Index

1. ईंट मनके और अस्थियाँ

1. आरंभ 2. निर्वाह के तरीके 3. मोहनजोदड़ो 4. सामाजिक विभिन्नताओं का अवलोकन 5. शिल्प उत्पादन के विषय में जानकारी 6. माल प्राप्त करने सम्बन्धी नीतियाँ 7. मुहरें लिपि तथा बाट 8. प्राचीन सभ्यता 9. सभ्यता का अंत 10. हड़प्पा सभ्यता की खोज 11. अतीत को जोड़कर पूरा करने की समस्याएं मानचित्र बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर 1 अंकीय प्रश्न उत्तर 2 अंकीय प्रश्न उत्तर

2. राजा किसान और नगर

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

3. बंधुत्व जाति और वर्ग

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

4. विचारक विश्वास और इमारतें

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर 1 बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर 2

6. भक्ति सूफी और परम्पराएँ

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

7. एक साम्राज्य की राजधानी विजयनगर

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

8. उपनिवेशवाद और देहात

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

10. उपनिवेशवाद और देहात

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

11. विद्रोह और राज

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

13. महात्मा गाँधी और आन्दोलन

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

15. संविधान का निर्माण

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

Class 12th History Chapter 7 Important Question Answer 2 Marks एक साम्राज्य की राजधानी : विजयनगर

प्रश्न 1. एक साम्राज्य की राजधानी के रूप में विजयनगर पाम के उपयोग एवं साम्राज्य की स्थापना, फैलाव, पतन एवं हम्पी नाम के आविर्भाव का उल्लेख कीजिए।
उत्तर : (i)विजयनगर शब्द के दो उपयोग : विजयनगर विजयों का शहर” नामक शब्द एक शहर और एक साम्राज्य दोनों के लिए प्रयोग किया जाने वाला नाम था।
(ii) साम्राज्य की स्थापना, फैलाव और पतन : विजयनगर सामाज्य की स्थापना हरिहर और बुका दो भाइयों ने चौदहवीं शताब्दी में की थी। अपने चरमोत्कर्ष पर यह उत्तर में कृष्णा नदी पुरात में लेकर प्रायद्वीप के सुदूर दक्षिण तक फैला हुआ था। 1565 में मैकें इस पर आक्रमण कर इसे लूटा गया और बाद में यह उजड़ गया। हालांकि सत्रहवीं-अठारहवीं शताब्दियों तक यह पूरी तरह से विर विनष्ट हो गया था, पर फिर भी कृष्णा-तुंगभद्रा दोआब क्षेत्र के निवासियों को स्मृतियों में यह जीवित रहा।
(iii) लोगों ने इसे हम्पी नाम से याद रखा। इस नाम का आविर्भाव यहाँ की स्थानीय मातृदेवी पम्पादेवी के नाम से हुआ था। इन मौखिक परंपराओं के साथ-साथ पुरातात्विक खोजों, स्थापत्य के नमूनों, अभिलेखों तथा अन्य दस्तावेजों ने विजयनगर चशी साम्राज्य को पुनः खोजने में विद्वान की सहायता की।
(iv) अपने चरमोत्कर्ष पर यह उत्तर में कृष्णा नदी से लेकर वि प्रायद्वीप के सुदूर दक्षिण तक फैला हुआ था। 1565 में इस पर দুর आक्रमण कर इसे लूटा गया और बाद में यह उजड़ गया। हालांकि सत्रहवीं- अठारहवीं शताब्दियों तक यह पूरी तरह से नष्ट हो गया था, पर फिर भी कृष्णा-तुंगभद्रा दोआब क्षेत्र के निवासियों की महत स्मृतियों में यह जीवित रहा। उन्होंने इसे हम्पी नाम से याद रखा। इस नाम का आविर्भाव यहाँ की स्थानीय मातृदेवी पम्पादेवी के नाम से हुआ था। इन मौखिक परंपराओं के साथ-साथ पुरातात्विक खोजों, स्थापत्य के नमूनों, अभिलेखों तथा अन्य दस्तावेजों ने विजयनगर साम्राज्य को पुनः खोजने में विद्वानों की सहायता की।

प्रश्न 2: विजयनगर साम्राज्य में मंदिर स्थापत्य में प्रारंभ हुई विशेषताओं की व्याख्या गोरपुरम् तथा मंडपों के विशेष संदर्भ में कीजिए।
उत्तर : (i) मंदिर स्थापक के संदर्भ में कई नई बातें प्रकाश में आती हैं। इनमें विशाल स्तर पर बनाई गई संरचनाएँ जो राजकीय सत्ता की द्योतक थीं, शमिल हैं।
(ii) इनका सबसे सुंदर उदाहरण राम गोरपुरम अथवा राजकीय प्रवेश द्वार थे जो केन्द्रीय देवालयों की मीनारों को बौना दिखाते थे।
(iii) बहुत दूर से ही मंदिर के ऊँचा होने का संकेत देते थे। (iv) ये शासकों के शक्तिशाली होने का प्रतीक होते थे। (v) विशिष्टता लिए हुए मंडप तथा लंबे स्तंभ वाले गलियारे मंदिर परिसर में स्थित देवताओं के चारों ओर बने थे।

