1 अंकीय प्रश्न उत्तर – विचारक, विश्वास और इमारतें सांस्कृतिक विकास – Class12th History Chapter 4

Index

1. ईंट मनके और अस्थियाँ

1. आरंभ 2. निर्वाह के तरीके 3. मोहनजोदड़ो 4. सामाजिक विभिन्नताओं का अवलोकन 5. शिल्प उत्पादन के विषय में जानकारी 6. माल प्राप्त करने सम्बन्धी नीतियाँ 7. मुहरें लिपि तथा बाट 8. प्राचीन सभ्यता 9. सभ्यता का अंत 10. हड़प्पा सभ्यता की खोज 11. अतीत को जोड़कर पूरा करने की समस्याएं मानचित्र बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर 1 अंकीय प्रश्न उत्तर 2 अंकीय प्रश्न उत्तर

2. राजा किसान और नगर

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

3. बंधुत्व जाति और वर्ग

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

4. विचारक विश्वास और इमारतें

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर 1 बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर 2

6. भक्ति सूफी और परम्पराएँ

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

7. एक साम्राज्य की राजधानी विजयनगर

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

8. उपनिवेशवाद और देहात

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

10. उपनिवेशवाद और देहात

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

11. विद्रोह और राज

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

13. महात्मा गाँधी और आन्दोलन

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

15. संविधान का निर्माण

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

प्रश्न 1. दो जटिल यज्ञों के नाम बताओ। इन्हें कौन करते थे और क्यों ?
उत्तर : राजसूय तथा अश्वमेध जटिल यज्ञ थे। इनके अनुष्ठान के लिए कई-कई ब्राह्मण और पुरोहितों पर निर्भर रहना पड़ता था। इसलिए इन्हें केवल राजा तथा बड़े-बड़े सरदार ही करवाते थे।

प्रश्न 2. ईसा पूर्व 600 से ईसा संवत् 600 तक के कालांश से समर्थन श्रेष्ठ विचारकों के नाम लिखिए।
उत्तर : (i) ईरान में जरथुस्ट्र (Zarathustra)। (ii) कोंग जि, चीन में। (iii) सुकरात, प्लेटो एवं अरस्तू. यूनान में। (iv) वर्धमान महावीर एवं गौतम बुद्ध भारत में।

प्रश्न 3. बुद्ध ने अच्छे आचरण एवं मूल्यों पर बल क्यों दिया ?
उत्तर : बुद्ध का मानना है कि समाज का निर्माण मनुष्यों ने किया था न कि ईश्वर ने। इसीलिए उन्होंने राजाओं और गृहपतियों को दयावान और आचारवान होने की सलाह दी। बुद्ध के अनुसार व्यक्ति प्रयास से सामाजिक परिवेश को बदला जा सकता है। यही कारण था कि बुद्ध ने अच्छे आचरण एवं मूल्या पर बल दिया।

प्रश्न 4. तीन देवी-देवताओं के नाम लिखिए जिसका उल्लेख ऋग्वेद में 1000 ई. से 1500 ई. पू. के बीच किया गया है।
उत्तर : ।. अग्नि, 2. इंद्र तथा 3. सोम।

प्रश्न 5. भाग्यवादियों तथा भौतिकवादियों के प्रमुख भेदों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर : भाग्यवादी उनको कहा जाता है जो ये विश्वास करते कि सब कुछ निर्धारित है जो जिसके भाग्य में है वह उसे समय आने पर अवश्य मिलेगा। वे ईश्वर को भाग्यविधाता मानते हैं। दूसरी ओर भौतिकवादी उन लोगों को कहा जाता है जो आँखों के समक्ष दुनिया को ही यथार्थ मानते हैं वे ‘खाओ-पियो और मौज उड़ाओ’ की संस्कृति में विश्वास रखते हैं। भारत जैसे देश में अधिकांश लोग भौतिकवादी हैं जबकि पश्चिमी देशों में ज्यादातर लोग भौतिकवादी होते हैं।

प्रश्न 6. जैन धार्मिक ग्रंथों के विद्वानों द्वारा प्रयोग की गई तीन भाषाओं के नाम लिखिए।
उत्तर : (i) प्राकृत, (ii) संस्कृत, (iii) तमिल।

