Index

1. ईंट मनके और अस्थियाँ

1. आरंभ 2. निर्वाह के तरीके 3. मोहनजोदड़ो 4. सामाजिक विभिन्नताओं का अवलोकन 5. शिल्प उत्पादन के विषय में जानकारी 6. माल प्राप्त करने सम्बन्धी नीतियाँ 7. मुहरें लिपि तथा बाट 8. प्राचीन सभ्यता 9. सभ्यता का अंत 10. हड़प्पा सभ्यता की खोज 11. अतीत को जोड़कर पूरा करने की समस्याएं मानचित्र बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर 1 अंकीय प्रश्न उत्तर 2 अंकीय प्रश्न उत्तर

2. राजा किसान और नगर

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

3. बंधुत्व जाति और वर्ग

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

4. विचारक विश्वास और इमारतें

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर 1 बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर 2

6. भक्ति सूफी और परम्पराएँ

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

7. एक साम्राज्य की राजधानी विजयनगर

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

8. उपनिवेशवाद और देहात

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

10. उपनिवेशवाद और देहात

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

11. विद्रोह और राज

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

13. महात्मा गाँधी और आन्दोलन

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

15. संविधान का निर्माण

बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

Class 12th History Chapter 8 Important Question Answer 1 Marks किसान, जमींदार और राज्य (कृषि समाज और मुगल साम्राज्य)

प्रश्न 1. मुगल साम्राज्य के प्रमुख सम्राटों 1526 से 1707 तक के कालांश (Period) का क्रमानुसार संक्षिप्त रूप में उल्लेख कीजिए ।
उत्तर : 1. पानीपत की प्रथम लड़ाई में इब्राहिम लोदी को पराजित कर सन् 1526 ई. में बाबर ने मुगल साम्राज्य की नींव रखी। उसने सन् 1530 ई. तक राज्य किया।
2.बाबर के उपरान्त हुमायूँ मुगल सिंहासन पर आया। उसके शासन काल को दो चरणों में विभाजित किया जाता है। प्रथम चरण 1530 से 1540 तक रहा। लगभग पन्द्रह वर्षों तक शेरशाह सूरी तथा उसके अनेक उत्तराधिकारी हिन्दुस्तान के सम्राट रहे। हुमायूँ 1540 से 1555 तक ईरान के शाह के पास राजनीतिक शरणार्थी बना रहा। 1555 में उसने पुनः सिंहासन प्राप्त किया और 1556 ई. में ही वह अपनी दूसरी पाली पूरी करके मृत्युलोक को प्राप्त हुआ।
3.अकबर ने सन् 1556 में पानीपत की दूसरी लड़ाई में आदिलशाह तथा हेमू को पराजित कर सन् 1605 तक शासन किया
4. अकबर के बाद जहाँगीर सिंहासन पर 1603 से 1627 ई. तक रहा।
5.जहाँगीर के बाद 1627 से 1658 तक शाहजहाँ ने मुगल सम्राट के रूप में सत्ता संभाले रखी।
6.1658 से 1707 तक औरंगजेब सत्ता में रहा। औरंगजेब के बाद के मुगल सम्राट परवर्ती सम्राट कहलाये। अंतिम मुगल सम्राट को अंग्रेजों ने 1857 के विद्रोह के बाद कैद कर रंगून (बर्मा) भेज दिया। वहीं उसका निधन हुआ।

प्रश्न 2. मुगलकाल में कृषि की समृद्धि और आबादी की बढ़ोत्तरी का बहुत ही संक्षेप में उल्लेख कीजिए।
उत्तर : मुगल काल में कृषि की समृद्धि और आबादी की बढ़ोत्तरी : कृषि उत्पादन के ऐसे विविध और लचीले तरीकों का एक बड़ा नतीजा यह निकला है कि आबादी धीरे धीरे बढ़ने लगीं। आर्थिक इतिहासकारों की गणना के मुताबिक, समय-समय पर होने वाली भुखमरी और महामारी के बावजूद, 1600 से 1700 के बीच भारत की आबादी लगभग 5 करोड़ बढ़ गई। 200 वर्षों में यह करीब-करीब 33 फीसदी बढ़ोत्तरी थी।

