याद रखने योग्य बातें – शीत युद्ध का दौर – Class 12th Chapter 1

The Cold War Era | शीत युद्ध का दौर

Class 12 | Chapter 1

हिंदी नोट्स

 याद रखने योग्य बातें –

  1. शीत युद्ध (Cold War) : वह तनावपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिक स्थिति जो द्वितीय विश्व के बाद 1945 से 1990 तक जारी रही, उसे शीतयुद्ध की संज्ञा दी जाती हैं।
  2. समकालीन विश्व राजनीति की शुरुआत (Beginning of Contemporary World Politics) : 1990 ई. में शीत युद्ध की समाप्ति को समकालीन विश्व राजनीति की शुरुआत माना जाता है। 
  3. दो महाशक्तियाँ (Tivo Great Powers) : द्वितीय विश्व युद्ध के उपरांत संयुक्त राज्य अमेरिका तथा सोवियत संघ दो महाशक्तियाँ कहलाई।
  4. गुटनिरपेक्ष आन्दोलन [NAMINon-Alignment Movement)] : वह आन्दोलन जो गुटनिरपेक्षता की नीति का अनुसरण करने वाले राष्ट्रों द्वारा दोनों महाशक्तियों के दबदबे को चुनौती देने की दृष्टि से शुरू किया गया।
  5. नव अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था (New International Economic Order) : वह नई अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक नीति जो उदारीकरण, वैश्वीकरण एवं निजीकरण की पक्षधर है। विगत 40 वर्षों से भी ज्यादा समय से विश्व के अधिकांश देश इस व्यवस्था के पक्षधर हो गए हैं।
  6. नव-स्वतंत्रता प्राप्त राष्ट्रों का गुटनिरपेक्ष आंदोलन या नाम (NAM) का एक सामान्य उद्देश्य : एशिया, अफ्रीका तथा लैटिन अमेरिका के नव-स्वतंत्रता प्राप्त राष्ट्रों ने गुट निरपेक्ष आंदोलन को अपने आर्थिक विकास और राजनीतिक स्वतंत्रता को बनाए रखने का साधन बनाया। 
  7. सी.आई.ए. (C.I.A) : संयुक्त राज्य अमेरिका की खुफिया एजेंसी। क्यूबा का मिसाइल संकट (Cuban Missile Crisis) : सं. रा. अ. तथा सोवियत संघ के बीच अप्रैल 1961 से 1962 तक ।
  8. क्यूबा का मिसाइल संकट (Cuban Missile Crisis) : सं. रा. अ. तथा सोवियत संघ के बीच अप्रैल 1961 से 1962 तक। 
  9. मित्र राष्ट्र (Allied Powers) : द्वितीय विश्व युद्ध में ब्रिटेन, सं. रा. अमेरिका, फ्रांस तथा सोवियत संघ को मित्र राष्ट्र कहा गया।
  10. धुरी (Axis Powers) : जर्मनी, इटली तथा जापान को द्वितीय विश्व युद्ध में धुरी राष्ट्र कहा गया
  11. प्रथम विश्व युद्ध कालांश : 1914-1918
  12. द्वितीय विश्व युद्ध का कालांश : 1939-1945 
  13. हिरोशिमा और नागासाकी : जापान के वे दो शहर जो अगस्त, 1945 को द्वितीय विश्व युद्ध के अन्तिम दिनों में सं. रा. अमेरिका द्वारा परमाणु बमों के शिकार बनाए गए थे। 
  14. द्वितीय विश्व युद्ध में पराजित देश जर्मनी, जापान तथा इटली। 
  15. 1950 के दशक के प्रारंभ में ही संयुक्त राज्य अमेरिका और सोवियत संघ द्वारा जिन परमाणु बमों का परीक्षण किया जा रहा था, उनकी क्षमता : 10 से 15 हजार किलो टन।
