2 अंकीय प्रश्न उत्तर – भिवाजन को समझना राजनीति , स्मृति , अनुभव – Class12th History Chapter 14

Index

1. ईंट मनके और अस्थियाँ

1. आरंभ 2. निर्वाह के तरीके 3. मोहनजोदड़ो 4. सामाजिक विभिन्नताओं का अवलोकन 5. शिल्प उत्पादन के विषय में जानकारी 6. माल प्राप्त करने सम्बन्धी नीतियाँ 7. मुहरें लिपि तथा बाट 8. प्राचीन सभ्यता 9. सभ्यता का अंत 10. हड़प्पा सभ्यता की खोज 11. अतीत को जोड़कर पूरा करने की समस्याएं मानचित्र बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर 1 अंकीय प्रश्न उत्तर 2 अंकीय प्रश्न उत्तर

2. राजा किसान और नगर

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

3. बंधुत्व जाति और वर्ग

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

4. विचारक विश्वास और इमारतें

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर 1 बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर 2

6. भक्ति सूफी और परम्पराएँ

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

7. एक साम्राज्य की राजधानी विजयनगर

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

8. उपनिवेशवाद और देहात

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

10. उपनिवेशवाद और देहात

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

11. विद्रोह और राज

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

13. महात्मा गाँधी और आन्दोलन

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

15. संविधान का निर्माण

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

Class 12th History Chapter 14 Important Question Answer 2 Marks विभाजन को समझना राजनीति, स्मृति, अनुभव

प्रश्न 1. 1940 के प्रस्ताव के जरिए मुस्लिम लीग ने क्या माँग की ?
उत्तर : 1940 के प्रस्ताव के जरिए मुस्लिम लीग ने यह माँग की कि उपमहाद्वीप के मुस्लिम बहुल इलाकों के लिए सीमित स्वायत्तता की माँग करते हुए प्रस्ताव पेश किया। इस अस्पष्ट से प्रस्ताव में कहीं भी विभाजन या पाकिस्तान का उल्लेख नहीं था। बल्कि, इस प्रस्ताव को लिखने वाले पंजाब के प्रधानमंत्री और यूनियनिष्ट पार्टी के नेता सिंकदर हयात खान ने 1 मार्च, 1941 को पंजाब असेम्बली को संबोधित करते हुए घोषणा की थी कि वह ऐसे पाकिस्तान की अवधारणा का विरोध करते हैं जिसमें “यहाँ मुस्लिम राज और बाकी जगह हिंदू राज होगा….। अगर पाकिस्तान का मतलब यह है कि पंजाब में खालिस मुस्लिम राज कायम होने वाला है तो मेरा उससे कोई वास्ता नहीं है।” उन्होंने संघीय इकाइयों के लिए उल्लेखनीय स्वायत्तता के आधार पर एक ढीले-ढाले (संयुक्त) महासंघ के समर्थन में अपने विचारों को फिर दोहराया।

प्रश्न 2. कुछ लोगों को ऐसा क्यों लगता था कि बँटवारा बहुत अचानक हुआ ?
उत्तर : प्रारंभ में मुस्लिम लीग के नेताओं ने भी एक संप्रभु राज्य के रूप में पाकिस्तान की माँग खास संजीदगी से नहीं उठाई थी। प्रारंभ में शायद खुद जिन्ना की पाकिस्तान की सोच को सौदेबाजी में एक पैतरे के तौर पर प्रयोग कर रहे थे जिसका कि वे सरकार द्वारा कांग्रेस को मिलने वाली रियासतों पर रोक लगाने और मुसलमानों के लिए और रियासतें प्राप्त करने के लिए इस्तेमाल कर सकते थे।
पाकिस्तान के बारे में अपनी माँग पर मुस्लिम लीग की राय पूरी तरह स्पष्ट नहीं थी। उपमहाद्वीप के मुस्लिम बहुल क्षेत्रं के लिए सीमित स्वायत्तता की माँग से विभाजन होने के बीच बहुत ही कम समय-केवल सात साल रहा।