प्रश्न 7. उन देशों एवं क्षेत्रों के नाम लिखिए जहाँ पर बुद्ध का संदेश फैला।
उत्तर : बुद्ध का संदेश भारत से भूटान, वर्तमान, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, कोरिया, जापान, श्रीलंका, और इंडोनेशिया, चीन आदि में फैला। म्यानमार, थाइलैंड

प्रश्न 8. इस आकृति में दिखाई गई प्रतिमा के विषय में कुछ वाक्य लिखिए।
उत्तर : ये प्रतिमा आंध्र प्रदेश के अमरावती से प्राप्त हुई है। इसमें भगवान बुद्ध को महल छोड़ते हुए दिखाया गया है। इसका निर्माण आज से 200 ई. पूर्व का बना हुआ है। कुछ लोगों द्वारा इसे भगवान बुद्ध के उपरांत लगभग 400 वर्ष के बाद के समय की प्रतिमा मानी जाती है।

प्रश्न 9. किन्हीं चार जगहों के नाम लिखिए जहाँ पर इस महाद्वीप में स्तूप मिलते हैं ?
उत्तर : (i) साँची (मध्य प्रदेश), (ii) मरुद (मध्य प्रदेश), (iii) अमरावती (आंध्र प्रदेश), (iv) शाह-जी-की-डेरी (पिशावर में) अब पाकिस्तान में है।

प्रश्न 10. बुद्ध के समर्थक किन चार सामाजिक वर्गों से आए? उल्लेख कीजिए।
उत्तरः बुद्ध के समर्थक निम्न सामाजिक वर्गों से आए थे।
(i) राजवंश या शासक वर्ग, (ii) समाज के धनी वर्ग के लोग, (i) गृहपति या बड़े भूपति, (iv) सामान्य ज्ञान वर्ग के लोग, (v) कर्मकार, शिल्पी-लोग और दास।

प्रश्न 11. वैदिक काल में देवताओं की उपासना रीति क्या थी ?
उत्तर : उपासना रीति थी-स्तुति पाठ करना और यज्ञ बलि (चढ़ावा) अर्पित करना। ऋग्वैदिक काल में स्तुति पाठ पर अधिक जोर दिया जाता था। स्तुतिपाठ सामूहिक भी होता था और व्यक्तिगत तौर पर अलग-अलग भी इन्द्र और अग्नि समस्त जन द्वारा दी गई बलि ग्रहण करने के लिए बुलाए जाते थे।

प्रश्न 12. तीर्थंकर का क्या अर्थ है ?
उत्तर : महावीर से पूर्व जैन धर्म के जो 23 धर्मगुरु हुए थे, उन्हें तीर्थंकर के नाम से जाना जाता है। महावीर जैन धर्म के 24वें तीर्थकर सर्वाधिक प्रसिद्ध गुरु माने जाते हैं।

प्रश्न 13, ‘निर्वाण’ शब्द से क्या तात्पर्य है ?
उत्तर : बौद्ध धर्म में ‘निर्वाण’ शब्द का अर्थ है-मुक्ति पाना, मोक्ष या जीवन-मरण के बन्धनों से छुटकारा पाना। बौद्ध धर्म में मोक्ष या निर्वाण प्राप्त करना जीवन का मुख्य उद्देश्य माना जाता है।

प्रश्न 14. ‘जिन’ शब्द से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर : जैन पौराणिक गाथाओं में ‘जिन’ शब्द का अर्थ है-महान विजयी, महावीर स्वामी को ‘जिन’ का नाम दिया गया है, क्योंकि उन्होंने सुख और दु:ख पर विजय प्राप्त कर ली थी।

प्रश्न 15. ‘अहिंसा’ शब्द से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर : किसी भी जीवित पशु-पक्षी एवं मानव को कोई भी हानि न पहुँचाना अहिंसा कहलाता है। जैन मत के अनुसार तो निर्जीव पदार्थ को आहत करना अथवा कष्ट पहुँचाना भी हिंसा और कष्ट न पहुँचाना अहिंसा है। जैन एवं बौद्ध धर्म के सिद्धांतों में अहिंसा का बहुत अधिक महत्त्व है।

प्रश्न 16. ‘संघ नामक पद का आशय स्पष्ट करें।
उत्तर : बौद्धों के धार्मिक संगठन को ‘संघ’ के नाम से जाना जाता है। बौद्ध संघों में भिक्षु और भिक्षुणियाँ दोनों रहते थे, परन्तु उन्हें आचरण में शुद्धता लानी पड़ती थी। उन्हें विलासमय जीवन से दूर रहना पड़ता था और आजीवन विवाह नहीं करना होता था।.