  16. पारस्परिक अवरोध (Mutual Deterrence) : संयुक्त राष्ट्र अमेरिका और सोवियत संघ के नेताओं के दिमाग में परमाणु वर्मा के प्रयोग होने के फलस्वरूप जो भय था तथा जिसे दोनों राष्ट्रों ने स्वयं अपने लिए भयंकर बर्बादी लाने का कारण मानकर (शीतयुद्ध के काल में) परमाणु बमों के प्रयोग से परहेज किया, वही पारस्परिक अवरोध (रोक और संतुलन) कहा गया।  
  17. दो ध्रुवीय विश्व का आरंभ (The Emergence of Two Power Blocs) : शीतयुद्ध काल में पश्चिमी यूरोपीय देशों में से  ज्यादातर सं. रा. अमेरिका के खेमे में शामिल होकर नाटो (NATO) तथा पूर्वी यूरोप के अधिकांश देशों ने सोवियत संघ के खेमें में शामिल होकर वारसा पैक्ट का निर्माण लिया।
  18. नाटो (NATO) या उत्तर अटलांटिक संधि संगठन : अप्रैल 1949 में पश्चिमी देशों का गठबंधन, जिसमें 12 देश शामिल थे। 
  19. वारसा संधि या संगठन (Warsa Treaty) की स्थापना : 1951
  20. दक्षिण-पूर्व एशियाई संधि संगठन (SEATO) : यह भी पश्चिमी देशों का सैनिक संगठन था। 
  21. दो बड़े साम्यवादी देशों-सोवियत संघ तथा साम्यवादी चीन के तीन गहरे मित्र देश या घनिष्ठ राष्ट्र थे : (i) उत्तरी वियतनाम, () उत्तरी कोरिया और (I) इराक।
  22. द्वितीय विश्व युद्ध से पूर्व दो प्रमुख साम्राज्यवादी देश : (0) ब्रिटेन तथा (in) फ्रांस। 
  23. साम्यवादी चीन तथा सोवियत संघ में अनबन : 1950 के दशक के अन्तिम दिनों से अनबन हो गई (याद रहे. यह 1959 ई. से मानी जाती है।)
  24. चीन-सोवियत संघ में एक लघु युद्ध : 1961
  25. कोरिया युद्ध या संकट काल : 1950-1953
  26. बर्लिन संकट : 1958-1962।
  27. कांगो संकट (Congo Crisis) : 1960 के दशक की शुरुआत में।
  28. द्वितीय विश्व युद्ध के उपरान्त शीतयुद्ध के कारण अत्यधिक जन हानि उठाने वाले तीन एशियाई देश  (i) कोरिय (ii) वियतनाम, (iii) अफगानिस्तान।
  29. कुट्टी : एक मशहूर भारतीय कार्टूनिस्ट। उन्होंने शीतयुद्ध से सम्बन्धित घटनाओं पर कार्टून बनाकर बहुत प्रसिद्धि प्राप्त की थी।
  30. महाशक्तियों द्वारा अस्त्र -नियंत्रण (या हथियारों की होड़-समाप्ति) का प्रयास: 1960 के दशक के उत्तरार्द्ध से। 
  31. गुटनिरपेक्ष आन्दोलन के पाँच प्रारंभिक प्रमुख नेता तथा उनके राष्ट्र : 1. जोसेफ ब्राज़ टीटो (यूगोस्लाविया 2. जवाहरलाल नेहरू (भारत), 3. गमाल अब्दुल नासिर (मिस्र) 4. सुकर्णो (इण्डोनेशिया) तथा 5. वामे एनक्रुमा (घाना) 
  32. प्रथम गुटनिरपेक्ष सम्मेलन : बेलग्रेड (यूगोस्लाविया) 1961 ई. (25 सदस्य देश) । 
  33. 2006 में गुटनिरपेक्ष आंदोलन के 14वें सम्मेलन में भाग लेने वाले कुल सदस्य देश एवं पर्यवेक्षक देश : 116 सदस्य देश तथा 15 पर्यवेक्षक देश।
  34. पृथकतावाद की विदेश नीति (Foreign Policy of Isolation) : किसी राष्ट्र द्वारा स्वयं को अन्तर्राष्ट्रीय  मामलों से दूर रखने  की नीति। सं. रा. अमेरिका ने 1914 तक स्वयं को अंतर्राष्ट्रीय मामलों से दूर रखा था।
  35. तटस्थता की नीति (Policy of Neutrality) : मुख्यतः युद्ध में शामिल न होने की नीति।
  36. सोवियत संघ का विघटन तथा शीत युद्ध का अन्त : 1990 के दशक के प्रारंभिक वर्षों में।