प्रश्न 3. 16वीं तथा 17वीं शताब्दी में कृषि के लगातार विस्तार के उत्तरदायी कारकों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर : 16वीं तथा 17वीं शताब्दी में कृषि के लगातार विस्तार में नये सिंचाई के उपकरणों के अधिक विस्तार, नहरों की सुविधाएँ, कुओं तथा तालाबों का निर्माण एवं उपयोग के साथ सरकार द्वारा कई बार किसानों को भूराजस्व या भूमि की उत्पादकता एवं लागत की रकम में सामंजस्य, कुछ नई भूराजस्व प्रणालियों का उपयोग आदि कृषि के लगातार विस्तार के लिए उपयोगी कारक साबित हुए।

प्रश्न 4. आइन-ए-अकबरी के अनुसार एक समांतर सैनिक बल का संक्षेप में उल्लेख कीजिए।
उत्तर : आइन के अनुसार मुगल भारत में जमींदारों की मिली-जुली सैनिक शक्ति इस प्रकार थी : 3,84,558 घुड़सवार; 42,77,057 पैदल; 1863 हाथी; 4260 तोप और 4,500 नाव।

प्रश्न 5. मनसबदारी पर अति लघु टिप्पणी लिखिए।
उत्तर : मनसबदारी व्यवस्था (Mansabdari System) : मुगल प्रशासनिक व्यवस्था के शीर्ष पर एक सैनिक-नौकरशाही तंत्र (मनसबदारी) था जिस पर राज्य के सैनिक व नागरिक मामलों की जिम्मेदारी थी। कुछ मनसबदारों को नकदी भुगतान किया जाता था, जब कि उनमें से ज्यादातर का साम्राज्य के अलग-अलग हिस्सों में राजस्व के आबंटन के जरिये भुगतान कया जाता था। समय-समय पर उनका तबादला किया जाता था।

प्रश्न 6. ग्रामीणों द्वारा गाँव के दस्तकारों को : सेवाओं के बदले में क्या दिया जाता था? किसी एक के में लिखिए ।
उत्तर: ग्रामीणों द्वारा गाँव के दस्तकारों (चर्मकारी, बदरी, कुम्हारों, जुलाहों, शिल्पकारों) आदि को उनकी सेवाओं के दरू प्रायः अनाज या वे वस्तुएँ जो किसानों द्वारा अथवा अन्य द्वारा बनाई जाती थीं, उनकी सेवाओं के बदले दी जाती थी| सामान्य भाषा में वस्तु विनिमय प्रणाली कह सकते हैं।

प्रश्न 7. खान-ए-खाना के बारे में आप क्या जानते हैं.
उत्तर : खान-ए-खाना (Khan-a-khana): खान-ए-जान का शाब्दिक अर्थ है-खानों (उपाधि खान, मलिक आदि) के सबसे महान। यह एक उपाधि थी जो अकबर ने बैरम को दी थी बैरम खाँ अकबर का संरक्षक एवं गुरु था। सन् 1556 से 1561 ई. तक बैरम खाँ ने अकबर को अपने दिशा-निर्देश द्वारा राजकार्य चलवाया। सिंहासनारोहण के समय अकबर की आयु केवल ।। वर्ष 4 माह थी। अत: मुगल साम्राज्य के स्थिरीकरण में बैरमखों का बड़ा हाथ था।

प्रश्न 8. मुगल काल में जमींदार किस प्रकार शक्ति प्राप्त करते थे? किन्हीं दो तरीकों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर : मुगल काल में जमींदारों की व्यक्तिगत जमीन होती थी। जमींदार को शक्ति प्राप्त होने के निम्न कारण थे :
(i) जमींदारों की मूल शक्ति इनकी व्यक्तिगत सैनिक संसाधन घुड़सवार सैनिक एवं किले होते थे।
(ii) वे राज्य की ओर से कर वसूल भरते थे। इसके बदले में इन्हें पैसा मिलता था।

प्रश्न 9. कानूनगो कौन था ?
उत्तर : कानूनगो (Kanoongo) : कानूनगो एक प्रकार के जमींदार होते थे जिन्हें वास्तविक उत्पादन, खेती की स्थिति स्थानीय मूल्यों का ज्ञान होता था। कानूनगो सरकार को कृषि संबंधी जानकारी देते थे। कृषि-कार्य में कानूनगो का विशेष स्थान था।

