Index

1. ईंट मनके और अस्थियाँ

1. आरंभ 2. निर्वाह के तरीके 3. मोहनजोदड़ो 4. सामाजिक विभिन्नताओं का अवलोकन 5. शिल्प उत्पादन के विषय में जानकारी 6. माल प्राप्त करने सम्बन्धी नीतियाँ 7. मुहरें लिपि तथा बाट 8. प्राचीन सभ्यता 9. सभ्यता का अंत 10. हड़प्पा सभ्यता की खोज 11. अतीत को जोड़कर पूरा करने की समस्याएं मानचित्र बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर 1 अंकीय प्रश्न उत्तर 2 अंकीय प्रश्न उत्तर

2. राजा किसान और नगर

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

3. बंधुत्व जाति और वर्ग

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

4. विचारक विश्वास और इमारतें

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर 1 बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर 2

6. भक्ति सूफी और परम्पराएँ

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

7. एक साम्राज्य की राजधानी विजयनगर

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

8. उपनिवेशवाद और देहात

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

10. उपनिवेशवाद और देहात

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

11. विद्रोह और राज

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

13. महात्मा गाँधी और आन्दोलन

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

15. संविधान का निर्माण

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

Class 12th History Chapter 13 Important Question Answer 2 Marks महात्मा गाँधी और राष्ट्रीय आंदोलन

प्रश्न 1. महात्मा गाँधी ने खुद को आम लोगों जैसा दिखाने के लिए क्या किया ?
उत्तर : महात्मा गाँधी ने खुद को आम लोगों जैसा दिखाने के लिए निम्न कार्य किए :(i) उन्होंने सबसे पहले अपने राजनीतिक गुरु गोपालकृष्ण गोखले के कहने के अनुसार एक वर्ष तक ब्रिटिश भारत की यात्रा की ताकि वे इस भूमि और इसके लोगों को अच्छी तरह जान सकें।
(ii) उन्होंने सर्व-साधारण गरीब लोगों, नील की खेती में काम करने वाले मजदूरों, अहमदाबाद के मिल मजदूरों और खेड़ा में गरीब किसानों के हित में बात की और उनकी सहानुभूति प्राप्त करने की कोशिश की।
(iii) उन्होंने सर्व-साधारण की तरह मामूली कपड़े विशेषकर खद्दर के कपड़े पहने। हाथ में आम किसान की तरह लाठी उठाई, चरखा काता, कुटीर उद्योग-धंधों, हरिजनों के हितों, महिलाओं के प्रति सद्व्यवहार और सच्ची सहानुभूति रखने के साथ ही बार-बार यह दोहराया कि भारत गाँवों में बसता है, किसानों और गरीब लोगों की समृद्धि और खुशहाली के बिना देश की उन्नति नहीं हो सकती।

प्रश्न 2. किसान महात्मा गाँधी को किस तरह देखते थे ?
उत्तर : किसान महात्मा गाँधी को अपना हितैषी समझते थे। वे मानते थे कि गाँधीजी भू-राजस्व को कम कराने, उदारतापूर्वक भू-राजस्व वसूली के लिए सरकार-सरकारी अधिकारियों, जमींदारों, जोतदारों, ताल्लुकदारों पर दबाव डाल सकते हैं।
किसान यह भी मानते थे कि गाँधी जी किसानों को हर तरह से शोषण से मुक्ति दिला सकते हैं। गाँधीजी उन्हें समझते हैं और वे उनकी भाषा में उन्हें हर समय समस्या के समाधान भी सुलझा सकते हैं। वे ग्रामीण क्षेत्रों से संबंधित समस्याओं और किसानों के कुटीर धंधों के समर्थक थे। किसान गाँधीजी को जन-प्रिय नेता और अपने में से एक समझते थे। उन्हें विश्वास था कि गाँधीजी उन्हें अंग्रेजों की दासता, जमींदारों के शोषण और साहूकारों के चंगुल से अहिंसात्मक आंदोलनों और शांति-प्रिय प्रतिरोध के द्वारा मुक्ति दिलाएँगे।

प्रश्न 3. नमक कानून स्वतंत्रता संघर्ष का महत्त्वपूर्ण मुद्दा क्यों बन गया था ?
उत्तर : नमक कानून स्वतंत्रता संघर्ष का महत्त्वपूर्ण मुद्दा इसलिए बन गया क्योंकि उन दिनों नमक के उत्पादन और विक्रय पर ब्रिटिश राज्य को एकाधिकार प्राप्त था। नमक गरीब से गरीब और अमीर से अमीर सभी धर्मों, जातियों, वर्गों, वर्णों, लिंगों और क्षेत्रों के लोगों द्वारा प्रयोग में लाया जाता था नमक कानून का तोड़ने का मतलब था विदेशी दासता और ब्रिटिश शासन की अवज्ञा करना, उससे प्रेरित होकर छोटे-छोटे अन्य कानूनों को तोड़ना ताकि स्वराज्य और पूर्ण स्वतंत्रता स्वतः ही देशवासियों को मिल जाए और स्वतंत्रता संग्राम का अंतिम उद्देश्य पूरा हो सके।

