो और बैंकिंग संस्थानों की स्थापना होने लगी। कंपनी के मुख्य प्रशासकीय कार्यालय समुद्र तट से दूर बनाए गए।

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