प्रश्न 3. हम्पी के भग्नावशेष किस प्रकार और कब प्रकाश में आए ? संक्षेप में स्पष्ट कीजिए।
उत्तर : हम्पी के भग्नावशेष 1800 ई० में एक अभियंता एवं पुराविद कर्नल कॉलिन मैकेंजी के प्रयत्नों से प्रकाश में आए। मैकेंजी ईस्ट इंडिया कंपनी में कार्यरत थे। उन्होंने इस स्थान का पहला सर्वेक्षण मानचित्र तैयार किया। उनकी आरंभिक जानकारियाँ विरुपाक्ष मंदिर तथा पंपादेवी के पूजास्थल के पुरोहितों की स्मृतियों पर आधारित थीं। 1856 ई० से छाया चित्रकारों ने यहाँ के स्मारकों के चित्र संकलित करने आरंभ किए जिससे शोधकर्ताओं को उनका अध्ययन करने में सहायता मिली। यहाँ तथा हम्पी के अन्य मंदिरों से कई दर्जन अभिलेखों को ही इकट्ठा किया गया। इतिहासकारों ने इन स्रोतों का विदेशी यात्रियों के वृत्तांतों तथा तेलुगू, कन्नड़, तमिल तथा संस्कृत में लिखे गए साहित्य से मिलान किया ताकि विजयनगर के इतिहास का पुनर्निर्माण किया जा सके। इन कार्यों से विरुपाक्ष मंदिर के पुजारियों द्वारा दी गई जानकारी की पुष्टि हुई।

प्रश्न 4. विरुपाक्ष मंदिर की किन्हीं पाँच विशेषताओं का वर्णन कीजिए।

अथवा

विजयनगर शासकों ने विरुपाक्ष मंदिर की एक विशिष्ट प्रकार की स्थापत्य कला में नवप्रवर्तन और विकास किस प्रकार प्रकट किया ? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर : विरुपाक्ष मंदिर की पाँच विशेषताएँ निम्नलिखित हैं: (i) विरुपाक्ष मंदिर का निर्माण अनेक शताब्दियों में किया गया था। यद्यपि अभिलेखों से विदित होता है कि सबसे प्राचीन मंदिर 9्रवीं तथा 10वीं शताब्दियों का था तथापि विजयनगर साम्राज्य की स्थापना के पश्चात् इसे और अधिक विस्तृत किया गया था।
(ii) मुख्य मंदिर के समक्ष बने मंडप का निर्माण कृष्णदेव राय द्वारा अपने राज्यारोहण के समय कराया गया था। इस मंडप को सूक्ष्मता से उत्कीर्णित स्तम्भों द्वारा सुसज्जित कराया गया था। कृष्णदेव राय के द्वारा ही सम्भवतः पूर्वी गोपुरम का निर्माण कराया गया था। इन समस्त परिवर्तनों से केंद्रीय देवालय समस्त परिवार के एक छोटे से हिस्से तक ही सीमित रह गया था।
(iii) विरुपाक्ष मंदिर के सभागारों का प्रयोग अनेक प्रकार क कार्यों के लिए किया जाता था। मंदिर में विशाल स्तर पर निर्मित संरचनाएँ राजकीय सत्ता की प्रतीक थीं। ये सम्भवतः शासकों की शक्ति का स्मरण कराती हैं।
(iv) विरुपाक्ष मंदिर के कुछ सभागारों में देवताओं की मूर्तियां संगीत नृत्य तथा नाटकों के विशेष कार्यक्रमों के अवलोकन हेतु रखी जाती थी।
(v) विरुपाक्ष मंदिर के अन्य सभागारों का प्रयोग देवी-देवताओं के विवाह के उत्सव पर आनंद मनाने हेतु तथा कुछ अन्य का प्रयोग देवी-देवताओं को झूला झुलाने के लिए किया जाता था। इन सभी अवसरों पर विशिष्ट मूर्तियों का प्रयोग किया जाता था जो छोटे केंद्रीय देवालयों में स्थापित मूर्तियाँ से अलग होती थीं। भी घेरा गया था। विजयनगर के शासकों द्वारा संपूण कृषि भू-भाग को बचाने के लिए एक अधिक महँगी तथा व्यापक नीति को अपनाया गया था। पेस सामान्य रूप से शहर का वर्णन, “विश्व के सबसे अच्छे संभरण वाले शहर” के तौर पर करता है, जहाँ बाजार चावल, गेहूँ, अनाज, भारतीय मकई तथा कुछ मात्रा में जौ तथा सेम, मूंग, दालें, काला चना जैसे खाद्य पदार्थों से भरे रहते थे।” फर्नाओ नूनिज के अनुसार, “विजय नगर के बाजार प्रचुर मात्रा में फलों, अंगूरों और संतरों, नींबू, अनार, कटहल तथा आम से भरे रहते थे और सभी बहुत सस्ते।”