प्रश्न 10. मुगलकालीन गाँवों में प्रचलित ‘जजमानी’व्यवस्था क्या थी ?
उत्तर : ‘जजमानी’ व्यवस्था में ग्रामीण दस्तकार तथा खेतिहार परिवार आपसी बातचीत द्वारा सेवाओं की पूर्ति का तरीका स्वयं निश्चित कर लेते थे। ऐसी व्यवस्था में आमतौर पर वस्तुओं और सेवाओं का विनिमय होता था। उदाहरण के लिए 18वीं शताब्दी में बंगाल में जमींदार, लोहारों, बढ़ई और सुनारों को उनकी सेवाओं के बदले “रोज का भत्ता और खाने के लिए नकी देते थे।”

प्रश्न 11. 16वीं तथा 17वीं शताब्दी का ग्रामीण समाज किन रिश्तों के आधार पर बना था ?
उत्तर : 16वीं तथा 17वीं शताब्दी में ग्रामीण समाज छोटे खेतिहारों तथा धनी जमींदारों से बना था। ये दोनों ही कृषि उत्पादन से जुड़े थे और फसल में हिस्सों के दावेदार थे। अतः उनके बीच वा सहयोग, प्रतियोगिता तथा संघर्ष के रिश्ते बने। यही रिश्ते ग्रामीण समाज का आधार थे।

प्रश्न 12. जब्ती क्या थी ?
उत्तर : जब्ती (.Jabti) : ‘जब्ती’ कर-निर्धारण की वास्तविक प्रणाली थी। इस विधि द्वारा कर निर्धारण अनुमान से नहीं, निश्चितता से होता था। ‘जब्ती’ विधि सर्वप्रथम शेरशाह ने लागू की थी। बाद में कुछ सुधार करके अकबर ने इसे अपनाया।

प्रश्न 13. सत्रहवीं शताब्दी में पश्चिमी भारत की प्रमुख फसल का उल्लेख कीजिए तथा बताइए कि वह भारत कैसे आई।
उत्तर : सत्रहवीं सदी में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से कई नयी फसलें भारतीय उपमहाद्वीप पहुँची। मसलन, मक्का भारत में, अफ्रीका और स्पेन के रास्ते आया और सत्रहवीं सदी तक इसकी गिनती पश्चिमी भारत की मुख्य फसलों में होने लगी। टमाटर, आलू और मिर्च जैसी सब्जियाँ नयी दुनिया से लाई गई। इसी तरह अनानास और पपीता जैसे फल वहीं से आए।

प्रश्न 14. आप दहसाला शब्द के बारे में क्या जानते हैं?
उत्तर : दहसाला : ‘दहसाला’ कर की एक प्रणाली है जो दस वर्ष की औसत उपज के आधार पर तय की जाती थी। अकबर ने अपने सिंहासना रोहण के कुछ वर्षों बाद में यह भू-राजस्व प्रणाली लागू की थी। यह पिछले दस साल की फसल और उसकी कीमत के औसत पर आधारित होती थी।

प्रश्न 15. जंगल निवासियों को जंगली क्यों कहा जाता था? कोई दो कारण दीजिए।
उत्तर : समसामयिक रचनाएँ जंगल में रहने वालों के लिए जंगली शब्द का इस्तेमाल करती हैं। जिनकी आजीविका का साधन जंगलों के उत्पाद, शिकार और स्थानीय खेती होती थी वे जंगल निवासी जंगली कहलाते थे। ये मौसम के हिसाब से काम करते थे। जैसे वसंत के मौसम में जंगल से उत्पाद इकट्ठा करते थे। गर्मियों में मछली पकड़ी जाती थी, मानसून के महीने में खेती की जाती थी और जाड़े के महीने में शिकार किया जाता था।

प्रश्न 16, गल्ला प्रणाली का अर्थ स्पष्ट करो।
उत्तर : गल्ला (Galla) : अकबर द्वारा लागू कर-निर्धारण की अनेक विधियाँ थीं, जिनमें जब्ती, दहसाला तथा गल्ला प्रमुख थी। गल्ला (अनाज) किसानों एवं राज्य के बीच तय शर्तों के अनुसार इस पद्धति में लगान नकद नहीं लिया जाता था।

