शासक और इतिवृत > मुग़ल शासक और साम्राज्य

स्त्रोत - क्रोनिकल्स (इतिवृत/इतिहास)

  • नियुक्त शासक होने की दृष्टि के प्रसार प्रचार का तरीका
  • दरबारी इतिहासकारों को विवरण लेखन का कार्य सौंपा गया
  • बादशाह के समय की घटनाओं का लेखा जोखा दिया गया
  • शासन में मदद के लिए ढेरों जानकारियां इक्कट्ठा की गयीं
  • घटनाओं का अनवरत कालानुक्रमिक विवरण
  • अपरिहार्य स्त्रोत
  • तथ्यात्मक सूचनाओं का खजाना
  • मूल-पाठों का उद्देश्य – उन आशयों को संप्रेषित करना था जिन्हें मुग़ल शासक अपने क्षेत्र में लागू करना चाहते थे
  • इनसे झलक मिलती है – कैसे शाही विचारधाराएँ रची और प्रचारित की जाती थीं.

मुग़ल शासक और साम्राज्य

  • मुग़ल और तैमूर नाम
  • पहला तैमूर शासक बाबर चंगेज खान का सम्बन्धी था
  • 16वीं शताब्दी में यूरोपियों ने शासकों का वर्णन करने के लिए मुग़ल शब्द का प्रयोग किया  | 
  • रडयार्ड किपलिंग की पुस्तक में युवा नायक मोगली

ज़हीरुद्दीन मुहम्मद उर्फ बाबर की उपलब्धियां

  • महज़ 12 वर्ष की आयु में फ़रगना घाटी का शासक बन गया।
  • बाबर कुषाणों के बाद ऐसा पहला शासक हुआ जिसने काबुल एवं कंधार को अपने पूर्ण नियंत्रण में रख सका।
  • भारत में अफ़ग़ान एवं राजपूत शक्ति को समाप्त कर ‘मुगल साम्राज्य’ की स्थापना की, जो लगभग 330 सालों तक चलता रहा।
  • हिंदुस्तान में पहली बार तुलगमा युद्ध नीति का प्रयोग बाबर ने किया।
  • हिंदुस्तान में पहली बार तोपखाने का प्रयोग बाबर ने किया
  • सड़कों की माप के लिए बाबर ने ‘गज़-ए-बाबरी’ के प्रयोग का शुभारम्भ किया।

नसीरुद्दीन हुमायूँ (1530-40, 1555-56)

हुमायूँ एक मुगल शासक था। प्रथम मुग़ल सम्राट बाबर का पुत्र नसीरुद्दीन हुमायूँ था। यद्यपि उन के पास साम्राज्य बहुत साल तक नही रहा, पर मुग़ल साम्राज्य की नींव में हुमायूँ का योगदान है।

  • जन्म की तारीख और समय: 6 मार्च 1508, काबुल, अफ़ग़ानिस्तान
  • मृत्यु की जगह और तारीख: 27 जनवरी 1556, दिल्ली
  • दफ़नाने की जगह: हुमायूँ का मकबरा, नई दिल्ली
  • बच्चे: अकबर, बख्शी बानो बेगम, ज़्यादा
  • पत्नी: माह चुचक बेगम (विवा. 1546), हमीदा बानो बेगम (विवा. 1541–1556), बेगा बेगम (विवा. 1527–1556)
  • माता-पिता: बाबर, महम बेगम
  • भाई: कामरान मिर्ज़ा, गुलबदन बेगम, ज़्यादा

जलालुद्दीन अकबर (1556-1605)

  • साम्राज्य का विस्तार, सुदृढीकरण किया
  • हिन्दुकुश पर्वत तक सीमाओं का विस्तार किया
  • सफाविओं और उज्बेकों की विस्तारवादी योजनाओं पर लगाम लगाया

जहाँगीर (1605-27)