प्रश्न 5. “विजयनगर और दक्षिण के सुल्तानों में विभिन्नताएँ और मतभेद होते हुए भी उनमें कुछ अच्छे संबंधों के प्रमाण भी मिलते हैं। वस्तुतः राम राय की जोखिम भरी नीति विजयनगर के पतन के लिए निर्णायक साबित हुई।” इस कथन पर टिप्पणी लिखिए।

उत्तर : (i) विजयनगर शहर के विध्वंस के लिए सुल्तानों की सेनाएँ उत्तरदायी थीं, फिर भी सुलतानों और रायों के संबंध धार्मिक भिन्नताएँ होने पर भी हमेशा या अपरिहार्य रूप से शत्रुतापूर्ण नहीं रहते थे। उदाहरण के लिए कृष्णदेव राय ने सल्तनतों में सत्ता के कई दावेदारों का समर्थन किया और ‘”यवन राज्य की स्थापना करने वाला” विरुद्ध धारण करके गौरव महसूस किया है।
(ii) बीजापुर के सुल्तान ने कृष्णदेव राय की मृत्यु के पश्चात् विजयनगर में उत्तराधिकार के विवाद को सुलझाने के लिए हस्तेक्षप किया।
(iii) वास्तव में विजयनगर शासक और सल्तनतें दोनों ही एक दूसरे के स्थायित्व को निश्चित करने की इच्छुक थीं।
(iv) यह रामराय की जोखिम भरी नीति थी, जिनके अनुसार उसने एक सुलतान को दूसरे के विरुद्ध करने की कोशिश की किंतु वे सुल्तान एक हो गए और उन्होंने उसे निर्णायक रूप से पराजित कर दिया।

प्रश्न 6, विजयनगर के संदर्भ में, जो भवन सुरक्षित रह गए वे हमें उन तरीकों, स्थान और उनके प्रयोग के बारे में .क्या बताते हैं? संक्षेप में वर्णन कीजिए।
उत्तर : (1) विजयनगर के सुरक्षित भवन हमें उन तरीकों के विषय में बताते हैं जिनमें स्थानों को व्यवस्थित किया गया और उन्हें प्रयोग में लाया गया।
(2) वे हमें यह भी बताते हैं कि उनका निर्माण किन वस्तुओं और तकनीकों से किया गया और कैसे किया गया। उदाहरण के लिए किसी शहर की किलेबंदी के अध्ययन से हम उसकी प्रतिरक्षण, आवश्यकताओं और सामरिक तैयारी को समझ सकते हैं।
(3) यदि हम उनकी तुलना अन्य स्थानों के भवनों से करें तो वे हमें विचारों के प्रसार और सांस्कृतिक प्रभावों के बारे में भी बताते हैं। वे उन विचारों को व्यक्त करते हैं जो उन्हें बनाने वाले या प्रश्रयदाता व्यक्त करना चाहते थे।
(4) वे प्रायः ऐसे चिह्नों से परिपूर्ण रहते हैं जो उनके सांस्कृतिक संदर्भ का परिणाम होते हैं। इन्हें हम तभी समझ सकते हैं जब हम उनके संबंध में अन्य स्रोतों, जैसे साहित्य, अभिलेखों तथा लोक प्रचलित परंपराओं से मिली जानकारी को संयोजित करें|

प्रश्न 7. विजयनगर शहर के विषय में खोज कार्य में किन-किन लोगों और विवरण कारों के वृत्तांत उल्लेखनीय हैं। यह एक विशाल शहर था। इस संबंध में डोमिगो पेस द्वारा लिखे गए एक विवरण का अंश लिखिए।

उत्तर : (i) विजयनगर शहर के विषय में खोज, विजयनगर के राजाओं तथा उनके नायकों के बड़ी संख्या में अभिलेख मिले हैं जिनमें मंदिरों को दिए जानेवाले दानों उल्लेख तथा महत्त्वपूर्ण घटनाओं का विवरण है। कई यात्रियों ने शहर की यात्रा की और इसके बारे में लिखा। इनमें सबसे उल्लेखनीय वृत्तांत निकोलो दे कॉन्ती नामक इतालवी व्याप अब्दुर रज्जाक नामक फ़ारस के राजा का दूत, अफ़ानासी । निकितिन नामक रूस का एक व्यापारी, जिन सभी ने पंद्रहवी शताब्दी में शहर की यात्रा की थी, और दुआर्ते बारबोसा, डोमिंग पेस तथा पुर्तगाल का फर्नावो नूनिज़, जो सभी सोलहवीं में आए थे, के हैं। शताब्दी का
(ii) विजयनगर एक विशाल शहर था, डोमिगो पेस द्वारा लिखे गए वृत्तांत का एक अंश इस शहर का परिमाप मैं यहाँ नहीं लिख रहा हूँ क्योंकि यह एक स्थान से पूरी तरह नहीं देखा जा सकता, पर मैं एक पहाड़ पर चढ़ा जहाँ से में इसका एक बड़ा भाग देख पाया। मैं इसे पूरी तरह से नहीं देख पाय क्योंकि यह कई पर्वत श्रृंखलाओं के बीच स्थित है। वहाँ से मैं| जो देखा वह मुझे रोम जितना विशाल प्रतीत हुआ और देखने में अत्यंत सुन्दर; इसमें पेड़ों के कई उपवन हैं, आवासों के बगीचों म तथा पानी की कई नालियाँ जो इसमें आती हैं, तथा कई स्थानों पर झीलें हैं; तथा राजा के महल के समीप ही खजूर के पेड़ों का बगीचा तथा अन्य फल प्रदान करने वाले वृक्ष थे।