प्रश्न 17. बटाई अवधारणा से आप क्या समझते हैं?
उत्तर : बटाई (Batai): कृषि भूमि में जो पैदावार होती थी, उसे एक निश्चित विधि (मात्रा) के अनुसार सरकार तथा किसानों (रैयतों) के बीच बाँट दिया जाता था। इसे बटाई विधि कहते हैं। प्रश्न 18.मुगलकालीन समय के दौरान जंगलों में रहने वाले कबीलों के जीवन का वर्णन कीजिए ।
उत्तर : मुगलकालीन समय के दौरान जंगलों में रहने वाले कबीलों के जीवन का वर्णन निम्नलिखित बिंदुओं के अंतर्गत किया जा सकता है :
1.मुगलकालीन रचनाओं में जंगल में रहने वाले लोगों के लिए जंगली शब्द का प्रयोग किया गया है। हालांकि, जंगली होने का तात्पर्य सभ्यता का न होना था। 2. उस दौरान ‘जंगली’ शब्द का प्रयोग ऐसे लोगों के लिए किया जाता था जिनका गुजारा जंगल के उत्पादों, शिकार तथा स्थानांतरित खेती के जरिए होता था। 3. खेती से तमाम गतिविधियाँ मौसम के अनुसार होती थीं। उदाहरण के लिए भीलों में बसंत के मौसम में जंगल के उत्पाद एकत्रित किए जाते थे। गर्मियों में मछली पकड़ी जाती थी, खेती मानसून के महीनों में की जाती थी। सर्दी के महीनों में शिकार किया जाता.था। 4. जंगलों में यह सिलसिला निरंतर गतिशीलता की नींव पर खड़ा था तथा इस नींव को मजबूती भी प्रदान करता था। 5. जंगलों में रहने वाले इन कबीलों की एक प्रमुख विशेषता निरंतर एक स्थान से दूसरे स्थानों पर घूमते रहते थे।

प्रश्न 19. आइन के तीसरे भाग ‘मुल्क आबादी’ की विषय-वस्तु क्या हैं?
उत्तर : आइन के तीसरे भाग ‘मुल्क आबादी’ की विषय-वस्तु साम्राज्य की आर्थिक व्यवस्था के बारे में उल्लेख करना है। इसमें अकबरकालीन भू-राजस्व दरों का गुणात्मक विवरण खूब दिया गया है। इसमें विभिन्न दरों के बाद बारह प्रांतों के हिसाब का उल्लेख है। सभी सूबों की भू-भौगोलिक स्थितियाँ और आर्थिक विवरण दिए हैं। इसमें इन सूबों की प्रशासनिक और आर्थिक विभिन्नताएँ विभिन्न स्तरों पर जैसे सरकार, परगना और महलों का उल्लेख है। आइन के इस भाग में क्षेत्र का माप, क्षेत्रफल एवं निर्धारित भू-राजस्व (जमा) का उल्लेख है ।

प्रश्न 20. कोलाज क्या था ?
उत्तर : पोलाज (Polai): पोलाज उस कृषि भूमि को कहा जाता था जिस पर प्रति वर्ष फसल बोई जाती थी।

प्रश्न 21. परती शब्द का अर्थ लिखें ।
उत्तर : परती : परती भूमि पर प्रति वर्ष फसल नहीं बोई जाती थी। यह भूमि पैदावार की दृष्टि से बिल्कुल बेकार भूमि होती है ।

प्रश्न 22, चचर व बंजर भूमि की परिभाषा लिखिए।
उत्तर : चचर (मुगलकाल में) वह जमीन थी जिसे तीन या चार वर्षों तक खाली रखा जाता था। बंजर वह जमीन थी जिस पर पाँच या इससे अधिक वर्षों तक खेती नहीं की गई थी।

प्रश्न 23, आप तकाबी शब्द के बारे में क्या जानते हैं?
उत्तर : तकाबी : तकाबी वह कृषि-संबंधी ऋण था जो किसानों को आवश्यकता पड़ने पर बीज, खाद, कृषियंत्र तथा पशु खरीदने के लिए सम्राट अकबर द्वारा दिया जाता था। यह ऋण (तकाबी) सरल मासिक किश्तों में सरकार को लौटा दिया जाता था।