  • शाह जहाँ पाँचवे मुग़ल शहंशाह था। शाह जहाँ अपनी न्यायप्रियता और वैभवविलास के कारण अपने काल में बड़े लोकप्रिय रहे। किन्तु इतिहास में उनका नाम केवल इस कारण नहीं लिया जाता। शाहजहाँ का नाम एक ऐसे आशिक के तौर पर लिया जाता है जिसने अपनी बेग़म मुमताज़ बेगम के लिए विश्व की सबसे ख़ूबसूरत इमारत ताज महल बनाने का यत्न किया।
  • जन्म की तारीख और समय: 5 जनवरी 1592, लाहौर, पाकिस्तान
  • मृत्यु की जगह और तारीख: 22 जनवरी 1666, आगरा फोर्ट, आगरा
  • दफ़नाने की जगह: ताज महल, आगरा
  • पत्नी: इज़्ज़-उन-निस्सा (विवा. 1617–1666), ज़्यादा
    बच्चे: औरंगज़ेब, जहाँनारा बेग़म, दारा सिकोह, ज़्यादा
  • दादा या नाना: अकबर, मरियम उज़-ज़मानी, मारवाड़ के उदय सिंह,

शाहजहाँ (1628-58)

  • शाह जहाँ पाँचवे मुग़ल शहंशाह था। शाह जहाँ अपनी न्यायप्रियता और वैभवविलास के कारण अपने काल में बड़े लोकप्रिय रहे। किन्तु इतिहास में उनका नाम केवल इस कारण नहीं लिया जाता। शाहजहाँ का नाम एक ऐसे आशिक के तौर पर लिया जाता है जिसने अपनी बेग़म मुमताज़ बेगम के लिए विश्व की सबसे ख़ूबसूरत इमारत ताज महल बनाने का यत्न किया।
  • जन्म की तारीख और समय: 5 जनवरी 1592, लाहौर, पाकिस्तान
  • मृत्यु की जगह और तारीख: 22 जनवरी 1666, आगरा फोर्ट, आगरा
  • दफ़नाने की जगह: ताज महल, आगरा
  • पत्नी: इज़्ज़-उन-निस्सा (विवा. 1617–1666), ज़्यादा
  • बच्चे: औरंगज़ेब, जहाँनारा बेग़म, दारा सिकोह, ज़्यादा
    दादा या नाना: अकबर, मरियम उज़-ज़मानी, मारवाड़ के उदय सिंह,

औरंगजेब (1658-1707)

  • मुहिउद्दीन मोहम्मद, जिन्हें आम तौर पर औरंगज़ेब या आलमगीर के नाम से जाना जाता था, भारत पर राज करने वाला छठा मुग़ल शासक था। उसका शासन 1658 से लेकर 1707 में उनकी मृत्यु तक चला। औरंगज़ेब ने भारतीय उपमहाद्वीप पर आधी सदी के लगभग समय तक राज किया। वो अकबर के बाद सबसे अधिक समय तक शासन करने वाला मुग़ल शासक था।
  • जन्म की तारीख और समय: 3 नवंबर 1618, दाहोद
  • मृत्यु की जगह और तारीख: 3 मार्च 1707, भिंगर, अहमदनगर
  • दफ़नाने की जगह: टॉम्ब ऑफ़ मुघल एम्पेरोर औरंगज़ेब आलमगीर, खुल्दाबाद
  • बच्चे: बहादुर शाह प्रथम, मुहम्मद अकबर, ज़्यादा
  • पत्नी: नवाब बाई (विवा. 1638–1691), ज़्यादा
  • किताबें: फ़तवा-ए-आलमगीरी
  • माता-पिता: शाह जहाँ, मुमताज़ महल

औरंगजेब की मृत्यु के बाद

  • 1707 में औरंगजेब की मृत्यु हुई
  • राजनीतिक शक्तियां घटने लगीं
  • राजधानी नगरों से नियंत्रित विशाल साम्राज्य की जगह क्षेत्रीय शक्तियों ने अधिक स्वायतत्ता अर्जित की
  • अंतिम वंशज बहादुर शाह जफ़र 1857

Class 12th History Chapter 14 Important Question Answer 1 Marks विभाजन को समझना राजनीति, स्मृति, अनुभव

प्रश्न 1. 1878 ई. के अधिनियम के विरुद्ध भारतीयों ने अपना रोष क्यों प्रकट किया ?
उत्तर : 1878 ई. के वर्नाक्यूलर प्रेस एक्ट में भारतीय भाषाओं में छपने वाले समाचार पत्रों पर प्रतिबंध लगा दिया गया। भारतीय जनता ने इसका डटकर विरोध किया क्योंकि भारतीयों को लगा कि जैसे उनकी भावनाओं का गला घोंटा जा रहा था अतः उनके व्यापक रोष और विरोध को देखकर विवश होकर 1882 ई. में लार्ड रिपन को यह एक्ट वापस लेना पड़ा।