प्रश्न 17. ‘धर्म’ से क्या अभिप्राय है ?
उत्तर : धर्म या धम्म एक ही शब्द के पर्यायवाची हैं। जो धर्म आर्यों के लिए अर्थ रखता था, वही धम्म का अर्थ बौद्ध धर्म के अनुयायियों के लिए है अर्थात् पूजा – पाठ करना, मूर्तियों पर जल चढ़ाना, हवन, यज्ञादि करना, ईश स्तुति करना, किसी जीव को कष्ट न पहुँचाना, दूसरे धर्मों को हानि न पहुँचाना, सबकी भलाई करना आदि।

प्रश्न 18. आप ‘जातक’ के संबंध में क्या जानते हैं ?

अथवा

जातकों की विषय-वस्तु का उल्लेख कीजिए। वह क्या दर्शाते हैं ?
उत्तर : जातक कथाओं में महात्मा गौतम बुद्ध के पूर्व जन्मों कथाएँ संकलित हैं। ये कथाएँ पालि भाषा में हैं। इनमें तत्कालीन धार्मिक, सामाजिक और आर्थिक चित्रण मिलते हैं। SN जातकों का बौद्ध साहित्य में विशेष महत्त्व है। इन कहानियों से में पता चलता है कि महात्मा बुद्ध जाति प्रथा एवं ब्राह्मणों को उच्च स्थान दिये जाने के विरुद्ध थे और क्षत्रियों को ब्राह्मणों से अच्छा मानते थे। काशी, कौशल तथा मगध राज्यों की प्रसिद्ध घटनाओं का विवरण भी जातक कथाओं में मिलता है। जातक कथाएँ अपना धार्मिक और ऐतिहासिक महत्त्व रखती हैं।

प्रश्न 19. बौद्ध और जैन सम्प्रदायों को धार्मिक सुधार आन्दोलन क्यों कहा जाता है ?
उत्तर : जैन तथा बौद्ध मत के प्रमुख सिद्धांतों का अध्ययन करने से यह स्पष्ट होता है कि महावीर स्वामी और महात्मा बुद्ध किसी नये धर्म के प्रवर्तक नहीं थे। वे तो सुधारक थे, जो हिन्दू धर्म की त्रुटियों को दूर करना चाहते थे। हिन्दू धर्म में उन दिनों अनेक आडम्बर, जातिवाद, छुआछूत, ऊँच-नीच की भावना विद्यमान थी। उसमें धार्मिक अनुष्ठान, कर्मकाण्ड एवं पशु बलि की प्रथा थी। जैन धर्म और बौद्ध धर्म ने उसमें सुधार लाने के अथक प्रयास किये। ये धर्म, हिन्दू धर्म के सामने चुनौती बनकर खड़े हो गये। इन दोनों में आडम्बर, कर्मकाण्ड, जातिवाद, छुआछूत, ऊँच-नीच और हिंसा की भावना नहीं थी। अत: इन दोनों सम्प्रदायों को धार्मिक सुधार आंदोलन कहा जाता है।

प्रश्न 20, चैत्य’ क्या है ? स्पष्ट करें।
उत्तर : बौद्ध मन्दिरों को ‘चैत्य’ के नाम से जाना जाता था। कार्ले नामक स्थान पर एक विशाल चैत्य (बौद्ध मन्दिर) है। इस विशाल चैत्य के दोनों ओर सजे हुए स्तम्भों की पंक्तियाँ हैं|

प्रश्न 21, ‘विहार’ से आप क्या समझते हैं?
उत्तर : बौद्ध मठों को विहार कहा जाता था। विहारों में बौद्ध भिक्षु वर्षा ऋतु में रहते थे नासिक (महाराष्ट्र राज्य) में ऐसे तीन विहार मिले हैं।

