शासक और इतिवृत > मुग़ल शासक और साम्राज्य

स्त्रोत - क्रोनिकल्स (इतिवृत/इतिहास)

  • नियुक्त शासक होने की दृष्टि के प्रसार प्रचार का तरीका
  • दरबारी इतिहासकारों को विवरण लेखन का कार्य सौंपा गया
  • बादशाह के समय की घटनाओं का लेखा जोखा दिया गया
  • शासन में मदद के लिए ढेरों जानकारियां इक्कट्ठा की गयीं
  • घटनाओं का अनवरत कालानुक्रमिक विवरण
  • अपरिहार्य स्त्रोत
  • तथ्यात्मक सूचनाओं का खजाना
  • मूल-पाठों का उद्देश्य – उन आशयों को संप्रेषित करना था जिन्हें मुग़ल शासक अपने क्षेत्र में लागू करना चाहते थे
  • इनसे झलक मिलती है – कैसे शाही विचारधाराएँ रची और प्रचारित की जाती थीं.

मुग़ल शासक और साम्राज्य

  • मुग़ल और तैमूर नाम
  • पहला तैमूर शासक बाबर चंगेज खान का सम्बन्धी था
  • 16वीं शताब्दी में यूरोपियों ने शासकों का वर्णन करने के लिए मुग़ल शब्द का प्रयोग किया  | 
  • रडयार्ड किपलिंग की पुस्तक में युवा नायक मोगली

ज़हीरुद्दीन मुहम्मद उर्फ बाबर की उपलब्धियां

  • महज़ 12 वर्ष की आयु में फ़रगना घाटी का शासक बन गया।
  • बाबर कुषाणों के बाद ऐसा पहला शासक हुआ जिसने काबुल एवं कंधार को अपने पूर्ण नियंत्रण में रख सका।
  • भारत में अफ़ग़ान एवं राजपूत शक्ति को समाप्त कर ‘मुगल साम्राज्य’ की स्थापना की, जो लगभग 330 सालों तक चलता रहा।
  • हिंदुस्तान में पहली बार तुलगमा युद्ध नीति का प्रयोग बाबर ने किया।
  • हिंदुस्तान में पहली बार तोपखाने का प्रयोग बाबर ने किया
  • सड़कों की माप के लिए बाबर ने ‘गज़-ए-बाबरी’ के प्रयोग का शुभारम्भ किया।

नसीरुद्दीन हुमायूँ (1530-40, 1555-56)

हुमायूँ एक मुगल शासक था। प्रथम मुग़ल सम्राट बाबर का पुत्र नसीरुद्दीन हुमायूँ था। यद्यपि उन के पास साम्राज्य बहुत साल तक नही रहा, पर मुग़ल साम्राज्य की नींव में हुमायूँ का योगदान है।

  • जन्म की तारीख और समय: 6 मार्च 1508, काबुल, अफ़ग़ानिस्तान
  • मृत्यु की जगह और तारीख: 27 जनवरी 1556, दिल्ली
  • दफ़नाने की जगह: हुमायूँ का मकबरा, नई दिल्ली
  • बच्चे: अकबर, बख्शी बानो बेगम, ज़्यादा
  • पत्नी: माह चुचक बेगम (विवा. 1546), हमीदा बानो बेगम (विवा. 1541–1556), बेगा बेगम (विवा. 1527–1556)
  • माता-पिता: बाबर, महम बेगम
  • भाई: कामरान मिर्ज़ा, गुलबदन बेगम, ज़्यादा

जलालुद्दीन अकबर (1556-1605)

  • साम्राज्य का विस्तार, सुदृढीकरण किया
  • हिन्दुकुश पर्वत तक सीमाओं का विस्तार किया
  • सफाविओं और उज्बेकों की विस्तारवादी योजनाओं पर लगाम लगाया

जहाँगीर (1605-27)