प्रश्न 2. कैबिनेट मिशन को भारत में कब और क्यों भेजा गया ?
उत्तर : कैबिनेट मिशन को मार्च 1946 में निम्नलिखित उद्देश्यों से भारत भेजा गया।
(i) मुस्लिम लीग की पाकिस्तान की माँग का अध्ययन करने के लिए।
(ii) भारत के लिए एक उचित रूप-रेखा सुझाने के लिए।

प्रश्न 3. अंतर्राष्ट्रीय घटनाओं ने किस प्रकार भारतीय राष्ट्रवाद को प्रोत्साहन दिया ? दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर : 1. भारत का राष्ट्रवादी आंदोलन इस बात से भी प्रभावित हुआ कि एशिया और दूसरे भागों में भी विश्वयुद्ध के बाद राष्ट्रवादी आंदोलन सक्रिय हो रहे थे ।
2.रूसी क्रांति के प्रभाव से भी राष्ट्रवादी आंदोलन को बहुत बल मिला। इस प्रकार जनता को लगा कि यदि निहत्थे किसान और मजदूर अपने यहाँ के अत्याचारियों के विरुद्ध क्रांति कर सकते हैं तो परतंत्र राज्यों की जनता भी अपनी स्वतंत्रता के लिए लड़ सकती है।

प्रश्न 4. कांग्रेस ने मुस्लिम लीग के संयुक्त प्रांतों में कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाने के प्रस्ताव को क्यों ठुकरा दिया ? दो कारण दीजिए।
उत्तर : (i) संयुक्त प्रांत में मुस्लिम लीग कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार की स्थापना करनी चाहती थी लेकिन कांग्रेस ने अपना संपूर्ण बहुमत होने के कारण लीग की इस माँग को ठुकरा दिया।
(ii) कांग्रेस के इस नजरिये से लीग के सदस्यों के मन में यह भय पैदा हो गया कि यदि भारत अविभाजित रहा तो मुसलमानों के हाथ में राजनीतिक सत्ता कभी नहीं आ पाएगी।

प्रश्न 5. मौलाना अबुल कलाम आजाद की अध्यक्षता में कांग्रेस ने 1940 में व्यक्तिगत सत्याग्रह क्यों प्रारंभ किया?
उत्तर : कांग्रेस चाहती थी कि ब्रिटिश सरकार उसे आश्वासन दे दे कि जैसे ही दूसरा विश्व युद्ध समाप्त होगा वह भारत को स्वतन्त्रता दे देगी। इसीलिए गाँधी जी ने व्यक्तिगत नागरिक अवज्ञा आन्दोलन 17 अक्टूबर, 1940 को शुरू किया। विनोबा भावे पहले सत्याग्रही थे। सरकार ने लगभग 30 हजार सत्याग्रहियों को पकड़ा और कैद में डाल दिया। ऐसे प्रमुख नेताओं में सरोजनी नायडू, अरुणा आसफ अली, मियाँ इतीखार-उद्दीन और सी.सी राज गोपालाचार्य प्रमुख थे। गाँधी जी बड़े पैमाने पर सत्याग्रह चलाकर ब्रिटिश सरकार को एक नाजुक स्थिति के समय बड़ी मुसीबत में डालकर परोक्ष रूप से फासिस्ट देशों की मदद करना नहीं चाहते थे।

प्रश्न 6. मुस्लिम लीग ने क्रिप्स पस्तावों को स्वीकार क्यों नहीं किया ?
उत्तर : मुस्लिम लीग ने क्रिप्स मिशन प्रस्तावों को इसीलिए ठुकरा दिया क्योंकि लीग की प्रमुख माँग पाकिस्तान के निर्माण का कहीं जिक्र नहीं था।

प्रश्न 7. अंग्रेजी शिक्षा भारतवासियों के लिए किस प्रकार से एक छिपा हुआ वरदान साबित हुई ?
उत्तर : 1. अंग्रेजी भाषा ने भारतीयों के लिए नये साहित्य, विज्ञान, गणित तथा तकनीकी विषयों से संबंधित पुस्तकों तथा ज्ञान के द्वार खोल दिए।
2.अंग्रेजी शिक्षा ने भारतीयों में राष्ट्रीय स्वाभिमान, राष्ट्रीय चेतना तथा प्रबुद्धता जगाने में योगदान दिया।