प्रश्न 24. अकबर के काल में फौजदार एवं अमलगुजार कौन थे ?
उत्तर : फौजदार एवं अमलगुजार (Faujdar and Amalgusar) : अकबर ने अपने राज्य को कई सरकारों (जिलों) में बाँट रखा था। प्रत्येक सरकार के मुख्य अधिकारियों को फौजदार’ और ‘अमलगुजार’ कहा जाता था। फौजदार का कार्य न्याय तथा कानून व्यवस्था बनाये रखना था। ‘अमलगुजार’ का कार्य भू राजस्व एकत्र करना होता था।

प्रश्न 25. अकबर के काल में दीवान-ए-आला क्या करता था ?
उत्तर : दीवान-ए-आला (Diwan-a-Ala) : दीवान- ए- आला का अर्थ है-मुख्य दीवान जो संपूर्ण राज्य की आय-व्यय का ब्यौरा रखता था। वह सरकारी या खालिस भूमि, जागीरदारों और इनाम में दी जाने वाली भूमियों का ब्यौरा भी रखता था। प्रांतीय दीवान, दीवान-ए-आला के अधीन कार्य करते थे।

प्रश्न 26, सोलहवीं और सत्रहवीं शताब्दी में राजस्थान में जाति पंचायत की दो प्रमुख शक्तियाँ का उल्लेख कीजिए।
उत्तरः (i) राजस्थान में जाति पंचायते दो जातियों के दीवारी झगड़ों का फैसला करती थी।
(ii) शादियाँ मानदंडों के अनुसार हो रही हैं या नहीं वह भी जाति पंचायत तय करती थी।

प्रश्न 27. मीर बख्शी कौन था ?
उत्तर : मीर बख्शी (Meer Bakshi) : अकबर के शासन काल में सेना का मुख्य अधिकारी ‘मीर बख्शी’ कहलाता था। मनसब पदों पर नियुक्ति या पदोन्नति मीर बख्शी की सिफारिश पर होती थी। मीर बख्शी खुफिया विभाग (C.I.D. Dept.) अथवा जासूसी विभाग का प्रमुख भी होता था। मीर बख्शी का पद, मुख्य दीवान के समकक्ष होता था। दोनों एक दूसरे के कार्यों की निगरानी करते थे।

प्रश्न 28, आइन-ए-अकबरी’ का लेखक कौन था? यह ग्रंथ हमें राज्य द्वारा की गई कृषि व्यवस्था के बारे में क्या जानकारी देता है?
उत्तरः आइन-ए-अकबरी’ का लेखक अकबर का दरबारी इतिहासकार अबुल फज्ल था। यह ग्रंथ हमें राज्य द्वारा की गई कृषि-व्यवस्था के निम्न पक्षों की जानकारी देता है :
(i) खेतों की नियमित जुताई को सुनिश्चित करना
(ii) राज्य द्वारा करों की उगाही की व्यवस्था
(iii) राज्य तथा जमींदारों के बीच रिश्तों का नियमन।

प्रश्न 29. बरीद तथा वाकिया नवीस कौन थे?
उत्तर : बरीद तथा वाकिया नवीस (Barid and Wakia Navis) : बरीद ‘मीर बख्शी’ के अधीन गुप्तचर अधिकारी होता था। वाकिया नवीस या वाक्यानवीस संदेश लेखक को कहते थे। इन दोनों के द्वारा दी गई सूचनाएँ मीर बख्शी बादशाह को देता था।

प्रश्न 30. काजी क्या करता था ?
उत्तर : काजी (Qazi) : न्याय विभाग प्रमुख रूप से कार्ज के पास होता था। वह धार्मिक कार्यों और कल्याण संस्थाओं की देखभाल करता था। धार्मिक अनुष्ठान (कार्य) उसी के अधीन होते थे। प्रजा और सम्राट दोनों के लिए काजी का पद महत्त्वपूर्ण था।

प्रश्न 31. जब्ती व्यवस्था की मुख्य विशेषताएँ क्या थीं ?
उत्तर : जब्ती व्यवस्था (Zabti System) : शेरशाह द्वारा लाहौर से अवध तक लागू जब्ती व्यवस्था को शुरूआत अकबर ने भी अपनाया। प्रत्येक क्षेत्र में चल रहे मूल्यों के में अनुसार अकबर ने उन दरों को मंजूरी दी जिनके द्वारा माल के रूप में कर को नकद पद (दस्तूर) में परिवर्तित किया जा सके। इस समय औसत उत्पाद पर आधारित फसल की केवल एक दर और लाहौर से लेकर अवध क्षेत्र तक मूल्य की एक सारणी थी। इसमें स्थानीय उत्पादन और मूल्यों में भारी विषमताओं को नजरअंदाज किया जाता था।