प्रश्न 22, जैन धर्म के सिद्धांत भारतीय चिंतन परंपरा को कैसे प्रभावित करते हैं ?
उत्तर : (i) जैन दर्शन की सबसे महत्त्वपूर्ण अवधारणा यह है कि सारा संसार सजीव है। इसके अनुसार पत्थर, चट्टान और जल में जीवन होता है। (i) जीवों के प्रति अहिंसा जैन दर्शन का केंद्र बिंदु है। इसके अनुसार जीवों विशेषकर मनुष्यों, जानवरों, पेड़-पौधों और कीड़े-मकोड़ों को नहीं मारना चाहिए। नि: संदेह जैन मत के अहिंसा के इस सिद्धांत ने संपूर्ण भारतीय चिंतन-परंपरा को प्रभावित किया है।

प्रश्न 23. ‘स्तूप’ शब्द का क्या अर्थ है ?
उत्तर : महात्मा गौतम की अस्थियों पर अर्द्ध गोलाकार रूप में बने भवनों को स्तूप के नाम से जाना जाता है। साँची और अमरावती के स्तूप विश्व भर में प्रसिद्ध हैं।

प्रश्न 24. दक्षिण के चालुक्यों के राज्य में धार्मिक स्थिति की दो प्रमुख विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर : चालुक्य राजा हिन्दू धर्म के अनुयायी थे, परन्तु उनमें धार्मिक सहनशीलता की भावना थी वे बौद्ध तथा जैन विद्वानों का भी आदर करते थे तथा उन्हें आर्थिक मदद देते थे। चालुक्य राजाओं के शासनकाल में हिन्दू धर्म बहुत उन्नति पर था। बौद्ध-धर्म का पतन हो रहा था किन्तु धर्म पर्याप्त उन्नति पर था।

प्रश्न 25. नियतिवादियों तथा भौतिकवादियों में क्या अंतर था ?
उत्तर : नियतिवादी आजीविक परंपरा के थे। उनके अनुसार जीवन में सब कुछ पूर्व निर्धारित है। इसे बदला नहीं जा सकता। इसके विपरीत भौतिकवादी उपदेशक लोकायत परंपरा के थे वे दान, दक्षिणा, चढ़ावा आदि देने को खोखला झूठ और मूखों का सिद्धांत मानते थे। वे जीवन का भरपूर आनंद लेने में विश्वास रखते थे।

प्रश्न 26. एन.बी.पी. फेज या ‘उत्तरी काला पॉलिशदार अवस्था’ से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर : एन.बी.पी. अवस्था या उत्तरी काला पालिशदार अवस्था (Northern Black Polished Ware)का प्रारंभ पुरातत्त्व की दृष्टि से छठी शताब्दी ई.पू. में हुआ था। जैसा कि ‘उत्तरी काला पालिशदार अवस्था’ नाम से स्पष्ट है कि यह एक प्रकार का चिकना, पालिश किया हुआ चमकदार बर्तन होता है। धनी लोगों द्वारा इसमें भोजन किया जाता था। एन. बी. पी. अवस्था में धातु मुद्रा का चलन हो गया था। भारत में दूसरे नगरवाद का जन्म ए. बी. पी. अवस्था के साथ ही हुआ।

प्रश्न 27, बुद्ध की उपस्थिति को प्रतीकों द्वारा किस प्रकार दिखाया गया ? इस संबंध में तीन उदाहरण दीजिए।

उत्तर : 1. रिक्त स्थान बुद्ध के ध्यान की दशा का प्रतीक था।
2.स्तूप उनके महापरिनिब्बान (महानिर्वाण) के प्रतीक था
3.चक्र उनके द्वारा सारनाथ में दिए गए पहले उपदेश का प्रतीक था।

प्रश्न 28. ‘ग्रामिक’ पद का आशय क्या है ?
उत्तर : बुद्ध-कला में ग्राम प्रधान को ‘ग्रामिक’ कहा जाता था। कई स्थानों पर उसे ग्राम मालिका भी कहा जाता था। वह गाँव का मुखिया होता था और गाँव में होने वाले झगड़ों का फैसला करता था। उसकी नियुक्ति राजा द्वारा की जाती थी।

