2 अंकीय प्रश्न उत्तर – औंपनिवेशक शहर ( नगरीकरण , नगर – योजना , स्थापत्य ) – Class12th History Chapter 12

Index

1. ईंट मनके और अस्थियाँ

1. आरंभ 2. निर्वाह के तरीके 3. मोहनजोदड़ो 4. सामाजिक विभिन्नताओं का अवलोकन 5. शिल्प उत्पादन के विषय में जानकारी 6. माल प्राप्त करने सम्बन्धी नीतियाँ 7. मुहरें लिपि तथा बाट 8. प्राचीन सभ्यता 9. सभ्यता का अंत 10. हड़प्पा सभ्यता की खोज 11. अतीत को जोड़कर पूरा करने की समस्याएं मानचित्र बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर 1 अंकीय प्रश्न उत्तर 2 अंकीय प्रश्न उत्तर

2. राजा किसान और नगर

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

3. बंधुत्व जाति और वर्ग

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

4. विचारक विश्वास और इमारतें

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर 1 बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर 2

6. भक्ति सूफी और परम्पराएँ

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

7. एक साम्राज्य की राजधानी विजयनगर

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

8. उपनिवेशवाद और देहात

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

10. उपनिवेशवाद और देहात

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

11. विद्रोह और राज

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

13. महात्मा गाँधी और आन्दोलन

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

15. संविधान का निर्माण

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

Class 12th History Chapter 12 Important Question Answer 2 Marksऔपनिवेशक शहर(नगरीकरण, नगर-योजना, स्थापत्य)

प्रश्न 1. औपनिवेशिक शहरों में रिकॉर्ड्स सँभाल कर क्यों रखे जाते थे ?
उत्तर : औपनिवेशिक शहरों में रिकॉर्ड्स निम्नलिखित कारणों की वजह से सँभाल कर रखे जाते थे : (i) शहरों में कितने प्रतिशत आबादी घटी-बढ़ी है, इस बात को जानने के लिए।
(ii) शहरों की चारित्रिक विशेषताओं के अन्वेषण के समय उन रिकार्डों का प्रयोग सामाजिक और अन्य परिवर्तनों को जानने के लिए आवश्यक थी।
(iii) इन रिकार्डों से शहरों में व्यापारिक गतिविधियाँ, औद्योगिक प्रगति, सफाई, सड़क, परिवहन, यातायात और प्रशासनिक कार्यालयों की आवश्यकताओं को जानने, समझने और उन पर आवश्यकतानुसार कार्य करने के लिए आवश्यक कार्य हेतु कदमों को बढ़ाने के लिए ये रिकार्ड सहायक होते थे।

प्रश्न 2. औपनिवेशिक संदर्भ में शहरीकरण के रुझानों को समझने के लिए जनगणना संबंधी आँकड़े किस हद तक उपयोगी होते हैं ?
उत्तर : औपनिवेशिक संबंध में शहरीकरण के रुझान को समझने के लिए जनगणना संबंधी आँकड़े बहुत उपयोगी होते हैं:
(i) इससे श्वेत और अश्वेत (White and Black) लोगों की कुल जनसंख्या या आबादी को जानने में सहयोग मिलता है।
(ii) श्वेत और अश्वेत टाउन के निर्माण, विस्तार और उनके जीवन संबंधी स्तर, भयंकर बीमारियों के जनसंख्या पर पड़े दुष्प्रभाव आदि को जानने में भी जनगणना संबंधी आँकड़े तुरंत जानकारी देने वाली पट्टियों का कार्य करते हैं।
(iii) जनगणना संबंधी आँकड़े विभिन्न समुदायों, कार्यों, जातियों की जानकारी देते हैं।

प्रश्न 3. “व्हाइट” और “ब्लैक” टाउन शब्दों का क्या महत्त्व था?

अथवा

ब्रिटिश काल में प्रारंभ में बनाए गए व्हाइट (श्वेत) या टाउन तथा ब्लैक टाउन के दो अंतरों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर : ‘व्हाइट’ और ‘ब्लैक’ टाउन भारतीयों पर अंग्रेजों की जातीय श्रेष्ठता के प्रतीक थे। अंग्रेज़ गोरी चमड़ी वाले थे और उन्हें व्हाइट कहा जाता था, जबकि भारतीयों को काले लोग माना जाता था।
व्हाइट टाउन : ‘व्हाइट टाउन’ औपनिवेशिक शहरों के वे जहाँ केवल गोरे लोग रहते थे। छावनियों को भी सुरक्षित स्थानों पर विकसित किया गया तथा छावनियों में यूरोपीयों के अधीन भारतीय सैनिक तैनात किए जाते थे। ये इलाके मुख्य शहर से अलग परंतु जुड़े हुए होते थे। चौड़ी सड़कों, बड़े बगीचों में बने बंगलों, बैरकों, परेड मैदान और चर्च आदि में लैस ये छावनियाँ यूरोपीय लोगों के लिए एक सुरक्षित आश्रय स्थल थीं। व्हाइट टाउन व्यवस्थित शहरी जीवन का प्रतीक था।
ब्लैक टाउन : ब्लैक टाउन में भारतीय रहते थे। ये अव्यवस्थित थे तथा गंदगी और बीमारी का स्रोत थे। इन्हें अराजकता एवं उपद्रव का केंद्र माना जाता था।

