How did the development of Indian literature in 19th century India help generate national consciousness? 19वीं शताब्दी के भारत में भारतीय साहित्य के विकास ने राष्ट्रीय चेतना उत्पन्न करने में कैसे मदद की ?

 उत्तर : भारतीय साहित्य का राष्ट्रीय चेतना उत्पन्न करने में सहयोग : 19वीं शताब्दी के भारत में भारतीय साहित्य के विकास ने राष्ट्रीय चेतना उत्पन्न करने में बड़ा योग दिया । 19वीं शताब्दी में एक बड़ी मात्रा में राष्ट्रीय साहित्य का सृजन हुआ। बंकिमचन्द्र चटर्जी, दीनबंधु मिश्रा , हेमचंद बैनर्जी, नवीनचन्द्र सेन, रविन्द्रनाथ टैगोर आदि महान साहित्यकारों ने अपने लेखों द्वारा भारतीयों में एक नई जान फूंक दी। बंकिमचन्द्र के ‘आनन्द मठ’ (Anand Math) को बंगाली देशभक्ति का बाइबल माना जाता है । ‘वन्देमातरम्’ का राष्ट्रीय गीत इसी पुस्तक की देन है। अंग्रेजी भाषा के माध्यम से जब पश्चिमी साहित्य का अनुवाद हुआ तो धीरे-धीरे भारतीयों के मन पर पश्चिमी विचारधारा का बड़ी तीव्र गति से प्रभाव होने लगा । बर्क (Burke), मिल (Mill), मिलटन (Milton), रूसो (Rousseau), मोंटस्क्यु (Montesquieue), वाल्टेयर (Voltaire) आदि पश्चिमी विचारकों और क्रांतिकारियों के लेखों ने भारतीय जनता में स्वतंत्रता और राष्ट्रीयता के भाव भर दिये और वे अपने देश को स्वतंत्र कराने के कार्य में लग गए।

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