प्रश्न 8. इतिहास के मौखिक स्रोतों का किन्हीं दो बिंदुओं के आधार पर महत्त्व बताओ।
उत्तर : (i) मौखिक स्रोतों में हमें लोगों के अनुभवों तथा स्मृतियों को बारीकी से समझने का मौका मिलता है।
(ii) इससे इतिहासकारों को बहुरंगी तथा सजीव वृत्तांत लिखने में सहायता मिलती है।

प्रश्न 9. प्रेस ने किन दो तरीकों से भारत में राष्ट्रीय जागृति को बढ़ाने में सहायता की थी ?
उत्तर : 1. प्रेस ने ब्रिटिश सरकार की जनविरोधी नीतियों और प्रतिक्रियावादी दृष्टिकोण को जनता के सामने खोलकर रख दिया।
2.इससे सर्वसाधारण सचेत हो गया| राष्ट्रीय स्वाभिमान, सम्मान, राष्ट्रभक्ति और बलिदान भावना से पूर्ण जनमत तैयार हो गया। यह सारा चमत्कार प्रेस का ही था।

प्रश्न 10. जिन्ना का ‘द्विराष्ट्र सिद्धांत’ क्या था ? यह किस तरह दृष्टि मिथ्या सिद्ध हुआ ?
उत्तर : जिन्ना का कहना था कि हिंदू और मुसलमान दो अलग-अलग राष्ट्र है। इसलिए वे एक साथ नहीं रह सकते। उनके लिए अलग-अलग राज्य होने चाहिएँ परन्तु धर्म आधारित यह सिद्धांत 1971-72 में बाँग्लोदश की स्थापना से मिथ्या सिद्ध हुआ।

प्रश्न 11. 1920 तथा 1930 के दशकों में कौन-से मुद्दे हिंदुओं तथा मुसलमानों के बीच तनाव का कारण बने?
उत्तर : मुसलमानों को “मस्जिद के सामने संगीत” गौ-रक्षा आंदोलन और आर्य समाज के शुद्धि के प्रयास (अर्थात् कि नव मुसलमानों को फिर से हिंदू बनाना) जैसे मुद्दों पर क्रोध आया। दूसरी ओर हिंदू 1923 के बाद मुसलमानों के तबलीग ( प्रचार) और तंजीम (संगठन) के विस्तार से उत्तेजित हुए।

प्रश्न 12. क्रिप्स मिशन कब भारत आया ? क्रिप्स वार्ता क्यों भंग हो गई ?

अथवा

1942 में भारत में क्रिप्स मिशन की असफलता के किन्हीं दो कारणों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर : क्रिप्स मिशन मार्च, 1942 में भारत आया। यह वार्ता इसलिए भंग हो गई क्योंकि सरकार युद्ध के बाद भी भारत को स्वाधीनता का वचन देने के लिए तैयार न थी। क्रिप्स ने कांग्रेस का यह प्रस्ताव भी ठुकरा दिया था कि युद्ध के बाद एक राष्ट्रीय सरकार बनाई जाए।

प्रश्न 13. सन् 1947 में भारत-विभाजन के दो कारण बताइए।
उत्तर : (i) भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन को कमजोर बनाने के लिए अंग्रेज सरकार ने हिन्दू-मुस्लिम में फूट डाली, जिसका परिणाम देश का विभाजन था।
(ii) 1945 में ब्रिटेन में बनी मजदूर-दल की सरकार द्वारा भारतीयों को स्वतंत्रता दिलाने के लिए वचन दिया गया था। विभाजन का प्रश्न भी स्वतंत्रता के साथ जुड़ा हुआ था।

