Index

1. ईंट मनके और अस्थियाँ

1. आरंभ 2. निर्वाह के तरीके 3. मोहनजोदड़ो 4. सामाजिक विभिन्नताओं का अवलोकन 5. शिल्प उत्पादन के विषय में जानकारी 6. माल प्राप्त करने सम्बन्धी नीतियाँ 7. मुहरें लिपि तथा बाट 8. प्राचीन सभ्यता 9. सभ्यता का अंत 10. हड़प्पा सभ्यता की खोज 11. अतीत को जोड़कर पूरा करने की समस्याएं मानचित्र बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर 1 अंकीय प्रश्न उत्तर 2 अंकीय प्रश्न उत्तर

2. राजा किसान और नगर

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

3. बंधुत्व जाति और वर्ग

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

4. विचारक विश्वास और इमारतें

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर 1 बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर 2

6. भक्ति सूफी और परम्पराएँ

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

7. एक साम्राज्य की राजधानी विजयनगर

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

8. उपनिवेशवाद और देहात

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

10. उपनिवेशवाद और देहात

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

11. विद्रोह और राज

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

13. महात्मा गाँधी और आन्दोलन

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

15. संविधान का निर्माण

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

Class 12th History Chapter 7 Important Question Answer 3 Marks एक साम्राज्य की राजधानी : विजयनगर

प्रश्न 1, पिछली दो शताब्दियों में हम्पी के भवनावशेषों के अध्ययन में कौन-सी पद्धतियों का प्रयोग किया गया है? आपके अनुसार ये पद्धतियाँ विरुपाक्ष मंदिर के पुरोहितों द्वारा प्रदान की गई जानकारी का किस प्रकार पूरक रही?
उत्तर : पिछली दो शताब्दियों में हम्पी के भवनावशेषों के अध्ययन में कई पद्धतियों का इस्तेमाल किया गया| सबसे पहले इस स्थान पर पहला सर्वेक्षण मानचित्र तैयार किया। आरम्भिक जानकारियाँ विरूपाक्ष मंदिर तथा पम्पा-देवी के पूजास्थल के पुरोहित की स्मृतियों पर आधारित थीं। 1856 ई. में छाया चित्रकारों ने यहाँ के भवनों के चित्र संकलित करने आरम्भ किए जिससे शोधकर्ताओं को उनका अध्ययन करने में मदद मिले। इसके अतिरिक्त दर्जनों अभिलेखों को इकट्ठा किया गया। फिर इन स्रोतों को विदेशी यात्रियों से प्राप्त विवरणों तथा तेलुगु, कन्नड़, तमिल और संस्कृत में लिखे गए साहित्य से मिलाया गया और फिर इसका अध्ययन किया गया।

प्रश्न 2. विजयनगर की जल-आवश्यकताओं को किस प्रकार पूरा किया जाता था ?
उत्तर : विजयनगर की जल-आवश्यकताओं को मुख्य रूप से तुंगभद्रा नदी द्वारा निर्मित एक प्राकृतिक कुण्ड से जाता था। यह नदी उत्तर-पूर्व दिशा में बहती है। इस कुंड के पूरा किया आस-पास ग्रेनाइट की पहाड़ियाँ हैं। ये पहाड़ियाँ शहर से चारों ओर करघनी का निर्माण करती सी प्रतीत होती हैं। इन पहाड़ियों से अनेक जल-धाराएँ निकलकर नदी में जा मिलती हैं। करीब-करीब सभी धाराओं के साथ-साथ बाँध बनाकर भिन्न-भिन्न आकारों के हौज बनाए गए थे ऐसे सबसे महत्वपूर्ण होजों में एक कमलपुरम् जलाशय का निर्माण पंद्रहवीं शताब्दी के आरम्भिक वर्षों में कराया गया था। इस हौज के पानी से आस-पास के खेतों को सींचने के साथ-साथ इसे एक नहर के माध्यम से ‘राजकीय केन्द्र’ तक भी ले जाया गया था। हिरिया नहर जो उस समय के सबसे महत्त्वपूर्ण जल संबंधी संरचनाओं में से एक है, के खंडहरों को आज भी देखा जा सकता है। इस नहर में तुंगभद्रा पर बने बांध के द्वारा पानी लाया जाता था और इसे ‘धार्मिक केन्द्र’ से ‘शहरी केन्द्र’ को अलग करने वाली घाटी को सिंचित करने में प्रयोग किया जाता था। इस नहर का निर्माण संभवतः संगम वंश के राजाओं द्वारा करवाया गया था।