प्रश्न 8. विजयनगर के धार्मिक केन्द्र में मंदिर निर्माण के महत्त्व का वर्णन कीजिए।
उत्तरः (i) मंदिर स्थापत्य के संदर्भ में इस समय तक कई नए तत्व प्रकाश में आते हैं। इनमें विशाल स्तर पर बनाई गई संरचनाएँ जो राजकीय सत्ता की द्योतक थीं, शामिल हैं। इनका सबसे अच्छा उदाहरण राय गोपुरम् अथवा राजकीय प्रवेशद्वार थे जो अक्सर केंद्रीय देवालयों की मीनारों को बौना प्रतीत करते थे और जो लंबी दूरी से ही मन्दिर के होने का संकेत देते थे। ये संभवत: शासकों की ताकत की याद भी दिलाते थे, जो इतनी ऊँची मीनारों के निर्माण के लिए आवश्यक साधन, तकनीक तथा कौशल जुटाने में सक्षम थे।
(ii) विजयनगर में विरुपाक्ष मंदिर का निर्माण कई शताब्दियों में हुआ था। हालांकि अभिलेखों से पता चलता है कि सबसे प्राचीन मन्दिर नवीं-दसवीं शताब्दियों का था, विजयनगर साम्राज्य की स्थापना के बाद इसे कहीं अधिक बड़ा किया गया था। मुख्य मंदिर के सामने बना मण्डप कृष्णदेव राय ने अपने राज्यारोहण के उपलक्ष्य में बनवाया था।
(iii) मंदिर के सभागारों का प्रयोग विविध प्रकार के कार्यों के लिए होता था। इनमें से कुछ ऐसे थे जिनमें देवताओं की मूर्तियाँ संगीत, नृत्य और नाटकों के विशेष कार्यक्रमों को देखने के लिए रखी जाती थीं।

प्रश्न 9. विजयनगर साम्राज्य के वास्तुकला पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर : स्थापत्यकला (Architecture): विजयनगर साम्राज्य के अधिकांश शासक कला प्रेमी थे। उन्होंने वास्तुकला के क्षेत्र में अनेकों मंदिर बनवाए। उनमें से हजारा मंदिर और विट्ठल स्वामी के मंदिर बहुत प्रसिद्ध हैं। विट्ठल स्वामी के मंदिर का निर्माण देवराज द्वितीय के शासन समय में आरंभ हुआ और अच्युत देवराय के शासन काल तक भी पूरा न हो सका। यह मंदिर 135 फुट लंबा, 86 फुट चौड़ा और 25 फुट ऊँचा है। इसके दो द्वार हैं। तथा 56 स्तंभ। हजारा मंदिर का निर्माण विरुपाक्ष द्वितीय ने करवाया। इस मंदिर के चारों ओर अनेक छोटे-छोटे देवी-देवताओं के मंदिर बनाए गए हैं। इन मंदिरों की दीवारों पर भगवान रामचंद्र के जीवन से संबंधित अनेक दृश्यों को चित्रित किया गया है। यह साम्राज्य मंदिरों की संख्या की दृष्टि से ही नहीं बल्कि उनके ढाँचे, सुन्दर कला तथा संगठन सभी दृष्टियों से महत्त्वपूर्ण है। इस काल में अनेक पुराने मंदिरों का विस्तार हुआ। हिंदू देवियों के लिए भी इस काल में अलग मंदिर बनाए गए। इस काल के मंदिरों की प्रमुख विशेषता यह है कि इनमें अनेक स्तंभों के अतिरिक्त विशाल हाल बनाए गए। इस काल में मंदिरों के अतिरिक्त अनेक मूर्तियाँ भी बनाई गई। कृष्ण देव और उसकी दो पलियों की मूर्तियाँ शिल्पकला की दृष्टि से बहुत ही प्रशासनिक हैं। चित्रकला और संगीतकला में भी उन्नति की. गई।