प्रश्न 3. आम लोग विभाजन को किस तरह देखते थे ?
उत्तर : विभाजन के बारे में आम लोग यह सोचते थे कि यह विभाजन पूर्णतया या तो स्थायी नहीं होगा अथवा शांति और कानून व्यवस्था बहाल के बाद तो सभी लोग अपने मूल स्थान, कस्बा या शहर अथवा राज्य में वापस लौट आएँगे। वे मानते कि पाकिस्तान के गठन का मतलब यह नहीं होगा कि जो लोग एक देश के एक हिस्से से दूसरे हिस्से में जाएँगे तो उनके साथ बाद में भी कठोरता होगी उन्हें बीजा और पासपोर्ट जरूरी प्राप्त करना होगा। जो लोग अपने रिश्तेदारों, मित्रों और जानकारों से बिछड़ जाएँगे वे हमेशा के लिए बिछड़े रहेंगे। जो लोग गंभीर नहीं थे या राष्ट्र विभाजन के गंभीर परिणामों को जाने-अनजाने में अनदेखी कर रहे थे, वे यह मानने को तैयार नहीं थे कि दोनों देशों के लोग पूरी तरह हमेशा के लिए जुदा हो जायेंगे। वस्तुतः आम लोगों का सोचना उनके भोलेपन या अज्ञानता और यथार्थ से आँखें बंद कर लेने के समान था।

प्रश्न 4. विभाजन के खिलाफ महात्मा गाँधी जी की दलील क्या थी ?

अथवा

भारत विभाजन के विरुद्ध महात्मा गाँधी द्वारा दिए गए तर्कों की व्याख्या कीजिए।

अथवा

बँटवारे के विरुद्ध गाँधी जी के विचारों की समीक्षा कीजिए।
उत्तर : महात्मा गाँधी विभाजन के सख्त खिलाफ थे। उनकी दलील थी कि लोगों का हृदय परिवर्तन किया जा सकता है। उनका विश्वास था कि देश में सांप्रदायिक एकता पुनः स्थापित हो जाएगी, इसलिए विभाजन की कोई आवश्यकता नहीं है। भारत के लोग हिंसा और घृणा का रास्ता त्यागकर फिर से भाइयों की तरह अपनी तमाम समस्याओं का निदान कर लेंगे। उनके विचार में अहिंसा, शांति, सांप्रदायिक भाईचारे के विचारों को हिंदू और मुसलमान दोनों मानते हैं। इसलिए उन्होंने हर जगह हिंदू और मुसलमानों को शांति बनाए रखने, परस्पर प्रेम और एक-दूसरे की रक्षा करने का आह्वान किया। गाँधीजी स्वीकार करते थे कि सैंकड़ों वर्ष से हिंदू, मुस्लिम एक साथ रहते आए हैं, वे एक जैसी वेशभूषा धारण करते हैं, एक जैसा भोजन करते हैं, इसलिए शीघ्र ही घृणा को भूलकर फिर से पहले की भाँति एक-दूसरे के सुख-दुख में हिस्सा लेंगे।

प्रश्न 5. विभाजन को दक्षिण एशिया के इतिहास में एक ऐतिहासिक मोड़ क्यों माना जाता है ?
उत्तर : भारत के विभाजन को एक ऐतिहासिक मोड़ इसलिए समझा जाता है क्योंकि विभाजन तो पहले भी हुए लेकिन यह विभाजन इतना व्यापक और खून-खराबे वाला था कि दक्षिण एशिया के इतिहास में इसे एक नए ऐतिहासिक मोड़ के रूप में देखा गया। हिंसा अनेक बार हुई। दोनों संप्रदाय के नेता विभाजन के दुष्ट परिणामों की कल्पना भी नहीं कर सके। इस विभाजन के दौरान भड़के सांप्रदायिक दंगों के कारण लाखों लोग मारे गए और नए सिरे से अपनी जिंदगी शुरू करने के लिए विवश हुए।

प्रश्न 6. बँटवारे के समय औरतों के क्या अनुभव रहे ?