प्रश्न 32, जमा-ए-दहसाला क्या था ?
उत्तर : मुगल काल में औसत उत्पाद को नकद दरों में परिवर्तित करने की समस्या बनी रही। इन समस्याओं के में शासन के चौबीसे वर्ष (1579-80) में जमा-ए-दह-साला अर्थात् दस वर्ष का जमा) संकलित किया गया। सबसे पहले औसत उत्पाद का अनुमान लगाने के लिए पिछले 10 वर्षों की खेती की वर्तमान दर पिछले उत्पाद के आधार पर प्रत्येक इलाके के लिए नई सूची तैयार की गई। पिछले दस वर्षों की नकद दर को भी तालिकाबद्ध किया गया तथा औसत मूल्य के आधार पर अंतिम दस्तूर तैयार किए गए। अंतिम दस्तूर से वार्षिक राजकीय हस्तक्षेप की आवश्यकता खत्म हो गई तथा वार्षिक राजस्व मांग उगाहने में अनिश्चितता भी काफी कम हो गई। जमा-ए-दह-साला की प्रमुख कमियों में यह था कि किसानों को खेती के सारे खतरे खुद उठाने पड़ते थे। रूप

प्रश्न 33. हस्त-ओ-बद पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर : हस्त-ओ-बद व्यवस्था में अधिकारी गाँव का निरीक्षण कर कुल उत्पाद का अनुमान लगाने के लिए हलो – (Ploughs) की संख्या भी गिन ली जाती थी।

प्रश्न 34. कानकुत पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखो।
उत्तर : कानकुत व्यवस्था में पहले भूमि को नापा जाता था तथा फिर प्रत्येक फसल की प्रति उत्पाद इकाई (बीघा) का अनुमान लगाया जाता था। इसके बाद इसे खेती किए जाने वाले कुल क्षेत्र पर लागू किया जाता था।

प्रश्न 35. खुद काश्त का क्या अर्थ है ?
उत्तर : ऐसे किसान जो अपनी भूमि पर स्वयं (खुद) खेती (काश्त) करते थे, उन्हें खुद काश्त’ के नाम से जाना जाता था। इनमें से कुछ किसानों के पास अपने हल कृषि उपकरण तथा बैल होते थे। वे एक निश्चित दर पर लगान देते थे।

प्रश्न 36. ग्राम पंचायत ( मुगल काल) के मुखिया के दो कार्यों का वर्णन कीजिए।
उत्तर : (1) ग्राम पंचायत के मुखिया का मुख्य काम गाँव के आय-व्यय का हिसाब-किताब अपनी निगरानी में तैयार करवाना था। इस काम में गाँव का पटवारी उसकी सहायता करता था।
(2) जाति की अवहेलना को रोकने के लिए लोगों के आचरण पर नजर रखना।

प्रश्न 37. मुगल कालीन भारत में जमींदारों द्वारा सामाजिक व आर्थिक सुविधाओं को भोगने के दो कारण लिखिए।
उत्तर : 1. उनके पास बड़ी-बड़ी निजी ज़मीनें थीं। 2. वे राज्य को महत्त्वपूर्ण सेवाएँ प्रदान करते थे। इसके बदले उन्हें विशेष सुविधाएँ दी जाती थीं।

प्रश्न 38. किसी जाति या संप्रदाय विशेष के लोग संभ्रात वर्गों की कैसी माँगों के प्रति अपना विरोध जताते थे और क्यों ?
उत्तर : किसी जाति या संप्रदाय विशेष के लोग संभ्रांत वर्गों की उन माँगों के विरुद्ध अपना विरोध जताते थे जिन्हें वे नैतिक दृष्टि से अवैध मानते थे। उनमें एक थी बहुत अधिक कर की माँग, क्योंकि इससे किसानों का गुजारा हो पाना भी कठिन हो जाता था, विशेषकर सूखे या ऐसी अन्य विपदाओं के दौरान।