प्रश्न 3. शहर (विजयनगर ) के किलेबंद क्षेत्र में कृषि क्षेत्र को रखने के आपके विचार में क्या फायदे और नुकसान थे?
उत्तर : शहर के किलेबन्द क्षेत्र में कृषि क्षेत्र को रखने का मुख्य उद्देश्य प्रतिपक्ष को खाद्य सामग्री से वंचित कर समर्पण के लिए बाध्य करना होता था। इस प्रकार की घेराबंदियाँ कई महीनों और यहाँ तक कि कई वर्षों तक चल सकती थीं। सामान्यत: ऐसी परिस्थितियों से निपटने के लिए शासकों द्वारा किलेबंद क्षेत्रों के भीतर ही विशाल अन्नागारों का निर्माण करवाया था। विजयनगर के शासकों ने पूरे कृषि भूभाग को शत्रुता से बचाने के लिए एक अधिक महँगी और व्यापक नीति को अपनाया था। इस प्रकार के किलेबंदी का मुख्य नुकसान था उसके निर्माण पर होने वाला खर्च जो बहुत महँगा होता था। दूसरे, कठिन परिस्थितियों में यह किसानों के लिए असुविधाजनक थी।

प्रश्न 4. आपके विचार में महानवमी डिब्बा से संबद्ध अनुष्ठानों का क्या महत्त्व था ?
उत्तर : महानवी डिब्बा से संबंध अनुष्ठानों का विशेष महत्त्व था। इस अवसर पर जो धर्मानुष्ठान होते थे, उनमें मूर्ति की पूजा, राज्य के अश्व की पूजा तथा भैंसों और अन्य जानवरों की बलि देना शामिल था। इस अवसर के मुख्य आकर्षणों में नृत्य, कुश्ती प्रतिस्पर्धा तथा साज लगे घोड़ों, हाथियों तथा रथों और सैनिकों की शोभायात्रा और साथ ही प्रमुख नायकों और अधीनस्थ राजाओं द्वारा राजा और उसके अतिथियों को दी जाने वाल औपचारिक भेंट शामिल थे। इन उत्सवों के गहन सांकेतिक अर्थ थे। त्योहार के अंतिम दिन राजा द्वारा अपनी तथा अपने नायकों की सेना का खुले मैदान में आयोजित भव्य समारोह में निरीक्षण किया जाता था इस अवसर पर नायक राजा को बड़ी मात्रा में भेंट देते थे।

प्रश्न 5. कमल महल और हाथियों के अस्तबल जैसे भवनों का स्थापत्य हमें उनके बनवाने वाले शासकों के विषय में क्या बताता है ?
उत्तर : शाही केन्द्र के सबसे सुंदर भवनों में एक कमल महल है। वैसे तो इस भवन का निर्माण किस कार्य के लिए किया गया था इसकी जानकारी इतिहासकारों को भी नहीं है, परंतु सभवतः यह परिषदीय सदन था जहाँ राजा अपने परामर्शदाताओं से मिलता था। इसी प्रकार कला का नमूना माना जा सकता है। इसी प्रकार हाथियों के अस्तबल चित्र में देखने के बाद एक आदर्श भवन निर्माण कला का नमूना माना जा सकता है। इसको हाथियों के लिए ही प्रयोग किया जाता था इसमें आज तक संदेह है। कमल महल तथा उसके नजदीक हाथियों के अस्तबल की स्थापत्य कला इण्डो-इस्लामिक तकनीकों से प्रभावित थीं। विजयनगर के शासक इस शैली में महलों और भवनों का निर्माण करवाते थे और उन पर विशाल धन राशि खर्च करते थे। उनका मानना था कि इन महलों की भव्यता उनके गौरव तथा प्रतिष्ठता को भव्य बनाएगी।

प्रश्न 6. स्थापत्य की कौन-कौन सी परंपराओं ने विजयनगर के वास्तुविदों को प्रेरित किया ? उन्होंने इन परंपराओं में किस प्रकार बदलाव किए ?