अथवा

भारतीय महिलाओं पर भारत के विभाजन के प्रभावों की विवेचना करें।

अथवा

बँटवारे का औरतों पर क्या प्रभाव पड़ा ?
उत्तर : बँटवारे के समय औरतों के बहुत ही कटु अनुभव रहे- (i) उनके साथ बलात्कार हुए और उनका अपहरण करके उन्हें बार-बार खरीदा और बेचा गया।
(ii) उन्हें अजनबियों के साथ जिंदगी बिताने के लिए मजबूर किया गया।
(iii) परिवार के सम्मान की रक्षा के नाम पर उन्हें मार डाला गया अथवा मरने के लिए विवश किया गया। इस कारनामे को बहादुरी और शहीदी का नाम दिया गया।
(iv) कई औरतों ने अपनी इज्जत की रक्षा के लिए आत्महत्या कर ली। उन्हें शत्रु के हाथ में पड़ना पसंद नहीं था।
(v) उनके बारे में जो निर्णय लिए गए उनमें उनकी सलाह नहीं ली गई। दूसरे शब्दों में अपने जीवन के बारे में निर्णय लेने के उनके अधिकार की उपेक्षा कर दी गई।
(vi) भारत तथा पाकिस्तान दोनों ही देशों की सरकारों ने औरतों के प्रति कोई संवेदनशील रुख नहीं अपनाया। कई मामलों में घर बसा चुकी औरतों को पुनः उनके देश वापिस भेज दिया गया। इस प्रकार उनकी जिंदगी बरर्बाद हो गई और परिवार उजड़ गया।

प्रश्न 7. बँटवारे के सवाल पर कांग्रेस की सोच कैसे बदली ?

अथवा

कांग्रेस ने पंजाब को दो भागों में विभाजन करने के पक्ष में वोट क्यों दिया ?
उत्तर : कांग्रेस विभाजन के विरुद्ध थी परन्तु मार्च, 1947 में कांग्रेस हाईकमान ने पंजाब को मुस्लिम बहुल और हिंदू/सिख- बहुल दो भागों में बाँटने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। कांग्रेस ने बंगाल के संबंध में यही सिद्धांत अपनाने का सुझाव दिया। अंकों के खेल में उलझकर पंजाब के बहुत-से सिख और कांग्रेसी नेता भी यह मानने । लगे कि अब विभाजन कड़वी सच्चाई बन चुका है, जिसे टाला नहीं जा सकता। उन्हें लगता था कि वे अविभाजित पंजाब में मुसलमानों से घिर जाएँगे और उन्हें मुस्लिम नेताओं की दया पर जीना पडेगा। इसलिए वे भी विभाजन के पक्ष में हो गए। बंगाल में भी भद्रलोक बंगाली हिंदुओं का जो वर्ग सत्ता को अपने हाथ में रखना चाहता था, वह यह सोचता था कि विभाजन न होने पर वे मुसलमानों के स्थायी गुलाम बनकर रह जाएँगे। संख्या की दृष्टि से वे कम थे। इसलिए उनको लगता था कि प्रांत के विभाजन से ही उनका राजनीतिक प्रभुत्व बना रह सकता है।

प्रश्न 8. यूगोस्लाविया के विभाजन को जन्म देने वाली नृजातीय हिंसा के बारे में पता लगाइए। उसमें आप जिन नतीजों पर पहुँचते हैं उनकी तुलना इस अध्याय में भारत विभाजन के बारे में बताई गई बातों से कीजिए।
उत्तर : हाल के वर्षों में यूगोस्लाविया में जो घटनाएँ हुई हैं,उनका स्वरूप काफी दुःखद है। प्रथम विश्वयुद्ध के बाद जिस यूगोस्लाविया का राज्य के रूप में उदय हुआ, उस पर दूसरे युद्ध के बाद से कम्युनिस्ट पार्टी का शासन था। लगभग आरंभिक समय से ही यूगोस्लाविया की कम्युनिस्ट सरकार ने अपने को सोवियत संघ के प्रभाव से मुक्त रखा। गुट-निरपेक्ष आंदोलन के जन्मदाता देशों में यूगोस्लाविया भी था छः गणराज्यों का यह संघ था। यहाँ कम्युनिस्ट पार्टी का शासन 1990 में खत्म हुआ । 1992 तक आते-आते यूगोस्लाविया 5 स्वतंत्र राज्यों में विभाजित हो गया। इसमें से बनने वाले नए राज्यों के नाम इस प्रकार हैं: यूगोस्लाविया का नया राज्य जो सर्बिया तथा मॉनटेनेग्रो को मिलाकर बना है, क्रोशिया, मैकैडोनिया, स्लोवेनिया तथा बोस्निया-हर्जेगोबिना। यूगोस्लाविया के टूटने से इसकी समस्याओं का अंत नहीं हुआ। बोस्निया-हर्जेगोविना के निवासी तीन समुदायों के हैं। बोस्निया के सर्व, बोस्निया के क्रोर और ब्रोस्निया के मुसलमान। तीनों समुदायों में आपस में युद्ध होता रहा है, खासतौर पर सर्वो और मुसलमानों में। इससे वहाँ की जनता को घोर कष्ट झेलना पड़ रहा है।

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