प्रश्न 10. विजयनगर साम्राज्य के समृद्ध व्यापार के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डालिए।
उत्तर : 14वीं से 16वीं शताब्दी के दौरान युद्धकला कुशल अश्वसेना पर आधारित थी। इसलिए प्रतिस्पर्धी राज्यों के लिए अरब तथा मध्य एशिया से उत्तम घोड़ों का आयात बहुत ही महत्त्व रखता था। आरंभ में इस व्यापार पर अरब व्यापारिसों का नियंत्रण था। स्थानीय व्यापारी, जिन्हें कुदिरई चेट्टी अथवा घोड़ों के व्यापारी कहा जाता था, भी इस व्यापार में भाग लेते थे। 1498 ई० से पुर्तगाली व्यापारी भी सक्रिय हो गए। ये उपमहाद्वीप के पश्चिमी तट पर आए और व्यापारिक तथा सामरिक केंद्र स्थापित करने का प्रयास करने लगे। उनके पास बंदूकों के प्रयोग के रूप में बेहतर सामरिक तकनीक थी। इस तकनीक ने उन्हें इस काल की उलझी हुई राजनीति में एक महत्त्वपूर्ण शक्ति बनकर उभरने में सहायता की।
विजयनगर भी अपने मसालों, वस्त्रों तथा रत्नों के लिए प्रसिद्ध था। ऐसे शहरों के लिए व्यापार प्रतिष्ठा का सूचक माना जाता था। यहाँ की धनी जनता में महँगी विदेशी वस्तुओं की काफी माँग थी-विशेष रूप से रत्नों और आभूषणों की। दूसरी ओर व्यापार से प्राप्त राजस्व का राज्य की समृद्धि में महत्त्वपूर्ण योगदान था।

प्रश्न 11. हम्पी पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर : हम्पी (Hampi) : हम्पी नगर कर्नाटक में है। हम्पी विजयनगर साम्राज्य की राजधानी थी। विजयनगर के राजाओं की स्थापत्य कला में रुचि हम्पी नगर में निर्मित इमारतों से दृष्टिगोचर होती है। यहाँ के प्रमुख स्मारकों में विट्ठल मंदिर तथा हजारा राम मंदिर हैं। विट्ठल मंदिर का निर्माण 1513 ई. में राजा कृष्णदेव राय ने कराया था। इन मंदिरों में दो रंग स्तम्भ हैं। हम्पी में राजकीय भवन परकोटे के भीतर बने थे। हजारा राम मंदिर का निर्माण कृष्णदेव राय ने ही 1520 ई. में कराया था।

प्रश्न 12. विजय नगर शासकों का कला एवं स्थापत्य कला के प्रति योगदान लिखिए।
उत्तर : (i) विजय नगर शासकों ने कला एवं स्थापत्य कला को प्रश्रय दिया।
(ii) विजय नगर साम्राज्य अपने विशाल भवनों के लिए प्रसिद्ध थे जिसमें किले, महल मंदिर ओर शामिल थे। (iii) विजय नगर स्थित विठ्ठल स्वामी का मंदिर अपनी ममता और स्थापत्य कला के लिए प्रसिद्ध था।

प्रश्न 13. विजयनगर साम्राज्य के विस्तार में कृष्णदेव राय के योगदान पर प्रकाश डालिए।

अथवा

कृष्णदेव राय के शासन काल में विजयनगर साम्राज्य के विस्तार और दृढ़ीकरण को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर : कृष्णदेव राय को विजयनगर के पुराने शत्रु बहमनी राज्य के उत्तराधिकारी राज्यों और उड़ीसा से मुकाबला करना पड़ा। सात साल तक कई लड़ाइयाँ लड़ने के पश्चात् कृष्णदेव ने पहले उड़ीसा को कृष्णा नदी तक के क्षेत्र के सभी जीते हुए प्रदेशों को विजयनगर को लौटाने के लिए विवश किया। इस प्रकार अपनी स्थिति को सुदृढ़ करके कृष्णदेव ने तुंगभद्रा दोआब के लिए पुरानी लड़ाई आरंभ कर दी। इसका परिणाम यह हुआ कि उसके दो शत्रुओं, उड़ीसा और बीजापुर ने आपस में संधि कर ली। कृष्णदेव ने के लिए काफी तैयारियाँ कीं। उसने रायपुर और मुद्कल पर आक्रमण कर दिया। 1520 ई० में बीजापुर के सुलतान की युद्ध में पूर्ण पराजय हुई। कृष्णदेव राय ने इसे कृष्णा नदी के पार खदेड़ दिया। इसके पश्चात् विजयनगर की सेना बेलगाँव पहुँची। फिर उसने बीजापुर पर अधिकार किया और कई दिनों तक लूट-पाट जारी रखी। इसके पश्चात् उन्होंने गुलबर्गा को नष्ट कर दिया।
इस प्रकार कृष्णदेव राय के समय में विजयनगर सैनिक दृष्टि से दक्षिण का शक्तिशाली राज्य बन गया।

प्रश्न 14. “अमर नायक प्रणाली विजयनगर साम्राज्य की एक प्रमुख राजनीतिक खोज थी। ” न्यायसंगत पुष्टि कीजिए।
उत्तर :(i) यह विजयनगर साम्राज्य की एक प्रमुख राजनीतिक प्रणाली थी और दिल्ली सल्तनत की इक्ता प्रणाली से इसके कई तत्त्व लिए गए थे।
(ii) अमर नायक सैनिक कमांडर थे जिन्हें प्रशासन के लिए राज्य क्षेत्र दिए जाते थे।
(iii) इक्ता प्रणाली की तरह यह किसानों, शिल्पकर्मियों तथा व्यापारियों से भू-राजस्व तथा अन्य कर प्राप्त करते थे।
(iv) यह अपने पास घोड़े और हाथियों के दल रखते थे। राजस्व, कर आदि में से कुछ भाग इनके रखरखाव के लिए अपने पास रखते थे।
(v) यह समय-समय पर विजयनगर शासकों को अपने सैनिक प्रदान करते थे । इन अमर नायकों की सैनिक सहायता के परिणामस्वरूप शासक पूरे दक्षिणी प्रायद्वीप पर नियंत्रण करने में सफल हुए।

