“The spirit of nationalism flourishes when people begin to realize that they are part of the same nation.” Please confirm this statement. “राष्ट्रवाद की भावना तब पनपती है, जब लोग यह महसूस करने लगते हैं कि वे एक ही राष्ट्र के अंग हैं।” इस कथन की पुष्टि कीजिए।

 उत्तर : राष्ट्रवाद की भावना तब पनपती है जब लोग यह महसूस करने लगते हैं कि वे एक ही राष्ट्र के अंग हैं, एक-दूसरे को एकता के सूत्र में बाँधने वाली कोई साझा बात ढूँढ़ जब वे लेते हैं। सामूहिक अपनेपन की यह भावना आंशिक रूप से संयुक्त संघर्षों के चलते पैदा हुई थी। इनके अलावा बहुत सारी सांस्कृतिक प्रक्रियाएँ भी थीं जिनके जरिए राष्ट्रवाद लोगों की कल्पना और दिलो दिमाग पर छा गया था। इतिहास व साहित्य, लोक कथाएँ व गीत, चित्र व प्रतीक, सभी ने राष्ट्रवाद को साकार करने में अपना योगदान दिया था। राष्ट्र की पहचान सबसे ज्यादा किसी तस्वीर में अंकित की जाती है। इससे लोगों को एक ऐसी छवि गढ़ने में मदद मिलती है जिसके जरिए वे राष्ट्र को पहचान सकते हैं। 20वीं सदी में राष्ट्रवाद के विकास के साथ भारत की पहचान भी भारत माता की छवि का रूप लेने लगी। यह तस्वीर पहली बार बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने बनाई थी। 1870 के दशक में उन्होंने मातृभूमि की स्तुति के रूप में ‘वंदे मातरम्’ गीत लिखा था। बाद में इसे उन्होंने अपने उपन्यास आनंदमठ में शामिल कर लिया। यह गीत बंगाल में स्वदेशी आंदोलन में खूब गाया गया। राष्ट्रवाद का विचार भारतीय लोक कथाओं को पुनर्जीवित करने के आंदोलन से भी मजबूत हुआ। 19वीं सदी के आखिर में राष्ट्रवादियों ने भाटों व चारणों द्वारा गाई-सुनाई जाने वाली लोक कथाओं को दर्ज करना शुरू कर दिया। वे लोक गीतों व जनश्रुतियों को इकट्ठा करने के लिए गाँव-गाँव घूमने लगे। उनका मानना था कि यही कहानियाँ हमारी उस परंपरागत संस्कृति की सही तस्वीर पेश करती हैं जो बाहरी ताकतों के प्रभाव से भ्रष्ट और दूषित हो चुकी हैं। अपनी राष्ट्रीय पहचान को ढूंढने और अपने अतीत में गौरव का भाव पैदा करने के लिए इस लोक परंपरा को बचाकर रखना बहुत जरूरी था।

Leave a Comment

You cannot copy content of this page
Scroll to Top