प्रश्न 29. साँची से प्राप्त कमल दल तथा हाथियों के बीच एक महिला की मूर्ति के बारे में इतिहासकारों में क्या मतभेद हैं ?
उत्तर : कुछ इतिहासकार इस महिला को बुग की माँ माया बताते हैं तो कुछ अन्य इतिहासकारों के अनुसार वह एक लोकप्रिय देवी गजलक्ष्मी है। गजलक्ष्मी सौभाग्य लाने वाली एक देवी थी जिन्हें प्रायः हाथियों के साथ जोड़ा जाता है।

प्रश्न 30. ‘महापात्र’ पद का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर : महात्मा गौतम बुद्ध के जमाने में राजा की सहायता के लिए अनेक छोटे-बड़े अधिकारी होते थे। इनमें से कुछ उच्च अधिकारियों को महापात्र कहते थे।

प्रश्न 31. ‘बलिसाधक’ शब्द के विषय में आप क्या जानते हैं ?
उत्तर : वैदिक काल में ‘बलि’ उस धनराशि को कहा जाता था जिसे कबीले वाले स्वेच्छा से अपने मुखिया को देते थे। बुद्ध काल में यह धनराशि सभी के लिए अनिवार्य कर दी गई। इस धनराशि को एकत्र करने वाले को ‘बलिसाधक’ कहा जाता था।

प्रश्न 32, बौद्धिक स्तूपों को “पत्थर में गढ़ी कथाएँ” क्यों कहा जाता है ? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर : (i) कला इतिहासकारों को बौद्ध मूर्तिकला का समझने के लिए बुद्ध के चरित्र-लेखन का सहारा लेना पड़ा चिंतन करते हुए ज्ञान प्राप्ति हुई। कई प्रारंभिक मूर्तिकारों ने बुद्ध को मानव रूप में ने दिखाकर उनकी उपस्थिति प्रतीकों के माध्यम से दर्शाने का प्रयास किया है। (i) इन मूर्तिकलाओं में पेड़ का तात्पर्य केवल एक पेड़ नहीं था वरन् वह बुद्ध के जीवन की एक घटना का प्रतीक था। अत: ऐसे प्रतीकों को समझने के लिए यह आवश्यक है कि इतिहासकार कलाकृतियों के निर्माताओं की परंपराओं को भी जानें।

प्रश्न 33. बुद्धकालीन गणतंत्रीय व्यवस्था के विषय में आप क्या जानते हैं ?
उत्तर : बुद्धकालीन भारत में पूर्वी उत्तर प्रदेश तथा बिहार के कुछ क्षेत्रों में गणतंत्रीय व्यवस्था थी। इनके शासन पर सभा या परिषद का नियंत्रण होता था। इन गणतंत्रों की अपनी-अपनी सेना होती थी। बड़े-बड़े कबीलों के लोग राजा होते थे, जो उनके गणतंत्र में स्थापित सभा के सदस्य होते थे। कुछ ऐसी भी सेनाएँ होती थीं, जिनमें ब्राह्मणों को नहीं रखा जाता था। शासन में प्रायः गुलामों और मजदूरों का कोई स्थान नहीं होता था।

प्रश्न 34. विवेचन करें कि ईसा की छठी सदी से चौथी सदी तक नगरीकरण के कौन-कौन से कारण थे?
उत्तर : (i) बुद्ध काल में बड़े-बड़े राज्य अस्तित्व में आ चुके थे इस प्रकार उनकी राजधानियाँ देखते ही देखते बड़े नगरों में परिवर्तित हो गईं।
(ii) सिक्कों के आविष्कार ने जो व्यापार को प्रोत्साहन दिया. उसके कारण भी अनेक व्यापारिक केन्द्र, बड़े-बड़े नगरों में बदल गये। ये नगर प्रायः नदियों के किनारे बसे होते थे और दूसरे नगरं से सम्बन्धित होते थे। अत: व्यापार को भी नगरीकरण ने प्रोत्साहन दिया।
(iii) कुछ स्थान औद्योगिक इकाइयों के रूप में भी उभरे और देखते-देखते ही नगरों में परिवर्तित होते चले गये।

प्रश्न 35. बुद्ध का जन्म कहाँ हुआ ? उनकी कोई तीन शिक्षाएँ लिखें।
उत्तर : महात्मा बुद्ध बौद्ध धर्म के संस्थापक थे। व कपिलवस्तु के निकट लुंबिनी वन में पैदा हुए। उनकी शिक्षाएँ निम्नलिखित हैं
(1) संसार दु:खों का घर है। इन सभी दु:खों का कारण लालसाएँ हैं।
(2) आत्म-संयम अपना कर लालसाओं से छुटकारा मिल सकता है।