प्रश्न 15. स्पष्ट कीजिए कि कृष्णदेव राय की मृत्यु का विजयनगर साम्राज्य पर क्या प्रभाव पड़ा? (V. Imp.)
उत्तर : कृष्णदेव राय की मृत्यु के उपरांत विजयनगर साम्राज्य पर पड़े प्रभाव :
1.कृष्णदेव राय की मृत्यु के पश्चात् 1529 में राजकीय ढाँचे में तनाव उत्पन्न होने लगा। उसके उत्तराधिकारियों को विद्रोही नायकों या सेनापतियों से चुनौती का सामना करना पड़ा। 1542 तक केंद्र पर नियंत्रण एक अन्य राजकीय वंश, अराविदु के हाथों में चला गया, जो सत्रहवीं शताब्दी के अंत तक सत्ता पर काबिज रहे। पहले की तरह इस काल में भी विजयनगर शासकों और साथ ही दक्क सल्तनतों के शासकों की सामरिक महत्त्वाकांक्षाओं के चलते समीकरण बदलते रहे। अंततः यह स्थिति विजयनगर के विरुद्ध दक्कन सल्तनतों के बीच मैत्री-समझौते के रूप में परिणत हुई।
2.1565 में विजयनगर की सेना प्रधानमंत्री रामराय के नेतृत्व वा में तालीकोट के युद्ध में उतरी जहाँ उसे बीजापुर, अहमदनगर तथा गोलकुंडा की संयुक्त सेनाओं द्वारा करारी शिकस्त मिली। विजयी का सेनाओं ने विजयनगर शहर पर पूरी तरह धावा बोलकर उसे लूटा। कुछ ही वर्षों के भीतर यह शहर उजड़ गया। अब साम्राज्य का केंद्र रख पूर्व की ओर स्थानांतरित हो गया जहाँ अराविदु राजवंश ने पेनुकोंडा से और बाद में चंद्रगिरी (तिरुपति के समीप) से शासन किया।

प्रश्न 16. मैकेंजी के बाद विजयनगर संबंधी महत्त्वपूर्ण सूचनाएँ व सामग्री एकत्र किए जाने के लिए विद्वानों द्वारा किए गए विभिन्न प्रयासों का वर्णन कीजिए।

उत्तर : 1. हम्पी अथवा विजयनगर के भग्नावशेष 1800 ई एक अभियंता (इंजीनियर) तथा पुराविद् कर्नल कॉलिन मैकेंजी में द्वारा प्रकाश में लाए गए थे। मैकेंजी जो ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी में कार्यरत थे, ने इस स्थान का पहला सर्वेक्षण मानचित्र तेयार किया।
2. कर्नल कॉलिन मैकेंजी द्वारा प्राप्त प्रारंभिक जानकारियों विरुपाक्ष मंदिर तथा पंपादेवी के पूजास्थल पुराहितों की स्मृति पर आधारित थीं।
3.कालांतर में 1856 से छाया चित्रकारों ने यहाँ के के चित्र संकलित करने शुरू किए जिससे शोधकर्ता अध्ययन कर पाए। भवनों उनका
4.1856 से ही अभिलेखकर्ताओं ने यहाँ के अन्य मंदिरों से कई दर्जन अभिलेखों को इकट्ठा करना शुरू कर दिया। इस शहर (हम्पी) तथा साम्राज्य (विजयनगर) के इतिहास के पुनर्निर्माण के प्रयास में इतिहासकारों ने इन स्रोतों को विदेशी यात्रियों के विवराणों तथा तेलुगू, कन्नड़, तमिल और संस्कृत में लिखे गए साहित्य से शह मिलान किया। अथव महानव साक्ष्य त्योहार सामान
5.मैकेंजी द्वारा किए गए आरंभिक सर्वेक्षणों के बाद यात्रा वृत्तांत और अभिलेखों से मिली जानकारी को एक साथ जोड़ा गया। बीसवीं शताब्दी में इस स्थान का सर्वेक्षण भारतीय पुरातात्विक सर्वेक्षण विभाग तथा कर्नाटक पुरातात्विक एवं संग्रहालय विभाग द्वारा किया गया।
6.1976 में हम्पी को राष्ट्रीय महत्त्व के स्थल के रूप में । मान्यता मिली। उसके बाद 1980 के दशक के शुरू में कई तरह धर्मानु अभिलेखन प्रयोग से व्यापक तथा गहन सर्वेक्षणों के माध्यम से विजयनगर से मिले भौतिक अवशेषों के सूक्ष्मता से प्रलेखन के एक महत्त्वपूर्ण परियोजना का शुभारंभ किया गया पूरे विश्व शोभा के दर्जनों विद्वानों ने इस जानकारी को इकट्ठा और संरक्षित करने का कार्य किया। इन सबके कारण सड़कों, रास्तों और बाजारों इस इत्यादि के अवशेषों को पुन: प्राप्त किया जा सका है।