  • शाह जहाँ पाँचवे मुग़ल शहंशाह था। शाह जहाँ अपनी न्यायप्रियता और वैभवविलास के कारण अपने काल में बड़े लोकप्रिय रहे। किन्तु इतिहास में उनका नाम केवल इस कारण नहीं लिया जाता। शाहजहाँ का नाम एक ऐसे आशिक के तौर पर लिया जाता है जिसने अपनी बेग़म मुमताज़ बेगम के लिए विश्व की सबसे ख़ूबसूरत इमारत ताज महल बनाने का यत्न किया।
  • जन्म की तारीख और समय: 5 जनवरी 1592, लाहौर, पाकिस्तान
  • मृत्यु की जगह और तारीख: 22 जनवरी 1666, आगरा फोर्ट, आगरा
  • दफ़नाने की जगह: ताज महल, आगरा
  • पत्नी: इज़्ज़-उन-निस्सा (विवा. 1617–1666), ज़्यादा
    बच्चे: औरंगज़ेब, जहाँनारा बेग़म, दारा सिकोह, ज़्यादा
  • दादा या नाना: अकबर, मरियम उज़-ज़मानी, मारवाड़ के उदय सिंह,

शाहजहाँ (1628-58)

  • शाह जहाँ पाँचवे मुग़ल शहंशाह था। शाह जहाँ अपनी न्यायप्रियता और वैभवविलास के कारण अपने काल में बड़े लोकप्रिय रहे। किन्तु इतिहास में उनका नाम केवल इस कारण नहीं लिया जाता। शाहजहाँ का नाम एक ऐसे आशिक के तौर पर लिया जाता है जिसने अपनी बेग़म मुमताज़ बेगम के लिए विश्व की सबसे ख़ूबसूरत इमारत ताज महल बनाने का यत्न किया।
  • जन्म की तारीख और समय: 5 जनवरी 1592, लाहौर, पाकिस्तान
  • मृत्यु की जगह और तारीख: 22 जनवरी 1666, आगरा फोर्ट, आगरा
  • दफ़नाने की जगह: ताज महल, आगरा
  • पत्नी: इज़्ज़-उन-निस्सा (विवा. 1617–1666), ज़्यादा
  • बच्चे: औरंगज़ेब, जहाँनारा बेग़म, दारा सिकोह, ज़्यादा
    दादा या नाना: अकबर, मरियम उज़-ज़मानी, मारवाड़ के उदय सिंह,

औरंगजेब (1658-1707)

  • मुहिउद्दीन मोहम्मद, जिन्हें आम तौर पर औरंगज़ेब या आलमगीर के नाम से जाना जाता था, भारत पर राज करने वाला छठा मुग़ल शासक था। उसका शासन 1658 से लेकर 1707 में उनकी मृत्यु तक चला। औरंगज़ेब ने भारतीय उपमहाद्वीप पर आधी सदी के लगभग समय तक राज किया। वो अकबर के बाद सबसे अधिक समय तक शासन करने वाला मुग़ल शासक था।
  • जन्म की तारीख और समय: 3 नवंबर 1618, दाहोद
  • मृत्यु की जगह और तारीख: 3 मार्च 1707, भिंगर, अहमदनगर
  • दफ़नाने की जगह: टॉम्ब ऑफ़ मुघल एम्पेरोर औरंगज़ेब आलमगीर, खुल्दाबाद
  • बच्चे: बहादुर शाह प्रथम, मुहम्मद अकबर, ज़्यादा
  • पत्नी: नवाब बाई (विवा. 1638–1691), ज़्यादा
  • किताबें: फ़तवा-ए-आलमगीरी
  • माता-पिता: शाह जहाँ, मुमताज़ महल

औरंगजेब की मृत्यु के बाद

  • 1707 में औरंगजेब की मृत्यु हुई
  • राजनीतिक शक्तियां घटने लगीं
  • राजधानी नगरों से नियंत्रित विशाल साम्राज्य की जगह क्षेत्रीय शक्तियों ने अधिक स्वायतत्ता अर्जित की
  • अंतिम वंशज बहादुर शाह जफ़र 1857

Class 12th History Chapter 9 Important Question Answer 1 Marks शासक और इतिवृत्तक (मुगल दरबार)