अथवा

किन्हीं दो स्थापत्य परम्पराओं का उल्लेख कीजिए जिन्होंने विजयनगर के वास्तुविदों को प्रेरित किया। उन्होंने इन परम्पराओं का मंदिर स्थापत्य में किस प्रकार प्रयोग किया? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर : विजयनगर के शासकों ने प्रचलित परंपराओं को अपनाया। उन्होंने उन्हें नया रूप दिया और विकसित किया। अब राजकीय प्रतिकृति मूर्तियाँ मंदिरों में प्रदर्शित की जाने लगीं और राजा द्वारा मंदिरों की यात्राओं को महत्त्वपूर्ण राजकीय अवसर माना जाने लगा। इन यात्राओं में साम्राज्य के महत्वपूर्ण नायक भी राजा के साथ जाते थे।
स्थापत्य में नए तत्व : वियजनगर के शासकों के अधीन मंदिर स्थापत्य में कई नए तत्वों का समावेश हुआ।
(1) इनमें विशाल स्तर पर बनाई गई संरचनाएँ शामिल हैं। ये संरचनाएँ राजकीय सत्ता की प्रतीक थीं। इनका सबसे अच्छा उदाहरण राय गोपुरम् अथवा राजकीय प्रवेश द्वार थे। इन प्रवेश द्वारों के सामने केंद्रीय देवालयों की मीनारें बहुत ही छोटी जान पड़ती थीं। इन्हें देखकर लंबी दूरी से ही मंदिर के होने का संकेत मिल जाता था। ये संभवत: शासकों की शक्ति की याद भी दिलाते थे, जो इतनी ऊँची मीनारों के निर्माण के लिए आवश्यक साधन, तकनीक तथा कौशल जुटाने में सक्षम थे।
(2) मंदिरों के अन्य विशेष लक्षण मंडप तथा लंबे स्तंभों वाले गलियारे थे। ये गलियारे मंदिर परिसर में स्थित देवस्थलों के चारों ओर बने थे।
(3) विरुपाक्ष मंदिर के निर्माण में सैंकड़ों वर्ष लगे थे। अभिलेखों से पता चलता है कि यहाँ का सबसे प्राचीन मंदिर नवी-दसवीं शताब्दियों का था परंतु विजयनगर साम्राज्य का स्थापना के बाद इसका बहुत अधिक विस्तार किया गया था। मुख्य मंदिर के सामने बना मंडप कृष्णदेव राय ने अपने राज्यारोहण के उपलक्ष्य में बनवाया था। इसे सुंदर नक्काशी वाले स्तंभों से सजाया गया था। पूर्वी गोपुरम् के निर्माण का श्रेय भी उसे ही दिया जाता है। इसका अर्थ था कि केंद्रीय देवालय पूरे परिसर के एक छोटे से भाग तक ही सीमित रह गया था।
(4) मंदिर में सभागार बनाए गए। इनका प्रयोग भिन्न-भिन्न कार्यों के लिए होता था। कुछ सभागारों में देवताओं की मूर्तियाँ संगीत, नृत्य और नाटकों के विशेष कार्यक्रमों को देखने के लिए रखी जाती थीं। अन्य सभागारों का प्रयोग देवी-देवताओं के विवाह के उत्सव पर आनंद मनाने के लिए होता था। कुछ अन्य में देवी-देवताओं को झूला झुलाया जाता था। इन अवसरों पर विशेष मूर्तियों का प्रयोग होता था जो छोटे केंद्रीय देवालयों में स्थापित मूर्तियों से भिन्न होती थीं। दूसरा प्रसिद्ध देवस्थल विठ्ठल मंदिर है। यहाँ के प्रमुख देवता विठ्ठल थे। उन्हें महाराष्ट्र में पूजे जाने वाले विष्णु का एक रूप माना जाता है। इस देवता की पूजा का कर्नाटक में आरंभ वियजनगर के शासकों द्वारा एक साम्राज्यिक संस्कृति के निर्माण का प्रतीक है। अन्य मंदिरों की तरह इस मंदिर में भी कई सभागार हैं। इसमें रथ के आकार का एक अनूठा मंदिर भी है।
(5) मंदिर परिसरों की एक महत्त्वपूर्ण विशेषता रथ गलियाँ हैं जो मंदिर के गोपुरम् से सीधी रेखा में जाती हैं। इन गलियों का फर्श पत्थर के टुकड़ों से बनाया गया था। इनके दोनों ओर स्तंभ वाले मंडप थे जिनमें व्यापारी अपनी दुकानें लगाया करते थे। कुछ सबसे दर्शनीय गोपुरमों का निर्माण स्थानीय नायकों द्वारा भी किया गया था।
(6) मंदिर स्थापत्य के अतिरिक्त किलेबंदियों, जल-आपूर्ति के लिए बनाए गए हौजों, नहरों तथा सड़कों के निर्माण में भी नए तत्वों का समावेश हुआ। वास्तुविदों ने मेहराबों तथा गुंबदों के निर्माण में इस्लामी शैली को स्थानीय स्थापत्य शैली का पुट दिया। इस प्रकार इंडो-इस्लामिक शैली का विकास हुआ।