प्रश्न 17. विरुपाक्ष मंदिर के सभागारों का प्रयोग किन-किन कार्यों के लिए होता था ? मंदिर परिसर में बनी स्थ गलियों की क्या विशेषताएँ थीं ?
उत्तर : सभागार : मंदिर के सभागारों का प्रयोग भिन्न-भिन्न कार्यों के लिए होता था। कुछ सभागारों में देवताओं की मूर्तियाँ संगीत, नृत्य और नाटकों के विशेष कार्यक्रमों को देखने के लिए रखी जाती थीं। अन्य सभागारों का प्रयोग देवी-देवताओं के विवाह के उत्सव पर आनंद मनाने के लिए होता था। कुछ अन्य में देवी-देवताओं को झूला झुलाया जाता था। इन अवसरों पर विशेष मूर्तियों का प्रयोग होता था जो छोटे केंद्रीय देवालयों में स्थापित मूर्तियों से भिन्न होती थीं।
रथ गलियाँ : मंदिर परिवार की एक महत्त्वपूर्ण विशेषता रथ गलियाँ हैं जो मंदिर के गोपुरम् से सीधी रेखा में जाती हैं। इन गलियों का फर्श पत्थर के टुकड़ों से बनाया गया था। इनके दोनों ओर स्तंभ वाले मंडप थे जिनमें व्यापारी अपनी दुकानें लगाया करते थे।

प्रश्न 18. ‘विजयनगर के राजकीय केंद्र म डिब्बा का नामकरण उसके आकार और उनके कार्यों के आधार पर किया गया। व्याख्या कीजिए।

उत्तर : विजयनगर साम्राज्य के जो अवशेष मिले हैं उनमें एक विशिष्ट संरचना है ‘महानवमी डिब्बा’। इतिहासकार डोमिंगो पेस ने इसे विजय का भवन की संज्ञा दी है। यह एक विशालकाय मंच है जो लगभग 11000 वर्ग फीट के आधार पर 40 फीट की ऊँचाई तक जाता है। यह शहर के सबसे ऊँचे स्थानों में से एक पर स्थित है। मंच के आधार पर भरपूर उत्कीर्णन किया गया है। महानवमी डिब्बा पर लकड़ी की एक संरचना बने होने के भी साक्ष्य मिलते हैं।
सितम्बर-अक्टूबर के शरद मास में हिंदुओं का एक बड़ा त्योहार आज भी लगभग संपूर्ण भारत में मनाया जाता है जो सामान्यतः महानवमी (जिसका शाब्दिक अर्थ होता है महान नवाँ दिवस) के नाम से जाना जाता है तथा जिसे उत्तर भारत में दशहरा, बंगाल में दुर्गा पूजा तथा प्रायद्वीपीय भारत में नवरात्रि अथवा महानवमी के नाम से जाना जाता है। विजयनगर साम्राज्य की यात्रा पर समय-समय पर आए विदेशी यात्रियों के वृत्तांतों से -, इस बात की पुष्टि होती है कि महानवमी उस समय का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण त्योहार था जिस अवसर पर राजा भी उपस्थित होते थे। विद्वानों का विचार है कि महानवमी डिब्बा पर महानवमी पर्व के दौरान भव्य अनुष्ठान होते रहे होंगे जिस अवसर पर विजयनगर शासक अपने रुतबे, ताकत तथा अधिराज्य का प्रदर्शन करते होंगे।
एक विद्वान के विवरण के अनुसार, “इस अवसर पर होने वाल धर्मानुष्ठानों में मूर्ति पूजा, राज्य के अश्व की पूजा तथा भैंसों और अन्य जानवरों की बलि सम्मिलित थी। नृत्य, कुश्ती, प्रतिस्पर्धा तथा साज लगे घोड़ों, हाथियों तथा रथों और सैनिकों की शोभायात्रा और साथ ही प्रमुख नायकों और अधीनस्थ राजाओं द्वारा राजा और उसके अतिथियों को दी जाने वाली औपचारिक भेंट इस अवसर के प्रमुख आकर्षण थे। इन उत्सवों के गहन सांकेतिक अर्थ थे। त्योहार के अंतिम दिन राजा अपनी तथा अपने नायकों की सेना का खुले मैदान में आयोजित भव्य समारोह में निरीक्षण करता था। इस अवसर पर नायक राजा के लिये बडी मात्रा में भेट तथा साथ ही नियत कर भी लाते थे। “