प्रश्न 4. प्रमुख भारतीय व्यापारियों ने औपनिवेशिक शहरों में खुद को किस तरह स्थापित किया ?
उत्तर : औपनिवेशिक शहरों अर्थात् बंबई , कलकत्ता और मद्रास में एजेंटों तथा बिचौलियों के रूप में काम करना शुरू कर दिया। उन्होंने ब्लैक टाउन में बाजारों के आसपास परंपरागत ढंग के दालानी मकान बनवाए। उन्होंने भविष्य में पैसा लगाने के लिए शहर के अंदर बड़ी-बड़ी जमीनें भी खरीद ली थीं। अपने अंग्रेज स्वामियों को प्रभावित करने के लिए वे त्योहारों पर रंगीन भोजों का आयोजन करते थे। समाज में अपनी उच्च स्थिति को दर्शाने के लिए उन्होंने मंदिर बनवाए। मद्रास में कुछ दुबाश व्यापारी ऐसे भारतीय थे जो स्थानीय भाषा और अंग्रेजी, दोनों ही बोलना जानते थे। वे भारतीय समाज तथा गोरों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाते थे। संपत्ति एकत्र करने के लिए वे सरकार में अपनी पहुँच का प्रयोग करते थे । ब्लैक टाउन में परोपकारी कार्यों और मंदिरों को संरक्षण प्रदान करने के कारण समाज में उनकी स्थिति काफी मजबूत थी।

प्रश्न 5. औपनिवेशिक मद्रास में शहरी और ग्रामीण तत्व किस हद तक घुल-मिल गए थे ?
उत्तर : मद्रास को बहुत से गाँवों को मिलाकर विकसित किया गया था। धीरे-धीरे भिन्न-भिन्न प्रकार के आर्थिक कार्य करने वाले कई समुदाय आकर मद्रास में बस गए। यूरोपवासी व्हाइट टाउन में रहते थे जिसका केंद्र फोर्ट सेंट जार्ज अथवा सेंट जार्ज किला था। अंग्रेजों की सत्ता मजबूत होने के साथ-साथ यूरोपीय निवासी किले से बाहर जाने लगे। गार्डन हाउसेज (बगीचों वाले मकान) सबसे पहले माउंट रोड और पूनामाली रोड पर बनने शुरू हुए। ये सड़कें किले से छावनी तक जाती थीं इस दौरान संपन्न भारतीय भी अंग्रेजों की तरह रहने लगे थे। परिणामस्वरूप मद्रास के इर्द-गिर्द स्थित गाँवों का स्थान बहुत-से नए उपशहरी प्रदेशों ने ले लिया। यह इसलिए भी संभव हो सका क्योंकि संपन्न लोग परिवहन सुविधाओं की लागत वहन कर सकते थे परंतु गरीब लोग अपने काम की जगह के निकट स्थित गाँवों में ही रहते थे। मद्रास के बढ़ते शहरीकरण का परिणाम यह हुआ कि इन गाँवों के बीच वाले प्रदेश शहर में समा गए। इस प्रकार मद्रास के बढ़ते शहरीकरण का परिणाम यह हुआ कि इन गाँवों के बीच वाले प्रदेश शहर में समा गए। इस प्रकार मद्रास में शहरी तथा ग्रामीण तत्त्व आपस में घुल मिल गए और मद्रास दूर-दूर तक फैली एक अल्प सघन आबादी वाला अर्धग्रामीण शहर बन गया।

प्रश्न 7. औपनिवेशिक शहर में सामने आने वाले नए तरह के सार्वजनिक स्थान कौन से थे ? उनके क्या उद्देश्य थे ?
उत्तर : (i) नदी या समुद्र के किनारे आर्थिक गतिविधियों से गोदियों और घाटियों का विकास हुआ।
(ii) समुद्र किनारे गोदाम, वाणिज्यिक कार्यालय, जहाजरानी उद्योग के लिए बीमा एजेंसियाँ, यातायात डिपो तथा बैंकों की स्थापना होने लगी।
(iii) कंपनी के मुख्य प्रशासनिक कार्यालय समुद्र तट से दूर बनाए गए। कलकत्ता में स्थित राइटर्स बिल्डिंग इसी तरह का एक कार्यालय था। यहाँ “राइटर्स” से अभिप्राय क्लर्कों से है! यह ब्रिटिश शासन में नौकरशाही के बढ़ते महत्त्व का संकेत था।
(iv) किले की चारदीवारी के आसपास यूरोपीय व्यापारियों औ एजेंटों ने यूरोपीय शैली के भव्य मकान बना लिए थे। कुछ यूरोपियों ने शहर की सीमा से सटे उपशहरी इलाकों में बगीचा घर बना लिए थे।
(v) शासक वर्ग के लिए नस्ली विभेद पर आधारित क्लब रेसकोर्स और रंगमंच भी बनाए गए।
(vi) हाउन हॉल, सार्वजनिक पार्क, रंगशालाएँ तथा सिनेमा हॉल जैसे सार्वजनिक स्थल भी सामने आये। ये स्थान लोगों के लिए मनोरंजन तथा मेल-जोल के महत्त्वपूर्ण केंद्र थे।

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