प्रश्न 1. राजस्व को प्रशासनिक तंत्र बनाने के लिए मुगलों द्वारा उठाए गए किन्हीं दो उपायों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर : राजस्व को प्रशासनिक तंत्र बनाने के लिए मुगलों द्वारा उठाए गए कदम निम्नलिखित थे :(i) दिवान जिसके दफ़्तर पर पूरे राज्य की वित्तीय व्यवस्था के देख-रेख की जिम्मेदारी थी इस तंत्र में शामिल था। इस तरह हिसाब रखने वाले और राजस्व अधिकारी खेती की दुनिया में दाखिल हुए और कृषि संबंधों को शक्ल देने में एक निर्णायक ताकत के रूप में उभरे।
(ii) भू-राजस्व के इंतज़ामात में दो चरण थे : पहला, कर निर्धारण और दूसरा, वास्तविक वसूली। अमील-गुजार या राजस्व वसूली करने वाले को अकबर ने यह हुक्म दिया कि जहाँ उसे कोशिश करनी चाहिए कि खेतिहर नकद भुगतान करें, वहीं फसलों में भुगतान का विकल्प भी खुला रहे।

प्रश्न 2. मुगल शासकों के लिए उनके दरबारी इतिहासकारों द्वारा लिखे गए विवरणों का क्या महत्त्व था ? कोई दो बिंदु लिखिए।

उत्तर : (1) इन विवरणों से इस बात के प्रचार-प्रसार में सहायता मिली कि मुगल राजाओं को शासन करने की शक्ति ईश्वर की ओर से मिली है।
(2) इनमें उपमहाद्वीप के विभिन्न क्षेत्रों की जानकारियाँ दी गईं। इससे मुगल बादशाहों को शासन चलाने में सहायता मिली।

प्रश्न 3. किन्हीं दो समस्याओं की व्याख्या करें जो इतिहासकारों के समक्ष आती हैं जब वे आत्मकथाओं का अध्ययन करते हैं।
उत्तर : (i) आत्मकथाएँ उस अतीत का ब्यौरा देती हैं जो मानवीय विवरणों के हिसाब से काफी समृद्ध होता है परंतु इतिहासकारों को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि वे आत्म कथाओं को किस प्रकार पढ़ते हैं और उनकी कैसे व्याख्या करते हैं। आत्मकथाएँ प्राय: स्मृति के आधार पर लिखी गई होती हैं। उनसे पता चलता है कि लिखने वाले को क्या याद रहा, उसे कौन-सी चीजें महत्त्वपूर्ण लगीं या वह क्या याद करना चाहता था या फिर वह औरों की नजर में अपनी जिन्दगी को किस प्रकार दर्शाना चाहता था।
(ii) आत्मकथा लिखना अपनी तस्वीर गढ़ने का एक तरीका है। फलस्वरूप, इतिहासकारों को इन विवरणों को पढ़ते हुए यह देखने का प्रयास करना चाहिए कि जो लेखक हमें दिखाना चाहता है, उन चुप्पियों को समझना चाहिए- इच्छित या अनिच्छित विस्मृति के कृत्यों को समझना चाहिए।

प्रश्न 4. मुगल शासक काबुल तथा कंधार पर नियंत्रण क्यों रखना चाहते थे ?
उत्तरः भारतीय उपमहाद्वीप में आने के इच्छुक सभी विजेताओं को उत्तर भारत तक पहुँचने के लिए हिंदुकुश को पार करना पड़ता था। अत: मुगलों की सदा यह नीति रही कि इस संभावित खतरे से बचाव के लिए सामरिक महत्त्व की चौकियों विशेषकर काबुल तथा कंधार पर नियंत्रण रखा जाए।

प्रश्न 5. जहाँगीर एक न्यायप्रिय सम्राट् था। इस कथन की तुज्क-ए जहाँगीरी से एक संक्षिप्त वर्णन देते हुए प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर : मुगल सम्राटों में जहाँगीर का नाम उसकी न्यायप्रियता और निष्पक्षता के लिए उल्लेखनीय माना जाता है। इस संदर्भ में जहाँगीर ने अपने संस्मरणों में न्याय की ज़ंजीर को इस प्रकार वर्णित किया है:
राज्यारोहण के बाद मैंने जो पहला आदेश दिया वह न्याय की जंजीर को लगाने का था ताकि न्याय के प्रशासन में संलग्न लोगों से यदि देर हो जाए अथवा वे न्याय चाहने वाले लोगों के विषय में मिथ्याचार का व्यवहार करें तो उत्पीड़ित व्यक्ति इस जंजीर के पास आ सके और इसे हिला सके और उसकी ओर ध्यान आकर्षित हो सके। इस जंजीर को शुद्ध सोने से बनाया गया था। यह 30 गज़ लम्बी थी तथा इसमें 60 घंटियाँ लगी हुई थीं।