प्रश्न 19. ‘विजयनगर के शासकों के जीवन में मंदिरों का विशेष महत्व था।’ इस कथन के पक्ष में उचित तर्क दीजिए।
उत्तर : (i) मंदिर स्थापित के संदर्भ में इस समय तक कई नए तत्त्व प्रकाश में आते हैं। इनमें विशाल स्तर पर बनाई गई संरचनाएँ जो राजकीय संस्था के घातक थे, शामिल हैं। इनका सबसे अच्छा उदाहरण राय गुपुत्रम अथवा राजकीय प्रवेशद्वार थे जो अक्सर केंद्रीय दीवालों की मीनारों को प्रतीक करती है और जो लंबी दूरी से ही मंदिर की होने का संकेत देती थी। ये संभवत: शासकों के स्वागत की याद भी दिलाती थी, जो इतनी ऊँचाई मीनारों के निर्माण के लिए आवश्यक साधन तकनीकी तथा कुशल जुटाने में सक्षम थी।
(ii) विजयनगर में विरूपक्ष मंदिर का निर्माण कई शताब्दियों में हुआ था। हालांकि अभिलेखों से पता चलता है कि सबसे प्राचीन मंदिर नवीं-दसवीं शताब्दियों का था। विजयनगर साम्राज्य की स्थापना के बाद इसे कही अधिक बड़ा किया गया था। मुख्य मंदिर के सामने बना मंडप कृष्णदेव राय ने अपने राज्यारोहण के उपलक्ष्य में बनवाया था।
(iii) मंदिरों की सभागारों का प्रयोग विविध प्रकार के कार्यों के लिए होता था। इनमें से कुछ ऐसे थे जिनमें कि देवताओं की मूर्तियाँ, संगीत, नृत्य और नाटकों के विशेष कार्यक्रमों के देखने के लिए रखी जाती थीं।

अथवा

विजयनगर के ‘लोटस (कमल) महल’ तथा हजार राम मंदिर पर टिप्पणियाँ लिखिए।
उत्तर : लोटस महल : लोटस (कमल) महल राजकीय केंद्र के सबसे सुंदर भवनों में एक है। इसे यह नाम 19वीं शताब्दी के अंग्रेज यात्रियों ने दिया था। इतिहासकार इस बारे में निश्चित नहीं हैं कि यह भवन किस कार्य के लिए बना था। फिर भी मैकेंजी द्वारा बनाए गए मानचित्र से यह अनुमान लगाया गया है कि यह परिषदीय सदन था जहाँ राजा अपने परामर्शदाताओं से मिलता था। हजार राम मंदिर : राजकीय केंद्र में स्थित मंदिरों में हजार राम मंदिर’ अत्यंत दर्शनीय है। इसका प्रयोग संभवत: केवल राजा और उसके परिवार द्वारा ही किया जाता था। बीच के देवस्थल की मूर्तियाँ अब नहीं रहीं, परंतु दीवारों पर बनी मूर्तियाँ अब भी सुरक्षित हैं। इनमें मंदिर की आंतरिक दीवारों पर उकेरे कुछ दृश्य सम्मिलित हैं जो रामायण से लिए गए हैं।

अथवा

विजयनगर शहर के राजकीय केंद्र के भवनों का परीक्षण कीजिए। इन भवनों ने विजयनगर साम्राज्य की प्रतिष्ठा बढ़ाने में किस प्रकार सहायता की?
उत्तर : (i) राजकीय केंद्र बस्ती के दक्षिण-पश्चिमी भाग में स्थित था. इसमें 60 से भी अधिक मंदिर थे
(ii) लगभग 30 संरचनाओं की पहचान महलों के रूप में की गई है। ये संरचनाएँ अपेक्षाकृत बड़ी हैं जो आनुष्ठानिक कार्यों से संबद्ध नहीं होती।
(iii) “राजा का भवन” नामक संरचना अंतः क्षेत्र में सबसे विशाल है। इसके दो सर्वाधिक प्रभावशाली मंच हैं-1. सभा मंडप, 2. महानवमी डिब्बा।
(iv) लोटस (कमल) महल राजकीय केंद्र के सर्वाधिक सुंदर भवनों में से एक है। मैकेन्जी द्वारा बनाए गए मानचित्र के अनुसार यह संभवत: परिषदीय सदन था जहाँ राजा अपने सलाहकारों से मिलता था।

प्रश्न 20. ‘महानवमी डिब्बा’ से जुड़े अनुष्ठानों (घार्मि रीति-रिवाजों) के महत्त्व की परख कीजिए।
उत्तर : महानवमी डिब्बा से संबंधित अनुष्ठानों का विश महत्त्व था। इस अवसर पर जो धर्मानुष्ठान होते थे, उनमें मूर्तिक पूजा, राज्य के अश्व की पूजा तथा भैंसों और अन्य जानव बलि देना शामिल था। इस अवसर के मुख्य आकर्षणों में न कुश्ती प्रतिस्पर्धा तथा साज लगे घोड़ों, हाथियों तथा रथों की सैनिकों की शोभायात्रा और साथ ही प्रमुख नायकों और अधीन राजाओं द्वारा राजा और उसके अतिथियों को दी जाने का औपचारिक भेंट शामिल थी। नि:संदेह इन उत्सवों के गह सांकेतिक अर्थ थे। त्योहार के अंतिम दिन राजा द्वारा अपनी तथा अपने नायकों की सेना का खुले मैदान में आयोजित भव्य समाज का निरीक्षण किया जाता था। इस अवसर पर नायक राजा को बड़ मात्रा में भेंट किया करते थे।

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