“The impact of the non-cooperation movement on the economic front was dramatic.” Explain with examples. “आर्थिक मोर्चे पर असहयोग आंदोलन का प्रभाव नाटकीय रहा ।” उदाहरण सहित स्पष्ट करें ।

 उत्तर : असहयोग आंदोलन जनवरी 1921 में शुरू हुआ। आरंभ में असहयोग आंदोलन तेजी से फैला। हजारों विद्यार्थियों ने सरकारी स्कूलों-कॉलेजों का बहिष्कार कर दिया । अध्यापकों ने इस्तीफे दे दिए। विदेशी सामानों का बहिष्कार किया गया, शराब की दुकानों की पिकेटिंग की गई और विदेशी कपड़ों की होली जलाई गई। व्यापारियों ने विदेशी चीजों के व्यापार में पैसा लगाने से इंकार कर दिया । फलस्वरूप भारतीय वस्तुओं की माँग में आश्चर्यजनक वृद्धि हुई।

1.परंतु कुछ समय बाद यह आंदोलन शिथिल पड़ने लगा। वस्तुतः असहयोग आंदोलन का प्रभाव आर्थिक क्षेत्र में अधिक व्यापक या प्रभावशाली नहीं रहा ।
इसके निम्नलिखित कई कारण थे :
1. महँगा कपड़ा : भारत में तैयार खादी का कपड़ा मिलों में बड़े पैमाने पर बनने वाले कपड़े की तुलना में बहुत महँगा था। भारत की अधिकांश जनता गरीब थी। वह खादी का महँगा कपड़ा नहीं खरीद सकती थी। अतः विवश होकर उन्हें धीरे-धीरे सस्ते विदेशी कपड़ों की ओर जाना पड़ा। 
2. वैकल्पिक संस्थानों का अभाव : असहयोग आंदोलन में भाग लेने वाले लोग थे-विद्यार्थी, अध्यापक, वकील। इन्होंने ब्रिटिश संस्थानों का बहिष्कार किया था । आंदोलन की सफलता के लिए वैकल्पिक संस्थानों की स्थापना करना बहुत आवश्यक था, ताकि ब्रिटिश संस्थानों के स्थान पर उनका प्रयोग किया जा सके परंतु यह प्रक्रिया बहुत धीमी थी । फलस्वरूप ये सभी लोग अधीर हो उठे और फिर से ब्रिटिश संस्थाओं की ओर लौटने को विवश हो गए। 
3. मजदूरों में बेरोजगारी : विदेशी कपड़े के बहिष्कार से मिलो का उत्पादन कम हो गया तथा अनेक भारतीय मजदूर बेरोजगार हो गए। उनके लिए रोजगार के वैकल्पिक साधन न होने के कारण असहयोग आंदोलन को गहरा झटका लगा । अंत: हम कह सकते हैं कि आर्थिक दृष्टि से असहयोग आंदोलन का प्रभाव नाटकीय रहा ।

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