  37. सीमित परमाणु परीक्षण संधि (एलटीबीटी) (Limited 1st Bam Theory (0T87) : वायुमंडल, बाहरी अंतरिक्ष तथा पानी के अंदर परमाणु हथियारों के परीक्षण पर प्रतिबंध लगाने वाली इस संधि पर अमेरिका, ब्रिटेन तथा सोवियत संघ ने मास्को में 5 अगस्त, 1963 को हस्ताक्षर किए। यह संधि 10 अक्तूबर, 1963 से प्रभावी हो गई। 
  38. परमाणु अप्रसार संधि (एनपीटी) (Nuclear Non-Proliferation Treaty = NPT) : यह संधि केवल परमाणु शक्ति -संपन्न देशों को एटमी (परमाणु) हथियार रखने की अनुमति देती है और बाकी देशों को ऐसे हथियार हासिल करने से रोकती है। परमाणु अप्रसार संधि के उद्देश्यों को ध्यान में रखते हुए उन देशों को परमाणु-शक्ति से संपन्न देश माना गया जिन्होंने । जनवरी, 1967 से पहले किसी परमाणु हथियार अथवा अन्य विस्फोटक परमाणु सामग्री का निर्माण और विस्फोट किया हो। इस परिभाषा के अंतर्गत पाँच देशों-अमेरिका, सोवियत संघ (बाद में रूस), ब्रिटेन, फ्रांस और चीन को परमाणु-शक्ति से संपन्न माना गया। इस संधि पर एक जुलाई, 1968 को वॉशिंगटन, लंदन और मॉस्को में हस्ताक्षर हुए और यह संधि 5 मार्च, 1970 से प्रभावी हुई। इस संधि को 1995 में अनियतकाल के लिए बढ़ा दिया गया। 
  39. सामरिक अस्व परिसीमन वार्ता-1 (Strategic Arms Limitation Talks=SALT-1) : (स्ट्रेटजिक आर्म्स लिमिटेशन टॉक्स-साल्ट-1) सामरिक अस्त्र परिसीमन वार्ता का पहला चरण सन् 1969 के नवम्बर में आरंभ हुआ। सोवियत संघ के नेता लियोनेड ब्रेझनेव और अमेरिका के राष्ट्रपति रिचर्ड निक ने मास्को में 26 मई, 1972 को निम्नलिखित समझौते पर दस्तखत किए
    (क) परमाणु मिसाइल परिसीमन संधि (एबीएम ट्रीटी)।
    (ख) सामरिक रूप से घातक हथियारों के परिसीमन के बारे में अंतरिम समझौता।
    ये 3 अक्तूबर 1972 से प्रभावी हुए। 
  40. सामरिक अस्त्र परिसीमन वार्ता-II (Strategic Arms Limitation Talks = (SALT-II) : (स्ट्रेटजिक आर्स लिमिटेशन टॉक्स-साल्ट-II) वार्ता का दूसरा चरण सन् 1972 के नवम्बर महीने में शुरू हुआ। अमेरिकी राष्ट्रपति जिमी कार्टर और सोवियत संघ के नेता लियोनेड ब्रेझनेव ने वियना में 18 जून, 1972 को सामरिक रूप से घातक हथियारों के परिसीमन से संबंधित संधि पर हस्ताक्षर किए। 
  41. सामरिक अस्त्र न्यूनीकरण संधि-I (Strategic Arms Reduction Treaty-1 (STRAT-I) : (स्ट्रेटजिक आर्म्स रिडक्शन संधि स्टार्ट-1) अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश (सीनियर) और सोवियत संघ के राष्ट्रपति गोर्बाचेव ने 31 जुलाई, 1991 को सामरिक रूप से घातक हथियारों के परिसीमन और उनकी संख्या में कमी लाने से संबंधित संधि पर हस्ताक्षर किये।
  42. सामरिक अस्त्र न्यूनीकरण संधि-II (Strategic Arms Reduction Treaty II (START-II) : (स्ट्रेटजिक आर्स रिडक्शन संधि स्टार्ट-II) सामरिक रूप से घातक हथियारों को सीमित करने और उनकी संख्या में कमी करने से संबंधित इस संधि पर रूसी राष्ट्रपति बोरिस येल्तसिन और अमेरिकी राष् येल्तसिन और अमेरिकी राष्ट्रपति जॉर्ज बुश (सीनियर) ने मॉस्को में 3 जनवरी 1993 को हस्ताक्षर किए।
 

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