प्रश्न 14. मुस्लिम लीग ने पाकिस्तमान की माँग को अमलीजामा पहनाने के लिए (प्रत्यक्ष कार्यवाही ) क्यों फैसला किया ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर : 1906 ई. में मुसलमानों ने मुस्लिम लीग नामक संस्था की स्थापना भी कर ली। फलस्वरूप हिंदू-मुस्लिम भेदभाव बढ़ने लगा। मुस्लिम लीग ने मुस्लिम समाज में सांप्रदायिकता फैलानी आरंभ कर दी। 1940 ई तक हिंदू-मुस्लिम भेदभाव इतना बढ़ गया कि मुसलमानों ने अपने लाहौर प्रस्ताव में पाकिस्तान की माँग की।
मुस्लिम लीग की माँगें दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही थीं और कांग्रेस इन्हें स्वकार करती रही। 1916 ई. के लखनऊ समझौते क अनुसार कांग्रेस ने सांप्रदायिक चुनाव प्रणाली को स्वीकार कर लिया। कांग्रेस की इस कमजोर नीति का लाभ उठाते हुए मुसलमानों ने देश के विभाजन की माँग करनी आरंभ कर दी। पाकिस्तान की माँग मनवाने के लिए मुस्लिम लीग ने ‘सीधी कार्यवाही’ आरंभ कर दी और सार देश में सांप्रदायिक दंगे होने लगे। इन दंगों को केवल भारत-विभाजन द्वारा ही रोका जा सकता था।

प्रश्न 15. ऐसा कहना क्यों सही नहीं होगा कि बँटवारा केवल सीधे-सीधे बढ़ते हुए सांप्रदायिक तनावों के कारण से हुआ ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर : पृथक चुनाव क्षेत्रों की व्यवस्था में मुसलमान अपने चुनाव क्षेत्रों में अपने प्रतिनिधि चुनने को स्वतंत्र थे। इस व्यवस्था में राजनीतिज्ञों को यह लालच रहता था कि वे सामुदायिक नगरों का प्रयोग करें और अपने धार्मिक समुदाय के व्यक्तियों को लाभ पहुँचाएँ। इस प्रकार आधुनिक राजनैतिक व्यवस्था में धार्मिक अस्मिताओं का सक्रिय प्रयोग होने लगा। चुनावी राजनीति इन अस्मिताओं को अधिक गहरा और मजबूत बनाने लगी। अब धार्मिक अस्मिताएँ समुदायों के बीच बढ़ रहे इन विरोधों के कारण बन गई। यद्यपि भारतीय राजनीति पर पृथक चुनाव क्षेत्रों एवं सांप्रदायिक तनावों का काफी प्रभाव पड़ा तो भी हमें यह नहीं मानना चाहिए कि बँटवारा इन्हीं की देन है और इन्होंने बँटवारा कराया।

प्रश्न 16. भारतीय राष्ट्रवादियों और साम्प्रदायिकता वादियों की राजनीति में आधारभूत अन्तर क्या था ?
उत्तर : 1. हिन्दुओं के बीच हिन्दू महासभा जैसे साम्प्रदायिक संगठनों के बीच अस्तित्व के कारण मुस्लिम लीग के प्रचार को और बल मिला।
2.हिन्दू एक अलग राष्ट्र है और भारत हिन्दुओं का देश है, यह कहकर हिन्दू साम्प्रदायिकतावादियों ने मुस्लिम साम्प्रदायिकतावादियों की बात दोहराई। इस तरह भारत में उन्होंने भी दो राष्ट्रों के सिद्धान्त को मान लिया।

प्रश्न 17. 1947 के अंत तक (पंजाब में) कानून व्यवस्था का नाश हो चुका था। कोई दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर : 1. पूरा अमृतसर जिला रक्तपात में डूबा हुआ था परंतु अंग्रेज़ अफसरों को सूझ नहीं पा रहा था कि स्थिति को कैसे संभाला जाए।
2.भारतीय सिपाही तथा पुलिस वाले हिंदू, मुसलमान या सिख के रूप में आचरण करने लगे थे।

प्रश्न 18. 1940 के दशक की कोई सी चार भारतीय इतिहास से जुड़ी घटनाओं का उल्लेख कीजिए ।
उत्तर : (क) देश में तीव्रता से साम्प्रदायिकता का विकास। (ख) ब्रिटिश सरकार की द्वितीय विश्व युद्ध में भारत को घसीटने के विरुद्ध विनोबा भावे के नेतृत्व में सत्याग्रह का प्रारंभ।(ग) आजाद हिन्द फौज का (घ) भारत छोड़ो आंदोलन।