प्रश्न 7. अध्याय के विभिन्न विवरणों से आप विजयनगर के सामान्य लोगों के जीवन की क्या छवि पाते हैं?
उत्तर : अध्याय के विभिन्न विवरणों से विजयनगर के सामान्य लोगों की जीवन शैली की बहुत कम जानकारी मिलती है हैं। अब तक जो साक्ष्य प्राप्त हुए हैं, उनसे यह पता चलता कि वे सुखी जीवन व्यतीत करते थे लेकिन स्थापत्य तत्वों के परीक्षण हमें यह नहीं बताते कि सामान्य पुरुष-महिलाएँ तथा बच्चे शहर और उसके आस-पास के क्षेत्र में रहने वाली जनसंख्या का। एक बड़ा भाग थे, इन प्रभावशाली भवनों के बारे में क्या सोचते थे। सामान्य लोगों के आवासों, जो अब अस्तित्व में नहीं है, के 16 वीं शताब्दी का पुर्तगाली यात्री बारबोसा इस प्रकार वर्णन करा है- “लोगों के अन्य आवास छप्पर के हैं, पर फिर भी सुदृड हैं व्यवसाय के आधार खुले स्थानों वाली लम्बी गलियों व्यवस्थित हैं।” संभवत: सामान्य लोग जल के प्रति सावधान रहने थे और इसके लिए उन्होंने कुएँ, वर्षा के पानी वाले जलाशय और मंदिर के जलाशय की व्यवस्था की। शहरों में व्यापार बहुत समूह था और वहाँ के बाजार मसालों, वस्त्रों तथा रत्नों से भरे होते थे। इससे प्रतीत होता है कि शहर की जनता समृद्ध थी और विदेशों से महँगे सामान मँगाती थी। सामान्य लोगां की जीविका का मुख्य साधन कृषि था। विजयनगर के लोग बहुत ही धार्मिक थे। समो स्थलों से मंदिरों के अवशेषों का मिलना इस तथ्य की पुष्टि करता है। ये लोग विशेष रूप से पम्पादेवी और विरुपाक्ष की पूजा करते थे। लोग भोजन में चावल, गेहूँ, मकई, जौ, दालें, फल और सब्जी, मांस आदि खाते थे। बाजार में विभिन्न प्रकार के जानवर एवं उनके माँस बिकते थे।