प्रश्न 36. बौद्ध धर्म के चार आर्य सत्य कौन-से हैं ?
उत्तर : बौर धर्म के चार आर्य सत्य इस प्रकार हैं
(1) संसार दु:खों का घर है
(2) इन दु:खों का कारण तृष्णा अथवा लालसा है
(3) अपनी लालसाओं का दमन करने पर ही दुःखों से छुटकारा मिलता है और मनुष्य निर्वाण प्राप्त कर सकता है।
(4) तुष्णा के दमन के लिए मनुष्य को अष्ट मार्ग पर चलना चाहिए।

प्रश्न 37. ज्ञान प्राप्त करने के लिए सिद्धार्थ ने क्या किया? ज्ञान प्राप्त करने के पश्चात् वे किस नाम से जाने गए?
उत्तर: ज्ञान प्राप्त करने के लिए सिद्धार्थ ने निश्चय किया कि वे महल को छोड़कर सत्य की खोज करने के लिए संयास का रास्ता अपनायेंगे। सिद्धार्थ ने साधना के लिए बहुत से तरीकों को अपनाया। उन्होंने अपने शरीर को अधिक से अधिक कष्ट दिया। फिर उन्होंने इन तरीकों को त्याग दिया और कई दिनों तक ध्यान करते हुए अंत में उन्हें ज्ञान की प्राप्ति हुई। ज्ञान प्राप्ति के बाद उन्हें महात्मा बुद्ध के नाम से जाना गया।

प्रश्न 38, ‘काम’ का क्या अर्थ है? स्पष्ट करें।
उत्तर : ‘काम’ का अर्थ है-शारीरिक सुख भोग। स्त्री-पुरुष . के समागम को अथवा रति-क्रिया को ‘काम’ कहते हैं। शारीरिक सुख-भोग का विवेचन ‘कामशास्त्र’ में किया गया है।

प्रश्न 39. ‘धर्म’ से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर : ‘धर्म’ का अर्थ है-सामाजिक नियम व्यवस्था, यहाँ धर्म का अर्थ पूजा-अर्चना से नहीं है। राज्य और समाज को सुव्यवस्थित बनाने वाली विधि (कानून) धर्मशास्त्र का विषय है।

प्रश्न 40. ‘मोक्ष’ से आप क्या समझते हैं?
उत्तर : ‘मोक्ष’ मुख्यतः दर्शन सम्बन्धी ग्रंथों का विषय है, जिसका अर्थ है-जन्म और मृत्यु के चक्र से उद्धार अर्थात् जन्म और मृत्यु के चक्र (आवागमन) से मुक्ति (छुटकारा) । मोक्ष प्राप्ति का उपदेश गौतम बुद्ध ने भी दिया था, परन्तु बाद में कई ब्राह्मण-पंथी दार्शनिकों ने इसका भिन्न अर्थ बताकर मार्ग प्रशस्त किया।

प्रश्न 41. जातकों की विषय-वस्तु का उल्लेख कीजिए। वे क्या दर्शाते हैं ?
उत्तर : जातकों में जानवरों की कई कहानियाँ दी गई हैं। इन्हें मनुष्यों के गुणों के प्रतीक के रूप में प्रयोग किया गया है। जातक वास्तव में महात्मा बुद्ध के पूर्व-जन्म (बोधिसत्वों) की कहानियाँ हैं।

प्रश्न 42, दर्शन के सम्प्रदाय कितने और कौन-कौन से है ?
उत्तर : दर्शन के छः सम्प्रदाय हैं- 1. सांख्य, 2. योग, 1. न्याय, 4. वैशेषिक, 5. मीमांसा, 6. वेदान्त।

प्रश्न 43. साँची के स्तूप का क्या महत्त्व है ? कोई दो बिंदु लिखिए।
उत्तर : (1) साँची का स्तूप प्राचीन भारत की अद्भुत स्थापत्य कला का शानदार नमूना है।
(2) यह बौद्ध धर्म का महत्त्वपूर्ण केंद्र रहा है। इसकी खोज से आरंभिक बौद्ध धर्म के बारे में हमारी समझ में महत्त्वपूर्ण परिवर्तन आए।

प्रश्न 44. बर्मा (म्यनमार) और श्रीलंका ने बौद्ध धर्म के लिए क्या किया ?