प्रश्न 6. अकबर तथा अबुल फ़ज़ल द्वारा सृजित ‘प्रकाश का दर्शन’ क्या था ? इसका प्रयोग किस लिए किया गया ?
उत्तर: अकबर तथा अबुल फ़ज़ल द्वारा सृजित ‘प्रकाश के दर्शन’ के अनुसार दैवीय रूप से प्रेरित व्यक्ति का अपने लोगों पर सर्वोचय प्रभुत्व तथा अपने शत्रुओं पर पूर्ण नियंत्रण होता है। इस दर्शन का प्रयोग राजा की छवि तथा राज्य की अवधारणा को आकार देने के लिए किया गया।

प्रश्न 7. संक्षेप में शब-ए-बारात का उल्लेख कीजिए।
उत्तर : शब-ए-बारात हिजरी कैलेंडर के आठवें महीने अर्थात् चौदहवें सावन को पड़ने वाली पूर्णचंद्र रात्रि है। भारतीय उपमहाद्वीप में प्रार्थनाओं और आतिशबाजी के खेल द्वारा इस दिन को मनाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस रात मुसलमानों के लिए आगे आने वाले वर्ष का भाग्य निर्धारित होता है और पाप माफ कर दिए जाते हैं।

प्रश्न 8. ‘जिहाद’ का क्या अर्थ है ?
उत्तर : ‘जिहाद’ का शाब्दिक अर्थ है- धर्मयुद्ध। जब-जब मुसलमान आक्रमणकारियों ने भारत पर आक्रमण किया और भारतीय सेना उनके लिए भारी पड़ी तो उन्होंने सदैव ‘जिहाद’ (अर्थात् धर्म के नाम पर होने वाला युद्ध) का नाम लेकर मुसलमान सैनिकों में उत्साह भरा और उन्हें जी-जान से लड़ने के लिए प्रेरित किया। राणा सांगा और बाबर के बीच खनवाह के मैदान में लड़ी जाने वाली लड़ाई में जब राजपूतों के सामने मुगल न टिक सके, तो बाबर ने ‘जिहाद’ का नारा लगाकर मुगलों को दिलोजान से लड़ने के लिए उत्साहित किया और फिर अन्त में बाबर की ही विजय हुई।

प्रश्न 9. ‘जौहर’ शब्द का क्या अर्थ है ?
उत्तर : युद्ध के मैदान में जब राजपूत स्वयं को पूरी तरह शत्रुओं से घिरा हुआ पाते थे उनके प्राण बचने की कोई आशा नहीं दिखाई देती थी, तब राजपूत लोग केसरिया वेश धारण कर युद्ध-क्षेत्र में कूद पड़ते थे और राजपूत स्त्रियाँ एक विशाल सामूहिक चिता बनाकर अपने सतीत्व की रक्षा लिए चिता में जलकर अपने प्राणों की आहुति दिया करती थीं। कभी-कभी उनके बच्चे एवं कुछ वरिष्ठ नागरिक भी जौहर में भाग लेते थे। इसी को जौहर कहा जाता था।

प्रश्न 10. मुगलकालीन पांडुलिपियों में चित्रों का क्या महत्त्व था? कोई दो बिंदु लिखिए।
उत्तर : 1. चित्र किसी पुस्तक के सौंदर्य में वृद्धि करते थे। 2. राजा और राजा की शक्ति के विषय में जो बात शब्दों में न कही जा सकी हो, उसे चित्रों द्वारा व्यक्त कर दिया जाता था।