प्रश्न 39. ‘हुण्डी’ का क्या अर्थ है ? स्पष्ट करें।
उत्तर : पैसे के लेन-देन में मुगल काल के व्यापारी लिखित इकरारनामे देते थे जिन्हें हुण्डी के नाम से जाना जाता था। जब पैसे के भुगतान का समय होता था तो थोड़ी कटौती कमीशन के रूप में करके शेष भुगतान हो जाता था।

प्रश्न 40. महिलाओं को कृषि समाज में महत्त्वपूर्ण संसाधन के रूप में क्यों देखा जाता था? दो कारणों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर : 1. महिलाएँ पुत्रों को जन्म देकर कृषि के लिए श्रम जुटाती थीं।
2.वे घर का काम करने के साथ-साथ खेतों पर पुरुष साथ कंधे से कंधा मिला कर काम करती थीं। के

प्रश्न 41, मुगलकालीन भारत में जमींदारों द्वारा सामाजिक व आर्थिक सुविधाओं को भोगने के दो कारण लिखिए।

अथवा

मुगलकाल में जमींदार किस प्रकार शक्ति प्राप्त करते थे ? कोई दो तरीके बताओ।
उत्तर : (1) उनके पास बड़ी-बड़ी निजी जमीनें थीं ।
(2) वे राज्य को महत्त्वपूर्ण सेवाएँ प्रदान करते थे। इसके बदले उन्हें विशेष सुविधाएँ दी जाती थीं।

प्रश्न 42. कस्बा’ का क्या अर्थ है ? स्पष्ट करें।
उत्तर : जो स्थान गाँव से बड़ा और शहर से छोटा हो। उसे कस्बा कहा जाता है। दूसरे शब्दों में ‘कस्बे’ की जनसंख्या और क्षेत्रफल गाँव से बड़ा और शहर से छोटा होता है। अक्सर मुख्य मार्गों के आस-पास यात्री ठहरते थे, उनके खाने-पीने की वस्तुएँ बिकती थीं, फिर दुकानदारों ने आस-पास ही अपने घर बना लिए या अपने घरों में दुकानें बना लीं। इस तरह से कस्बों का जन्म हुआ।

प्रश्न 43. मुगल भारत में उत्पादित प्रमुख गैर-कृषि वस्तुएँ क्या थीं ?
उत्तर : गैर कृषि वस्तुएँ (Non-agricultural g०ods) : 1. सूती वस्त्र, 2. लोहे की वस्तुएँ, उपकरण, हथियार, 3. चाँदी के सिक्के, चाँदी के बर्तन, चाँदी के आभूषण, 4. ताँबे के सिक्के बर्तन, आभूषण, 5. पीतल की सजावट की वस्तुएँ, पीतल के बर्तन।

प्रश्न 44. गाँवों तथा शहरों के बीच व्यापार (मुगल काल में ) से गाँवों में नकदी लेन-देन होने लगा। इसके कुछ उदाहरण दीजिए।
उत्तर : 1. मुगलों के केंद्रीय प्रदेशों में कर की गणना और वसूली नकद में की जाती थी।
2.जो दस्तकार निर्यात के लिए उत्पादन करते थे, उन्हें उनकी मजदूरी अथवा पूर्व भुगतान नकद में ही दिया जाता था।
3. इसी तरह कपास, रेशम या नील जैसी व्यापारिक फसलें पैदा करने वालों का भुगतान भी नकदी में ही होता था।

प्रश्न 45. हुंडियाँ क्या थीं ? उनसे आंतरिक व्यापार किस प्रकार सरल हुआ ?
उत्तर : हुंडी एक व्यापारी द्वारा दूसरे स्थान पर भुगतान करने का वायदा था। इससे आंतरिक व्यापार को बढ़ावा मिला। पैसे का लेन-देन आसान व सुरक्षित हुआ।

प्रश्न 46, यूरोपीय व्यापारिक कंपनियों द्वारा भारत से किन वस्तुओं का निर्यात किया गया ?
उत्तर : यूरोपीय व्यापारिक कंपनियों द्वारा भारत में निम्न वस्तुओं का निर्यात हुआ : 1. गरम मसाला, 2. इलायची. 3. सूती वस्त्र, 4. दाल चीनी, 5. मलमल, 6. ऊनी वस्त्र, 7. काली मिर्च, 8. रेशमी वस्त्र।