प्रश्न 8. विश्व के सीमारेखा मानचित्र पर इटली. पुर्तगाल, ईरान तथा रूस को सन्निकटता से अंकित कीजिए उन मार्गों को पहचानिए जिनका प्रयोग पाठ्यपुस्तक पृ. पर उल्लिखित यात्रियों ने विजयनगर पहुँचने के लिए किया था।
उत्तर : स्वयं अध्ययन कीजिए।
सहायक संकेत : दिए गए विश्व रेखिक मानचित्र में सही स्थानों पर निम्नलिखित देशों के नाम लिखिए/अंकित कीजिए
(i) इटली, (ii) पुर्तगाल, (iii) ईरान, (iv) रूस, (v) मोरक जिन यात्रियों ने इटली और पुर्तगाल से विजयनगर के लिए यात्रा शुरू की होगी तो उन्हें क्रमश: लाल सागर, हिंद महासा और अरब सागर होकर कालीकट पहुँचे होंगे। जो लोग स्थल मार्ग से आए होंगे वे ईरान से स्थल मार्ग होते हुए विध्या, सतपुड़ा पहाड़ियों को पार करके विजयनगर (वर्तमान कर्नाटक राज्य) में पहुँचे होंगे।
जो साहसी समुद्री यात्री वास्को-डि-गामा की तरह पूरी तरह जल मार्ग से चले होंगे उन्हें अटलांटिक महासागर पार करने के बाद अफ्रीका के दक्षिण किनारे गुडहोप का चक्कर लगाकर हिंद महासागर से मालाबार और वहाँ से स्थल मार्ग से विजयनगर शहर तक पहुंचे होंगे। कुछ उल्ल अब्द ईरन से चलने वाले साहसिक समुद्री यात्री अरब सागर से होकर हिंद महासागर से मालाबार, समुद्रतट से विजय नगर गए होंगे। रूस और ईरान से स्थल मार्ग होकर आने वाले लोग अफगानिस्तान और वहाँ से उत्तरी पश्चिमी सीमाओं से होकर मुल्तान, मुल्तान से दिल्ली और दिल्ली से सुदूर दक्षिण में विजय नगर पहुंचे होंगे।

प्रश्न 9, अपने आस-पास के किसी धार्मिक भवन को देखिए। रेखाचित्र के माध्यम से छत, स्तंभों, मेहराबों, यदि हों तो, गलियारों, रास्तों, सभागारों, प्रवेशद्वारों, जलआपूर्ति आदि का वर्णन कीजिए। इन सभी की तुलना विरुपाक्ष मंदिर के अभिलक्षणों से कीजिए। वर्णन कीजिए कि भवन का हर भाग किस प्रयोग में लाया जाता था। इसके इतिहास के विषय में पता कीजिए।
उत्तर : मैं दक्षिणी दिल्ली में रहता हूँ। हमारे पड़ोस में हिंदू धार्मिक मंदिर है। इस मंदिर की कुछ विशेषताओं को मैंने ध्यानपूर्वक समझा है।मंदिर वास्तुकला की विशेषताओं के संदर्भ में यह कहा जा सकता है कि कुछ नई विशेषताएँ विकसित होकर सामने आई जिनमें से इस मंदिर में भी गोपुरम दूर से ही दिखाई देता है। यह मंदिर के प्रमुख द्वार के बिल्कुल सामने, बीचों बीच स्थित केन्द्रीय गर्भग्रह (दरगाह) के ऊपर बना हुआ है जिसे दूर से देखने मात्र से मंदिर की जानकारी प्राप्त होती है। इस मंदिर की भी दक्षिण भारत के मंदिरों की तरह दूसरी विशेषता मण्डप है जो ऊँचे-ऊँचे स्तम्भों पर लम्बा, चौड़ा हाल बरामदा है। विजयनगर में बनाए गए दो मंदिर विरुपाक्ष मंदिर और विट्ठल मंदिर बहुत ही ऐतिहासिक प्रसिद्धि के मंदिर माने जाते हैं।

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