प्रश्न 11. ‘मसनवी’ से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर : इसमें कोई संदेह नहीं कि बाबर ने छोटी आयु में ही यह सिद्ध कर दिया था कि वह एक महान वीर, योद्धा एवं विजेता था। इसके अतिरिक्त वह एक साहित्यकार भी था। उसने अपनी आत्मकथा ‘तुजक-ए-बाबरी’ तुर्की लिखी थी। एक प्रकृति प्रेमी और कवि भी था। उसकी रचनाओं में से एक प्रसिद्ध रचना मसनवी’ थी, जिससे उसके महान लेखक होने की बात सिद्ध होती है।

प्रश्न 12. ‘गद्दी’ शब्द का अर्थ स्पष्ट करें।
उत्तर : ‘गद्दी’ का शाब्दिक अर्थ हैं-राजसिंहासन। जिसे हुमायूँ को शेरशाह से 1540 ई. में परास्त हो जाने के फलस्वरूप खो देना था। अकस्मात् 1545 में शेरशाह की दुर्घटना में मृत्यु हो गई। उसके अयोग्य उत्तराधिकारियों के काल में हुमायूँ को पुनः (1555 ई. में) गद्दी मिल गई।

प्रश्न 13.मुगल भारत में लिपिघर के महत्त्व का उल्लेख कीजिए।
उत्तर-1, लिपिघर या किताबखाना में बादशाह की पांडुलिपियाँ का संग्रह रखा जाता था। 2. लिपिघर में नयी पांडुलिपियों की रचना की जाती थी।
सफलताएँ : 1. वह अपने साम्राज्य की सीमाओं का विस्तार हिदु कुश पर्वत तक करने में सफल रहा।
2.उसने ईरान के रूमानियों और तरान (मध्य एशिया) के उजबेकों की विस्तारवादी योजनाओं पर लगाम लगाए रखी।

प्रश्न 14. ‘डाक चौकी’ का क्या अर्थ है ?
उत्तर : शेरशाह के शासन काल में कुछ सरायों को ‘डाक चौकी’ के रूप में प्रयोग किया जाता था। इन डाक चौकियों पर डाक (पत्र, चिट्ठी आदि) रखी जाती थी। उस डाक को एक घुड़सवार लेकर अगली चौकी पर रख देता था। वहाँ से आगे जाने के लिए घुड़सवार लेकर तैयार खड़ा रहता था जो डाक चौकी सारी डाक एकत्र करके आगे ले जाता था और यह क्रम इसी प्रकार से चलता रहता था, जब तक कि डाक अपने गन्तव्य स्थान पर नहीं पहुँच जाती थी। उस समय डाकघर एवं यातायात के आधुनिक साधन (बस, रेल, हवाई जहाज आदि) नहीं थे।

प्रश्न 15, ‘पट्टा’ क्या है ? स्पष्ट करें।
उत्तर : पट्टा में भूमि की मलकियत या कुछ अन्य बातें लिखी होती थीं। बुआई का क्षेत्रफल, फसल की किस्म और किसान द्वारा देय कर एक पट्टे (कागज) पर लिख दिया जाता था और कृषव को उसकी सूचना दे दी जाती थी। किसी को भी किसान से निय कर से अधिक लेने का अधिकार नहीं था।

प्रश्न 16, अकबर ने फारसी को मुगल दरबार की प्रमुख भाषा बनाने का निश्चय क्यों किया ? कोई दो कारण लिखिए।
उत्तर-1. बादशाह अकबर द्वारा फारसी को काफी सोच-समझकर दरबार की मुख्य भाषा बनाया गया था। यही कारण था कि फारसी प्रशासन के सभी स्तरों पर मुख्य भाषा बन गई।
2.मुगल दरबार में बेहतर पद हासिल करने के इच्छुक ईरानी तथा मध्य एशियाई प्रवासियों ने मुगल बादशाह को फ़ारसी भाषा अपनाए जाने के लिये प्रेरित किया होगा।