प्रश्न 47. खुदकाश्त पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर : वे छोटे किसान जो अपनी भूमि पर स्वयं खेती करते थे, खुदकाश्त कहलाते थे।

प्रश्न 48. मुगलकाल में पंचायतों को कौन-कौन से अधिकार प्राप्त थे ? इनका क्या उद्देश्य था ?
उत्तर : मुगलकाल में पंचायतों को जुर्माना लगाने तथा किसी दोषी को समुदाय से निष्कासित करने जैसे अधिकार प्राप्त थे। इनका उद्देश्य जातिगत रिवाजों की अवहेलना को रोकना था।

प्रश्न 49. मुगलकाल में पंचायतों को कौन-कौन से अधिकार प्राप्त थे ? इनका क्या उद्देश्य था ?
उत्तर : मुगलकाल में पंचायतों को जुर्माना लगाने तथा किसी दोषी को समुदाय से निष्कासित करने जैसे अधिकार प्राप्त थे। इनका उद्देश्य जातिगत रिवाजों की अवहेलना को रोकना था।

प्रश्न 50. जागीर पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर : जागीर (Jagir) : वेतन के बदले में दिया गया भू-राजस्व आबंटन।

प्रश्न 51. खालिसा पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।
उत्तर : खालिसा (Khalisa) : केंद्रीय खजाने में सीधा जमा होने वाला भू-राजस्व।

प्रश्न 52, सोलहवीं और सत्रहवीं शताब्दी में भारत में बाम पंचायतों के दो मुख्य कार्यों का उल्लेख करें।
उत्तर : (i) पंचायत का एक मुख्य काम यह तसल्ली करना था कि गाँव में रहने वाले अलग-अलग समुदायों के लोग अपनी जाति की हदों के अन्दर रहें।
(ii) पंचायतों को जुर्माना लगाने और समुदाय से निष्कासित करने जैसे ज्यादा गंभीर दंड देने के अधिकार थे।

प्रश्न 53. बाबर के शासनकाल के किन्हीं पाँच शहरों के नाम लिखें।
उत्तर : (1) दिल्ली, (ii) पानीपत, (ii) आगरा, (iv) काबुल,(v) गंधार।

प्रश्न 54. सोलहवीं और सत्रहवीं शताब्दी में ग्रामीण शिल्पकारों को वेतन भुगतान के किन्हीं दो तरीकों का । उल्लेख कीजिए।
उत्तर : सोहलवीं और सत्रहवीं शताब्दी में ग्रामीण शिल्पकाों। जैसे कुम्हार, लोहार, बढ़ई, नाई, चर्मकार, यहाँ तक कि सुनार जैसे ग्रामीण दस्तकार भी अपनी सेवाएँ गाँव के लोगों को देते थे जिसके बदले गाँव वाले उन्हें अलग-अलग ढंग से उन लोगों की अदायगी करते थे।
1. नकद : अनेक लाभ, अनेक स्थानों पर नकद अदायी भी करते थे।
2.फसल का हिस्सा या जमीन का टुकड़ा : साधारणतया गाँवों के शिल्पकारों को फसल का एक भाग दे दिया जाता था। या फिर गाँव की जमीन का एक टुकड़ा, शायद कोई ऐसी जमीन जो खेती लायक होने के बावजूद बेकार पड़ी हुआ करती थी।
अदायगी की सूरत (शक्ल या रूप) क्या होगी ये शायद पंचायत ही तय करती थी।

प्रश्न 55. सोलहवीं और सत्रहवीं शताब्दी में कृषकों द्वारा कृषि के उपयोग में लाई जाने वाली दो प्रकार की प्रौद्योगिकी (टेक्नालॉजी) का उल्लेख कीजिए।
उत्तर : 1. मानसून भारतीय कृषि की रीढ़ था। कुछ ऐसी फसलें भी थीं जिनके लिए अतिरिक्त पानी की जरूरत थी। इसके लिए सिंचाई के कृत्रिम उपाय बनाने पड़े। रेहंट (Persianwhee) का प्रयोग बढ़ा। सिंचाई कार्यों को राज्य की मदद भी मिलती थी। मसलन, उत्तर भारत में राज्य ने कई नयी नहरें व नाले खुदवा और कई पुरानी नहरों की मरम्मत करवाई।

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