प्रश्न 19. भारत विभाजन का लोगों की जिन्दगी पर पड़े प्रभाव का उल्लेख कीजिए।
उत्तर : भारत विभाजन की (14-15 अगस्त, 1947) वजह से लाखों लोग उजड़ गए, शरणार्थी बनकर रह गए। उनको अपनी रेशा-रेशा जिन्दगी नए सिरे से बुननी पड़ी।

प्रश्न 20. 1940 का पाकिस्तान का प्रस्ताव, अस्पष्ट क्यों था ? कोई दो कारण लिखिए।
उत्तर : (i) मुस्लिम लीग के 1940 वाले प्रस्ताव की पृष्ठभूमि में मुसलमानों के दिल में सांप्रदायिकता और अल्पसंख्यक होने के कारण पूर्णतया अविश्वास बैठा हुआ था। मुस्लिम लीग के नेता यह मानते थे कि भारत में एक नहीं दो राष्ट्र हैं – हिंदू और मुस्लिम। इनकी संस्कृति तथा धर्म पूर्णतया अलग-अलग हैं। मुसलमानों के हित तभी सुरक्षित रह सकते हैं जब देश का विभाजन हो और पाकिस्तान का निर्माण हो ।
(ii) इस प्रस्ताव के पीछे मोहम्मद इकबाल की घृणा, अविश्वास और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के उस छात्र की भावना कार्य कर रही थी जिसने सबसे पहले ब्रिटेन में पाकिस्तान शब्द का प्रयोग किया था।

प्रश्न 21. 1909 में मुसलमानों के लिए बनाए गए पृथक चुनाव क्षेत्रों के सांप्रदायिक राजनीति पर पड़े कोई दो प्रभाव बताओ।
उत्तर : (i) पृथक चुनाव क्षेत्रों के कारण मुसलमान विशेष चुनाव क्षेत्रों से अपने प्रतिनिधि चुन सकते थे।
(ii) इस व्यवस्था से राजनेता सांप्रदायिक नारे लगाकर अपना पक्ष मजबूत बनाने लगे।

प्रश्न 22. ‘सारे जहाँ से अच्छा हिंदोस्ताँ हमारा’ के लेखक का नाम लिखिए। उन्होंने अपने 1930 के अध्यक्षीय भाषण में मुस्लिम लीग से क्या कहा ?
उत्तर : I. उर्दू कवि मोहम्मद इकबाल।
II. पाकिस्तान निर्माण की आवाज : कुछ लोगों का मानना है कि पाकिस्तान के गठन की माँग उर्दू कवि मोहम्मद इकबाल से शुरू होती है जिन्होंने “सारे जहाँ से अच्छा हिंदोस्ताँ हमारा” लिखा था। 1930 में मुस्लिम लीग के अधिवेशन में अध्यक्षीय भाषण देते हुए उन्होंने एक “उत्तर-पश्चिमी भारतीय मुस्लिम राज्य” (NWF Muslim Province) की जरूरत पर जोर दिया था।

प्रश्न 23. उर्दू कवि मोहम्मद इकबाल का ‘उत्तर पश्चिमी मुस्लिम राज्य’ से क्या आशय था ?
उत्तर : 1930 में मुस्लिम लीग के अधिवेशन में अध्यक्षीय भाषण देते हुए मोहम्मद इकबाल ने एक “उत्तर- पश्चिमी भारतीय 14 मुस्लिम राज्य” की आवश्यकता पर बल दिया था, परन्तु इस भाषण में इकबाल एक नए देश के उदय पर नहीं बल्कि पश्चिमोत्तर भारत में मुस्लिम-बहुल इलाकों को भारतीय संघ के भीतर एक स्वायत्त इकाई की स्थापना पर जोर दे रहे थे।

प्रश्न 24. आत्मकथाओं के अध्ययन में इतिहासकारों को पेश आने वाली किन्हीं दो समस्याओं का वर्णन कीजिए।
उत्तर : (i) आत्मकथाएँ लेखक अपनी स्मृति के आधार पर लिखता है। वह जो बातें भूल चुका होता है, उन्हें अनदेखा कर दिया जाता है।
(ii) आत्मकथा का लेखक प्रायः लोगों के सामने अपनी छवि को स्वच्छ दिखाने का प्रयास करता है। उसकी त्रुटियाँ इतिहासकारों से छिपी रह जाती हैं।

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