प्रश्न 17. सुलह-ए-कुल के आदर्श को बढ़ावा देने के लिए अकबर द्वारा किए गए कोई दो कार्य बताओ।
उत्तर : (1) अकबर ने 563 में तीर्थयात्रा कर तथा 1564 में जजिया को समाप्त कर दिया क्योंकि ये दोनों कर धार्मिक पक्षपात के प्रतीक थे।
(2) साम्राज्य के सभी अधिकारियों को प्रशासन में सुलह-ए-कुल के नियम का अनुपालन करने के निर्देश दिए गए। प्रश्न 18, ‘दाग’ से आप क्या समझते हैं ? (kInp.) उत्तर : ‘दाग’ का शाब्दिक अर्थ है-निशान लगाना अर्थात् पहचान का चिह्न लगाना। शाही घोड़ों पर राजकीय निशान लगाया जाता था. जिसे दाग कहा जाता था जिससे घटिया और बढ़िया नस्ल के घोड़ों में अंतर किया जा सके और घटिया नस्ल के घोड़े से बढ़िया किस्म का घोड़ा न बदला जा सके। सम्भवतः घोड़ों को ‘दाग’ लगाने की प्रथा शेरशाह ने अलाउद्दीन खिलजी से सीखी थी। इससे घुड़सवार सेना का स्टैंडर्ड (स्तर) बना रहता था।

प्रश्न 19. अबुल फजल कौन था ? उसका प्रमुख योगदान क्या है ?
उत्तर : अबुल फ़ज़ल की भाषा बहुत ही अलंकृत थी। क्योंकि इस भाषा के पाठों को ऊँची आवाज़ में पढ़ा जाता था, इसलिए इस भाषा में लय तथा कथन शैली को बहुत अधिक महत्त्व दिया जाता था। इस भारतीय-फारसी शैली को मुगल दरबार में संरक्षण मिला।

प्रश्न 20, ‘जजिया’ क्या है ? स्पष्ट करें।
उत्तर : मुगल काल में ‘जजिया’ एक प्रकार का एक कर (Tax) था जो मुसलमान शासक हिन्दुओं से वसूल करते थे। मुगलों की भाँति शेरशाह ने भी हिन्दुओं से जजिया कर लिया था। यह कर बच्चों, स्त्रियों, अपाहिजों एवं ब्राह्मणों से नहीं लिया जाता था और आर्थिक स्थिति के अनुसार लिया जाता था अर्थात् निर्धनों से कम और धनवानों से अधिक लिया जाता था।

प्रश्न 21. अकबर को मुगल बादशाहों में महानतम क्यों माना जाता है ? दो कारण लिखिए।
उत्तर : (i) जलालुद्दीन अकबर ( 1556-1605) को सबसे महान् मुगल शासक माना जाता है। उसने न केवल साम्राज्य का विस्तार किया बल्कि इसे सुदृढ़ और समृद्ध भी बनाया।
(ii) सुलह-ए-कुल का आदर्श मुगल साम्राज्य के सभी वर्गों तथा नृजातीय एवं धार्मिक समुदायों के बीच शांति, सद्भावना और एकीकरण से प्रेरित था। सुलह-ए-कुल में सभी धर्मों और मतों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता थी, परंतु लोगों से यह आशा की जाती थी कि वे राज्य सत्ता को क्षति नहीं पहुँचाएँगे अथवा आपस में नहीं लड़ेंगे।

प्रश्न 22. अकबर ने किस भाषा को राज-दरबार की मुख्य भाषा बनाया और क्यों ?
उत्तर : अकबर ने फारसी को राज-दरबार की मुख्य भाषा बनाया था। इसके लिए अकबर को संभवतः ईरान के साथ सांस्कृतिक और बौद्धिक संपर्कों, मुगल दरबार में पद पाने के इच्छुक ईरानी तथा मध्य एशियाई प्रवासियों ने प्रेरित किया होगा।

प्रश्न 23. सुलह-ए-कुल का आदर्श क्या था ?
उत्तर : सुलह-ए-कुल का आदर्श मुगल साम्राज्य के सभी वर्गों तथा नृजातीय एवं धार्मिक समुदायों के बीच शांति, सद्भावना और एकीकरण से प्रेरित था। सुलह-ए-कुल में सभी धर्मों और मतों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता थी, परंतु उनसे यह आशा की जाती थी कि वे राज्य सत्ता को क्षति नहीं पहुँचाएँगे अथवा आपस में नहीं लड़ेंगे।