प्रश्न 4. राष्ट्रीय आंदोलन के अध्ययन के लिए अखबार महत्त्वपूर्ण स्रोत क्यों हैं ?
उत्तर : राष्ट्रीय आंदोलन के अध्ययन के लिए अखबार अनेक दृष्टियों से महत्त्वपूर्ण स्रोत हैं :
(i) अखबार जनसंचार के सबसे महत्त्वपूर्ण साधन हैं और यह विशेषकर पढ़े-लिखे व्यक्तियों पर प्रभाव डालते हैं और प्रबुद्ध लोगों, लेखकों, कवियों, पत्रकारों, साहित्यकारों, विचारकों से प्रभावित होते हैं।
(ii) अखबार जनमत का निर्माण और अभिव्यक्ति करते हैं। यह सरकार और सरकारी अधिकारियों और लोगों में विचारों और समस्या के विषय में जानकारी और प्रगति में हो रहे कामों और उपेक्षित कार्यों और क्षेत्रों की जानकारी देते हैं।
(iii) राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान अखबार जिन लोगों के द्वारा पढ़े जाते हैं वे देश में होने वाली घटनाओं, नेतागणों और अन्य लोगों की गतिविधियों, विचारों आदि को जानते हैं।

प्रश्न 5. चरखे को राष्ट्रवाद का प्रतीक क्यों चुना गया ?
उत्तर : चरखे को राष्ट्रवाद का प्रतीक इसलिए चुना गया क्योंकि चरखा गाँधीजी को प्रिय था। गाँधीजी मानते थे कि आधुनिक युग में मशीनों ने मानव को गुलाम बनाकर श्रमिकों के हाथों से काम और रोजगार छीन लिया है । उन्होंने मशीनों की आलोचना की और चरखे को ऐसे मानव समाज के प्रतीक के रूप में देखा जिसमें मशीनों और प्रौद्योगिकी को बहुत महिमामंडित नहीं किया जाएगा। उनके अनुसार भारत एक गरीब देश है। चरखा गरीबों को पूरक आमदनी (Supplement) प्रदान करेगा जिससे वे स्वावलंबी बनेंगे, उन्हें बेरोजगारी और गरीबी से छुटकारा दिलाने में चरखा उन्हें स्वावलंबी बनाकर मदद करेगा। गाँधीजी मानते थे कि मशीनों से श्रम बचाकर लोगों को मौत के मुँह में धकेलना या उन्हें बेरोजगार करके सड़क पर फेंकने के बराबर है । चरखा धन के केंद्रीयकरण को रोकने में भी मददगार है।

प्रश्न 6. राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान घटी कोई एक घटना चुनिए। उसके विषय में तत्कालीन नेताओं द्वारा लिखे गए पत्रों और भाषणों को खोज कर पढ़िए। उनमें से कुछ अब प्रकाशित हो चुके हैं। आप जिन नेताओं को चुनते हैं उनमें से कुछ आपके इलाके के भी हो सकते हैं। उच्च स्तर पर राष्ट्रीय नेतृत्व की गतिविधियों को स्थानीय नेता किस तरह देखते थे इसके बारे में जानने की कोशिश कीजिए । अपने अध्ययन के आधार पर आंदोलन के बारे में लिखिए।
उत्तर : राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान आप सविनय अवज्ञा आंदोलन से जुड़ी घटनाओं को लिख सकते हैं। इसके लिए पाठ्यपुस्तक पृष्ठ 371 और 372 पर देश के विभिन्न प्रांतों से जुड़ी हुई गोपनीय रिपोटो का प्रयोग किया जा सकता है। इन रिपोर्टों को देखते हुए हमें विशेष सावधानी बरतनी चाहिए और इसमें दिए गए प्रत्येक शब्द को सत्य नहीं मानना चाहिए। कई बार उसमें आशंकाएँ और गलत विचार दिए होते हैं क्योंकि सरकारी रिपोर्ट लिखने वाले अधिकारी के विचार और पूर्वाग्रहों से प्रभावित हो सकती है। फिर भी रिपोर्ट से सरकारी कार्यवाही और प्रभावित नेताओं के बारे में जानकारियाँ उपयोगी होती हैं। औपनिवेशिक सरकार भारतीय जनता और आंदोलन की गतिविधियों पर नजर रखती थी और अपने शासन और साम्राज्य के हितों को देखते हुए जनता की कार्यवाहियों से उतनी ही चिंतित रहती थी।

प्रश्न 7. गाँधीजी के रचनात्मक कार्यक्रमों पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखो।
उत्तर : गाँधीजी का रचनात्मक कार्यक्रम (Constructive Programme of Gandhiji) : गाँधीजी के नेतृत्व में कांग्रेस ने रचनात्मक कार्यक्रम को बहुत बढ़ावा दिया। वह केवल राजनैतिक स्वतंत्रता ही नहीं चाहते थे अपितु जनता की आर्थिक-सामाजिक और आत्मिक उन्नति चाहते थे। इस भावना से उन्होंने ‘ग्राम उद्योग संघ’ तालीमी संघ और गौ-रक्षा संघ बनाए। उन्होंने समाज में शोषण समाप्त करने के लिए भूमि और पूँजी का समाजीकरण नहीं माँगा अपितु आर्थिक क्षेत्र के विकेंद्रीयकरण द्वारा इस प्रश्न को हल करना चाहा। उन्होंने कुटीर उद्योगों के प्रोत्साहन के लिए काम किया। खादी उनके आर्थिक तंत्र का आधार थी।

प्रश्न 8. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के उद्घाटन समारोह का भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में क्या महत्त्व है ?
उत्तर : फरवरी, 1916 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के उद्घाटन समारोह में गाँधीजी की पहली महत्त्वपूर्ण उपस्थिति हुई। इससे पहले भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन केवल उच्च तथा धनी वर्गों तक ही सीमित था परन्तु महात्मा गाँधी ने अपने भाषण से इसे आम जनता का आंदोलन बनाने की पहल की । उन्होंने कहा कि बनारस हिंदू विश्वविद्यालय की स्थापना ‘निश्चय ही अत्यंत शानदार’ है।

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