उत्तर : (i) बर्मा के लोगों ने बौद्ध के थेरवाद को विकसित किया और महात्मा बुद्ध की प्रार्थना के लिए अनेक मंदिर और मूर्तियाँ बनवाई।
(ii) श्रीलंका और बर्मा के बौद्धों ने प्रचुर मात्रा में बौद्ध या साहित्य की रचना की, जो भारत में दुर्लभ था।
(iii) श्रीलंका में सारे पालि मूल ग्रंथ एकत्र किये गये और उन पर टीकाएँ लिखी गई।

प्रश्न 45, कनिष्क के शासनकाल में धर्म प्रचारक कहाँ-कहाँ और क्यों गये ?
उत्तर : कनिष्क के शासनकाल में भारतीय धर्म प्रचारक चीन, मध्य-एशिया और अफगानिस्तान जाकर बौद्ध धर्म का उपदेश देते थे चीन से बौद्ध धर्म कोरिया और जापान पहुँचा।

प्रश्न 46. हम बुद्ध की शिक्षाओं के बारे में कैसे जानते हैं? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर : (i) बुद्ध की शिक्षाओं को ‘सुत्त पिटक’ में वर्णित कहानियों के आधार पर पुनर्निर्मित किया गया है। यद्यपि कुछ कहानियों में उनकी अलौकिक शक्तियों का जिक्र है तथापि अन्य कथाओं में अलौकिक शक्तियों के स्थान पर बुद्ध ने लोगों को विवेक तथा तर्क के आधार पर समझाने की कोशिश की है।
(ii) बौद्ध दर्शन के अनुसार विश्व अनित्य है तथा निरंतर बदल रहा है। यह आत्माविहीन है क्योंकि यहाँ कुछ भी स्थायी नहीं है।
(iii) इस क्षणभंगुर विश्व में दुःख मनुष्य के जीवन का अंतर्निहित तत्व है। मनुष्य दुनिया के दु:खों से घोर तपस्या तथा विषयासक्ति के मध्य मार्ग अपनाकर मुक्ति पा सकता है।
(iv) बौद्ध धर्म की प्रारंभिक परंपराओं में ईश्वर का होना या न होना अप्रासंगिक था। बुद्ध का मत था कि समाज की रचना व्यक्तियों के द्वारा की गई है, न कि ईश्वर के द्वारा।
(v) बुद्ध ने जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति, आत्म-ज्ञान तथा निर्वाण हेतु व्यक्ति केंद्रित हस्तक्षेप तथा सम्यक कर्म की कल्पना की थी।

प्रश्न 47. बौद्ध भिक्षुओं की जीवनचर्या कैसी थी ?
उत्तर : (1) बौद्ध भिक्षु सादा जीवन व्यतीत करते थे।
(2) वे दान पर निर्भर रहते थे और भोजन दान पाने के लिए वे अपने पास केवल एक कटोरा रखते थे।

प्रश्न 48. बौद्ध संघ की संचालन पद्धति कैसी थी ?
उत्तर : बौद्ध संघ की संचालन पद्धति गणों तथा संघों की परंपरा पर आधारित थी। इसके अनुसार लोग किसी निर्णय पर आपसी बातचीत द्वारा एकमत होने का प्रयास करते थे। यदि ऐसा नहीं हो पाता था तो मतदान द्वारा निर्णय लिया जाता था।

प्रश्न 49. पिटक कितने हैं ? उनके नाम और विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर : पिटक-तीन हैं-सुतपिटक, विनयपिटक एवं अभिधम्मपिटक। इससे इन्हें त्रिपिटक के नाम से गौतम बुद्ध के गया में निर्वाण प्राप्त करने के बाद इनकी रचना पुकारा जाता है। की गई। सुतपिटक में महात्मा बुद्ध के उपदेश संकलित किए गए हैं। विनयपिटक में बौद्ध संघ के नियमों का उल्लेख है और अभिधम्मपिटक में बौद्ध दर्शन (philosophy) का विवेचन है।

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