प्रश्न 24. ‘नौबत’ शब्द का क्या अर्थ है ?
उत्तर : ‘नौबत’ शब्द का अर्थ है-शाही बैंड। मुगल दरबार में नौबत का प्रयोग बादशाह के दरबार में आने पर किया जाता था। गायक अपने अनेक प्रकार के गीत भी दरबारियों को सुनाया करते थे और वाद्य-संगीत भी होता था। औरंगजेब ने नौबत और वाद्य-संगीत को अनुमति दी, परंतु गायकों द्वारा गीत गाने की दरबार में मनाही कर दी।

प्रश्न 25. मुगल शासकों द्वारा तैयार करवाए गए इतिवत्तों के कोई दो उद्देश्य बताओ।
उत्तर : (1) मुगल साम्राज्य के अंतर्गत आने वाले सभी लोगों के सामने मुगल राज्य का एक प्रबुद्ध राज्य के रूप में चित्रण करना।
(2) मुगल शासन का विरोध करने वाले लोगों को यह बताना कि उनके सभी विरोधों का असफल होना निश्चित है।

प्रश्न 26. झरोखा दर्शन की प्रथा किस मुगल समाट ने आरंभ की थी ? इसका क्या उद्देश्य था ?
उत्तर : झरोखा दर्शन की प्रथा अकबर ने आरंभ की थी। इसके अनुसार बादशाह एक छज्जे अथवा झरोखे में पूर्व की ओर मुँह करके लोगों की भीड़ को दर्शन देता था। इसका उद्देश्य शाही सत्ता के प्रति जन-विश्वास को बढ़ावा देना था।

प्रश्न 27. झरोखा दर्शन की प्रथा मुगल सम्राट् ने आरंभ की थी? इसका क्या उद्देश्य था?
उत्तर : झरोखा दर्शन की प्रथा अकबर ने आरंभ की थी। इसके अनुसार बादशाह एक छज्जे अथवा झरोखे में पूर्व की ओर मुँह करके लोगों की भीड़ को दर्शन देता था। इसका उद्देश्य शाही सत्ता के प्रति जन विश्वास को बढ़ावा देना था।

प्रश्न 28, औरंगजेब द्वारा जजिया कर फिर से लगाये जाने के दो उद्देश्य क्या थे ?
उत्तर : 1. औरंगजेब का उद्देश्य मराठों और राजपूतों के विरुद्ध मुसलमानों को संगठित करना था।
2.जजिया कर सच्चे और धर्म-भीरु लोगों द्वारा उगाहा जाता था। जो पैसा एकत्र होता था वह तमाम उलेमाओं (धार्मिक नेताओं) को जाता था।

प्रश्न 29. जहाँआरा कौन थी ? वास्तुकलात्मक परियोजनाओं में उसका क्या योगदान था ?
उत्तर : जहाँआरा मुगल बादशाह शाहजहाँ की पुत्री थी। उसने शाहजहाँ की नई राजधानी शाहजहाँनाबाद (दिल्ली) की कई वास्तुकलात्मक परियोजनाओं में भाग लिया। इनमें एक दो मंजिली भव्य कारवाँसराय शामिल थी जिसमें एक आँगन और एक बाग था। शाहजहाँनाबाद के मुख्य केंद्र चाँदनी चौक की रूपरेखा भी जहाँआरा द्वारा बनाई गई थी।

प्रश्न 30. ‘मुगलों द्वारा बनाए गए शहर अपनी शाही शोभा व समृद्धि के लिए प्रसिद्ध थे।’ इस कथन की दो विशेषताएँ बताइए।
उत्तर : (i) आगरा, दिल्ली तथा लाहौर शाही प्रशासन तथा सत्ता के प्रमुख केंद्र थे। शहर का केंद्र महल तथा मुख्य मस्जिद की ओर रहता था।
(ii) शिल्पकार शाही तथा अभिजात वर्ग के लिए विशिष्ट दस्तकारी की वस्तुएँ बनाते थे। शहरों में रहने वाले लोगों तथा सेना के लिए अनाज शहरी बाजारों में ग्रामीण अंचलों से आता था।

You cannot copy content of this page

Scroll to Top